प्रारंभिक परीक्षा
भारत का HPV टीकाकरण अभियान
चर्चा में क्यों?
भारत ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण को संपूर्ण देश में लागू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य सर्वाइकल/ग्रीवा कैंसर को समाप्त करना है। यह भारत में महिलाओं को प्रभावित करने वाला एक सामान्य लेकिन रोकथाम योग्य कैंसर है।
HPV टीकाकरण अभियान के संबंध में मुख्य बिंदु क्या हैं?
- लक्ष्य समूह और कवरेज: यह अभियान 14 वर्षीय लड़कियों को लक्षित करेगा और स्वैच्छिक तथा निशुल्क होगा। टीकाकरण की प्रक्रिया निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, जैसे—आयुष्मान आरोग्य मंदिर और जिला अस्पतालों में संपन्न की जाएगी।
- यह टीका किशोरावस्था में दिये जाने पर सर्वाइकल/ग्रीवा कैंसर के जोखिम को 85% से अधिक कम कर देता है।
- टीका विवरण: प्रारंभ में इस अभियान में MSD का गार्डासिल (अमेरिका आधारित) उपयोग किया जाएगा। यह चतुर्विकल्पीय टीका है, जो HPV प्रकार 16 और 18 (जो सर्वाइकल/ग्रीवा कैंसर का कारण बनते हैं) तथा प्रकार 6 एवं 11 से सुरक्षा प्रदान करता है।
- वैज्ञानिक प्रभावशीलता और सुरक्षा: यह एक गैर-संक्रामक टीका है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर में HPV संक्रमण पैदा नहीं कर सकता। इसका सुरक्षा प्रोफाइल अत्यंत सुदृढ़ और प्रमाणित है, यानी यह HPV संक्रमण नहीं फैलाता। इस टीके का सुरक्षा रिकॉर्ड अत्यंत सुदृढ़ है और वर्ष 2006 से विश्व स्तर पर 500 मिलियन से अधिक खुराकें दी जा चुकी हैं।
- अध्ययन दर्शाते हैं कि HPV टीके विभिन्न प्रकार के HPV द्वारा होने वाले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम में 93–100% तक प्रभावी हैं।
- खरीद और कार्यान्वयन:भारत ने GAVI (वैक्सीन एलायंस) के साथ रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से 'गार्डासिल' टीके सुनिश्चित किये हैं। ये टीके केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा प्रमाणित हैं और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय माने जाते हैं। इन्हें अब भारत के राष्ट्रीय HPV टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत एकीकृत किया गया है।
- भारत की सर्वोच्च टीकाकरण संस्था, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) ने इस टीके को राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करने की आधिकारिक सिफारिश की थी। साथ ही केंद्रीय बजट 2024 के भाषण में 9–14 वर्ष की लड़कियों के लिये सर्वाइकल/ग्रीवा कैंसर की रोकथाम हेतु टीकाकरण को प्रोत्साहित किया गया।
- अभियान की रणनीति: सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के तहत होने वाले नियमित टीकाकरण के विपरीत, HPV टीकाकरण एक विशेष अभियान के रूप में निर्धारित टीकाकरण दिवसों पर संचालित किया जाएगा। इसकी तीव्र कवरेज सुनिश्चित करने के लिये U-WIN डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से इसकी निगरानी (Tracking) की जाएगी।
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) क्या है?
- परिचय: HPV 200 से अधिक परस्पर संबंधित आवरण-रहित, द्वि-शृंखलित DNA विषाणुओं का एक समूह है, जो पैपिलोमाविरीडे कुल से संबंधित है तथा मुख्यतः त्वचा और श्लेष्म झिल्लियों की उपकला कोशिकाओं को संक्रमित करता है।
- अधिकांश संक्रमण लक्षणरहित होते हैं तथा स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जिनमें से लगभग 90% संक्रमण शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के माध्यम से एक से दो वर्ष के भीतर समाप्त हो जाते हैं।
- HPV प्रकारों का वर्गीकरण: HPV प्रकारों को दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- निम्न-जोखिम प्रकार (उदाहरणार्थ, HPV 6 तथा 11): ये मुख्यतः बिनाइन अवस्था उत्पन्न करते हैं, जैसे– जननांग में होने वाले मस्से (genital warts) अथवा सामान्य त्वचा में होने वाले मस्से (common skin warts)।
- उच्च-जोखिम प्रकार (उदाहरणार्थ, HPV 16 तथा 18): ये ऑन्कोजेनिक होते हैं तथा HPV-संबद्ध कैंसरों के अधिकांश मामलों के लिये उत्तरदायी होते हैं।
- रोगों का बोझ: गर्भाशय ग्रीवा कैंसर भारत में महिलाओं के मध्य दूसरा सर्वाधिक सामान्य कैंसर है, जिसमें प्रतिवर्ष लगभग 80,000 नए प्रकरण तथा 42,000 से अधिक मृत्यु दर्ज की जाती हैं। स्थायी HPV संक्रमण सभी गर्भाशय ग्रीवा कैंसरों के लगभग 85% के लिये उत्तरदायी हैं, जिनमें प्रकार 16 तथा 18 भारत में 80% से अधिक मामलों के लिये उत्तरदायी हैं।
- संक्रमण: संक्रमण मुख्यतः त्वचा-से-त्वचा संपर्क के माध्यम से होता है, जो सर्वाधिक रूप से यौन क्रिया के दौरान होता है। यह विश्व भर में सर्वाधिक सामान्य यौन संचारित संक्रमण (sexually transmitted infection) है।
- रोकथाम की रणनीति: HPV संक्रमण और उससे संबंधित कैंसर से बचने के लिये टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है। इसका प्राथमिक लक्ष्य 9-14 वर्ष की आयु की सभी लड़कियाँ होनी चाहिये, ताकि उन्हें यौन रूप से सक्रिय होने से पहले सुरक्षित किया जा सके। यह टीका 1 या 2 खुराक के रूप में दिया जा सकता है। रोकथाम के अन्य तरीकों में कंडोम का उपयोग, स्वैच्छिक पुरुष खतना और धूम्रपान का त्याग शामिल है।
- WHO उन्मूलन लक्ष्य (WHA 73.2): गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के उन्मूलन में तीव्रता लाने हेतु वैश्विक रणनीति द्वारा वर्ष 2030 तक तीन प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं:
- 15 वर्ष की आयु तक पहुँचने से पहले 90% बालिकाओं का पूर्ण HPV टीकाकरण सुनिश्चित करना है।
- 35 वर्ष की आयु तक 70% महिलाओं की उच्च-निष्पादन परीक्षण द्वारा जाँच तथा 45 वर्ष की आयु पर पुनः जाँच।
- गर्भाशय ग्रीवा रोग से पहचानी गई 90% महिलाओं को उपचार एवं देखभाल की उपलब्धता।
- WHO प्रत्युत्तर रूपरेखा: HPV-संबंधित कैंसरों की रोकथाम वर्ष 2022–2030 की WHO की वैश्विक स्वास्थ्य रणनीति का एक प्रमुख लक्ष्य है, जो HIV, हेपेटाइटिस तथा यौन संचारित संक्रमणों को संबोधित करती है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2021 के WHO प्रस्ताव में मौखिक स्वच्छता के संदर्भ में मुख एवं गले के कैंसर से निपटने हेतु उपाय सम्मिलित किये गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत के HPV टीकाकरण कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
9 से 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को निशुल्क, स्वैच्छिक टीकाकरण प्रदान करके गर्भाशय ग्रीवा कैंसर को समाप्त करना, मुख्य रूप से HPV प्रकार 16 और 18 को लक्षित करना।
2. राष्ट्रीय HPV अभियान में किस टीके का उपयोग किया जा रहा है?
भारत गार्डासिल का उपयोग कर रहा है, जो एक चतुःसंयोजी टीका है जो HPV 6, 11, 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करता है।
3. WHO के गर्भाशय ग्रीवा कैंसर उन्मूलन लक्ष्य क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 90% टीकाकरण, 70% जाँच और 90% उपचार कवरेज प्राप्त करना है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. भारत सरकार द्वारा चलाया गया ‘मिशन इंद्रधनुष’ (2016) किससे संबंधित है? (2016)
(a) बच्चों और गर्भवती महिलाओं का प्रतिरक्षण
(b) पूरे देश में स्मार्ट सिटी का निर्माण
(c) बाहरी अंतरिक्ष में पृथ्वी सदृश ग्रहों के लिये भारत की स्वयं की खोज
(d) नई शिक्षा नीति
उत्तर: (a)
प्रारंभिक परीक्षा
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु मंज़ूरी
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ रखने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पारित किया जाएगा। यह कदम 2024 में केरल विधानसभा द्वारा इस बदलाव का अनुरोध करने वाले प्रस्ताव के बाद उठाया गया है।
किसी राज्य का नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
- संसदीय अधिकार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी नए राज्य के गठन या किसी मौजूदा राज्य के क्षेत्र, सीमाओं या नाम में परिवर्तन करने का एकमात्र विधिक अधिकार प्राप्त है।
- राज्य प्रस्ताव: यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब किसी राज्य की विधानसभा नाम परिवर्तन के लिये प्रस्ताव पारित करती है और उसे गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा जाता है।
- अनुमोदन और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC): गृह मंत्रालय प्राप्त अनुरोध की जाँच करता है और विभिन्न हितधारकों, जैसे– रेल मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), डाक विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग तथा भारत के महापंजीयक से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नाम परिवर्तन से मौजूदा प्रशासनिक, भौगोलिक या सुरक्षा संबंधी रिकॉर्ड में कोई टकराव उत्पन्न न हो।
- विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग और विधायी विभाग ने 'केरल' (Kerala) राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।
- पूर्व अनुशंसा: एक बार जब गृह मंत्रालय (MHA) प्रस्ताव को मंज़ूरी दे देता है, तो इसके बाद विधेयक को संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा से ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
- राज्य विधानसभा के विचार: यदि विधेयक किसी राज्य के नाम या सीमाओं को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति को इस विधेयक का प्रारूप संबंधित राज्य विधानसभा को भेजना आवश्यक होता है।
- समय-सीमित प्रक्रिया: राज्य विधानसभा से राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर अपने विचार व्यक्त करने के लिये कहा जाता है।
- संसद राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिये बाध्य नहीं है, वह उन्हें स्वीकार कर सकती है या अस्वीकार कर सकती है।
- साधारण बहुमत: इस विधेयक को पारित होने के लिये संसद में केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है और इसे अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: संसद से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास उनकी स्वीकृति के लिये भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलते ही नाम परिवर्तन कानून बन जाता है और संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन हो जाता है।
- भारतीय संविधान की प्रथम अनुसूची: यह अनुसूची सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम और क्षेत्रीय सीमाओं को सूचीबद्ध करती है तथा भारत के राजनीतिक मानचित्र को कानूनी आधार प्रदान करती है।
- केरल विधानसभा ने विशेष रूप से अनुरोध किया कि नाम बदलकर "केरलम" न केवल प्रथम अनुसूची में किया जाए, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त सभी आधिकारिक भाषाओं में किया जाए, ताकि पूर्ण भाषायी एकरूपता सुनिश्चित हो सके।
- ऐतिहासिक मिसालों में उत्तरांचल से उत्तराखंड (2007) और उड़ीसा से ओडिशा (2011) जैसे उल्लेखनीय परिवर्तन शामिल हैं।
'केरलम' की उत्पत्ति
- अभिलेखीय एवं व्युत्पत्ति संबंधी जड़ें: इस क्षेत्र का सबसे प्रारंभिक अभिलेखीय साक्ष्य सम्राट अशोक के शिलालेख II (257 ईसा पूर्व) में मिलता है, जो इस क्षेत्र को "केरलपुत्र" (अक्सर चेर राजवंश के संदर्भ के रूप में) का दर्जा प्रदान करता है।
- भाषायी विकास: प्रख्यात जर्मन विद्वान हरमन गुंडर्ट (जिन्होंने पहला मलयालम-अंग्रेज़ी शब्दकोश संकलित किया) के अनुसार, "केरलम" शब्द "चेरम" या "चेरलम" से विकसित हुआ।
- मूल शब्द "चेर" का अर्थ "जुड़ना" है, और "अलम" का अनुवाद "भूमि या क्षेत्र" होता है।
- इस प्रकार, "चेरलम" या "केरलम" गोकर्णम और कन्याकुमारी के बीच की जुड़ी हुई भूमि को दर्शाता है।
- ऐक्य केरल आंदोलन: मालाबार, कोच्चि और त्रावणकोर के मलयालम-भाषी क्षेत्रों को एकीकृत करने वाले एक संयुक्त राज्य की राजनीतिक मांग ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ 1920 के दशक के दौरान महत्त्वपूर्ण गति प्राप्त की।
- राज्य पुनर्गठन (1956): स्वतंत्रता के बाद सैयद फज़ल अली की अध्यक्षता वाले राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) ने भाषायी आधार पर एक एकीकृत राज्य के निर्माण की सिफारिश की।
- 1 नवंबर, 1956 (प्रतिवर्ष केरल पिरवी दिवस के रूप में मनाया जाता है) को मालाबार ज़िले और कासरगोड तालुका को शामिल करके तथा त्रावणकोर के कुछ दक्षिणी तालुकों को बाहर करके आधुनिक राज्य का गठन किया गया।
- तथापि, संविधान में देशज मलयालम "केरलम" के स्थान पर अंग्रेज़ीकृत या परिवर्तित संस्करण "केरल" दर्ज किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत में किसी राज्य का नाम बदलने की अनुमति कौन-सा संवैधानिक उपबंध देता है?
अनुच्छेद 3 संसद को विधि द्वारा किसी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमाएँ बदलने का अधिकार देता है।
2. नाम बदलने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की क्या भूमिका होती है?
विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है, जो इसे विचार हेतु राज्य विधानमंडल को भी प्रेषित करते हैं।
3. राज्य विधानमंडल के विचार संसद के लिये बाध्यकारी होते हैं?
नहीं, कानून पारित करते समय संसद राज्य के विचारों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
4. राज्य का नाम बदलने में प्रथम अनुसूची क्यों महत्त्वपूर्ण है?
प्रथम अनुसूची में राज्यों के नाम और क्षेत्र सूचीबद्ध हैं; नाम बदलने के लिये इसके संशोधन की आवश्यकता होती है।
5. ऐक्य केरल आंदोलन क्या था?
वर्ष 1920 के दशक का एक आंदोलन, जो एक संयुक्त मलयालम-भाषी राज्य की मांग करता था, के कारण वर्ष 1956 में केरल का गठन हुआ।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न: भारतीय संघ के पूर्ण राज्यों के रूप में निम्नलिखित राज्यों के गठन का सही कालानुक्रम कौन-सा है? (2007)
(a) सिक्किम — अरुणाचल प्रदेश — नगालैंड — हरियाणा
(b) नगालैंड — हरियाणा — सिक्किम — अरुणाचल प्रदेश
(c) सिक्किम — हरियाणा — नगालैंड — अरुणाचल प्रदेश
(d) नगालैंड — अरुणाचल प्रदेश — सिक्किम — हरियाणा
उत्तर: (b)
रैपिड फायर
भारत के लिये IEA की पूर्ण सदस्यता
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भारत की पूर्ण सदस्यता के अनुरोध पर हुई प्रगति का स्वागत किया है, जो विश्व के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता को वैश्विक ऊर्जा शासन में एकीकृत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
- भारत, जो वर्ष 2017 से IEA का सहयोगी/एसोसिएट सदस्य है, पूर्ण सदस्यता की ओर एक जटिल मार्ग का सामना कर रहा है क्योंकि IEA ढाँचा इसे आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) देशों तक सीमित करता है, जिसकी सदस्यता ग्रहण करने में भारत ने औपचारिक रुचि व्यक्त नहीं की है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी
- परिचय: IEA एक अंतर-सरकारी निकाय है, जिसकी स्थापना वर्ष 1974 में 17 OECD देशों द्वारा योम किप्पुर युद्ध (1973) के दौरान अरब तेल प्रतिबंध (1973-1974) से उत्पन्न वैश्विक तेल संकट के प्रत्युत्तर में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य सतत तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा ऊर्जा आपात स्थितियों का प्रबंधन करना था।
- सदस्य देशों के पास कम-से-कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर रणनीतिक तेल भंडार होना अनिवार्य है, जिसे आपूर्ति में व्यवधान के समय जारी किया जा सकता है।
- IEA की विकसित होती भूमिका: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की भूमिका में समय के साथ व्यापक विविधता आई है। अब यह नवीकरणीय ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से संबंधित मुद्दों पर कार्य करती है और जलवायु परिवर्तन, डीकार्बोनाइज़ेशन, ऊर्जा संक्रमण तथा महत्त्वपूर्ण खनिज कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
- सदस्यता का विस्तार: ऐतिहासिक रूप से पूर्ण सदस्यता केवल OECD देशों तक सीमित थी। वर्तमान में IEA के 32 पूर्ण सदस्य हैं और कोलंबिया ने वर्ष 2020 में OECD की सदस्यता ग्रहण कर 33वें पूर्ण सदस्य के रूप में स्थान प्राप्त किया।
- वर्ष 2015 में IEA ने गैर-OECD देशों के लिये ‘एसोसिएट सदस्य’ श्रेणी प्रारंभ की और वर्तमान में इसके 13 एसोसिएट सदस्य हैं। ये एसोसिएट सदस्य नीतिगत चर्चाओं और गतिविधियों में भाग लेते हैं, किंतु उन्हें निर्णय-निर्माण का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
- भारत का सामरिक महत्त्व: एसोसिएट सदस्यों (भारत, चीन, ब्राज़ील आदि) को सम्मिलित करने पर IEA वैश्विक ऊर्जा मांग के लगभग 80% का प्रतिनिधित्व करता है। स्वयं IEA के अनुसार, आगामी तीन दशकों में विश्व के किसी भी देश की तुलना में भारत में ऊर्जा मांग में सर्वाधिक वृद्धि होने की संभावना है।
- प्रमुख प्रकाशन: यह वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक, वर्ल्ड एनर्जी इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट तथा ग्लोबल एनर्जी रिव्यू जैसी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्टें प्रकाशित करती है।
रैपिड फायर
भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) मुक्त व्यापार समझौता
भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने भारत-खाड़ी सहयोग परिषद मुक्त व्यापार समझौते पर वार्त्ता को आगे बढ़ाने के लिये संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किये, जो पहले से तय संदर्भ शर्तों के अनुरूप है। यह कदम आर्थिक सहयोग को गहरा करने और भारत-खाड़ी सहयोग परिषद संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त करने का उद्देश्य रखता है।
- भारत-खाड़ी सहयोग परिषद व्यापार: खाड़ी सहयोग परिषद भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार समूह है, जो भारत के वैश्विक व्यापार का 15.42% बनाता है।
- दो-पक्षीय व्यापार: वित्तीय वर्ष 2024-25 में दो-पक्षीय व्यापार 178.56 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया (निर्यात: 56.87 बिलियन USD; आयात: 121.68 बिलियन USD) और पिछले पाँच वर्षों में वार्षिक औसत वृद्धि दर 15.3% दर्ज की गई।
- भारत के प्रमुख निर्यात: भारत खाड़ी सहयोग परिषद देशों को मुख्य रूप से चावल, वस्त्र, मशीनरी और रत्न एवं आभूषण निर्यात करता है।
- भारत के प्रमुख आयात: GCC से भारत के आयात में कच्चा तेल, द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), पेट्रोकेमिकल्स और सोने जैसी कीमती धातुएँ प्रमुख हैं।
- आर्थिक महत्त्व: खाड़ी सहयोग परिषद एक बड़े बाज़ार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें 61.5 मिलियन लोग हैं और इसका सकल घरेलू उत्पाद (GDP) (दुनिया में 9वाँ स्थान) 2.3 ट्रिलियन USD है। यह भारत के लिये प्रमुख विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) स्रोत भी है, जिसके संचित निवेश सितंबर 2025 तक 31.14 बिलियन USD से अधिक हैं।
- प्रवासी और सॉफ्ट पावर: GCC में लगभग 10 मिलियन भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं, जो एक महत्त्वपूर्ण “जीवंत सेतु” का काम करते हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच यह प्रगाढ़ और चिरस्थायी 'जन-से-जन' (People-to-People) संपर्क ही भारत और जीसीसी (GCC) संबंधों की आधारशिला है। इससे इस क्षेत्र में भारतीय कंपनियों की व्यापक उपस्थिति से और भी बल मिलता है।
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC)
- यह एक क्षेत्रीय राजनीतिक और आर्थिक गठबंधन है, जो वर्ष 1981 में प्रभाव में आया और इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
- स्थापना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि: ईरानी क्रांति (1979) और ईरान–इराक युद्ध (1980–1988) जैसे क्षेत्रीय तनावों के जवाब में खाड़ी सहयोग परिषद का गठन किया गया। इसका उद्देश्य अपने सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा, सांस्कृतिक तथा सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
- खाड़ी सहयोग परिषद का मुख्यालय रियाद, सऊदी अरब में स्थित है। इसकी संगठनात्मक संरचना में सर्वोच्च परिषद शामिल है, जो सदस्य देशों के प्रमुखों से बनी सर्वोच्च संस्था है और पदाधिकार में घूर्णन होता है।
रैपिड फायर
अभ्यास वज्र प्रहार का 16वाँ संस्करण
भारत-अमेरिका संयुक्त विशेष सैन्य अभ्यास 'वज्र प्रहार' का 16वाँ संस्करण हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित 'स्पेशल फोर्सेज़ ट्रेनिंग स्कूल' में शुरू हुआ।
वज्र प्रहार
- पहली बार वर्ष 2010 में भारत में आयोजित यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और अमेरिका में आयोजित किया जाता है। इसका पिछला संस्करण अमेरिका के इदाहो में आयोजित किया गया था।
- इसमें भारतीय सेना के विशेष बल और अमेरिकी सेना के 'ग्रीन बेरेट्स' के कर्मी शामिल होते हैं।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य अंतर-संचालनीयता, संयुक्तता और सामरिक विशेषज्ञता के आपसी विनिमय को बढ़ाकर मज़बूत सैन्य सहयोग को बढ़ावा देना है।
- यह संयुक्त मिशन योजना क्षमताओं और परिचालन रणनीति जैसे क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों को साझा करने में सक्षम बनाएगा।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग
- रणनीतिक विकास: दोनों देशों के संबंध "भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग के लिये नए ढाँचे" (2015 में नवीनीकृत) और वर्ष 2016 में भारत को मिले 'प्रमुख रक्षा भागीदार' (MDP) के दर्जे पर आधारित हैं। वर्ष 2018 में भारत को अमेरिकी 'सामरिक व्यापार प्राधिकरण' (STA) के टियर-1 में भी उन्नत किया गया, जिससे उच्च तकनीक के निर्यात नियंत्रण में सुधार हुआ।
- अक्तूबर 2025 में हस्ताक्षरित 'यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' के नए ढाँचे ने अगले दशक के सहयोग का मार्गदर्शन करने के लिये द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ किया है।
- रक्षा नवाचार, निजी निवेश और प्रौद्योगिकी सह-उत्पादन में तेज़ी लाने के लिये वर्ष 2023 में भारत-अमेरिका डिफेंस एक्सेलेरेशन ईकोसिस्टम (INDUS X) लॉन्च किया गया था।
- आधारभूत समझौते: सैन्य अंतर-संचालन क्षमता महत्त्वपूर्ण समझौतों द्वारा स्थापित की गई है: रसद विनिमय समझौते के ज्ञापन (लेमोआ–2016), संचार संगतता और सुरक्षा समझौता (कोम्कासा– 2018), औद्योगिक सुरक्षा समझौता (ISA–2019) और बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (BECA - 2020)।
- रक्षा खरीद: भारतीय सशस्त्र बल प्रमुख अमेरिकी मूल के प्लेटफॉर्मों का संचालन करते हैं, जिनमें अपाचे, चिनूक, MH60R हेलीकॉप्टर और P8I समुद्री विमान शामिल हैं।
- संयुक्त सैन्य अभ्यास: प्रमुख द्विपक्षीय अभ्यासों में युद्ध अभ्यास (सेना), कोप इंडिया (वायु सेना) और टाइगर ट्रायंफ (ट्राय-सर्विस) शामिल हैं।
- दोनों राष्ट्र मालाबार, रिमपैक और रेड फ्लैग जैसे प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यासों में भी सहयोग करते हैं।
रैपिड फायर
सैन्य अभ्यास धर्म गार्जियन
भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ का 7वाँ संस्करण उत्तराखंड के चौबटिया में प्रारंभ हुआ।
- उद्देश्य: अर्द्ध-शहरी क्षेत्र में संयुक्त अभियानों को संचालित करने हेतु सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना और संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाना इसका प्रमुख लक्ष्य है।
- भाग लेने वाली इकाइयाँ: भारतीय सेना का दल लद्दाख स्काउट्स से लिया गया है, जबकि जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) की ओर से 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक भाग ले रहे हैं।
- मुख्य सामरिक गतिविधियाँ: कार्यक्रम में अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR) ग्रिड का विकास, मोबाइल वाहन जाँच चौकियों की स्थापना, कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन, हेलिबोर्न ऑपरेशन तथा हाउस इंटरवेंशन ड्रिल का अभ्यास शामिल हैं।
- रणनीतिक महत्त्व: भारत और जापान में बारी-बारी से आयोजित होने वाला यह अभ्यास रक्षा सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है, जो आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग, पारस्परिक संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) तथा समकालीन अभियानों के पहलुओं को सुदृढ़ करता है।
- अन्य भारत–जापान सैन्य अभ्यास: JIMEX (जापान-भारत समुद्री अभ्यास), वीर गार्जियन (वायु अभ्यास), शिन्यु मैत्री (वायु अभ्यास), सहयोग काइजिन (तटरक्षक), मालाबार (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका)।
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और पढ़ें: भारत-जापान संबंधों का पुनर्मूल्यांकन |
