शासन व्यवस्था
‘वन हेल्थ' दृष्टिकोण
प्रिलिम्स के लिये: ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण, विश्व स्वास्थ्य संगठन, निपाह, एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1), रेबीज़, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद
मेन्स के लिये: ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण: अवधारणा, महत्त्व और प्रासंगिकता, एकीकृत रोग निगरानी प्रणाली, पर्यावरणीय क्षरण और स्वास्थ्य के बीच संबंध
चर्चा में क्यों?
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विशेषज्ञों ने महामारी की बेहतर तैयारी और सभी के लिये समान स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने हेतु ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सारांश:
- विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर भारत में जूनोटिक रोगों, जलवायु से जुड़े जोखिमों से निपटने तथा महामारी की तैयारी को मज़बूत करने के लिये वन हेल्थ दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- नेशनल वन हेल्थ मिशन जैसी पहलों के माध्यम से भारत एक समन्वित, निवारक और सतत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर आगे बढ़ रहा है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस:
- विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना की वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व भर के लोगों के लिये चिंता का विषय बने किसी विशिष्ट स्वास्थ्य मुद्दे पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना और महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के प्रयासों को एकजुट करना है।
- विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 का केंद्रीय विषय “टुगेदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस” है। यह थीम वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में वैज्ञानिक सहयोग और 'वन हेल्थ' (एक स्वास्थ्य) दृष्टिकोण के महत्त्व को रेखांकित करती है।
- वैश्विक अभियान:
- अंतर्राष्ट्रीय वन हेल्थ शिखर सम्मेलन: फ्राँस द्वारा (फ्राँसीसी G7 अध्यक्षता के तहत) आयोजित, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरण क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दी गई।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोगी केंद्रों का वैश्विक मंच: 80 से अधिक देशों के 800 वैज्ञानिक संस्थानों का एक विशाल सम्मेलन।
- इन आयोजनों के परिणामस्वरूप, संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़े वैज्ञानिक नेटवर्क का निर्माण हुआ है, जो वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये एक प्राथमिक उपकरण के रूप में विज्ञान-आधारित सहयोग को बढ़ावा देता है।
'वन हेल्थ' दृष्टिकोण क्या है?
- वन हेल्थ: यह एक एकीकृत और समन्वित दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य मानव, पशु तथा पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य के बीच संतुलन स्थापित करना एवं उसे सतत रूप से अनुकूलित करना है।
- यह मानता है कि मानव, घरेलू एवं जंगली पशुओं, पौधों तथा व्यापक पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ और परस्पर निर्भर है।
- वन हेल्थ व्यापक रोग नियंत्रण को सक्षम बनाता है और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
- यह सामुदायिक, उप-राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तरों पर लागू होता है तथा समग्र व न्यायसंगत समाधान के लिये समन्वय, सहयोग एवं साझा शासन पर आधारित होता है।
- भारत के लिये 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण की आवश्यकता:
- उच्च जैव विविधता एवं अंतःक्रिया: विश्व की केवल 2.4% भूमि होने के बावजूद भारत में 8% प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच अधिक संपर्क होता है तथा ज़ूनोटिक रोगों (जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं) का जोखिम बढ़ जाता है।
- निपाह, एवियन इन्फ्लूएंज़ा (H5N1) और रेबीज़ के प्रकोप दर्शाते हैं कि भारत में उभरने वाले 60–70% से अधिक संक्रामक रोग पशुजनित (animal-borne) होते हैं।
- बड़े पैमाने पर पशुधन जनसंख्या: भारत में विश्व की सबसे बड़ी पशुधन आबादियों में से एक है, जो अक्सर वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच संक्रमण के प्रसार में एक कड़ी (सेतु) का कार्य करती है।
- एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR): मनुष्यों और पशुधन में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से ‘सुपरबग्स’ विकसित होते हैं, जो पर्यावरण और खाद्य शृंखला के माध्यम से फैलकर सामान्य संक्रमणों को भी उपचार-प्रतिरोधी बना देते हैं।
- जलवायु परिवर्तन और वेक्टरजनित रोग: वनों की कटाई, भूमि उपयोग में बदलाव तथा ग्लोबल वार्मिंग रोग वाहकों (जैसे– मच्छर तथा किलनी) के आवासों को बदल रहे हैं। इसके कारण डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियाँ नए क्षेत्रों में फैल रही हैं, साथ ही क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ (KFD) जैसी जंगली बीमारियाँ मानवीय बस्तियों तक पहुँच रही हैं।
- उच्च जैव विविधता एवं अंतःक्रिया: विश्व की केवल 2.4% भूमि होने के बावजूद भारत में 8% प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच अधिक संपर्क होता है तथा ज़ूनोटिक रोगों (जो पशुओं से मनुष्यों में फैलते हैं) का जोखिम बढ़ जाता है।
- नेशनल वन हेल्थ मिशन (NOHM): नेशनल वन हेल्थ मिशन एक अंतर-मंत्रालयी पहल है, जिसे 21वीं प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सलाहकार परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह भारत के एकीकृत जैव-सुरक्षा ढाँचे की ओर एक महत्त्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।
- वर्ष 2026 तक यह मिशन नागपुर स्थित राष्ट्रीय वन हेल्थ संस्थान द्वारा संचालित है और इसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इसमें दो-स्तरीय शासन संरचना है, जिसमें एक कार्यकारी समिति (नीति-केंद्रित) और एक वैज्ञानिक संचालन समिति (तकनीकी-केंद्रित) शामिल हैं।
- नेशनल वन हेल्थ मिशन का उद्देश्य 13 से अधिक सरकारी विभागों को एकीकृत करके भारत में उच्च ज़ूनोटिक रोग बोझ (पशुजनित रोगों) का समाधान करना है।
- इसका परिचालन फोकस “रोग नियंत्रण के व्यापक दायरे” पर केंद्रित है, जिसमें रोगजनकों की शीघ्र पहचान के लिये AI-संचालित उपकरणों का उपयोग, टीकों व निदान हेतु अनुसंधान एवं विकास (R&D) को सुव्यवस्थित करना, तथा ‘स्पिलओवर’ जोखिमों की निगरानी हेतु राष्ट्रीय वन्यजीव स्वास्थ्य नीति की स्थापना शामिल है।
- अंततः यह मिशन 'प्रतिक्रियात्मक स्वास्थ्य सेवा' से आगे बढ़कर एक 'सक्रिय और समग्र मॉडल' की ओर ले जाता है, जो मनुष्यों, विश्व की सबसे बड़ी पशुधन आबादी तथा पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ सुरक्षित करता है।
भारत में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को लागू करने में क्या चुनौतियाँ हैं और इसे सुदृढ़ बनाने हेतु क्या उपाय किये जा सकते हैं?
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चुनौतियाँ |
सुदृढ़ करने हेतु उपाय |
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पृथक् शासन: मानव, पशु और पर्यावरणीय क्षेत्र स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं जिसमें कमज़ोर समन्वय और सीमित डेटा साझाकरण होता है। |
समन्वय को संस्थागत बनाना: एकीकृत नीति-निर्माण सुनिश्चित करने के लिये प्रमुख मंत्रालयों के प्रतिनिधित्व वाला एक वैधानिक निकाय स्थापित करना। |
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संसाधन संबंधी बाधाएँ: पशु चिकित्सा और वन्यजीव स्वास्थ्य प्रणालियाँ अपर्याप्त वित्त पोषण, बुनियादी ढाँचे और कुशल जनशक्ति से ग्रस्त हैं। |
एकीकृत निगरानी: मनुष्यों, पशुओं और वन्यजीवों में बीमारियों की निगरानी के लिये एक एकीकृत, वास्तविक समय प्रणाली विकसित करना। |
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कम सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय: स्वास्थ्य व्यय (~GDP का 2.1%) राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य 2.5% से नीचे बना हुआ है, जो क्षमता को सीमित करता है। |
प्राथमिक देखभाल को सुदृढ़ करना: शीघ्र पहचान, रोकथाम और ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के लिये आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को बढ़ाना। |
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पारिस्थितिक क्षरण: वनोन्मूलन और शहरीकरण मानव-वन्यजीव अंतःक्रिया को बढ़ाता है, जिससे ज़ूनोटिक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। |
एंटीबायोटिक उपयोग को विनियमित करना: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने के लिये पशुधन और मुर्गीपालन में एंटीबायोटिक उपयोग पर सख्त नियंत्रण लागू करना। |
निष्कर्ष
भारत के लिये वन हेल्थ दृष्टिकोण महामारी, जलवायु परिवर्तन और दवा प्रतिरोध के "ट्रिपल थ्रेट" के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव है। किसान, गाय और वनों के स्वास्थ्य को एक ही प्रणाली के रूप में मानकर भारत "संकट प्रबंधन" से "रोकथाम" की ओर बढ़ सकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. “भारत में उभरते सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिये ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।” चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. वन हेल्थ दृष्टिकोण क्या है?
मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत करने वाला एक ढाँचा ताकि रोग नियंत्रण और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार किया जा सके।
2. राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन (NOHM) क्या है?
एक क्रॉस-मिनिस्ट्रियल पहल जो 13 विभागों को एकीकृत करती है ताकि ज़ूनोटिक रोग नियंत्रण, निगरानी और महामारी की तैयारियों को सुदृढ़ किया जा सके।
3. वन हेल्थ भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उच्च जैव विविधता, बड़ी पशुधन आबादी और बढ़ते ज़ूनोटिक रोगों के कारण मानव-पशु इंटरफेस पर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
4. एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) क्या है?
एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण रोगाणुओं द्वारा विकसित प्रतिरोध, जिससे संक्रमणों का इलाज करना कठिन हो जाता है और मृत्यु दर का जोखिम बढ़ जाता है।
5. वन हेल्थ को लागू करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
पृथक् शासन, कम वित्तपोषण, कमज़ोर पशु चिकित्सा बुनियादी ढाँचा और पारिस्थितिकीय क्षरण जिससे ज़ूनोटिक रोगों का विस्तार होता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न. "एक कल्याणकारी राज्य की नैतिक अनिवार्यता के अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य संरचना धारणीय विकास की एक आवश्यक पूर्व शर्त है।" विश्लेषण कीजिये। (2021)
मुख्य परीक्षा
भारत का हरित पथ: संरक्षण से जलवायु कार्रवाई की ओर
चर्चा में क्यों?
‘हरित पथ’ दृष्टिकोण में परिलक्षित भारत की विकसित होती पर्यावरणीय रणनीति संरक्षण से एकीकृत जलवायु कार्रवाई की ओर परिवर्तन को दर्शाती है। बढ़ती जलवायु चुनौतियों के बीच भारत जैव विविधता संरक्षण को आर्थिक विकास और सततता के साथ समन्वित कर रहा है।
- देश जलवायु न्याय और सतत विकास के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण ग्लोबल वॉयस के रूप में भी उभर रहा है।
भारत जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास को कैसे आगे बढ़ा रहा है?
- भारत की जैव विविधता एवं संरक्षण रूपरेखा:
- समृद्ध जैव विविधता: वैश्विक भू-क्षेत्र का केवल 2.4% हिस्सा होने के बावजूद, भारत में विश्व की लगभग 8% दर्ज प्रजातियाँ पाई जाती हैं (96,000 से अधिक पशु एवं 47,000 पौधों की प्रजातियाँ)।
- कानूनी आधार: संरक्षण का संचालन जैविक विविधता अधिनियम, 2002 द्वारा किया जाता है, जो वर्ष 1992 के जैविक विविधता अभिसमय (CBD) के अनुरूप है।
- NBSAP 2024–2030: इसे संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (COP 16) में लॉन्च किया गया। अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्ययोजना (NBSAP) का उद्देश्य वर्ष 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना तथा वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने का लक्ष्य निर्धारित करना है।
- इस योजना में पारिस्थितिक तंत्र पुनर्स्थापन, प्रजातियों का संरक्षण, आर्द्रभूमि/तटीय क्षेत्रों का संरक्षण तथा स्थानीय और राष्ट्रीय जैव विविधता समितियों के माध्यम से मज़बूत शासन व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- संरक्षित क्षेत्र एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम:
- संरक्षित क्षेत्र: वर्ष 2014 से 2025 के बीच संरक्षित क्षेत्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो 745 से बढ़कर 1,134 हो गई है। यह विस्तार वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये वन्यजीव गलियारों पर विशेष ज़ोर देता है।
- प्रमुख प्रजाति परियोजनाएँ:
- प्रोजेक्ट टाइगर: टाइगर रिज़र्व की संख्या बढ़कर 58 हो गई (सबसे नया – माधव टाइगर रिज़र्व)।
- प्रोजेक्ट एलीफैंट: 15 राज्यों में फैले 150 हाथी गलियारों को सुरक्षित करते हुए 33 अभयारण्यों तक इसका विस्तार किया गया है।
- प्रोजेक्ट चीता: इनकी संख्या 30 तक पहुँच गई है (जिनमें भारत में जन्मे 19 शावक शामिल हैं)। यह परियोजना गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य जैसे नए क्षेत्रों में विस्तारित हो रही है।
- हिम तेंदुआ परियोजना: पहले आकलन में हिम तेंदुओं की संख्या 718 आँकी गई (लद्दाख में सबसे अधिक)। चरण 2.0 की शुरुआत वर्ष 2025 के अंत में हुई।
- प्रोजेक्ट डॉल्फिन: अनुमानित 6,327 नदी डॉल्फिन (2021-2023)। प्रमुख नदियों को कवर करने वाला दूसरा व्यापक सर्वेक्षण जनवरी 2026 में शुरू किया गया।
- इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA): यह भारत के नेतृत्व में एक बहु-देशीय और बहु-एजेंसी गठबंधन है। इसका उद्देश्य 95 बिग कैट रेंज देशों के साथ-साथ संरक्षण में रुचि रखने वाले नॉन-रेंज देशों को एक साथ लाना है। यह गठबंधन सहयोगात्मक कार्रवाई और ज्ञान साझाकरण के लिये एक एकीकृत मंच प्रदान करता है।
- भारत ने वर्ष 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में IBCA की शुरुआत की, जिसे बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनुमोदित किया। इस गठबंधन का सचिवालय भारत में स्थित है।
- वन्यजीव सप्ताह 2025 का शुभारंभ: स्लॉथ बियर और घड़ियाल के लिये नई राष्ट्रीय परियोजनाओं के साथ हुआ। इन परियोजनाओं में प्रजाति संरक्षण को वन पारिस्थितिक तंत्र की बहाली के साथ जोड़ने वाली व्यापक परिदृश्य-स्तरीय रणनीति पर बल दिया गया।
- वन एवं जैवमंडल संरक्षण:
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (बायोस्फीयर रिज़र्व): भारत में 18 बायोस्फीयर रिज़र्व का एक नेटवर्क है। इनमें से 13 UNESCO के 'वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिज़र्व' के तहत मान्यता प्राप्त हैं, जिसमें 'कोल्ड डेज़र्ट बायोस्फीयर रिज़र्व' (हिमाचल प्रदेश) सितंबर 2025 में शामिल किया गया (नवीनतम) है।
- वनाग्नि प्रबंधन: जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिये भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा एक 24x7 उपग्रह-आधारित, रियल-टाइम आग निगरानी प्रणाली संचालित की जाती है, जो तुरंत SMS और ईमेल अलर्ट जारी करती है।
- बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान: नागरिकों के नेतृत्व वाला 'एक पेड़ माँ के नाम' (Plant4Mother) अभियान एक विशाल पर्यावरण आंदोलन बन गया, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2025 के अंत तक 262.4 करोड़ पौधे लगाए गए।
- आर्द्रभूमि और तटीय पारिस्थितिक तंत्र:
- मैंग्रोव बहाली: मैंग्रोव को प्राकृतिक बफर के रूप में मान्यता देते हुए तटरेखा आवास एवं मूर्त आय हेतु मैंग्रोव पहल (MISHTI) के तहत भारत ने वर्ष 2025 में 4,536 हेक्टेयर का बहाल किया और भविष्य के वृक्षारोपण के लिये 13 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 22,560 हेक्टेयर की पहचान की।
- रामसर स्थल: भारत ने वर्ष 2025 में 11 नए रामसर स्थलों की घोषणा की, जिससे कुल संख्या 98 हो गई (एशिया में सबसे अधिक और विश्व स्तर पर तीसरा स्थान)।
- उल्लेखनीय रूप से उदयपुर और इंदौर भारत के पहले रामसर मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि शहर बन गए।
- राष्ट्रीय तटीय मिशन: तटवर्त्ती जलवायु को लचीलापन बढ़ाने, अपरदन का प्रबंधन करने और मूंगा चट्टानों की रक्षा के लिये वर्ष 2025–2031 के लिये विस्तारित किया गया।
- ब्लू फ्लैग बीच: वर्ष 2025–26 तक 7 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 18 समुद्र तटों ने स्वच्छता, सुरक्षा और सतत प्रबंधन के लिये अंतर्राष्ट्रीय ब्लू फ्लैग प्रमाणन प्राप्त किया।
- प्रभावित समुदायों का समर्थन करने के लिये सरकार सुनिश्चित करती है कि मृत्यु या चोट के लिये अनुग्रह अनुदान 24 घंटों में भुगतान किया जाए।
- भारत ने "मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के लिये उत्कृष्टता केंद्र" और "बाघ अभयारण्यों के बाहर बाघ" को संबोधित करने वाली एक विशिष्ट परियोजना शुरू की।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन: सरकार ने संघर्ष केंद्रों की पहचान करने, समन्वित कार्रवाई अनिवार्य करने और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें स्थापित करने के लिये सख्त एडवाइज़री जारी की है।
- प्रदूषण नियंत्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था पहल:
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): 130 लक्षित शहरों में से 103 ने वर्ष 2024–25 तक PM10 सांद्रता को सफलतापूर्वक कम किया (2017–18 की तुलना में)।
- उल्लेखनीय रूप से 64 शहरों में 20% की गिरावट देखी गई, हालाँकि 25 शहरों में 40% की कमी देखी गई।
- फ्लाई ऐश का उपयोग: सरकार तापविद्युत संयंत्रों की फ्लाई ऐश का 100% उपयोग अनिवार्य करती है।
- वर्ष 2024–25 में उत्पन्न 340 मिलियन टन में से 332.63 मिलियन टन को सफलतापूर्वक सड़कों (32%), सीमेंट (27%) और ईंटों (14%) में पुनः उपयोग किया गया।
- पुनर्चक्रण अवसंरचना में उछाल: सतत विकास का समर्थन करने के लिये वर्ष 2019–25 के दौरान भारत में अपशिष्ट पुनर्चक्रण संयंत्रों की संख्या लगभग चार गुना हो गई।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): दिसंबर 2025 तक 71,000 से अधिक उत्पादकों और 4,400 पुनर्चक्रणकर्त्ताओं ने पंजीकरण कराया, जिससे 375 लाख टन से अधिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण की सुविधा हुई।
- भारत के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 ने वर्ष 2024–25 तक 100% के EPR लक्ष्य पेश किये। वर्ष 2026 के संशोधन अप्राप्त लक्ष्यों को तीन वर्षों के लिये आगे बढ़ाने की अनुमति देकर लचीलापन प्रदान करते हैं, जिसमें कम-से-कम एक-तिहाई वर्ष में साफ करने का लक्ष्य होना चाहिये।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): 130 लक्षित शहरों में से 103 ने वर्ष 2024–25 तक PM10 सांद्रता को सफलतापूर्वक कम किया (2017–18 की तुलना में)।
- सतत विकास और समावेशी विकास: नीति आयोग द्वारा निर्देशित भारत का समग्र SDG स्कोर वर्ष 2018 में 57 से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 71 हो गया है।
जलवायु कार्रवाई के लिये भारत की रणनीति क्या है?
- जलवायु नीतियाँ और लक्ष्य:
- NAPCC: राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (NAPCC) एक व्यापक ढाँचे के रूप में कार्य करती है, जिसमें अनुकूलन और शमन को संतुलित करने के लिये नौ क्षेत्रीय मिशन शामिल हैं।
- NDC: वर्ष 2031-2035 की अवधि के लिये राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC 3.0) के तहत:
- भारत वर्ष 2035 तक अपनी संचयी स्थापित ऊर्जा क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन, जल, बायोमास और परमाणु सहित) से प्राप्त करने का संकल्प करता है।
- भारत ने फरवरी 2026 तक पहले ही 52.57% का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो अपने पूर्व में निर्धारित वर्ष 2030 के लक्ष्य (50%) को सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है।
- भारत का लक्ष्य वर्ष 2005 के आधार वर्ष की तुलना में वर्ष 2035 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करना है।
- भारत ने वर्ष 2020 तक पहले ही 36% की कमी हासिल कर ली थी, जो इसे वर्ष 2030 के लिये अपने पूर्व में निर्धारित 45% कमी के लक्ष्य को पार करने की राह पर है।
- भारत वर्ष 2035 तक वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4.0 बिलियन टन CO₂ समतुल्य के अतिरिक्त कार्बन सिंक के निर्माण का लक्ष्य रखता है।
- वर्ष 2025 तक भारत ने वन एवं वृक्ष आवरण से 2.29 बिलियन टन CO₂ समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया है।
- भारत वर्ष 2035 तक अपनी संचयी स्थापित ऊर्जा क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म स्रोतों (सौर, पवन, जल, बायोमास और परमाणु सहित) से प्राप्त करने का संकल्प करता है।
- नेट-ज़ीरो और हाइड्रोजन: भारत का लक्ष्य वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन है।
- मिशन लाइफ: सतत जीवन के लिये एक ज़मीनी आंदोलन जिसने दिसंबर 2025 तक 6 करोड़ से अधिक लोगों को शामिल किया है और लगभग 5 करोड़ प्रतिज्ञाएँ आरक्षित की हैं।
- स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार:
- वर्तमान क्षमता (जनवरी 2026): भारत में अब गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत बिजली उत्पादन में प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं। लगभग 520.5 गीगावाट की कुल स्थापित क्षमता में से गैर-जीवाश्म ईंधन का योगदान लगभग 272 गीगावाट है, जो जीवाश्म ईंधनों (~248.5 गीगावाट) से अधिक है।
- वैश्विक रैंकिंग (2025): भारत सौर ऊर्जा में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है और पवन ऊर्जा तथा कुल नवीकरणीय ऊर्जा में चौथे स्थान पर है।
- महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ: मोढेरा (गुजरात) भारत का पहला 24×7 सौर ऊर्जा संचालित गाँव बना है, जबकि ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) में देश का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पार्क स्थापित किया गया है।
- दक्षता: वर्ष 2015 से 2023 के दौरान बिजली क्षेत्र में CO₂ उत्सर्जन तीव्रता 61.45 से घटकर 40.52 टन प्रति ₹ करोड़ GDP हो गई, जो उल्लेखनीय कमी को दर्शाती है।
- कार्बन बाज़ार और औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन
- कार्बन ट्रेडिंग: भारत ने अनुपालन सुनिश्चित करने और ऑफसेट तंत्र को सक्षम बनाने के लिये अपनी घरेलू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को लागू कर दिया है।
- औद्योगिक जवाबदेही: जनवरी 2026 में सरकार ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता के लक्ष्यों का विस्तार करते हुए 490 प्रमुख उत्सर्जन-गहन इकाइयों को इसके दायरे में शामिल किया।
- कार्बन कैप्चर (CCUS): 2026–27 के केंद्रीय बजट में कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) तकनीकों के विकास के लिये पाँच वर्षों में ₹20,000 करोड़ की बड़ी राशि निर्धारित की गई है।
- वैश्विक नेतृत्व और बहुपक्षीय जुड़ाव
- कूटनीति: भारत ने वर्ष 2025 में ब्राज़ील में आयोजित COP30 के दौरान प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ज़ोर दिया और ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) में शामिल हुआ।
- सौर एवं ओज़ोन: भारत ने 2025 के अंत में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की 8वीं असेंबली की मेज़बानी की, साथ ही मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत भारत ने वर्ष 2025 तक HCFCs (ओज़ोन-क्षयकारी पदार्थ) में 67.5% की सफल कटौती हासिल की।
निष्कर्ष
भारत नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, प्रदूषण नियंत्रण, आवास पुनर्स्थापन और व्यापक जनभागीदारी जैसे सशक्त घरेलू प्रयासों को वैश्विक सहयोग के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में ठोस और मापनीय उपलब्धियों के आधार पर भारत ‘प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन’ के अपने 2050 के लक्ष्य की ओर दृढ़ता से अग्रसर है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. ‘भारत की पर्यावरणीय रणनीति संरक्षण से जलवायु कार्रवाई की ओर एक बदलाव को दर्शाती है।’ आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. NBSAP 2024–2030 क्या है?
भारत का जैव विविधता रोडमैप वर्ष 2030 तक जैव विविधता ह्रास को रोकने और वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
2. MISHTI का क्या महत्त्व है?
मैंग्रोव पुनर्स्थापन की एक पहल, जो तटीय लचीलापन बढ़ाती है और जलवायु जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है।
3. भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य क्या है?
वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना।
4. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का उद्देश्य 130 शहरों में लक्षित कार्ययोजनाओं के माध्यम से कणीय प्रदूषण (PM10/PM2.5) को कम करना है।
5. विस्तारित उत्पादक दायित्व (EPR) क्या है?
एक ढाँचा जो उत्पादकों को प्लास्टिक, ई-अपशिष्ट, टायर और बैटरियों के पुनर्चक्रण और निपटान के लिये उत्तरदायी बनाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न 1: भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2015)
- यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
- यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
प्रश्न 2. वर्ष 2015 में पेरिस में UNFCCC की बैठक में हुए समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2016)
- समझौते पर संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों ने हस्ताक्षर किये थे और यह 2017 में प्रभावी होगा।
- समझौते का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करना है ताकि इस सदी के अंत तक औसत वैश्विक तापमान में वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस या 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न हो।
- विकसित देशों ने ग्लोबल वार्मिंग में अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को स्वीकार किया और विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने के लिये वर्ष 2020 से प्रतिवर्ष $1000 बिलियन दान करने के लिये प्रतिबद्ध हैं।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के पक्षकारों के सम्मेलन (COP) के 26वें सत्र के प्रमुख परिणामों का वर्णन कीजिये। इस सम्मेलन में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताएँ क्या हैं? (2021)
प्रश्न. नवंबर 2021 में ग्लासगो में विश्व के नेताओं के शिखर सम्मेलन में सीओपी 26 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में, आरंभ की गई हरित ग्रिड पहल का प्रयोजन स्पष्ट कीजिये। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में यह विचार पहली बार कब दिया गया था? (2021)
प्रश्न. "सतत, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिये अनिवार्य है।" इस संबंध में भारत में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)
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