मध्य प्रदेश Switch to English
इंदौर में दूषित जल से मृत्यु
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल के सेवन से सात लोगों की मृत्यु तथा 40 से अधिक व्यक्तियों के अस्पताल में भर्ती होने की गंभीर घटना का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया।
मुख्य बिंदु
- संदूषण का कारण: पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से होकर गुजरती है, जिसमें रिसाव होने के कारण सीवेज जल पेयजल में मिल गया।
- इसके अतिरिक्त, पानी की कई वितरण लाइनें क्षतिग्रस्त पाई गईं, जिसके परिणामस्वरूप दूषित जल सीधे घरों तक पहुँच गया।
- NHRC की कार्रवाई: इस घटना को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखते हुए, NHRC ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।
- आयोग ने मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
- अवलोकन: आयोग ने स्पष्ट किया कि निवासियों द्वारा कई दिनों तक दूषित जल की शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी और समयोचित कार्रवाई नहीं की गई, जो जीवन के अधिकार तथा स्वास्थ्य के अधिकार का घोर उल्लंघन है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
- परिचय:
- भारत का NHRC मानव अधिकारों को बढ़ावा और संरक्षण देने के लिये स्थापित एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है।
- स्थापना:
- इसका गठन 12 अक्तूबर 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (PHRA), 1993 के तहत किया गया था, जिसे बाद में वर्ष 2006 और वर्ष 2019 में संशोधित किया गया था।
- आयोग की स्थापना पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप की गई थी, जो मानव अधिकारों को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिये अपनाए गए अंतर्राष्ट्रीय मानक हैं।
- पेरिस सिद्धांत मानव अधिकारों के संवर्द्धन और संरक्षण के लिये पेरिस (अक्तूबर, 1991) में अपनाए गए अंतर्राष्ट्रीय मानकों का समूह है तथा 20 दिसंबर, 1993 को संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा द्वारा अनुमोदित किया गया था।
- ये सिद्धांत विश्व भर में राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं (NHRI) के कार्यों का मार्गदर्शन करते हैं।
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