रैपिड फायर
राज्य विकास ऋणों (SDL) हेतु RBI की बेंचमार्क निर्गमन रणनीति
- 06 Apr 2026
- 18 min read
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से राज्य विकास ऋणों (SDL) के लिये पायलट बेंचमार्क निर्गमन रणनीति (BIS) शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य उधारों में अधिक अनुशासन, पारदर्शिता और तरलता सुनिश्चित करना है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, रिज़र्व बैंक को राज्य सरकारों का बैंकर बनने और उनके सार्वजनिक ऋण का प्रबंधन करने का अधिकार प्रदान करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, राज्य सरकारों द्वारा भारी उधारी और निर्गमों की औसत अवधि में तीव्र वृद्धि के कारण बॉण्ड बाज़ार में मांग एवं आपूर्ति के बीच असंतुलन उत्पन्न हो गया।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में, भारतीय राज्य केंद्र के लगभग बराबर उधार लेने वाले हैं, जहाँ राज्यों का कुल निर्गम लगभग ₹12.5 ट्रिलियन है, जबकि केंद्र का यह आँकड़ा ₹14.6 ट्रिलियन है।
- पायलट रोलआउट: राज्य विकास ऋणों (SDL) के लिये बेंचमार्क निर्गमन रणनीति (BIS) वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में नौ राज्यों (आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश) में पायलट आधार पर लागू की जा रही है।
- तंत्र: BIS के तहत राज्य पहले से घोषित उधारी कैलेंडर के अनुसार निर्धारित बेंचमार्क परिपक्वता श्रेणियों में प्रतिभूतियाँ जारी करेंगे, जिससे अनुकूल और गैर-मानकीकृत निर्गम व्यवस्था के स्थान पर एक मानकीकृत प्रणाली अपनाई जाएगी।
- मुख्य उद्देश्य: इसका प्रमुख उद्देश्य राज्य विकास ऋण (SDL), जो राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण हेतु जारी किये जाते हैं, के बाज़ार में विखंडन को कम करना है। इसके लिये बड़े और अधिक तरल बेंचमार्क प्रतिभूतियों का निर्माण किया जाता है, जिससे मूल्य खोज बेहतर हो, पारदर्शिता बढ़े तथा निवेशकों को राज्य बॉण्ड की आपूर्ति के बारे में अधिक स्पष्टता मिल सके।
- ऋण लक्ष्य: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही (Q1) में कुल ₹2.54 ट्रिलियन (2.54 लाख करोड़ रुपये) जुटाने की योजना बनाई है।
- नौ पायलट राज्य नए संरचित BIS ढाँचे के माध्यम से लगभग ₹1.54 लाख करोड़ जुटाएंगे, जबकि अन्य राज्य पारंपरिक तरीके से उधारी जारी रखेंगे।
- क्रमिक प्रतिफल लाभ: यह रणनीति आवश्यक पूर्वानुमानिता तो प्रदान करती है, लेकिन बाज़ार सहभागियों के अनुसार इसके कारण उधारी लागत (यील्ड) में कमी का प्रभाव धीरे-धीरे ही दिखाई देगा, क्योंकि राज्य बॉण्ड की भारी आपूर्ति अभी भी जारी रहेगी।
|
और पढ़ें: राज्यों की बढ़ती उधारी और बॉण्ड यील्ड पर इसका प्रभाव |