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भारत में वायु प्रदूषण

  • 07 Mar 2026
  • 69 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

फिनलैंड स्थित एक स्वतंत्र अनुसंधान समूह, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) द्वारा किये गए एक विश्लेषण में पाया गया कि सत्र 2025-26 की सर्दियों के दौरान भारत के 238 शहरों में से 204 शहर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे

CREA विश्लेषण के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?

  • व्यापक राष्ट्रीय अनुपालन की कमी: सर्दियों के दौरान 238 शहरों में से 204 शहरों में औसत PM2.5 का स्तर भारतीय राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) के 40 µg/m³ से अधिक दर्ज किया गया।
  • सबसे प्रदूषित शहर: गाज़ियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है, जहाँ PM2.5 की औसत सांद्रता 172 µg/m³ है। इसके बाद नोएडा (166 µg/m³) और दिल्ली (163 µg/m³) का स्थान रहा।
    • भारत के अधिकांश आर्थिक केंद्रों को ज़हरीली हवा की समस्या से जूझना पड़ा। दिल्ली (163 µg/m³), कोलकाता (78 µg/m³), मुंबई (48 µg/m³) और चेन्नई (44 µg/m³) सभी में सर्दियों के दौरान PM2.5 की सांद्रता राष्ट्रीय मानक से अधिक दर्ज की गई।
  • भारत के सबसे स्वच्छ शहर: कर्नाटक का चामराजनगर शीतकालीन मौसम के दौरान भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, जहाँ PM2.5 की औसत सांद्रता मात्र 19 µg/m³ थी।
  • बंगलुरु एकमात्र ऐसा महानगर था जिसने अपनी वायु गुणवत्ता को NAAQS सीमा से थोड़ा नीचे बनाए रखा, जहाँ PM2.5 की औसत सांद्रता 39 µg/m³ दर्ज की गई।
  • दक्षिण और मध्य/पूर्वोत्तर भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। दस सबसे स्वच्छ शहरों में कर्नाटक के 8, मध्य प्रदेश का 1 तथा मेघालय का एक 1 शामिल हैं।

वायु प्रदूषण से संबंधित प्रमुख शब्द

मुख्य प्रदूषक

  • पर्टिकुलेट मैटर (PM10 और PM2.5): वायुमंडल में निलंबित सूक्ष्म ठोस या तरल पदार्थ।
    • PM10 कणों का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। PM2.5 अत्यंत सूक्ष्म कण (2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम) होते हैं जो फेफड़ों के अवरोधकों (lung barrier) को भेदकर रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं।
  • भू-स्तरीय (ट्रोपोस्फेरिक) ओज़ोन (O3): समतापमंडलीय ओज़ोन (जो हमें पराबैंगनी किरणों से बचाती है) के विपरीत, भू-स्तरीय ओज़ोन हानिकारक द्वितीयक प्रदूषक है। 
    • यह सीधे उत्सर्जित नहीं होता है, बल्कि सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOx) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा निर्मित होता है।
  • वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOC): कार्बनिक रसायन जो कक्षीय तापमान पर आसानी से वाष्प या गैस बन जाते हैं।
    • ये पेंट, सॉल्वैंट्स, वाहनों से निष्कर्षण और औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्सर्जित होते हैं और स्मॉग निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
  • द्वितीयक प्रदूषक: ऐसे प्रदूषक जो सीधे किसी स्रोत से उत्सर्जित नहीं होते हैं, बल्कि प्राथमिक प्रदूषकों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा निम्न वायुमंडल में बनते हैं (जैसे– भू-स्तरीय ओज़ोन, फोटोकेमिकल स्मॉग)।

वायुमंडलीय परिघटना

  • फोटोकेमिकल स्मॉग: एक भूरी-भूरी (Brownish-Gray) धुंध, जो हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन के ऑक्साइड से प्रदूषित वायुमंडल पर सौर पराबैंगनी विकिरण की क्रिया के कारण होती है।
    • यह गर्म और धूपयुक्त जलवायु वाले अत्यधिक मोटरयुक्त (जहाँ वाहनों की संख्या अधिक हो) शहरों में एक आम समस्या है।
  • तापमान व्युत्क्रमण: तापमान व्युत्क्रमण तब होता है जब वायु का तापमान घटने के बजाय ऊँचाई के साथ बढ़ता है, जिससे शीतल पवन के ऊपर एक उष्ण परत बन जाती है जो प्रदूषकों को ऊपर उठने से रोक देती है।
    • शीतकाल में दिल्ली में पड़ने वाली सर्दी के कारण प्रदूषक निम्न वायुमंडल में जमा हो जाते हैं, जिससे घने स्मॉग का निर्माण होता है और सतह-स्तरीय वायु प्रदूषण में वृद्धि हो जाती है।
  • अम्लीय वर्षा: नाइट्रिक और सल्फ्यूरिक अम्ल की हानिकारक मात्रा वाली वर्षा, जो मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन से वायुमंडल में उत्सर्जित नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड से बनती है।

निगरानी और मापन

  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI): लोगों तक वायु गुणवत्ता की स्थिति को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने के लिये एक कलर-कोडेड टूल।
  • NAAQS (राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक): केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा परिवेशी वायु गुणवत्ता के लिये निर्धारित मानक।
    • भारत में NAAQS में 12 प्रदूषक शामिल हैं (AQI में शामिल 8 के अतिरिक्त बेंजीन, बेंजो(a) पाइरीन, आर्सेनिक और निकल)।
  • सफर (वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान प्रणाली): पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) की एक पहल जो वायु गुणवत्ता पर लगभग वास्तविक समय (नियर रियल-टाइम) में स्थान-विशिष्ट जानकारी और 1-3 दिन पहले इसका पूर्वानुमान प्रदान करती है।
    • CAAQMS (निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन): अत्यधिक उन्नत, स्वचालित स्टेशन जो वायु प्रदूषकों को लगातार मापते हैं और केंद्रीय सर्वरों पर वास्तविक समय में डेटा प्रेषित करते हैं (दैनिक AQI की गणना के लिये उपयोग किया जाता है)।

शासन और कार्रवाई ढाँचे

  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP): दिल्ली-NCR क्षेत्र में लागू आपातकालीन प्रकृति के प्रदूषण-रोधी उपायों का एक समूह।
    • GRAP के तहत उपाय "श्रेणीबद्ध" हैं और AQI के बिगड़ने ("खराब" से "गंभीर+") के साथ चरणबद्ध रूप से लागू होते हैं।
  • भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक: भारत सरकार द्वारा आंतरिक दहन इंजन और मोटर वाहनों से वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिये स्थापित BS उत्सर्जन मानदंड
    • भारत वर्तमान में BS-VI मानदंडों का पालन कर रहा है।
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP): पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा संपूर्ण देश में वायु प्रदूषण से व्यापक रूप से निपटने के लिये शुरू की गई एक राष्ट्रीय स्तर की रणनीति, जिसका लक्ष्य वर्ष 2024 तक पार्टिकुलेट मैटर सांद्रता में 20-30% की कमी लाना था (बाद में इसे संशोधित कर वर्ष 2026 तक 40% तक कम कर दिया गया)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. PM2.5 क्या है और यह खतरनाक क्यों है?

PM2.5 वह कण है जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण फेफड़ों और रक्त प्रवाह में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं, जिससे साँस संबंधी और हृदय रोग हो सकते हैं।

2. एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है?


एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) भारत में वायु गुणवत्ता के स्तर को बताने के लिये उपयोग किया जाने वाला एक रंग-कोडित उपकरण है, जिसकी गणना आठ प्रमुख प्रदूषकों की सांद्रता के आधार पर की जाती है।\

3. तापमान व्युत्क्रमण क्या है और यह वायु प्रदूषण को कैसे प्रभावित करता है

तापमान व्युत्क्रमण तब होता है जब ऊपर की हवा गर्म और ज़मीन के पास की हवा ठंडी हो, जिससे प्रदूषक फँस जाते हैं और गंभीर स्मॉग उत्पन्न होता है। यह स्थिति विशेष रूप से उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान देखने को मिलती है।

4. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) का उद्देश्य क्या है? 

NCAP का लक्ष्य 2026 तक पार्टिकुलेट मैटर (PM) प्रदूषण को 40% तक कम करना है। इसके लिये शहर-विशेष कार्ययोजनाएँ, निगरानी विस्तार और समन्वित प्रदूषण नियंत्रण उपाय अपनाए जाएंगे।

5. ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) क्या है?

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली-NCR के लिये एक आपातकालीन प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली  है, जिसमें AQI स्तरों के अनुसार प्रतिबंधों और उपायों को धीरे-धीरे लागू किया जाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न 

प्रिलिम्स

प्रश्न. वायु प्रदूषण कम करने हेतु कृत्रिम वर्षा कराने के तरीके में किनका प्रयोग होता है? (2025)

(a) सिल्वर आयोडाइड और पोटैशियम आयोडाइड 

(b) सिल्वर नाइट्रेट और पोटैशियम आयोडाइड 

(c) सिल्वर आयोडाइड और पोटैशियम नाइट्रेट 

(d) सिल्वर नाइट्रेट और पोटैशियम क्लोराइड

उत्तर: (a)

प्रश्न. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) किस प्रकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से भिन्न है? (2018)

  1. एनजीटी का गठन एक अधिनियम द्वारा किया गया है, जबकि सीपीसीबी का गठन सरकार के कार्यपालक आदेश से किया गया है। 
  2. एनजीटी पर्यावरणीय न्याय उपलब्ध करता है तथा उच्चतर न्यायालयों में मुकदमों के भार को कम करने में सहायता करता है, जबकि सीपीसीबी झरनों एवं कुओं की सफाई को प्रोत्साहित करता है तथा देश में वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने का लक्ष्य रखता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हाल ही में जारी किये गए संशोधित वैश्विक वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देशों (AQG) के मुख्य बिंदुओं का वर्णन कीजिये। विगत 2005 के अद्यतन से ये किस प्रकार भिन्न हैं? इन संशोधित मानकों को प्राप्त करने के लिये भारत के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में किन परिवर्तनों की आवश्यकता है? (2021)

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