दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स



प्रारंभिक परीक्षा

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026

  • 06 Apr 2026
  • 62 min read

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

भारत ने अपने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (2026 में संशोधित) में संशोधन करते हुए कंपनियों के लिये अनुपालन मानकों को आसान बनाया है, जबकि विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढाँचे के तहत रीसाइक्लिंग लक्ष्यों को बरकरार रखा है।

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (संशोधित 2026) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • अनुपालन प्रावधान: जो कंपनियाँ वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिये अपने पुनर्चक्रण लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती हैं, उन्हें अब तुरंत दंडित नहीं किया जाएगा।
    • वित्तीय वर्ष 2025–26 के अधूरे लक्ष्यों को अगले तीन वर्षों (2026–27 से शुरू) तक आगे ले जाया जा सकता है, बशर्ते कि हर वर्ष कम-से-कम एक-तिहाई कमी को पूरा किया जाए।
  • पुनर्चक्रण लक्ष्य: वर्ष 2026 के संशोधन में प्लास्टिक पैकेजिंग में पुनर्चक्रित सामग्री और पुनः उपयोग के लक्ष्यों के लिये चरणबद्ध ढाँचा बनाए रखा गया है। यह वर्ष 2022 के विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढाँचे के तहत शुरू की गई प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है, जिसमें पहली बार उत्पादकों, आयातकों तथा ब्रांड मालिकों (PIBOs) के लिये संग्रहण लक्ष्य निर्धारित किये गए थे।
    • वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिये कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग (श्रेणी I) में कम-से-कम 30% पुनर्चक्रित सामग्री होना अनिवार्य है, जो वर्ष 2028–29 तक बढ़कर 60% हो जाएगा।
    • लचीले प्लास्टिक (श्रेणी II) के लिये 10% की आवश्यकता निर्धारित है, जो बढ़कर 20% हो जाएगी, जबकि बहु-स्तरीय प्लास्टिक (श्रेणी III) हेतु 5% का लक्ष्य है, जो बढ़कर 10% तक पहुँचेगा।
    • इसके अतिरिक्त 'रिजिड पैकेजिंग' (कठोर पैकेजिंग) के पुन: उपयोग के लक्ष्य अनिवार्य कर दिये गए हैं, जिसमें छोटे कंटेनरों (0.9–4.9 लीटर) के लिये 10%, बड़े पानी के पैकेटों/बोतलों के लिये 70% और बड़े गैर-जल पैकेटों के लिये 10% का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें समय के साथ धीरे-धीरे वृद्धि की जाएगी।
  • व्यापार योग्य प्रमाण-पत्र प्रणाली: नियमों में एक ऐसी व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया गया है, जिसके तहत कंपनियाँ अपने पुनर्चक्रण दायित्वों को पूरा करने के लिये उन कंपनियों से ट्रेडेबल क्रेडिट खरीद सकती हैं, जिन्होंने अपने लक्ष्यों से अधिक प्रदर्शन किया है।
    • हालाँकि यह प्रणाली लचीलापन प्रदान करती है और लागत कम करती है, लेकिन यह कंपनियों को अपने स्वयं के प्लास्टिक के पुनर्चक्रण से बचने की अनुमति भी देती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2023 में 6 लाख से अधिक फर्जी प्रमाण-पत्र पाए।
  • छूट: नियमों में ऐसे मामलों के लिये छूट दी गई है, जहाँ अन्य विनियम पुनर्चक्रित प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करते हैं, जैसे कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), जिसके कारण खाद्य और पेय पैकेजिंग क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा इससे बाहर रह सकता है।
  • कार्यान्वयन तंत्र: अनुपालन की निगरानी एक केंद्रीकृत EPR पोर्टल के माध्यम से की जाती है, जिस पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी रहती है, ताकि दायित्वों की ट्रैकिंग, रिपोर्टिंग और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
    • नियमों के तहत कंपनियों के लिये वर्ष 2024–25 तक बाज़ार में जारी किये गए सभी प्लास्टिक का 100% संग्रहण और प्रसंस्करण करना अनिवार्य किया गया है, जो EPR कार्यान्वयन का अंतिम चरण है।
    • हालाँकि पूर्ण अनुपालन का कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अधिकांश डेटा केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से स्वयं-रिपोर्टिंग पर आधारित है और संपूर्ण प्रणाली स्तर पर कोई व्यापक सत्यापन व्यवस्था मौजूद नहीं है।
    • पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, EPR के तहत पुनर्चक्रण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन यह अभी भी पूर्ण कवरेज से दूर है। वर्ष 2022 से अब तक 2.07 करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण किया गया है, जबकि वर्ष 2022–23 में वार्षिक प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन लगभग 41.3 लाख टन रहा, जो लक्ष्यों और वास्तविक परिणामों के बीच के अंतर को दर्शाता है।

नोट: प्लास्टिक की श्रेणियाँ पुनर्चक्रणीयता के आधार पर परिभाषित की जाती हैं: श्रेणी I (कठोर प्लास्टिक) में उच्च-घनत्व पॉलीथीन (HDPE) और पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) कंटेनर शामिल हैं, इन्हें एकत्र करना सबसे आसान है; श्रेणी II (लचीला प्लास्टिक) में कैरी बैग और स्नैक रैपर शामिल हैं जिन्हें एकत्र करना मध्यम कठिनाई वाला है; और श्रेणी III (बहु-परत प्लास्टिक) जैसे टेट्रा पैक कार्टन एवं फॉयल रैपर को पुनर्चक्रित करना सबसे कठिन है।

  • भारत ने वर्ष 2022 में ही एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिया था।

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों (संशोधन 2026) में परिभाषित प्रमुख शब्द

  • जीवन के अंत का निपटान: यह प्लास्टिक अपशिष्ट से ऊर्जा पुनर्प्राप्ति के उपयोग को संदर्भित करता है, जिसमें सीमेंट और इस्पात उद्योगों में सह-प्रसंस्करण, अपशिष्ट-से-ऊर्जा, अपशिष्ट-से-तेल रूपांतरण एवं सड़क निर्माण जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्लास्टिक को नए प्लास्टिक या रसायनों में परिवर्तित करना यहाँ शामिल नहीं है और इसे पुनर्चक्रण के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • पुनर्चक्रण: पुनर्चक्रण को प्लास्टिक अपशिष्ट के नए उत्पादों में परिवर्तन या ऊर्जा के उत्पादन के रूप में परिभाषित किया गया है। यह संशोधन पिछली परिभाषा में "ऊर्जा के उत्पादन" का विस्तार करता है, जिससे पुनर्चक्रण गतिविधियों का दायरा बढ़ जाता है।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करणकर्त्ता: इस शब्द में अब पुनर्चक्रणकर्त्ता और जीवन के अंत के निपटान में शामिल संस्थाएँ दोनों शामिल हैं, जैसे अपशिष्ट-से-ऊर्जा संचालक एवं सह-प्रसंस्करणकर्त्ता। पहले, यह केवल पुनर्चक्रणकर्त्ताओं तक सीमित था, लेकिन अब दायरा व्यापक और अधिक समावेशी है।
  • पंजीकृत पर्यावरण लेखा परीक्षक: ये पर्यावरण लेखांकन नियम, 2025 के तहत परिभाषित लेखा परीक्षक हैं, जो EPR अनुपालन और पुनर्चक्रित सामग्री के उपयोग को सत्यापित करने के लिये अधिकृत हैं। वे नियमों के तहत अनुपालन सत्यापन के लिये नामित एजेंसियों के विकल्प के रूप में कार्य करते हैं।
  • पुन: उपयोग (Reuse): पुन: उपयोग का अर्थ है किसी सामग्री को उसकी संरचना को बदले बगैर उसी या किसी भिन्न उद्देश्य के लिये फिर से उपयोग करना। यह परिभाषा कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग (श्रेणी I) में पुन: उपयोग दायित्वों के लिये विशेष रूप से प्रासंगिक है।
  • विक्रेता: यह शब्द उन संस्थाओं को संदर्भित करता है जो प्लास्टिक के कच्चे माल जैसे रेजिन, छर्रों, या पैकेजिंग में उपयोग किये जाने वाले मध्यवर्ती आगतों को बेचती हैं। यह पहली बार कच्चे माल के आपूर्तिकर्त्ताओं को नियामक ढाँचे के अंतर्गत लाता है, जिससे मूल्य शृंखला में जवाबदेही का विस्तार होता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न 1. भारत में निम्नलिखित में से किसमें एक महत्त्वपूर्ण विशेषता के रूप में 'विस्तारित उत्पादक दायित्व' आरंभ किया गया था? (2019)

(a) जैव चिकित्सा अपशिष्ट (प्रबंधन और हस्तन) नियम, 1998

(b) पुनर्चक्रित प्लास्टिक (निर्माण और उपयोग) नियम, 1999

(c) ई-अपशिष्ट (प्रबंधन और हस्तन) नियम, 2011

(d) खाद्य सुरक्षा और मानक विनियम, 2011

उत्तर: (c) 


प्रश्न 2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) किस प्रकार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से भिन्न है? (2018) 

NGT का गठन एक अधिनियम द्वारा किया गया है जबकि CPCB का गठन सरकार के कार्यपालक आदेश से किया गया है।

NGT पर्यावरणीय न्याय उपलब्ध कराता है और उच्चतर न्यायालयों में मुकदमों के भार को कम करने में सहायता करता है जबकि CPCB झरनों एवं कुँओं की सफाई को प्रोत्साहित करता है तथा देश में वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने का लक्ष्य रखता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (b) 


प्रश्न. पर्यावरण में निर्मुक्त हो जाने वाली 'सूक्ष्ममणिकाओं (माइक्रोबीड्स)' के विषय में अत्यधिक चिंता क्यों है? (2019)

(a) ये समुद्री पारितंत्रों के लिये हानिकारक मानी जाती हैं। 

(b) ये बच्चों में त्वचा कैंसर होने का कारण मानी जाती हैं।

(c) ये इतनी छोटी होती हैं कि सिंचित क्षेत्रों में फसल पादपों द्वारा अवशोषित हो जाती हैं। 

(d) अक्सर इनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिये किया जाता है। 

उत्तर: (a) 


मेन्स 

प्रश्न: निरंतर उत्पन्न किये जा रहे फेंके गए ठोस कचरे की विशाल मात्राओं का निस्तारण करने में क्या-क्या बाधाएँ हैं? हम अपने रहने योग्य परिवेश में जमा होते जा रहे ज़हरीले अपशिष्टों को सुरक्षित रूप से किस प्रकार हटा सकते हैं? (2018)

close
Share Page
images-2
images-2