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हरियाणा पी.सी.एस. - रणनीति

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  • 01 Aug 2021
  • 12 min read

परीक्षा की रणनीति

उज्ज्वल भविष्य की तैयारी में लगे अभ्यर्थियों के बीच एक बेहतर विकल्प के चुनाव के लिये कशमकश का बने रहना स्वाभाविक है। राज्य लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग तथा अन्य सरकारी संगठनों/बोर्डों द्वारा आयोजित परीक्षाएँ राज्य स्तर पर सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रतिष्ठित विकल्प हैं। यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे ज़्यादातर अभ्यर्थी राज्य सेवा परीक्षा की ओर आकर्षित एवं सफल होते रहे हैं। इसकी मुख्य वजह इन दोनों ही परीक्षाओं की प्रकृति, प्रक्रिया एवं पाठ्यक्रम में थोड़ा-बहुत अंतर होने के बावजूद काफी समानता का होना है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी एकदिवसीय परीक्षाओं में तथा एकदिवसीय परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी इन प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में सफल होते हैं। ऐसे में सफलता सुनिश्चित करने के क्रम में हमारी प्राथमिकता यह होनी चाहिये कि परीक्षा की प्रकृति के अनुरूप एक उचित एवं गतिशील रणनीति बनाई जाए। यहाँ HCS ‘प्रारंभिक परीक्षा की रणनीति पर चर्चा की जा रही है।

प्रारंभिक परीक्षा की रणनीति

  • किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में विजेता वही होता है, जिसने अपनी तैयारी शुरुआत से की हो। इस दृष्टि से अभ्यर्थियों के लिये उचित होगा कि वे सर्वप्रथम परीक्षा के पाठ्यक्रम का अध्ययन करें एवं उसके समस्त भाग तथा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुविधा व रुचि के अनुसार वरीयता क्रम निर्धारित करें। 
  • तत्पश्चात् पूर्व में आयोजित हो चुकी प्रारंभिक परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों का सूक्ष्म अवलोकन करें। जिन विषयों एवं टॉपिक से ज़्यादा प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, उनका विशेष ध्यान रखें।
  • इस अवलोकन से यह अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा कि परीक्षा के अनुरूप हमें किन खंडों पर अपनी अवधारणात्मक एवं तथ्यात्मक जानकारी मज़बूत करनी है।
  • संपूर्ण पाठ्यक्रम की अध्ययन सामग्री को रट लेना किसी भी विद्यार्थी के लिये संभव नहीं है, ऐसे में बेहतर होगा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अध्ययन किया जाए। इससे तथ्यों को याद रखने में आसानी होगी, उदाहरण के लिये- अगर हम भारत के भूगोल को उसके नक्शे के साथ पढ़ेंगे तो तथ्यों की पूरी एक शृंखला ही हमारे दिमाग में छप जाएगी। प्रयास करें कि शॉर्ट नोट्स साथ-साथ बनाते चलें।
  • अगर कट-ऑफ की बात करें तो अब तक HCS प्रारंभिक परीक्षा का कट-ऑफ प्राय: 60&65 प्रतिशत तक रहा है। हालाँकि वर्तमान में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा प्रश्नपत्र-2 अर्थात् CSAT को क्वालीफाईंग प्रकृति का कर दिये जाने के कारण कट-ऑफ थोड़ा परिवर्तित हो सकता है। फिर भी बेहतर होगा कि हम पूर्व कट-ऑफ मार्क्स को ध्यान में रखते हुए अपना टारगेट सेट करें।
  • इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने नियमित अध्ययन को अपनी सफलता का मूलमंत्र माना है, अत: अपनी नियमित दिनचर्या से 5-6 घंटे का समय अध्ययन के लिये निकालना उचित होगा। यदि समसामयिक घटनाओं एवं रिवीज़न के लिये भी 1-2 घंटे का समय देते हैं, तो काफी बेहतर स्थिति में रहेंगे।
  • आपकी सुविधा के लिये हमने पिछले 3 वर्षों की प्रारंभिक परीक्षा के प्रथम प्रश्नपत्र का विषयवार ट्रेंड एनालिसिस तैयार किया है। इस सारणी से स्पष्ट है कि प्रश्नपत्र के सभी खंडों को हर वर्ष आनुपातिक रूप से लगभग बराबर महत्त्व दिया जा रहा है। हालाँकि, हरियाणा विशेष से संबंधित प्रश्नों की संख्या आनुपातिक रूप से कम है।

HCS (प्रारंभिक परीक्षा) सामान्य अध्ययन-ट्रेंड एनालिसिस

विषय

2017
(आयोजन वर्ष-2019)

2014
(आयोजन वर्ष-2014)

2011
(आयोजन वर्ष-2012)

इतिहास

24

19

20

भूगोल

15

22

13

भारतीय राजव्यवस्था

10

13

10

सामान्य विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी

19

24

11

भारतीय अर्थव्यवस्था

08

10

14

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी

02

04

करेंट अपेयर्स

10

01

हरियाणा विशेष

10

07

21

विविध

02

01

कुल

100

100

90

  • इस एनालिसिस से यह भी स्पष्ट है कि यदि किसी वर्ष किसी विषय से कम प्रश्न पूछे गए हैं तो अगले वर्ष उस विषय से ज़्यादा प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। अत: किसी भी विषय को कम आँकना उचित नहीं होगा। हरियाणा राज्य विशेष के साथ-साथ सामान्य अध्ययन के सभी खंडों की तैयारी के लिये ‘दृष्टि पब्लिकेशन्स’ की क्विक बुक सीरीज़ की 8 पुस्तकों का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा। इस बुक सीरीज़ में पीएससी एवं अधीनस्थ तथा एकदिवसीय परीक्षाओं के लिये पर्याप्त कंटेंट दिया गया है, जो कि आधिकारिक एवं प्रामाणिक स्रोतों से तैयार है। इस प्रकार एक ही जगह परीक्षोपयोगी संपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो जाने से समय और ऊर्जा की भी पर्याप्त बचत होगी।
  • समसामयिक घटनाओं के प्रश्नों की प्रकृति तथा संख्या को ध्यान में रखते हुए आप नियमित रूप से ‘दृष्टि वेबसाइट एवं ‘दृष्टि यूट्यूब चैनल्स पर उपलब्ध करेंट अपेयर्स का अध्ययन कर सकते हैं। इसके साथ ही ‘दृष्टि पब्लिकेशन्स की मासिक पत्रिका ‘हरियाणा करेंट अपेयर्स’ का अध्ययन करना भी लाभदायक होगा। वैसे तो सामान्य अध्ययन के सभी खंडों के लिये ‘दृष्टि पब्लिकेशन्स की क्विक बुक सीरीज़ की 8 पुस्तकें पर्याप्त हैं, फिर भी यदि आप अपनी तैयारी को और परखना चाहते हैं तो इसके लिये आप ‘दृष्टि पब्लिकेशन्स’ की प्रीलिम्स प्रैक्टिस सीरीज़ (PPS) की पुस्तकों का अध्ययन भी कर सकते हैं।
  • अपने क्वालीफाइंग स्वरूप के चलते द्वितीय प्रश्नपत्र भी पर्याप्त गंभीरता की मांग करता है। प्रथम प्रश्नपत्र की तरह ही इस प्रश्नपत्र में भी गणित, तर्कशक्ति आदि से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास पूर्व में पूछे गए प्रश्नों को विभिन्न खंडों में वर्गीकृत करके किया जा सकता है। इस प्रश्नपत्र के लिये ‘दृष्टि पब्लिकेशन्स की सीसैट (CSAT) पुस्तक अत्यंत लाभदायी होगी। अपनी तैयारी को और धार देने के लिये विगत वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर हल करने का प्रयास करना लाभदायी होगा।
  • अपनी तैयारी को अंतिम रूप से परखने के लिये आप इस परीक्षा पर आधारित कोई टेस्ट सीरीज़ जॉइन कर सकते हैं। इससे निश्चित समय-सीमा में प्रश्नों को हल करने तथा समय-प्रबंधन की दक्षता में भी वृद्धि होगी।

प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी का अंतिम चरण

परीक्षा के 2-3 दिन पहले से कुछ भी नया खंड या टॉपिक पढ़ने से बचें। अपनी तैयारी पर आत्मविश्वास बनाए रखें। आपने अब तक जितना पढ़ा है, उसी का रिवीज़न करें। याद रखें कि तनाव लेने से परीक्षा में आपका प्रदर्शन बेहतर होने की बजाय कम हो जाएगा। इसलिये तनावमुक्त रहें और परीक्षा वाली रात भरपूर नींद लें। प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों के उत्तर देने के क्रम को लेकर ज़्यादातर अभ्यर्थियों में संशय की स्थिति बनी रहती है। उत्तर देने का क्रम क्या हो? इसका उत्तर सभी के लिये एक समान नहीं हो सकता। इसका निर्धारण आपकी तैयारी पर निर्भर करता है। अगर आपकी सामान्य अध्ययन के सभी विषयों पर पकड़ एवं गति संतोषजनक है तो आप एक तरफ से उत्तर देते हुए आगे बढ़ सकते हैं। अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो सबसे पहले आप उन प्रश्नों को हल करें, जिनके उत्तर के लिये आप पूरी तरह आश्वस्त हैं और जो सबसे कम समय लेते हों। फिर उन प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें, जिनके विकल्पों में आपको थोड़ा-बहुत ही संशय हो। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर हल किये जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें। चूँकि, निगेटिव मार्विंग का प्रावधान है, इसलिये उत्तर का चुनाव सावधानीपूर्वक करें तथा सभी प्रश्नों को अटेम्प्ट करने का अनावश्यक दबाव न लें। आपकी जिस खंड में पकड़ अच्छी हो, उससे पूछे जाने वाले प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिये, क्योंकि उनमें समय कम लगेगा और उत्तर ठीक होने की संभावना भी ज़्यादा होगी। ये प्रश्न हल करने के बाद आपकी स्थिति काफी मज़बूत हो चुकी होगी। इससे आपको आगे के प्रश्नों के लिये पर्याप्त समय तो मिलेगा ही, साथ ही अन्य अभ्यर्थियों की अपेक्षा मनोवैज्ञानिक बढ़त भी हासिल होगी। सीसैट के प्रश्नपत्र में भी प्रथम प्रश्नपत्र की तरह उन प्रश्नों को पहले हल करना ठीक होगा, जिनमें समय कम लगता हो और उत्तर ठीक होने की संभावना भी ज़्यादा हो। परीक्षा की तैयारी की लंबी प्रक्रिया में निराशा हावी हो सकती है, ऐसे में यह भरोसा रखना आवश्यक है कि अलभ्य कुछ भी नहीं है। जब आप एक सटीक रणनीति के साथ तैयारी करेंगे तो मंज़िल आपसे ज़्यादा देर तक दूर नहीं रह सकती।

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