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हरियाणा

हरियाणा लोक सेवा आयोग - मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम

  • 17 Jan 2026
  • 124 min read

हरियाणा सिविल सेवा (HCS) परीक्षा – मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम

हरियाणा सिविल सेवा (HCS) मुख्य परीक्षा का उद्देश्य अभ्यर्थी की बौद्धिक गहराई, विश्लेषणात्मक क्षमता तथा विविध विषयों में लिखित अभिव्यक्ति का समग्र मूल्यांकन करना है। यह चरण न केवल शैक्षणिक ज्ञान का परीक्षण करता है, बल्कि विचारों को स्पष्ट, संक्षिप्त एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता को भी परखता है। इसी कारण यह सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण निर्धारक चरण माना जाता है।

HCS मुख्य परीक्षा में अब ‘स्टेट PCS पैटर्न’ (1 सामान्य अध्ययन + वैकल्पिक विषय) से हटकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा के अनुरूप पैटर्न (4 सामान्य अध्ययन पेपर + कोई वैकल्पिक विषय नहीं) को अपनाया गया है।

विशेषता

पुराना पैटर्न

नया 2026 पैटर्न

वैकल्पिक विषय

शामिल (1 पेपर)

हटाया गया

सामान्य अध्ययन

1 पेपर (भाग I एवं II)

4 पेपर (सामान्य अध्ययन I, II, III, IV)

नीतिशास्त्र पेपर

नहीं

हाँ (सामान्य अध्ययन–IV)

मुख्य फोकस

तथ्यात्मक एवं परंपरागत विषय

विश्लेषणात्मक एवं बहुआयामी

 

मुख्य परीक्षा में अब 6 अनिवार्य पेपर शामिल हैं। इन सभी पेपरों में अभ्यर्थियों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

पेपर

विषय

पाठ्यक्रम के प्रमुख बिंदु

अधिकतम अंक

पेपर 1

अंग्रेज़ी तथा अंग्रेज़ी निबंध

संक्षिप्त लेखन, बोधगम्यता, निबंध, व्याकरण

100

पेपर 2

हिंदी तथा हिंदी निबंध (देवनागरी लिपि में)

अनुवाद, गद्य, कविता, रचना

100

पेपर 3

सामान्य अध्ययन - I

इतिहास, संस्कृति, भूगोल, भारतीय समाज

100

पेपर 4

सामान्य अध्ययन - II

राजव्यवस्था, शासन, सामाजिक न्याय, अंतर्राष्ट्रीय संबंध

100

पेपर 5

सामान्य अध्ययन - III

अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, सुरक्षा

100

पेपर 6

सामान्य अध्ययन - IV

नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि

100

कुल अंक

600

हरियाणा सिविल सेवा (HCS) मुख्य परीक्षा का विस्तृत पाठ्यक्रम (नया 2026 पैटर्न)

1. अंग्रेज़ी और अंग्रेज़ी निबंध

इस पेपर का उद्देश्य अभ्यर्थी के ध्यानपूर्वक गद्य को पढ़ने और समझने की क्षमता का परीक्षण करना तथा अंग्रेज़ी भाषा में अपने विचारों को स्पष्ट, शुद्ध एवं सटीक रूप से अभिव्यक्त करने की योग्यता का आकलन करना है।

इसके तहत पूछे जाने वाले प्रश्नों का पैटर्न व्यापक रूप से निम्नलिखित होगा:

  • Precis Writing (संक्षिप्त लेखन)
  • Comprehension of given passages (बोधगम्यता)
  • Essay (निबंध)
  • Usage and Vocabulary (शब्द प्रयोग व शब्द भंडार)
  • General Grammar/Composition (सामान्य व्याकरण तथा रचना)

नोट:

  • अभ्यर्थी को किसी विशिष्ट विषय पर निबंध लिखना होगा।
  • विषयों का विकल्प दिया जाएगा।
  • उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वे निबंध के विषय के करीब रहें, विचारों को सुव्यवस्थित और संक्षेप में प्रस्तुत करना अपेक्षित होगा।
  • प्रभावी और सटीक अभिव्यक्ति को अधिक अंक दिये जाएँगे।

2. हिंदी तथा हिंदी निबंध (देवनागरी लिपि में)

  • एक अंग्रेज़ी परिच्छेद का हिंदी में अनुवाद।
  • पत्र/संक्षिप्त लेखन
  • दिये गए हिंदी अवतरण (गद्य और कविता) की उसी भाषा में व्याख्या।
  • संरचना (मुहावरे, सुधार आदि)
  • एक विशिष्ट विषय पर निबंध। (विषयों का विकल्प दिया जाएगा)

3. सामान्य अध्ययन - I

भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज।

  • भारतीय संस्कृति: प्राचीन से आधुनिक काल तक कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
  • आधुनिक भारतीय इतिहास: अठारहवीं सदी के मध्य से वर्तमान तक के महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम, व्यक्तित्व और मुद्दे।
  • स्वतंत्रता संग्राम: इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न हिस्सों से प्रमुख योगदानकर्त्ता/योगदान।
  • स्वतंत्रता के बाद का इतिहास: देश के भीतर एकीकरण और पुनर्गठन।
  • विश्व इतिहास: अठारहवीं सदी की घटनाएँ, जैसे- औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनर्निर्धारण, औपनिवेशीकरण, उपनिवेश से मुक्ति, राजनीतिक विचारधाराएँ, जैसे- साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि — उनके रूप और समाज पर प्रभाव।
  • भारतीय समाज: भारतीय समाज की प्रमुख विशेषताएँ, भारत की विविधता।
  • सामाजिक मुद्दे: महिलाओं और महिला संगठनों की भूमिका, जनसंख्या तथा संबंधित समस्याएँ, गरीबी और विकास संबंधी मुद्दे, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ एवं समाधान।
  • वैश्वीकरण: वैश्वीकरण का भारतीय समाज पर प्रभाव।
  • सामाजिक सशक्तीकरण: सांप्रदायिकता, क्षेत्रीयता और पंथनिरपेक्षता।
  • विश्व भूगोल: विश्व के भौतिक भूगोल की प्रमुख विशेषताएँ।
  • प्राकृतिक संसाधनों का वितरण: विश्व (साउथ एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप सहित) में प्रमुख प्राकृतिक संसाधन; विश्व के विभिन्न भागों (भारत सहित) में प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र की उद्योगों की स्थिति के लिये ज़िम्मेदार कारक।
  • भू-भौतिकीय घटनाएँ: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, चक्रवात आदि भौगोलिक विशेषताएँ और उनका स्थान — महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और आइस कैप सहित) में परिवर्तन, वनस्पति एवं जीव-जंतु में परिवर्तन तथा ऐसे परिवर्तनों के प्रभाव।
  • हरियाणा विशिष्ट: हरियाणा से संबंधित मुद्दे।

4. सामान्य अध्ययन - II

शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध।

  • भारतीय संविधान: ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और मूल संरचना।
  • संघीय ढाँचा: केंद्र और राज्यों के कार्य एवं ज़िम्मेदारियाँ, संघीय ढाँचे से संबंधित मुद्दे तथा चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक सत्ता एवं वित्त का स्थानांतरण और उसमें निहित चुनौतियाँ।
  • शक्तियों का पृथक्करण: विभिन्न अंगों के बीच शक्ति का विभाजन, विवाद निवारण तंत्र और संस्थाएँ।
  • संविधानों की तुलना: भारतीय संवैधानिक व्यवस्था की अन्य देशों के संविधान से तुलना।
  • विधानमंडल: संसद और राज्य विधानमंडल—संरचना, कार्यप्रणाली, व्यवसाय संचालन, अधिकार एवं विशेषाधिकार तथा इससे उत्पन्न मुद्दे।
  • कार्यपालिका और न्यायपालिका: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन तथा कार्यप्रणाली; सरकार के मंत्रालय एवं विभाग; दबाव समूह तथा औपचारिक/अनौपचारिक संघ और उनकी राजव्यवस्था में भूमिका।
  • लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम: प्रमुख विशेषताएँ।
  • संवैधानिक पद एवं निकाय: विभिन्न संवैधानिक पदों की नियुक्ति, विभिन्न संवैधानिक निकायों के अधिकार, कार्य और ज़िम्मेदारियाँ।
  • वैधानिक एवं नियामक निकाय: वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।
  • सरकारी नीतियाँ: विभिन्न क्षेत्रों में विकास हेतु हस्तक्षेप और उनकी रूपरेखा एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे।
  • विकास उद्योग: NGO, स्वयं सहायता समूह (SHG), विभिन्न समूह और संघ, दाताओं, दान संस्थाएँ, संस्थागत एवं अन्य हितधारकों की भूमिका।
  • कल्याणकारी योजनाएँ: केंद्र और राज्यों द्वारा संवेदनशील वर्गों के लिये योजनाएँ तथा उनका प्रदर्शन; इन संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा एवं उत्थान के लिये बनाए गए तंत्र, कानून, संस्थाएँ और निकाय।
  • सामाजिक सेवाएँ: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
  • गरीबी और भुखमरी: गरीबी और भुखमरी से संबंधित मुद्दे।
  • शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही, ई-गवर्नेंस (अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ), नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।
  • सिविल सेवा: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी देशों के संबंध।
  • वैश्विक समूह: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा समझौते, जो भारत को शामिल या प्रभावित करते हैं।
  • वैश्विक राजनीति: विकसित और विकासशील देशों की नीतियों एवं राजनीति का भारत के हितों पर प्रभाव, भारतीय प्रवासी।
  • अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ और मंच—उनकी संरचना एवं अधिकार क्षेत्र।
  • हरियाणा विशिष्ट: हरियाणा से संबंधित मुद्दे।

5. सामान्य अध्ययन - III

प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था: योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित मुद्दे।
  • समावेशी विकास: समावेशी विकास से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • बजट: सरकारी बजट व्यवस्था।
  • कृषि एवं सिंचाई: प्रमुख फसलें, फसल पैटर्न, विभिन्न प्रकार की सिंचाई तथा सिंचाई प्रणालियाँ, कृषि उपज का भंडारण, परिवहन एवं विपणन तथा उनसे संबंधित समस्याएँ और बाधाएँ; किसानों की सहायता हेतु ई-प्रौद्योगिकी।
  • सब्सिडी एवं खाद्य सुरक्षा: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित मुद्दे; सार्वजनिक वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएँ तथा पुनर्गठन; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे; प्रौद्योगिकी मिशन; पशुपालन का अर्थशास्त्र।
  • खाद्य प्रसंस्करण: क्षेत्र की संभावनाएँ एवं महत्त्व, अवस्थिति, अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम आवश्यकताएँ, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन।
  • भूमि सुधार: भारत में भूमि सुधार।
  • उदारीकरण: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर उनका प्रभाव।
  • अवसंरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, हवाई अड्डे, रेलवे आदि।
  • निवेश मॉडल: विभिन्न निवेश मॉडल।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: विकास तथा उनके दैनिक जीवन में अनुप्रयोग और प्रभाव।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उपलब्धियाँ: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण तथा नई प्रौद्योगिकी का विकास।
  • IT एवं अंतरिक्ष जागरूकता: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में जागरूकता तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित मुद्दे।
  • पर्यावरण: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।
  • आपदा प्रबंधन: आपदाएँ तथा आपदा प्रबंधन।
  • आंतरिक सुरक्षा: विकास और उग्रवाद के प्रसार के बीच संबंध; आंतरिक सुरक्षा के लिये चुनौतियाँ उत्पन्न करने में बाह्य राज्य तथा गैर-राज्य तत्त्वों की भूमिका।
  • साइबर सुरक्षा: संचार नेटवर्क के माध्यम से उत्पन्न चुनौतियाँ, मीडिया एवं सोशल नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की मूल बातें, धन-शोधन तथा उसकी रोकथाम।
  • सीमा प्रबंधन: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ तथा उनका प्रबंधन; संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।
  • सुरक्षा बल: विभिन्न सुरक्षा बल एवं एजेंसियाँ तथा उनका अधिदेश।
  • हरियाणा विशिष्ट: हरियाणा से संबंधित मुद्दे।

6. सामान्य अध्ययन - IV

नैतिकता, सत्यनिष्ठा तथा अभिरुचि।

  • नैतिकता और मानवीय इंटरफेस: मानवीय कार्यों में नैतिकता का सार, उसके निर्धारक तत्त्व तथा परिणाम; नैतिकता के आयाम; निजी एवं सार्वजनिक संबंधों में नैतिकता। मानवीय मूल्य- महान नेताओं, समाज सुधारकों तथा प्रशासकों के जीवन और शिक्षाओं से प्राप्त सीख; मूल्यों को विकसित करने में परिवार, समाज एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका।
  • अभिवृत्ति: विषयवस्तु, संरचना एवं कार्य; विचार और व्यवहार पर उसका प्रभाव तथा उनसे संबंध; नैतिक तथा राजनीतिक अभिवृत्तियाँ; सामाजिक प्रभाव एवं अनुनय।
  • सिविल सेवा हेतु अभिरुचि: सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता तथा गैर-पक्षपात, वस्तुनिष्ठता, लोकसेवा के प्रति समर्पण, कमज़ोर वर्गों के प्रति समानुभूति, सहिष्णुता तथा करुणा।
  • भावनात्मक बुद्धिमत्ता: अवधारणाएँ और प्रशासन एवं शासन में उनकी उपयोगिता एवं अनुप्रयोग।
  • नैतिक विचारक: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों और दार्शनिकों का योगदान।
  • लोक/सिविल सेवा मूल्य: स्थिति और समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ एवं दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में कानून, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; जवाबदेही और नैतिक शासन; शासन में नैतिक एवं सदाचार मूल्यों को सुदृढ़ करना; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और वित्तपोषण में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन।
  • शासन में शुचिता: लोकसेवा की अवधारणा; शासन और शुचिता का दार्शनिक आधार; सरकार में सूचना साझा करना तथा पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा-पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदाय की गुणवत्ता, सार्वजनिक धन का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।
  • केस स्टडी: उपर्युक्त मुद्दों पर केस स्टडी।

दृष्टि IAS के साथ HCS मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त करें।

अद्यतन HCS मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम 2026 के अनुरूप तैयारी के लिये एक गतिशील अध्ययन योजना और उच्च-गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री की आवश्यकता है। चूँकि अब परीक्षा पैटर्न UPSC सिविल सेवा परीक्षा के अनुरूप हो गया है, इसलिये केवल रटंत अध्ययन पर्याप्त नहीं होगा। विशेष रूप से नए अंतर्राष्ट्रीय संबंध और आंतरिक सुरक्षा मॉड्यूल के लिये विश्लेषणात्मक गहराई आवश्यक होगी।

HCS 2026 की तैयारी हेतु आवश्यक अध्ययन संसाधन:

  • डेली मेन्स राइटिंग प्रोग्राम (GS I–IV): नई UPSC-शैली के HCS पैटर्न के लिये उपयुक्त। यह सभी चार सामान्य अध्ययन पेपर को समग्र रूप से कवर करता है, जिसमें नया नैतिकता (GS-IV) केस स्टडी अनुभाग भी शामिल है। [Daily Mains Writing Program]
  • हरियाणा करेंट अफेयर्स: दृष्टि करेंट अफेयर्स मैगज़ीन (हरियाणा संस्करण) के माध्यम से अनिवार्य ‘हरियाणा से संबंधित मुद्दे’ अनुभाग में दक्षता प्राप्त करें। [Subscribe Now]
  • NCERT फाउंडेशन: विश्व इतिहास और भौतिक भूगोल से जुड़े नव सम्मिलित विषयों के लिये संक्षिप्त नोट्स के माध्यम से सुदृढ़ वैचारिक आधार तैयार करें। [NCERT Notes]

HCS मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम 2026 व्यापक और चुनौतीपूर्ण है। चार पृथक सामान्य अध्ययन पेपर की शुरुआत के साथ, HPSC सामान्य अध्ययन में विशेषज्ञ स्तर के ज्ञान तथा समाज के प्रति एक सामान्यवादी दृष्टिकोण की अपेक्षा करता है। इस नए पैटर्न में सफलता की कुंजी स्थिर विषयों (जैसे- इतिहास, राजव्यवस्था) और प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन तथा नैतिकता जैसे गतिशील खंडों के बीच संतुलन स्थापित करने में निहित है।

संबंधित संसाधन

HCS परीक्षा पैटर्न

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HCS विगत वर्षों के प्रश्नपत्र

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HCS परीक्षा रणनीति

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हरियाणा राज्य सामान्य ज्ञान

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मासिक करेंट अफेयर्स संकलन

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या HCS मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषय हटा दिया गया है? +

हाँ, हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की 7 जनवरी, 2026 की अधिसूचना के अनुसार, HCS मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषय को पूर्णतः हटा दिया गया है। अब अभ्यर्थियों को एक सामान्य अध्ययन और एक वैकल्पिक विषय के स्थान पर चार सामान्य अध्ययन (GS) पेपर के लिये उपस्थित होना होगा।

2. HCS मुख्य परीक्षा 2026 का नया परीक्षा पैटर्न क्या है? +

संशोधित HCS मुख्य परीक्षा पैटर्न के अंतर्गत कुल छह अनिवार्य पेपर शामिल होंगे:

  1. अंग्रेज़ी (निबंध सहित)
  2. हिंदी (निबंध सहित)
  3. सामान्य अध्ययन – I (इतिहास, भूगोल, समाज)
  4. सामान्य अध्ययन – II (राजव्यवस्था, शासन, अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
  5. सामान्य अध्ययन – III (अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण)
  6. सामान्य अध्ययन – IV (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा तथा अभिरुचि)
3. क्या HCS मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम अब UPSC सिविल सेवा परीक्षा के समान है? +

हाँ, इसकी संरचना अब लगभग UPSC मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के समान है। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने चार पेपर वाला सामान्य अध्ययन (GS) प्रारूप अपनाया है, जिसमें नैतिकता (GS-IV) तथा आपदा प्रबंधन/आंतरिक सुरक्षा (GS-III) जैसे विशिष्ट पेपर शामिल हैं। हालाँकि HCS अभ्यर्थियों को अतिरिक्त रूप से ‘हरियाणा से संबंधित मुद्दे’ की तैयारी भी करनी होगी, जो सामान्य अध्ययन–I, II और III में एक अनिवार्य खंड है।

4. नए HCS नीतिशास्त्र पेपर (GS-IV) में क्या शामिल है? +

नया सामान्य अध्ययन–IV पेपर नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि से संबंधित है। इसमें भावनात्मक बुद्धिमत्ता, लोक प्रशासन में नैतिकता, शासन में शुचिता, नैतिक चिंतकों के विचार तथा केस स्टडी जैसे विषय शामिल हैं, जिनके माध्यम से अभ्यर्थी की समस्या-समाधान क्षमता, निर्णय-निर्माण और नैतिक दृष्टिकोण का मूल्यांकन किया जाता है।

5. क्या हिंदी और अंग्रेज़ी के पेपर में कोई परिवर्तन किया गया है? +

नहीं, भाषा विषयों के पाठ्यक्रम में कोई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन नहीं किया गया है। अंग्रेज़ी पेपर में अभी भी सारांश, बोधगम्यता, निबंध तथा व्याकरण शामिल हैं, जबकि हिंदी पेपर में अनुवाद, गद्य/पद्य की व्याख्या तथा निबंध लेखन शामिल हैं।

6. क्या मुख्य परीक्षा के लिये हरियाणा-विशिष्ट करेंट अफेयर्स पढ़ना आवश्यक है? +

हाँ। UPSC के विपरीत, HCS पाठ्यक्रम में GS-I, GS-II तथा GS-III के अंतर्गत स्पष्ट रूप से ‘हरियाणा से संबंधित मुद्दे’ शामिल किये गए हैं। इसका अर्थ है कि अभ्यर्थियों को सामान्य विषयों (जैसे- अर्थव्यवस्था, राजव्यवस्था या इतिहास) को हरियाणा राज्य में उनके विशिष्ट संदर्भ और विकास के साथ जोड़कर अध्ययन करना अनिवार्य है।

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