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केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने हेतु मंज़ूरी

  • 25 Feb 2026
  • 45 min read

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों? 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ रखने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पारित किया जाएगा। यह कदम 2024 में केरल विधानसभा द्वारा इस बदलाव का अनुरोध करने वाले प्रस्ताव के बाद उठाया गया है।

किसी राज्य का नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?

  • संसदीय अधिकार: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी नए राज्य के गठन या किसी मौजूदा राज्य के क्षेत्र, सीमाओं या नाम में परिवर्तन करने का एकमात्र विधिक अधिकार प्राप्त है।
  • राज्य प्रस्ताव: यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब किसी राज्य की विधानसभा नाम परिवर्तन के लिये प्रस्ताव पारित करती है और उसे गृह मंत्रालय (MHA) को भेजा जाता है।
  • अनुमोदन और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC): गृह मंत्रालय प्राप्त अनुरोध की जाँच करता है और विभिन्न हितधारकों, जैसे– रेल मंत्रालय, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), डाक विभाग, भारतीय सर्वेक्षण विभाग तथा भारत के महापंजीयक से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नाम परिवर्तन से मौजूदा प्रशासनिक, भौगोलिक या सुरक्षा संबंधी रिकॉर्ड में कोई टकराव उत्पन्न न हो।
    • विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग और विधायी विभाग ने 'केरल' (Kerala) राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।
  • पूर्व अनुशंसा: एक बार जब गृह मंत्रालय (MHA) प्रस्ताव को मंज़ूरी दे देता है, तो इसके बाद विधेयक को संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा से ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • राज्य विधानसभा के विचार: यदि विधेयक किसी राज्य के नाम या सीमाओं को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति को इस विधेयक का प्रारूप संबंधित राज्य विधानसभा को भेजना आवश्यक होता है।
  • समय-सीमित प्रक्रिया: राज्य विधानसभा से राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर अपने विचार व्यक्त करने के लिये कहा जाता है।
    • संसद राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिये बाध्य नहीं है, वह उन्हें स्वीकार कर सकती है या अस्वीकार कर सकती है।
  • साधारण बहुमत: इस विधेयक को पारित होने के लिये संसद में केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है और इसे अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
  • राष्ट्रपति की स्वीकृति: संसद से पारित होने के बाद विधेयक को राष्ट्रपति के पास उनकी स्वीकृति के लिये भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलते ही नाम परिवर्तन कानून बन जाता है और संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन हो जाता है।
    • भारतीय संविधान की प्रथम अनुसूची: यह अनुसूची सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम और क्षेत्रीय सीमाओं को सूचीबद्ध करती है तथा भारत के राजनीतिक मानचित्र को कानूनी आधार प्रदान करती है।
    • केरल विधानसभा ने विशेष रूप से अनुरोध किया कि नाम बदलकर "केरलम" न केवल प्रथम अनुसूची में किया जाए, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त सभी आधिकारिक भाषाओं में किया जाए, ताकि पूर्ण भाषायी एकरूपता सुनिश्चित हो सके।
  • ऐतिहासिक मिसालों में उत्तरांचल से उत्तराखंड (2007) और उड़ीसा से ओडिशा (2011) जैसे उल्लेखनीय परिवर्तन शामिल हैं।

'केरलम' की उत्पत्ति

  • अभिलेखीय एवं व्युत्पत्ति संबंधी जड़ें: इस क्षेत्र का सबसे प्रारंभिक अभिलेखीय साक्ष्य सम्राट अशोक के शिलालेख II (257 ईसा पूर्व) में मिलता है, जो इस क्षेत्र को "केरलपुत्र" (अक्सर चेर राजवंश के संदर्भ के रूप में) का दर्जा प्रदान करता है।
  • भाषायी विकास: प्रख्यात जर्मन विद्वान हरमन गुंडर्ट (जिन्होंने पहला मलयालम-अंग्रेज़ी शब्दकोश संकलित किया) के अनुसार, "केरलम" शब्द "चेरम" या "चेरलम" से विकसित हुआ। 
    • मूल शब्द "चेर" का अर्थ "जुड़ना" है, और "अलम" का अनुवाद "भूमि या क्षेत्र" होता है।
    • इस प्रकार, "चेरलम" या "केरलम" गोकर्णम और कन्याकुमारी के बीच की जुड़ी हुई भूमि को दर्शाता है।
  • ऐक्य केरल आंदोलन: मालाबार, कोच्चि और त्रावणकोर के मलयालम-भाषी क्षेत्रों को एकीकृत करने वाले एक संयुक्त राज्य की राजनीतिक मांग ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ 1920 के दशक के दौरान महत्त्वपूर्ण गति प्राप्त की।
  • राज्य पुनर्गठन (1956): स्वतंत्रता के बाद सैयद फज़ल अली की अध्यक्षता वाले राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) ने भाषायी आधार पर एक एकीकृत राज्य के निर्माण की सिफारिश की।
    • 1 नवंबर, 1956 (प्रतिवर्ष केरल पिरवी दिवस के रूप में मनाया जाता है) को मालाबार ज़िले और कासरगोड तालुका को शामिल करके तथा त्रावणकोर के कुछ दक्षिणी तालुकों को बाहर करके आधुनिक राज्य का गठन किया गया।
    • तथापि, संविधान में देशज मलयालम "केरलम" के स्थान पर अंग्रेज़ीकृत या परिवर्तित संस्करण "केरल" दर्ज किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारत में किसी राज्य का नाम बदलने की अनुमति कौन-सा संवैधानिक उपबंध देता है?
अनुच्छेद 3 संसद को विधि द्वारा किसी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमाएँ बदलने का अधिकार देता है।

2. नाम बदलने की प्रक्रिया में राष्ट्रपति की क्या भूमिका होती है?
विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है, जो इसे विचार हेतु राज्य विधानमंडल को भी प्रेषित करते हैं।

3. राज्य विधानमंडल के विचार संसद के लिये बाध्यकारी होते हैं?
नहीं, कानून पारित करते समय संसद राज्य के विचारों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।

4. राज्य का नाम बदलने में प्रथम अनुसूची क्यों महत्त्वपूर्ण है?
प्रथम अनुसूची में राज्यों के नाम और क्षेत्र सूचीबद्ध हैं; नाम बदलने के लिये इसके संशोधन की आवश्यकता होती है।

5. ऐक्य केरल आंदोलन क्या था?
वर्ष 1920 के दशक का एक आंदोलन, जो एक संयुक्त मलयालम-भाषी राज्य की मांग करता था, के कारण वर्ष 1956 में केरल का गठन हुआ।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स

प्रश्न: भारतीय संघ के पूर्ण राज्यों के रूप में निम्नलिखित राज्यों के गठन का सही कालानुक्रम कौन-सा है? (2007)

(a) सिक्किम — अरुणाचल प्रदेश — नगालैंड — हरियाणा

(b) नगालैंड — हरियाणा — सिक्किम — अरुणाचल प्रदेश

(c) सिक्किम — हरियाणा — नगालैंड — अरुणाचल प्रदेश

(d) नगालैंड — अरुणाचल प्रदेश — सिक्किम — हरियाणा

उत्तर: (b)

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