रैपिड फायर
निरसन और संशोधन अधिनियम, 2025
निरसन और संशोधन अधिनियम, 2025 71 अप्रचलित कानूनों (1886-2023 तक के) को हटाकर और चार प्रमुख अधिनियमों में संशोधन करके भारत के कानूनी ढाँचे को सुव्यवस्थित करता है। यह अनावश्यक कानूनों को खत्म करने, कानूनी अव्यवस्था को कम करने और वैधानिक संदर्भों को अद्यतन करने के लिये एक विधायी "हाउसकीपिंग" उपाय के रूप में कार्य करता है। यह अधिनियम शासन सुगमता और व्यापार सुगमता को भी बढ़ावा देता है।
- निरसन (Repeal) का अर्थ है किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून को हटाना या उसे रद्द करना, जबकि संशोधन (Amendment) का अर्थ है मौजूदा कानून में प्रावधानों को जोड़कर, हटाकर या प्रतिस्थापित करके उसमें बदलाव करना।
- निरसन और संशोधन अधिनियम, 2025: इस अधिनियम की पहली अनुसूची उन कानूनों को सूचीबद्ध करती है जिन्हें निरस्त कर दिया गया है क्योंकि वे अब अप्रचलित हो चुके हैं या अपना उद्देश्य पूरा कर चुके हैं, जबकि दूसरी अनुसूची मौजूदा कानूनों में लक्षित संशोधन पेश करती है, जिसमें भाषा को अद्यतन करना, त्रुटियों को सुधारना और विसंगतियों को दूर करना शामिल है।
- विशेष रूप से, वर्ष 2014 से अब तक 1,500 से अधिक पुराने केंद्रीय कानूनों को निरस्त किया जा चुका है, जिससे 'स्टैट्यूट बुक' (कानून की किताब) अधिक संक्षिप्त और समझने में आसान हो गई है।
- लक्षित वैधानिक संशोधन:
- CPC, 1908 और सामान्य खंड अधिनियम में पुराने डाक संदर्भों (उदाहरण के लिये, "पंजीकृत पोस्ट" को अब "पंजीकरण और डिलीवरी के प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट" से बदल दिया गया है) का प्रतिस्थापन। यह वर्तमान भारतीय डाक सेवाओं के साथ संयोजन सुनिश्चित करता है और प्रक्रियागत भ्रम को दूर करता है।
- भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 213 को हटाना, परीक्षण आवश्यकताओं में समुदाय-आधारित असमानताओं को समाप्त किया जा सके और उत्तराधिकार के मामलों में निष्पक्षता तथा एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम में किये गए सुधार- "रोकथाम" शब्द को "तैयारी" शब्द से बदल दिया गया है, जो यह सुनिश्चित करके वैधानिक ढाँचे को मज़बूत करता है कि कानून राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रचालनगत अधिदेश को सटीक रूप से दर्शाता है।
- बचत खंड: यह अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि निरसन से पुराने कानूनों के तहत स्थापित मौजूदा अधिकारों, दायित्वों या चल रही कानूनी कार्यवाहियों पर कोई प्रभाव न पड़े।
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प्रारंभिक परीक्षा
भारत की 1,000 किलोमीटर की क्वांटम संचार सफलता
चर्चा में क्यों?
भारत ने नेशनल क्वांटम मिशन के तहत इसके शुभारंभ के दो वर्षों से भी कम समय में 1,000 किमी. का क्वांटम संचार नेटवर्क विकसित कर लिया है, जो आठ वर्षों में 2,000 किमी. के लक्ष्य से आगे है। यह नेटवर्क QNu लैब्स द्वारा स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से विकसित किया गया है।
1,000 किलोमीटर लंबे क्वांटम संचार नेटवर्क का क्या महत्त्व है?
- उन्नत सुरक्षा: क्वांटम की वितरण (QKD) तकनीक पर आधारित यह नेटवर्क, मिशन की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर सबसे लंबी QKD तैनातियों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।
- यह विकास रक्षा, वित्तीय प्रणालियों और महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना सहित अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित संचार क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिये तैयार है।
- भौगोलिक अनुकूलता: यह तैनात तकनीक कठिन भूभागों में भी सुचारु रूप से कार्य करने हेतु डिज़ाइन की गई है, जिससे यह जटिल जलमग्न (अंडरवॉटर) और भूमिगत नेटवर्कों के लिये भी उपयुक्त बनती है।
- रणनीतिक विस्तार: यह व्यापक नागरिक और रणनीतिक उपयोगों के साथ अत्यधिक सुरक्षित डिजिटल पारिस्थितिक तंत्र की दिशा में भारत के प्रयासों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाता है।
क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) नेटवर्क
- QKD दो उपयोगकर्त्ताओं के बीच सीक्रेट एंक्रिप्शन की को साझा करने का एक अत्यधिक सुरक्षित तरीका है, जिसमें क्वांटम कणों (फोटॉनों) का उपयोग किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि संचार हैकिंग से सुरक्षित बना रहे।
- यदि कोई व्यक्ति की को बीच में रोकने या देखने का प्रयास करता है, तो क्वांटम कणों की अवस्था में परिवर्तन हो जाता है (ऑब्जर्वर इफेक्ट और नो-क्लोनिंग नियम के कारण), जिससे उपयोगकर्त्ताओं को तुरंत घुसपैठ का पता चल जाता है।
राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) क्या है?
- परिचय: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) को अप्रैल 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया तथा अक्तूबर 2024 में लॉन्च किया गया, ताकि भारत को क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया जा सके। इस मिशन का उद्देश्य क्वांटम प्रौद्योगिकियों में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रारंभ करना, पोषित करना तथा उसका विस्तार करना है।
- यह मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। इसके लिये आठ वर्षों (2023-24 से 2030-31) की अवधि हेतु कुल ₹6,003 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
- मुख्य उद्देश्य एवं लक्ष्य:
- क्वांटम कंप्यूटिंग: सुपरकंडक्टिंग एवं फोटोनिक प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए 50 से 1,000 भौतिक क्यूबिट्स वाले मध्यम-स्तरीय क्वांटम कंप्यूटरों का विकास करना।
- क्वांटम संचार: भारत के भीतर 2,000 किमी. की दूरी तक ग्राउंड स्टेशनों के बीच तथा अन्य देशों के साथ उपग्रह-आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार स्थापित करना।
- मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग करते हुए 2,000 किमी. तक के अंतर-शहरी क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) नेटवर्क का विकास करना।
- क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी: सटीक समय निर्धारण, संचार एवं नेविगेशन (जो GPS, रक्षा और उड्डयन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं) हेतु अत्यधिक संवेदनशील मैग्नेटोमीटर और परमाणु घड़ियों का विकास करना।
- क्वांटम सामग्री और उपकरण: क्वांटम उपकरणों के निर्माण के लिये सुपरकंडक्टर्स, नवीन सेमीकंडक्टर्स और टोपोलॉजिकल सामग्री जैसे उन्नत क्वांटम पदार्थों के डिज़ाइन और संश्लेषण को समर्थन प्रदान करना।
- संस्थागत ढाँचा: अनुसंधान अवसंरचना के निर्माण एवं इन लक्ष्यों के क्रियान्वयन हेतु, इस मिशन के अंतर्गत प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में चार समर्पित थीमैटिक हब्स (T-Hubs) स्थापित किये गए हैं।
- स्टार्टअप एवं डीप-टेक के लिये समर्थन: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) क्वांटम-सुरक्षित साइबर सुरक्षा, बायोसेंसर, फोटॉन सेंसिंग तथा परमाणु मेमोरी जैसे क्षेत्रों में कार्यरत डीप-टेक स्टार्टअप्स को सक्रिय रूप से वित्तपोषण एवं इनक्यूबेशन सहायता प्रदान करता है।
- वर्तमान में, यह मिशन 17 डीप-टेक उद्यमों का समर्थन कर रहा है (जिसमें QNu लैब्स जैसी कंपनियाँ शामिल हैं, जिन्होंने 1,000 किमी. संचार उपलब्धि प्राप्त करने में योगदान दिया)।
- सरकार वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर (OCD) जैसे नए वित्तीय साधनों का उपयोग कर रही है। यह स्टार्टअप्स को बिना तत्काल इक्विटी हिस्सेदारी में कमी किये पूंजी उपलब्ध कराता है, जिससे सार्वजनिक धन के साथ-साथ निजी निवेश को आकर्षित करने में सहायता प्राप्त होती है।
- क्वांटम प्रौद्योगिकी का रणनीतिक महत्त्व:
- वैश्विक स्थिति: वर्तमान में केवल कुछ ही देश (जैसे– अमेरिका, चीन, कनाडा, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड और फ्राँस) क्वांटम प्रौद्योगिकी का तीव्र विकास कर रहे हैं।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) का उद्देश्य भारत को इन देशों के साथ बराबरी करने और प्रतिस्पर्द्धा करने हेतु एक ‘क्वांटम जंप/गति’प्रदान करना है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: क्वांटम तकनीक, विशेष रूप से क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD), वस्तुतः अटूट संचार प्रदान करती है, जो रक्षा, वित्तीय प्रणालियों और महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के लिये महत्त्वपूर्ण है।
- आर्थिक विकास: यह आयातित प्रौद्योगिकियों और पेटेंटों पर निर्भरता को कम करके, भविष्य की महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देकर "आत्मनिर्भर भारत" पहल का समर्थन करती है।
- वैश्विक स्थिति: वर्तमान में केवल कुछ ही देश (जैसे– अमेरिका, चीन, कनाडा, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड और फ्राँस) क्वांटम प्रौद्योगिकी का तीव्र विकास कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) क्या है?
यह क्वांटम प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिये एक सरकारी पहल (2023) है, जिसका बजट 8 वर्षों में 6,003 करोड़ रुपये है।
2. क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) क्या है?
यह क्वांटम यांत्रिकी का उपयोग करने वाली एक सुरक्षित संचार विधि है, जो वस्तुतः अटूट डेटा ट्रांसमिशन को सक्षम बनाती है।
3. 1,000 किमी. क्वांटम नेटवर्क का क्या महत्त्व है?
यह स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रक्षा, वित्त और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में सुरक्षित संचार को बढ़ाता है।
4. NQM के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
क्वांटम कंप्यूटर, सुरक्षित संचार नेटवर्क, क्वांटम सेंसर और उन्नत क्वांटम सामग्री विकसित करना।
5. NQM स्टार्टअप्स का समर्थन कैसे करता है?
यह डीप-टेक उद्यमों को वित्तपोषित करता है और नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण जैसे उपकरणों का उपयोग करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. “क्यूबिट” (Qubit) शब्द का उल्लेख निम्नलिखित में से कौन-से एक प्रसंग में होता है? (2022)
(a) क्लाउड सेवाएँ
(b) क्वांटम संगणन
(c) दृश्य प्रकाश संचार प्रौद्योगिकियाँ
(d) बेतार संचार प्रौद्योगिकियाँ
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. "चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेंस को सरकार का अविभाज्य अंग बनाने में पहल की है।" विवेचन कीजिये। (2020)
प्रारंभिक परीक्षा
जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919
चर्चा में क्यों?
13 अप्रैल, 2026 को राष्ट्र ने जलियाँवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो भारत के औपनिवेशिक इतिहास के सबसे अंधकारमय अध्यायों में से एक की 107वीं वर्षगाँठ का प्रतीक है।
जलियाँवाला बाग हत्याकांड क्या था?
- पृष्ठभूमि: रॉलेट एक्ट, 1919 (जिसे औपचारिक रूप से अराजक एवं क्रांतिकारी अपराध अधिनियम, 1919 कहा जाता है) को राजद्रोह समिति की सिफारिशों के आधार पर पारित किया गया था।
- इसने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार को संदिग्ध राजनीतिक असंतोष फैलाने वालों को बिना मुकदमे के अधिकतम दो वर्षों तक कैद करने का अधिकार दिया।
- रॉलेट एक्ट (1919) के विरोध में महात्मा गांधी ने 6 अप्रैल, 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया, जो पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन था। उन्होंने इस अधिनियम का कड़ा विरोध करते हुए इसे ‘ब्लैक लॉ’ कहा और यह दिन ‘ब्लैक डे’ के रूप में जाना गया।
- पंजाब में स्थिति विशेष रूप से तनावपूर्ण थी। 9 अप्रैल को दो प्रमुख स्थानीय राष्ट्रवादी नेता डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के आयोजन के कारण गुप्त रूप से गिरफ्तार कर निर्वासित कर दिया गया।
- जन आक्रोश के कारण अमृतसर में दंगे भड़क उठे। ब्रिटिश प्रशासन ने शहर का नियंत्रण ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर को सौंप दिया, जिन्होंने व्यावहारिक रूप से मार्शल लॉ लागू करते हुए सभी सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया।
- हत्याकांड का दिन: 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी का पर्व था, जो एक प्रमुख फसल उत्सव है। इस अवसर पर हज़ारों लोग—पुरुष, महिलाएँ और बच्चे—अमृतसर के जलियाँवाला बाग नामक एक घिरे हुए सार्वजनिक स्थल पर एकत्रित हुए।
- कई लोग ऐसे ग्रामीण थे जिन्हें डायर द्वारा सार्वजनिक सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी नहीं थी, जबकि एक छोटा समूह अपने नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध के लिये वहाँ उपस्थित था।
- जनरल डायर गुरखा और बलूच सैनिकों की टुकड़ी के साथ पहुँचा और उसने जानबूझकर मुख्य सँकरे प्रवेश द्वार को अपनी सेना तथा बख्तरबंद वाहनों से अवरुद्ध कर दिया।
- बिना किसी चेतावनी के डायर ने अपनी सेना को निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिससे एक हज़ार से अधिक पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मारे गए।
- हंटर कमीशन (अशांति जाँच समिति): इस नरसंहार की जाँच के लिए उन्हें वर्ष 1919 में नियुक्त किया गया था।
- हालाँकि इसने डायर के कार्यों की निंदा की और उसे सेना से इस्तीफा देने के लिये मजबूर किया, लेकिन इसने उसके खिलाफ किसी भी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई की सिफारिश नहीं की।
- INC जाँच: कांग्रेस ने हंटर कमीशन का बहिष्कार किया और अपनी एक गैर-सरकारी समिति का गठन किया, जिसमें महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास और अब्बास तैयबजी जैसे नेता शामिल थे, इस समिति ने इस कृत्य को एक सोची-समझी अमानवीय कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
- परिणाम:
- विरोध: गहरे विरोधस्वरूप रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ब्रिटिश 'नाइटहुड' की उपाधि त्याग दी और महात्मा गांधी ने अपना 'कैसर-ए-हिंद' पदक लौटा दिया।
- सर चेट्टूर संकरन नायर: वे एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी, न्यायविद् और समाज सुधारक थे। उन्होंने वायसरॉय की कार्यकारी परिषद में अपनी सेवाएँ दीं और मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार में योगदान दिया। जलियाँवाला बाग हत्याकांड के बाद उन्होंने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया। अपनी पुस्तक 'गांधी एंड एनार्की' (1922) में उन्होंने माइकल ओ’डायर को इस नरसंहार के लिये ज़िम्मेदार ठहराया, जिसके कारण लंदन में उस पर मानहानि का मुकदमा चला।
- जन आंदोलनों के लिये उत्प्रेरक: पंजाब की घटनाओं पर जनाक्रोश जब खिलाफत आंदोलन से जुड़ा, तो इसने महात्मा गांधी को वर्ष 1920–22 के असहयोग आंदोलन शुरू करने के लिये एक ठोस और तत्काल राजनीतिक आधार प्रदान किया।
- क्रांतिकारी उग्रवाद का उदय: इस त्रासदी ने विशेष रूप से उत्तर भारत के युवाओं को गहराई से प्रभावित किया, जिनमें भगत सिंह प्रमुख थे। इसने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) जैसे संगठनों के माध्यम से सशस्त्र साम्राज्यवाद-विरोधी आंदोलनों की गति को और तेज़ कर दिया।
- ऐतिहासिक प्रतिशोध: सन् 1940 में इस हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी ऊधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ'डायर की हत्या कर दी। ओ'डायर 1919 में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे, जिन्होंने आधिकारिक तौर पर जनरल डायर की कार्रवाइयों का समर्थन किया था।
- विरोध: गहरे विरोधस्वरूप रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ब्रिटिश 'नाइटहुड' की उपाधि त्याग दी और महात्मा गांधी ने अपना 'कैसर-ए-हिंद' पदक लौटा दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. रॉलेट अधिनियम, 1919 क्या था?
यह बिना मुकदमे के दो वर्ष तक नज़रबंद रखने की अनुमति देता था, नागरिकों की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाता था और व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म देता था।
2. जलियाँवाला बाग हत्याकांड क्यों हुआ?
यह रॉलेट अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और जनरल डायर के नेतृत्व में हुए पंजाब में ब्रिटिश दमन का परिणाम था।
3. हंटर कमीशन की क्या भूमिका थी?
इसने हत्याकांड की जाँच की, डायर की आलोचना की लेकिन सख्त सज़ा की सिफारिश नहीं की, जिससे औपनिवेशिक पूर्वाग्रह उजागर हुआ।
4. हत्याकांड ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को कैसे प्रभावित किया?
इससे व्यापक आक्रोश उत्पन्न हुआ, असहयोग आंदोलन को प्रेरणा मिली और क्रांतिकारी राष्ट्रवाद मज़बूत हुआ।
5. उधम सिंह कौन थे और उन्होंने क्या किया?
जलियाँवाला बाग हत्याकांड के प्रत्यक्षदर्शी रहे उधम सिंह ने इस क्रूरता का प्रतिशोध लेने का संकल्प किया। उन्होंने वर्ष 1940 में लंदन जाकर माइकल ओ'डायर की हत्या कर दी, जिसे भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में एक साहसी 'प्रतिशोध' के रूप में दर्ज किया गया है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न 1. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, रॉलेट अधिनियम ने लोकप्रिय आक्रोश क्यों पैदा किया? (2009)
(a) इसने धार्मिक स्वतंत्रता का हनन किया
(b) इसने भारतीय पारंपरिक शिक्षा को दबा दिया
(c) इसने सरकार को बिना मुकदमा चलाए लोगों को कैद करने का अधिकार दिया
(d) इसने ट्रेड यूनियन की गतिविधियों पर अंकुश लगा दिया
उत्तर: (c)
प्रश्न 2. इनमें से कौन अंग्रेज़ी में अनूदित प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतिकाव्य - 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिज़न' से संबद्ध हैं? (2021)
(a) बाल गंगाधर तिलक
(b) जवाहरलाल नेहरू
(c) मोहनदास करमचंद गांधी
(d) सरोजिनी नायडू
उत्तर: (c)
प्रश्न 3. भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)
- महात्मा गांधी 'गिरमिटिया' (इंडेंचर्ड लेबर) प्रणाली के उन्मूलन में सहायक थे।
- लॉर्ड चेम्सफोर्ड की 'वॉर कॉन्फरेंस' में महात्मा गांधी ने विश्वयुद्ध के लिये भारतीयों की भर्ती से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था।
- भारत के लोगों द्वारा नमक कानून तोड़े जाने के परिणामस्वरूप, औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न 1. असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के रचनात्मक कार्यक्रमों को स्पष्ट कीजिये। (2021)
रैपिड फायर
अभ्यास 'दस्तलिक' का 7वाँ संस्करण
भारतीय सशस्त्र बल, भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास, दस्तलिक के 7वें संस्करण में उज़्बेकिस्तान के नमनगन में भाग लेने के लिये तैयार है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और परिचालन तालमेल को बढ़ाना है।
- अभ्यास दस्तलिक: यह अभ्यास पहली बार वर्ष 2019 में आयोजित किया गया था, जो एक वार्षिक द्विपक्षीय कार्यक्रम है और बारी-बारी से भारत एवं उज़्बेकिस्तान में आयोजित किया जाता है।
- 7वें संस्करण में उज़्बेकिस्तान सशस्त्र बलों के कर्मियों के साथ त्रि-सेवा एकीकरण प्रशिक्षण शामिल है।
- प्राथमिक उद्देश्य: इस अभ्यास का उद्देश्य रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना और अर्द्ध-पहाड़ी इलाकों में संयुक्त परिचालन क्षमताओं को बढ़ाना है।
- यह संयुक्त सामरिक अभ्यासों, हमले मिशनों और भूमि नेविगेशन अभ्यासों के माध्यम से एक यूनिफाइड कमांड-एंड-कंट्रोल फ्रेमवर्क को विकसित करने पर केंद्रित है, जिसकी परिणति अवैध सशस्त्र समूहों को निष्प्रभावी करने के लिये विशेष अभियानों में होती है।
उज़्बेकिस्तान
- स्थान: उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में एक स्थलरुद्ध देश है, जिसकी सीमाएँ कज़ाखस्तान (उत्तर), किर्गिजस्तान (पूर्वोत्तर), ताजिकिस्तान (दक्षिण-पूर्व), अफगानिस्तान (दक्षिण) और तुर्कमेनिस्तान (दक्षिण-पश्चिम) से लगती हैं।
- भौतिक विशेषताएँ: देश में बड़े पैमाने पर शुष्कता पाई जाती है, जिसका अधिकांश भाग क्यज़िलकुम रेगिस्तान और तुरान मैदान से आच्छादित है।
- तियान शान, हिसार और अलाय जैसी पर्वत शृंखलाएँ पूर्व में स्थित हैं, जबकि फरगाना घाटी और ज़ेरावशान घाटी जैसे उपजाऊ क्षेत्र कृषि और समरकंद तथा बुखारा जैसे ऐतिहासिक शहरों का समर्थन करते हैं।
- प्रमुख महत्त्व: यह एक दोहरा स्थलरुद्ध देश है (केवल स्थलरुद्ध देशों से घिरा हुआ है); ऐसा एकमात्र अन्य देश लिकटेंस्टीन है।
- उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में सामरिक महत्त्व रखता है, इसमें कराकल्पकस्तान का स्वायत्त क्षेत्र शामिल है और यह क्षेत्रीय भू-राजनीति तथा मध्य एशिया के साथ भारत के जुड़ाव में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रैपिड फायर
चीन का सेनलिंग काउंटी और भारत की आपत्ति
भारत ने अपने क्षेत्र, विशेषकर अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों को "काल्पनिक नाम" देने के चीन के प्रयासों को दृढ़तापूर्वक अस्वीकार कर दिया है, यह कहते हुए कि ऐसे कृत्य निराधार और अस्वीकार्य हैं।
- विदेश मंत्रालय ने पुनः पुष्टि की कि ये क्षेत्र सदैव भारत का अभिन्न अंग बने रहेंगे, साथ ही यह भी कहा कि ऐसे कृत्य द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के प्रयासों को कमज़ोर करते हैं।
- पृष्ठभूमि: चीन ने हाल ही में शिनजियांग में "सेनलिंग" नाम का एक नया ज़िला स्थापित किया है। यह अफगानिस्तान, पाकिस्तान-अधिगृहीत कश्मीर और भारत के अरुणाचल प्रदेश से सटे त्रि-संधि स्थल क्षेत्र के निकट, काराकोरम श्रेणी के समीप स्थित है।
- इसका प्रशासन काशगर प्रीफेक्चर के अंतर्गत होता है, जो प्राचीन सिल्क रोड पर एक रणनीतिक क्षेत्र है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिये एक प्रमुख द्वार है, जो पाक-अधिकृत कश्मीर से होकर गुज़रता है और जिसका भारत विरोध करता है।
- प्रतिरूप: यह विकास एक सतत प्रतिरूप को दर्शाता है, क्योंकि चीन ने हाल के वर्षों में हियान और हेकांग सहित ऐसी कई प्रशासनिक इकाइयाँ बनाई हैं, जिनके विरुद्ध भारत ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
- चीन का दावा: चीन के दावे शिमला सम्मेलन के अंतर्गत परिभाषित सीमा और संबद्ध मैकमोहन सीमा को अस्वीकार करने पर आधारित हैं।
- यह तवांग मठों और ल्हासा के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देकर अपनी स्थिति को और उचित ठहराता है।
- उद्देश्य: स्थानों का नाम बदलना और प्रशासनिक इकाइयाँ बनाना चीन द्वारा क्षेत्रीय दावों को सुदृढ़ करने और भारत पर दबाव डालने के लिये प्रयुक्त रणनीतिक उपकरण माने जाते हैं।
- रणनीतिक महत्त्व: यह दृष्टिकोण एक व्यापक भू-राजनीतिक स्वरूप को दर्शाता है, जो दक्षिण चीन सागर में चीन के आचरण के समान है, जहाँ संप्रभुता का दावा करने के लिये प्रतीकात्मक कार्यों को आर्थिक और सैन्य सामर्थ्य के साथ जोड़ा जाता है।
रैपिड फायर
सेंटिनल प्रजाति के रूप में एंपरर पेंगुइन
हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने एंपरर पेंगुइन को एक संकटग्रस्त प्रजाति घोषित किया है, जो अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिये एक संकेतक (सेंटिनल) प्रजाति के रूप में भी कार्य करता है।
- एंपरर पेंगुइन सबसे बड़ी और सबसे भारी पेंगुइन प्रजाति है, जिसकी पहचान उसकी गर्दन और छाती पर सुनहरे-नारंगी रंग की धारियों से होती है।
- यह अपने अस्तित्व के लिये समुद्री बर्फ पर अत्यधिक निर्भर होता है, जिसका उपयोग वह जीवनयापन करने, शिकार करने और प्रजनन के लिये करता है, अत: जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
- वैश्विक तापवृद्धि के कारण एंपरर पेंगुइन की संख्या में उल्लेखनीय कमी का अनुमान है, जिसमें 2080 के दशक तक लगभग 50% तक कमी आने की संभावना बताई गई है।
सेंटिनल प्रजाति
- परिचय: सेंटिनल प्रजातियों का स्वास्थ्य किसी पारिस्थितिक तंत्र की स्थिति को दर्शाता है, जो पर्यावरणीय क्षरण की प्रारंभिक चेतावनी का संकेत करता है।
- कोयला खदानों में कैनरी पक्षियों का ऐतिहासिक उपयोग 'सेंटिनल सिद्धांत' का एक सटीक उदाहरण है, क्योंकि वे मनुष्यों की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड के प्रति कहीं अधिक तेज़ी से प्रतिक्रिया करते थे।
- कार्य: ये प्रजातियाँ अक्सर निश्चित आवासों में रहती हैं, पर्याप्त समय तक जीवित रहकर विषाक्त पदार्थों का संचय करती हैं और इनमें ऐसे जैविक गुण होते हैं जो पर्यावरणीय प्रभावों को और अधिक स्पष्ट कर देते हैं।
- ये प्रदूषण, रोग और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरणीय तनाव कारकों के प्रति शीघ्र और स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया करती हैं।
- उदाहरण: मेढक (अपनी पारगम्य त्वचा के कारण संवेदनशील), मधुमक्खियाँ (कृषि रसायनों की निगरानी करने वाली), ध्रुवीय भालू (आर्कटिक प्रदूषण के संकेतक) और कुछ मछली प्रजातियाँ (औद्योगिक अपवाह का पता लगाने वाली) सेंटिनल प्रजातियों के रूप में कार्य करती हैं तथा इनकी संख्या में गिरावट व्यापक पारिस्थितिक तनाव का संकेत देती है।
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और पढ़ें: IUCN रेड लिस्ट अपडेट 2023 |



