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UN ने चार भारतीय राज्यों में सड़क सुरक्षा वित्तपोषण परियोजना लॉन्च की
चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) ने भारत में एक 'सतत सड़क सुरक्षा वित्तपोषण परियोजना' (Sustainable Road Safety Financing Project) शुरू की है, जिसका उद्देश्य चयनित राज्यों में सड़क सुरक्षा हस्तक्षेपों के लिये वित्तीय तंत्र और क्षमता को मज़बूत करना है।
- इस परियोजना का उद्घाटन नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत, जीन टॉड (Jean Todt) की यात्रा के दौरान किया गया।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिये सतत और समन्वित वित्तपोषण तंत्र स्थापित करना है।
- तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिये यह परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), UNICEF और 'सेव लाइफ फाउंडेशन' (Save LIFE Foundation) जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के साथ साझेदारी में लागू की जा रही है।
- फोकस राज्य: प्रभावी सड़क सुरक्षा कार्य योजनाओं को लागू करने की क्षमता निर्माण के लिये यह वित्तपोषण परियोजना भारत के चार राज्यों राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम में शुरू की जा रही है।
- आवश्यकता: भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है, जिससे स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में व्यापक क्षति होती है। अनुमानों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं से देश की GDP का लगभग 3% नुकसान होता है।
- सतत वित्तपोषण रणनीतियाँ: यह परियोजना सड़क सुरक्षा के लिये अनुमानित और निरंतर फंड सुनिश्चित करने हेतु रोड सेफ्टी बॉण्ड, समर्पित कर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) जैसे नवीन वित्तीय उपकरणों को बढ़ावा देती है।
- क्षमता निर्माण: इसका एक मुख्य हिस्सा राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर सड़क सुरक्षा निवेशों की योजना बनाने, बजट तैयार करने तथा उनकी निगरानी करने के लिये संस्थागत क्षमता को मज़बूत करना है।
- वैश्विक संरेखण: यह पहल 'सड़क सुरक्षा के लिये दशक की कार्ययोजना 2021-2030' (Global Plan for the Decade of Action for Road Safety) का समर्थन करती है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूरे विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों को आधा करना है।
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रॉब जेटन नीदरलैंड के सबसे युवा और पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री बने
चर्चा में क्यों?
रॉब जेटन ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है, उन्होंने देश का सबसे युवा और पहला समलैंगिक नेता बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने फरवरी 2026 में कार्यभार सॅंभाला।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक नेतृत्व: रॉब जेटन 38 वर्ष की आयु में डच इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री और नीदरलैंड का नेतृत्व करने वाले पहले घोषित समलैंगिक व्यक्ति बन गए हैं। यह राजनीति में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व की प्रगति को रेखांकित करता है।
- वे तीन दलों के अल्पमत गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनकी मध्यमार्गी पार्टी डेमोक्रेट्स 66 (D66), मध्य-दक्षिणपंथी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अपील (CDA) और उदारवादी पीपल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी (VVD) शामिल है। निचली सदन की 150 सीटों में से इस गठबंधन के पास कुल 66 सीटें हैं।
- शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-In Ceremony): हेग (The Hague) स्थित हुइस टेन बॉश पैलेस (Huis ten Bosch Palace) में राजा विलेम-अलेक्जेंडर ने नई सरकार को शपथ दिलाई।
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: जेटन के राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 2010 में नगर निगम स्तर से हुई थी।
- वे वर्ष 2017 में डच प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में शामिल हुए और प्रधानमंत्री बनने से पहले जलवायु एवं ऊर्जा नीति मंत्री तथा उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
- महत्त्व: जेटन के नेतृत्व को समावेशिता और विविधता के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, विशेष रूप से LGBTQ+ समुदाय के लिये। नीदरलैंड समान अधिकारों को बढ़ावा देने के लिये जाना जाता है (नीदरलैंड वर्ष 2001 में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने वाला विश्व का पहला देश था)।
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पाँच नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे स्टेशनों को ‘ईट राइट स्टेशन’ सर्टिफिकेशन मिला
चर्चा में क्यों?
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के अंतर्गत आने वाले पाँच रेलवे स्टेशनों को यात्रियों के लिये सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन सेवाएँ सुनिश्चित करने हेतु भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 'ईट राइट स्टेशन' (Eat Right Station) प्रमाणन से सम्मानित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- ईट राइट स्टेशन: यह पहल FSSAI के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'ईट राइट इंडिया' आंदोलन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनता के बीच खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और पोषण को बढ़ावा देना है।
- सम्मानित स्टेशन: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के पाँच स्टेशनों को स्टेशन परिसर में स्थित खाद्य आउटलेट्स पर उच्च स्तर की स्वच्छता, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिये यह प्रमाणन प्रदान किया गया है।
- दीमापुर रेलवे स्टेशन (नागालैंड)
- अलीपुरद्वार रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल)
- कोकराझार रेलवे स्टेशन (असम)
- गोलकगंज रेलवे स्टेशन (असम)
- न्यू माल जंक्शन रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल)
- प्रमाणन के मानदंड: यह प्रमाणन खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देशों, स्वच्छता प्रोटोकॉल, भोजन के उचित भंडारण एवं रख-रखाव, सुरक्षित जल की उपलब्धता और उपभोक्ता जागरूकता उपायों के कड़े मूल्यांकन के बाद दिया जाता है।
- कार्यान्वयन भागीदार: इस प्रमाणन को सफल बनाने में FSSAI, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे, खाद्य विक्रेताओं और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने मिलकर खाद्य सुरक्षा बुनियादी ढाँचे तथा यात्री जागरूकता में सुधार के लिये प्रयास किये।
- पहल का विस्तार: ‘ईट राइट स्टेशन’ कार्यक्रम सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार के अन्य राष्ट्रीय प्रयासों, जैसे स्वच्छ भारत मिशन और सुरक्षित जल पहल का पूरक है तथा अन्य रेलवे ज़ोनों को भी इसी तरह के मानक अपनाने हेतु प्रोत्साहित करता है।
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