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महत्त्वपूर्ण संस्थान/संगठन

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

  • 22 Feb 2020
  • 27 min read

 Last Updated: July 2022 

सामान्य जानकारी:

  • स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (World Health Organization-WHO) की स्थापना वर्ष 1948 हुई थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित है।
  • वर्तमान में 194 देश WHO के सदस्य हैं। 150 देशों में इसके कार्यालय होने के साथ-साथ इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं।
  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है तथा सामान्यतः अपने सदस्य राष्ट्रों के स्वास्थ्य मंत्रालयों के सहयोग से कार्य करता है।
  • WHO वैश्विक स्वास्थ्य मामलों पर नेतृत्व प्रदान करते हुए स्वास्थ्य अनुसंधान संबंधी एजेंडा को आकार देता है तथा विभिन्न मानदंड एवं मानक निर्धारित करता है।
  • साथ ही WHO साक्ष्य-आधारित नीति विकल्पों को स्पष्ट करता है, देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है तथा स्वास्थ्य संबंधी रुझानों की निगरानी और मूल्यांकन करता है।
  • WHO ने 7 अप्रैल, 1948 से कार्य आरंभ किया, अतः वर्तमान में 7 अप्रैल को प्रतिवर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

उद्देश्य/कार्य:

  • अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी कार्यों पर निर्देशक एवं समन्वय प्राधिकरण के रूप में कार्य करना।
  • संयुक्त राष्ट्र के साथ विशेष एजेंसियों, सरकारी स्वास्थ्य प्रशासन, पेशेवर समूहों और ऐसे अन्य संगठनों जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी हैं, के साथ प्रभावी सहयोग स्थापित करना एवं उसे बनाए रखना।
  • सरकारों के अनुरोध पर स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के लिये सहायता प्रदान करना।
  • ऐसे वैज्ञानिक और पेशेवर समूहों के मध्य सहयोग को बढ़ावा देना जो स्वास्थ्य प्रगति के क्षेत्र में योगदान करते हैं।

संचालन:

WHO का संचालन निम्नलिखित संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है

  • विश्व स्वास्थ्य सभा
    (World Health Assembly):
    • विश्व स्वास्थ्य सभा सदस्य राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों से बनी होती है।
    • प्रत्येक सदस्य का प्रतिनिधित्व अधिकतम तीन प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है जिनमें से किसी एक को मुख्य प्रतिनिधि के रूप में नामित किया जाता है।
    • इन प्रतिनिधियों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी तकनीकी क्षमता के आधार पर सबसे योग्य व्यक्तियों में से चुना जाता है क्योंकि ये सदस्य राष्ट्र के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रशासन का अधिमान्य प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक नियमित वार्षिक सत्र और कभी-कभी विशेष सत्रों में भी आयोजित की जाती है।
    • यह डब्ल्यूएचओ के मुख्यालय, यानी जिनेवा, स्विट्जरलैंड में वार्षिक रूप से आयोजित किया जाता है।
    • कार्यकारी बोर्ड द्वारा तैयार किया गया विशिष्ट स्वास्थ्य एजेंडा इस सभा का फोकस बना हुआ है।
    • कोविड -19 महामारी की शुरुआत के बाद से वर्ष 2022 की विधानसभा पहली व्यक्तिगत सभा है।
    • मई 2022 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) में विश्व स्वास्थ्य सभा का 75वाँ सत्र आयोजित किया गया था।
  • विश्व स्वास्थ्य सभा के कार्य:
    • विश्व स्वास्थ्य सभा WHO की नीतियों का निर्धारण करती है।
    • यह संगठन की वित्तीय नीतियों की निगरानी करती है एवं बजट की समीक्षा तथा अनुमोदन करती है।
    • यह WHO तथा संयुक्त राष्ट्र के मध्य होने वाले किसी भी समझौते के संदर्भ में आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (Economic and Social Council) को रिपोर्ट करता है।

सचिवालय

(The Secretariat):

  • सचिवालय में महानिदेशक और ऐसे तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मचारी शामिल किये जाते हैं जिनकी संगठन के लिये आवश्यक माना जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुरूप बोर्ड द्वारा नामांकन के आधार पर विश्व स्वास्थ्य सभा के महानिदेशक की नियुक्ति की जाती है।

सदस्यता एवं सह सदस्यता:

  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्य इस संगठन के सदस्य बन सकते हैं।
  • ऐसे क्षेत्र या क्षेत्रीय समूह जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संचालन के लिये ज़िम्मेदार नहीं हैं, उन्हें स्वास्थ्य सभा द्वारा सह सदस्यों के रूप में नामित किया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का वैश्विक योगदान

(WHO’s Contribution to World)

  • देशीय कार्यालय
    (Country Offices)
    • ये संबंधित देश की सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन के बीच प्राथमिक संपर्क बिंदु होते हैं।
    • ये स्वास्थ्य मामलों पर तकनीकी सहायता प्रदान करने के साथ-साथ प्रासंगिक वैश्विक मानकों और दिशा-निर्देशों को साझा करते हैं एवं सरकार के अनुरोधों तथा आवश्यक मांगों को WHO के अन्य स्तरों तक पहुँचाते हैं।
    • ये देश के बाहर किसी बीमारी के फैलने के बारे में मेज़बान सरकार को सूचित करते हैं और उसके साथ मिलकर कार्य करते हैं।
    • ये देश में स्थित अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के कार्यालयों को सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सलाह एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
  • सरकारों के अतिरिक्त WHO स्वयं भी अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, प्रदाताओं, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और निजी क्षेत्र के साथ समन्वय स्थापित करता है।
  • WHO के अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यों से सभी देश लाभान्वित होते हैं जिसमें सर्वाधिक विकसित देश भी शामिल हैं। उदाहरणार्थ- चेचक का वैश्विक उन्मूलन, क्षय रोग को नियंत्रित करने के बेहतर एवं सस्ते तरीकों का प्रसार आदि।
  • WHO का मानना है कि टीकाकरण से बचपन के छह प्रमुख संक्रामक रोगों - डिप्थीरिया, खसरा, पोलियोमाइलाइटिस, टिटनेस, क्षय रोग एवं काली खाँसी की रोकथाम होती है। टीकाकरण उन सभी बच्चों के लिये उपलब्ध होना चाहिये जिन्हें इसकी आवश्यकता है-
    • WHO संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के सहयोग से सभी बच्चों के लिये प्रभावी टीकाकरण सुनिश्चित करने हेतु एक विश्वव्यापी अभियान का नेतृत्व कर रहा है।

WHO की ऐतिहासिक यात्रा:

  • WHO ने अपनी स्थापना के पहले दशक (वर्ष 1948-58) के दौरान विकासशील देशों के लाखों लोगों को प्रभावित करने वाले विशिष्ट संक्रामक रोगों पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित किया।
  • वर्ष 1958 से 1968 की अवधि में अफ्रीका में कई उपनिवेश स्वतंत्र हुए जो बाद में संगठन के सदस्य बन गए।
  • WHO ने 1960 के दशक में विश्व रासायनिक उद्योग (World Chemical Industry) के साथ मिलकर कार्य किया ताकि ओनोकोसेरिएसिस (रिवर ब्लाइंडनेस) और सिस्टोसोमियासिस (Schistosomiasis) के रोगवाहक से लड़ने के लिये नए कीटनाशक विकसित किये जा सकें।
  • बीमारियों एवं मृत्यु के कारणों की नामपद्धति का वैश्विक मानकीकरण करना अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संचार में WHO का महत्त्वपूर्ण योगदान था।
  • WHO की स्थापना के तीसरे दशक (1968-78) में विश्व में चेचक उन्मूलन के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त हुई।
    • वर्ष 1967 तक 31 देशों में चेचक स्थानिक रोग था। इससे लगभग 10 से 15 मिलियन लोग प्रभावित थे।
    • सभी प्रभावित देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं की टीमों द्वारा इस विषय पर काम किया गया था जिसका WHO ने नेतृत्व एवं समन्वय किया।
    • इस विशाल अभियान से वैश्विक स्तर पर बच्चों को प्रभावित करने वाले छह रोगों डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खाँसी, खसरा, पोलियोमाइलाइटिस ( poliomyelitis) एवं क्षय रोग के प्रति टीकाकरण (BCG वैक्सीन के साथ) का विस्तार किया।
    • राजनीतिक कारणों से लंबे असमंजस के बाद इस अवधि में WHO ने संपूर्ण विश्व में मानव प्रजनन पर अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देकर परिवार नियोजन के क्षेत्र में प्रवेश किया।
    • मलेरिया एवं कुष्ठ रोग के नियंत्रण के लिये भी नए प्रयास किये गए।
  • WHO की स्थापना के चौथे दशक (1978-88) की शुरुआत WHO और यूनिसेफ के एक वृहद् वैश्विक सम्मेलन द्वारा हुई। यह सम्मेलन सोवियत संघ के एशियाई हिस्से में स्थित एक शहर ‘अल्मा अता’ (Alma Ata) में आयोजित किया गया था।
    • अल्मा अता सम्मेलन में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, निवारक एवं उपचारात्मक उपायों के महत्त्व पर बल दिया गया।
    • इस सम्मेलन में सामुदायिक भागीदारी पर बल देना, उपयुक्त तकनीक एवं अंतर्क्षेत्रीय सहयोग करना आदि विश्व स्वास्थ्य नीति के केंद्रीय स्तंभ बन गए।
  • WHO की स्थापना के 30 वर्षों के उपरांत 134 सदस्य राष्ट्रों ने समान प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की जो कि इसके ध्येय वाक्य ‘सभी के लिये स्वास्थ्य’ (Health for All) में सन्निहित है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1980 में सभी के लिये सुरक्षित पेयजल एवं पर्याप्त उत्सर्जन निपटान के प्रावधान हेतु की गई ‘अंतर्राष्ट्रीय पेयजल आपूर्ति एवं स्वच्छता दशक’ (वर्ष 1981-90) की घोषणा WHO द्वारा समर्थित थी।
  • इस अवधि में प्रत्येक देश को वैश्विक बाज़ारों में बेचे जाने वाले हजारों ब्रांड के उत्पादों के बजाय सभी सार्वजनिक सुविधाओं में उपयोग के लिये ‘आवश्यक दवाओं’ की एक सूची विकसित करने के लिये प्रोत्साहित किया गया था।
  • ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी द्वारा संपूर्ण विश्व में शिशुओं में होने वाली डायरिया नामक बीमारी पर नियंत्रण एक और बड़ी सफलता थी जो कि बहुत ही सरल सिद्धांतों पर आधारित थी।

नेटवर्क: वर्ष 1995 में कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप जिससे WHO तीन महीने तक अनभिज्ञ रहा, ने वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी एवं अधिसूचना प्रणालियों की एक चौंकाने वाली कमी का खुलासा किया।

  • अतः वर्ष 1997 में WHO ने कनाडा के साथ मिलकर ‘ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इंटेलिजेंस नेटवर्क’ (Global Public Health Intelligence Network-GPHIN) को सभी जगह प्रसारित किया जिसने संभावित महामारियों की सूचना देने के लिये प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करने हेतु इंटरनेट तकनीक का लाभ उठाया।
  • WHO ने वर्ष 2000 में GPHIN को ‘ग्लोबल आउटब्रेक अलर्ट रिस्पांस नेटवर्क’ (Global Outbreak Alert Response Network-GOARN) के साथ घटनाओं का विश्लेषण करने के लिये जोड़ दिया।
  • GOARN ने 120 नेटवर्क एवं संस्थानों को किसी भी संकट के प्रति तीव्र कार्रवाई करने के उद्देश्य से डेटा प्रयोगशालाओं, कौशल एवं अनुभव के साथ जोड़ दिया।

WHO द्वारा किये गए अन्य प्रयास:

  • WHO ने कैंसर से निपटने के लिये भी अपने प्रयासों में वृद्धि की है जो समृद्ध राष्ट्रों की तरह ही अब विकासशील देशों में भी मौतों का कारण बन रहा है।
  • तंबाकू पुरुषों एवं महिलाओं दोनों की होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।
  • इन मौतों को रोकने के लिये WHO द्वारा प्रत्येक देश में तंबाकू के सेवन को प्रतिबंधित करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं।
  • एड्स की विश्वव्यापी महामारी ने इस घातक यौन संचारित वायरस के प्रसार को रोकने के लिये बढ़ते वैश्विक प्रयासों के बीच WHO के लिये एक और चुनौती पेश की है।
    • WHO एचआईवी पीड़ितों के स्व-परीक्षण की सुविधा पर कार्य कर रहा है ताकि HIV पीड़ित अधिक लोगों को उनकी स्थिति का पता चल सके और वे सही उपचार प्राप्त कर सकें।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2021 में कोविड -19 को महामारी के रूप में वर्णित किया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत

(WHO and India):

  • भारत 12 जनवरी, 1948 को WHO का सदस्य बना।
  • WHO का दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

भारत में WHO द्वारा किये गए स्वास्थ्य संबंधी प्रयास:

  • चेचक
    (Smallpox):
    • वर्ष 1967 में भारत में दर्ज किये गए चेचक के मामलों की कुल संख्या विश्व के कुल मामलों की लगभग 65% थी।
    • इनमें से 26,225 मामलों में रोगी की मृत्यु हो गई, इस घटना ने भविष्य में होने वाले अथक संघर्ष की विकट तस्वीर प्रस्तुत की है।
    • वर्ष 1967 में WHO ने गहन चेचक उन्मूलन कार्यक्रम (Intensified Smallpox Eradication Programme) प्रारंभ किया।
    • WHO और भारत सरकार के समन्वित प्रयास से वर्ष 1977 में चेचक का उन्मूलन किया गया।
  • पोलियो
    (Polio):
    • विश्व बैंक की वित्तीय एवं तकनीकी सहायता से WHO द्वारा वर्ष 1988 में प्रारंभ की गई वैश्विक पोलियो उन्मूलन पहल (Global Polio Eradication Initiative) के संदर्भ में भारत ने पोलियो रोग के खिलाफ मुहिम की शुरुआत की।
    • पोलियो अभियान-2012: भारत सरकार ने यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, रोटरी इंटरनेशनल और रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्रों की साझेदारी से पाँच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पोलियो से बचाव हेतु टीका लगवाने की आवश्यकता के बारे में सार्वभौमिक जागरूकता में योगदान दिया है।
    • इन प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2014 में भारत को एंडेमिक देशों की सूची से बाहर रखा गया।
    • हाल ही में, प्रधान मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दूसरे वैश्विक कोविड वर्चुअल शिखर सम्मेलन को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने डब्ल्यूएचओ सुधारों पर ज़ोर दिया।

भारत द्वारा सुझाए गए सुधार:

  • अंतर्राष्ट्रीय चिंता संबंधी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (Public Health Emergency of International Concern- PHEIC) घोषणा प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना:
    • PHEIC की घोषणा करने के लिये स्पष्ट मापदंडों के साथ वस्तुनिष्ठ मानदंड तैयार करने की आवश्यता है।
    • घोषणा प्रक्रिया में पारदर्शिता और तत्परता पर ज़ोर दिया जाना चाहिये।
    • PHEIC का तात्पर्य एक ऐसी स्थिति से है जो:
      • गंभीर, अचानक, असामान्य या अप्रत्याशित हो।
      • प्रभावित राज्य की राष्ट्रीय सीमा से परे सार्वजनिक स्वास्थ्य के निहितार्थ हो।
      • जिसमें तत्काल अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता हो।
  • वित्तपोषण:
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन की कार्यक्रम संबंधी गतिविधियों के लिये अधिकांश वित्तपोषण अतिरिक्त बजटीय योगदान से आता है, जो स्वैच्छिक प्रकृति के होते हैं और इन्हें सामान्य रूप से निर्धारित किया जाता है। WHO को इन फंडों के उपयोग में बहुत कम लचीलापन प्राप्त है।
    • यह सुनिश्चित करने किया जाना चाहिये’ कि अतिरिक्त बजटीय या स्वैच्छिक योगदान की आवश्यकता कहाँ सबसे अधिक है। WHO के पास उन क्षेत्रों में इसके उपयोग के लिये आवश्यक लचीलापन है।
    • WHO के नियमित बजट को बढ़ाने पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि विकासशील देशों पर भारी वित्तीय बोझ आरोपित किये बिना WHO की अधिकांश मुख्य गतिविधियों को इससे वित्तपोषित किया जा सके।
  • वित्तपोषण तंत्र और जवाबदेही ढाँचे की पारदर्शिता सुनिश्चित करना:
    • ऐसा कोई सहयोगी तंत्र नहीं है जिसमें सदस्य राज्यों के परामर्श से वास्तविक परियोजनाओं और गतिविधियों पर निर्णय लिया जाता है तथा वित्तीय मूल्य एवं सदस्य राज्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं या उनमें हो रही असामान्य देरी के संबंध में न ही कोई समीक्षा होती है।
    • मज़बूत और सुरक्षित वित्तीय जवाबदेही ढाँचे की स्थापना से वित्तीय प्रवाह में अखंडता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
    • बढ़ी हुई जवाबदेही को देखते हुए डेटा रिपोर्टिंग और वित्त के वितरण के संबंध में उचित पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने की भी आवश्यकता है।
  • WHO और सदस्य राज्यों की प्रतिक्रिया क्षमता में वृद्धि:
    • IHR 2005 के कार्यान्वयन ने सदस्य राज्यों के बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचे में महत्त्वपूर्ण कमियों को उजागर किया है। यह कोविड-19 महामारी से निपटने में उनकी क्षमता को देखते हए और अधिक स्पष्ट हो गया है।
    • यह आवश्यक है कि WHO द्वारा अपने सामान्य कार्यों के तहत की जाने वाली कार्यक्रम संबंधी गतिविधियों में IHR 2005 के तहत उन आवश्यक सदस्य राज्यों में क्षमता निर्माण को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये जहाँ सदस्य राज्यों द्वारा की गई IHR 2005 पर स्व-रिपोर्टिंग के आधार पर कमी पाई जाती है।
  • WHO के प्रशासनिक ढाँचे में सुधार:
    • एक तकनीकी संगठन होने के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन में अधिकांश कार्य स्वतंत्र विशेषज्ञों से बनी तकनीकी समितियों द्वारा किये जाते हैं। साथ ही इसके अलावा बीमारी के प्रकोप से जुड़े बढ़ते जोखिमों को देखते हुए WHO स्वास्थ्य आपात स्थिति कार्यक्रम (WHE) के प्रदर्शन के लिये ज़िम्मेदार स्वतंत्र निरीक्षण और सलाहकार समिति (IOAC) की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
    • WHO से मिलने वाली तकनीकी सलाह और सिफारिशों के आधार पर कार्यान्वयन के लिये ज़िम्मेदार राज्यों के लिये WHO के कामकाज में सदस्य राज्यों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है।
    • सदस्य राज्यों द्वारा प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने हेतु कार्यकारी बोर्ड की स्थायी समिति जैसे विशिष्ट तंत्र को मज़बूत करने की आवश्यकता है।
  • IHR के कार्यान्वयन में सुधार:
    • अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (International Health Regulations- IHR) 2005 के तहत स्व-रिपोर्टिंग सदस्य राज्यों का एक दायित्व है। यद्यपि IHR के कार्यान्वयन की समीक्षा स्वैच्छिक है।
      • IHR (2005) एक बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय कानूनी समझौते का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें WHO के सभी सदस्य राज्यों सहित विश्व भर के 196 देश शामिल हैं।
      • इन विनियमों का उद्देश्य गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों (जिनमें एक देश से दूसरे देश में प्रसारित होने तथा मानव जाति के समक्ष जोखिम उत्पन्न करने की संभावना हो) को रोकने और उन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मदद करना है।
    • IHR कार्यान्वयन की समीक्षा स्वैच्छिक आधार पर जारी रहनी चाहिये।
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढाने के लिये प्राथमिकताएँ निर्धारित करना भी महत्त्वपूर्ण है। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को विकासशील देशों के उन क्षेत्रों में सहायता हेतु निर्देशित किया जाना चाहिये जिनकी पहचान IHR के क्रियान्वयन में आवश्यक क्षमता की कमी वाले क्षेत्र के रूप में की गई है।
  • चिकित्सीय सुविधाओं, टीके और निदान तक पहुँच:
    • यह महसूस किया गया है कि दोहा घोषणा के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये ट्रिप्स (TRIPS) समझौतों में प्रदान की गई छूट, कोविड-19 महामारी जैसे संकटों से निपटने के लिये पर्याप्त नहीं हो सकती है।
    • कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने के लिये सभी साधनों तक उचित, वहनीय और समान पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है और इस प्रकार उनके आवंटन हेतु एक रूपरेखा तैयार करने की आवश्यकता है।
  • संक्रामक रोगों और महामारी के प्रबंधन हेतु वैश्विक ढाँचे का निर्माण:
    • यह आवश्यक हो गया है कि अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों, अवसंरचनात्मक तैयारी, मानव संसाधन और परीक्षण एवं निगरानी प्रणाली जैसी प्रासंगिक स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमताओं के संदर्भ में सदस्य राज्यों का समर्थन किया जाए तथा तथा इस संदर्भ में एक निगरानी तंत्र की स्थापना की जाए।
    • महामारी की संभावना वाले संक्रामक रोगों के लिये तैयारी और प्रतिक्रिया के संदर्भ में देशों की क्षमता में वृद्धि की जानी चाहिये, जिसमें प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मार्गदर्शन तथा स्वास्थ्य आपात के लिये आर्थिक उपायों पर एक बहु-विषयक दृष्टिकोण (जिसमें स्वास्थ्य व प्राकृतिक विज्ञान के साथ-साथ सामाजिक विज्ञान भी शामिल है) का समावेश हो।
  • महामारी प्रबंधन हेतु वैश्विक भागीदारी की आवश्यकता:
    • नए इन्फ्लुएंज़ा विषाणुओं के कारण मानव जाति में रोगों के अत्यधिक प्रसार के जोखिम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में वैश्विक समुदाय द्वारा तत्काल इस समस्या के समाधान हेतु साहसिक प्रयास किये जाने और हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में सतर्कता एवं तैयारियाँ सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता है।
    • वैश्विक महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया संबंधी क्षमता में सुधार तथा भविष्य में ऐसी किसी भी महामारी का सामना करने की हमारी क्षमता को मज़बूती प्रदान करना वैश्विक भागीदारी का प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिये।
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