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भारत के लिये IEA की पूर्ण सदस्यता

  • 25 Feb 2026
  • 19 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने भारत की पूर्ण सदस्यता के अनुरोध पर हुई प्रगति का स्वागत किया है, जो विश्व के तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता को वैश्विक ऊर्जा शासन में एकीकृत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

  • भारत, जो वर्ष 2017 से IEA का सहयोगी/एसोसिएट सदस्य है, पूर्ण सदस्यता की ओर एक जटिल मार्ग का सामना कर रहा है क्योंकि IEA ढाँचा इसे आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) देशों तक सीमित करता है, जिसकी सदस्यता ग्रहण करने में भारत ने औपचारिक रुचि व्यक्त नहीं की है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

  • परिचय: IEA एक अंतर-सरकारी निकाय है, जिसकी स्थापना वर्ष 1974 में 17 OECD देशों द्वारा योम किप्पुर युद्ध (1973) के दौरान अरब तेल प्रतिबंध (1973-1974) से उत्पन्न वैश्विक तेल संकट के प्रत्युत्तर में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य सतत तेल आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा ऊर्जा आपात स्थितियों का प्रबंधन करना था।
    • सदस्य देशों के पास कम-से-कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर रणनीतिक तेल भंडार होना अनिवार्य है, जिसे आपूर्ति में व्यवधान के समय जारी किया जा सकता है।
  • IEA की विकसित होती भूमिका: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की भूमिका में समय के साथ व्यापक विविधता आई है। अब यह नवीकरणीय ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से संबंधित मुद्दों पर कार्य करती है और जलवायु परिवर्तन, डीकार्बोनाइज़ेशन, ऊर्जा संक्रमण तथा महत्त्वपूर्ण खनिज कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
  • सदस्यता का विस्तार: ऐतिहासिक रूप से पूर्ण सदस्यता केवल OECD देशों तक सीमित थी। वर्तमान में IEA के 32 पूर्ण सदस्य हैं और कोलंबिया ने वर्ष 2020 में OECD की सदस्यता ग्रहण कर 33वें पूर्ण सदस्य के रूप में स्थान प्राप्त किया।
    • वर्ष 2015 में IEA ने गैर-OECD देशों के लिये ‘एसोसिएट सदस्य’ श्रेणी प्रारंभ की और वर्तमान में इसके 13 एसोसिएट सदस्य हैं। ये एसोसिएट सदस्य नीतिगत चर्चाओं और गतिविधियों में भाग लेते हैं, किंतु उन्हें निर्णय-निर्माण का अधिकार प्राप्त नहीं होता है।
  • भारत का सामरिक महत्त्व: एसोसिएट सदस्यों (भारत, चीन, ब्राज़ील आदि) को सम्मिलित करने पर IEA वैश्विक ऊर्जा मांग के लगभग 80% का प्रतिनिधित्व करता है। स्वयं IEA के अनुसार, आगामी तीन दशकों में विश्व के किसी भी देश की तुलना में भारत में ऊर्जा मांग में सर्वाधिक वृद्धि होने की संभावना है।
  • प्रमुख प्रकाशन: यह वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक, वर्ल्ड एनर्जी इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट तथा ग्लोबल एनर्जी रिव्यू जैसी प्रमुख फ्लैगशिप रिपोर्टें प्रकाशित करती है।

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