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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 09 Feb 2026
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भारत ने छठी बार ICC U-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीता

चर्चा में क्यों?

भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड अंडर-19 को बड़े अंतर से हराकर ICC पुरुष अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम की, जिससे इस प्रारूप में भारत ने अपना छठा खिताब जीतकर टूर्नामेंट के इतिहास में किसी भी टीम द्वारा सबसे अधिक खिताब जीतने का रिकॉर्ड कायम किया।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक जीत: भारत ने ज़िम्बाब्वे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया।
    • फाइनल में भारत का स्कोर: 411/9
    • इंग्लैंड का स्कोर: 311 (ऑल आउट)
    • उपविजेता: इंग्लैंड (अंडर-19)
    • जीत का अंतर: 100 रन
  • टीम का प्रदर्शन: भारत की पारी को 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की शानदार 175 रनों की पारी ने मज़बूती दी, जिसे अंडर-19 क्रिकेट इतिहास की सबसे उल्लेखनीय पारियों में से एक माना जा रहा है।
    • भारतीय कप्तान: आयुष म्हात्रे
    • मैन ऑफ द मैच (फाइनल): वैभव सूर्यवंशी
    • टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने सात मैचों में शानदार 439 रन बनाए।
  • रिकॉर्ड बढ़ाने वाला खिताब: इस जीत के साथ भारत ने अपना छठा ICC अंडर-19 विश्व कप खिताब जीता, जिससे टूर्नामेंट में देश का रिकॉर्ड और मज़बूत हुआ तथा भारत अंडर-19 विश्व कप इतिहास की सबसे सफल टीम बना रहा।
  • युवा प्रतिभा का उदय: इस टूर्नामेंट ने भारतीय क्रिकेट में मज़बूत प्रतिभा-शृंखला को उजागर किया। सूर्यवंशी का असाधारण प्रदर्शन और दबाव में टीम की सामूहिक निरंतरता भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का संकेत देती है।

और पढ़ें: ICC


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भारतीय टीचर रूबल नागी ने प्रतिष्ठित ग्लोबल टीचर प्राइज़ 2026 जीता

चर्चा में क्यों?

भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को ग्लोबल टीचर प्राइज़ 2026 से सम्मानित किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • पुरस्कार: रूबल नागी ने ग्लोबल टीचर प्राइज़ 2026 जीता, जिसके तहत उन्हें 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की गई। यह पुरस्कार दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम द्वारा वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के दौरान प्रदान किया गया।
  • आयोजक: यह पुरस्कार GEMS एजुकेशन द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और UNESCO के सहयोग से वार्की फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया जाता है।
  • कार्य और योगदान: रूबल नागी को पूरे भारत के वंचित समुदायों के बच्चों तक कला-आधारित शिक्षा पहुँचाने के उनके अभिनव प्रयासों के लिये सम्मानित किया गया।
    • रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने 100 से अधिक निम्न-आय वाले समुदायों और गाँवों में 800 से अधिक शिक्षण केंद्र स्थापित किये हैं।
    • ये केंद्र उन बच्चों को संरचित शिक्षण अवसर प्रदान करते हैं जिन्हें औपचारिक शिक्षा तक सीमित या कोई पहुँच नहीं थी।
  • कला के माध्यम से शिक्षा: उनके कार्य का एक प्रमुख पहलू उपेक्षित दीवारों को इंटरएक्टिव शैक्षिक भित्ति-चित्रों में बदलना है, जिन्हें ‘लिविंग वॉल्स ऑफ लर्निंग’ कहा जाता है। इनसे बच्चों को साक्षरता, संख्या ज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय जागरूकता और अन्य विषय उनके आसपास के वातावरण में ही सिखाए जाते हैं। 
    • इस पद्धति से एक मिलियन से अधिक बच्चों को शैक्षिक कार्यक्रमों से जोड़ा गया है और विद्यालय छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी आई है।
  • चयन और वैश्विक मान्यता: रूबल नागी का चयन 139 देशों से प्राप्त 5,000 से अधिक नामांकनों और आवेदनों में से किया गया, जो शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्य के वैश्विक महत्त्व तथा प्रभाव को दर्शाता है।
  • पुरस्कार राशि का उपयोग: वह इस धनराशि से एक व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना रखती हैं, जहाँ पेशेवर कौशल और डिजिटल साक्षरता का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वंचित बच्चों एवं युवाओं के लिये अवसरों का विस्तार किया जा सके।

और पढ़ें: UNESCO 


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यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिनीरत्न का दर्जा

चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSU) यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) को मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा प्रदान करने की मंज़ूरी दी है, जो इसे एक सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कॉर्पोरेट इकाई में रूपांतरित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्य बिंदु:

  • यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL): यंत्र इंडिया लिमिटेड का गठन 1 अक्तूबर, 2021 को पूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमीकरण के बाद किया गया था, जिसके तहत रक्षा विनिर्माण में स्वायत्तता, दक्षता और प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने के उद्देश्य से सात नए DPSU बनाए गए।
  • संगठन का प्रकार: यह रक्षा मंत्रालय (MoD) के अंतर्गत रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन एक अनुसूची ‘A’ श्रेणी का रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSU) है।
  • मुख्य उत्पाद: कार्बन फाइबर कंपोज़िट, एल्युमिनियम मिश्रधातु, ग्लास कंपोज़िट तथा मध्यम एवं बड़े कैलिबर के गोला-बारूद, बख्तरबंद वाहन, तोपें और मुख्य युद्धक टैंक (MBT) के लिये असेंबली उत्पाद।
  • स्वायत्तता और अधिकारों में वृद्धि: मिनीरत्न श्रेणी-I का दर्जा मिलने के बाद YIL का निदेशक मंडल अब सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना ₹500 करोड़ तक के पूंजीगत व्यय प्रस्तावों को स्वतंत्र रूप से मंज़ूरी दे सकता है।
  • आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: यह कदम आयात निर्भरता कम करने, स्वदेशी डिज़ाइन और उत्पादन क्षमताओं को प्रोत्साहित करने तथा रक्षा औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करने के लिये आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप है।

और पढ़ें: मिनीरत्न, आत्मनिर्भर भारत


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रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू ने दूसरा खिताब जीता

चर्चा में क्यों?

रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू (RCB) ने दिल्ली कैपिटल्स (DC) को हराकर अपना दूसरा महिला प्रीमियर लीग (WPL) खिताब जीतते हुए क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

मुख्य बिंदु:

  • लक्ष्य: दिल्ली कैपिटल्स ने जेमिमा रोड्रिग्स (37 गेंदों में 57 रन) की शानदार अर्द्धशतकीय पारी के दम पर 204 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।
  • रिकॉर्ड रन-चेज़: रॉयल चैलेंजर्स बंगलूरू ने 19.4 ओवरों में 204/4 रन बनाकर लक्ष्य हासिल किया, जो किसी बड़े T20 फाइनल में अब तक का सबसे बड़ा सफल रन-चेज़ है।
  • स्टार प्रदर्शन:
    • स्मृति मंधाना: कप्तानी पारी खेलते हुए 41 गेंदों में 87 रन बनाए, जो WPL फाइनल में किसी खिलाड़ी का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।
    • जॉर्जिया वॉल: 54 गेंदों में 79 रन बनाए और मंधाना के साथ दूसरे विकेट के लिये रिकॉर्ड 165 रनों की साझेदारी की।
  • फ्रैंचाइज़ उपलब्धि: इस जीत के साथ RCB, मुंबई इंडियंस के बाद दूसरी ऐसी फ्रैंचाइज़ बन गई जिसने दो WPL खिताब (2024 और 2026) जीते हैं।
  •  मुख्य उपलब्धियाँ और पुरस्कार:
    • ऑरेंज कैप (सर्वाधिक रन): स्मृति मंधाना (RCB) — 377 रन।
    • पर्पल कैप (सर्वाधिक विकेट): राधा यादव (DC) — 14 विकेट।
    • सीज़न की उभरती खिलाड़ी: जॉर्जिया वॉल (RCB)।
  • महिला खेलों के लिये महत्त्व: इस तरह की हाई-प्रोफाइल जीतें महिला पेशेवर खेलों के ‘सामान्यीकरण’ में योगदान देती हैं और ‘खेलो इंडिया’ पहल के तहत स्थानीय स्तर पर भागीदारी को प्रोत्साहित करती हैं।

और पढ़ें: IPL


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अंतरिक्ष-आधारित AI डेटा केंद्रों के लिये चीन की योजना

चर्चा में क्यों?

चीन ने घोषणा की है कि वह अपनी उन्नत तकनीकी और अंतरिक्ष अवसंरचना रणनीति के तहत आगामी पाँच वर्षों में अंतरिक्ष-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डेटा केंद्रों को प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • एकीकृत संरचना: यह योजना क्लाउड, एज और टर्मिनल (डिवाइस) क्षमताओं को समेकित करते हुए एक नई अंतरिक्ष संरचना विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
  • औद्योगिक-स्तरीय ‘स्पेस क्लाउड’: वर्ष 2030 तक चीन बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा केंद्रों से संचालित कक्षीय ‘स्पेस क्लाउड’ स्थापित करने का इरादा रखता है, जिससे ऊर्जा-गहन AI प्रोसेसिंग को पृथ्वी से कक्षा में स्थानांतरित किया जा सके।
  • प्रसंस्करण क्षमता: यह अवसंरचना कंप्यूटिंग शक्ति, भंडारण क्षमता और संचार बैंडविड्थ के ‘गहन एकीकरण’ को सक्षम बनाएगी, जिससे पृथ्वी पर उत्पन्न डेटा को सीधे अंतरिक्ष में संसाधित किया जा सकेगा।
  • घरेलू उपलब्धि: एक महत्त्वपूर्ण प्रमाण-कार्य (प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट) के रूप में, अलीबाबा क्लाउड का Qwen-3 मॉडल हाल ही में एक परीक्षण उपग्रह पर कक्षा में सफलतापूर्वक इन्फरेंस चलाकर विश्व का पहला सामान्य-उद्देश्य AI बनने का कीर्तिमान स्थापित किया।
  • चीन बनाम स्पेसएक्स: यह घोषणा चीन को स्पेसएक्स की कक्षीय महत्त्वाकांक्षाओं का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनाती है।
    • स्पेसएक्स ने AI कंपनी xAI के साथ विलय के बाद सौर-ऊर्जा संचालित कक्षीय डेटा केंद्रों और अंतरिक्ष कंप्यूटिंग उपग्रहों की योजनाओं को आगे बढ़ाया है।
  • संबद्ध चुनौतियाँ: ‘स्पेस क्लाउड’ के लिये उपग्रहों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि (संभावित रूप से मिलियन) टकराव के जोखिम को काफी बढ़ा देती है और अंतरिक्ष संचालन प्रबंधन को और जटिल बनाती है।
    • तकनीकी जोखिम: अंतरिक्ष-आधारित हार्डवेयर सौर ज्वालाओं, विकिरण और सूक्ष्म उल्कापिंडों के प्रभावों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है।

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वर्ष 2035 तक आंध्र प्रदेश को क्लीन एनर्जी हब बनाएगा नीति आयोग

चर्चा में क्यों?

नीति आयोग ने आंध्र प्रदेश को वर्ष 2035 तक भारत के शीर्ष तीन नवीकरणीय ऊर्जा हब में बदलने के उद्देश्य से एक रूपरेखा (ड्राफ्ट ब्लूप्रिंट) का अनावरण किया। इस रणनीति को ASSET (एक्सेलरेटिंग सस्टेनेबल स्टेट एनर्जी ट्रांजिशन) प्लेटफॉर्म के तहत नीति आयोग के CEO बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने राज्य के मुख्य सचिव को प्रस्तुत किया।

मुख्य बिंदु:

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: इस रूपरेखा का लक्ष्य वर्ष 2035 तक आंध्र प्रदेश को एक प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक और निर्यातक बनाना है।
    • यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन न्यूनीकरण, आर्थिक विकास और जलवायु कार्रवाई की व्यापक पहल के साथ मेल खाती है और वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करती है।
  • ऊर्जा सुलभता और दक्षता: नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, पावर खरीद लागत ₹3.90–4 प्रति यूनिट तक घट सकती है, जबकि कुल आपूर्ति लागत ₹6 प्रति यूनिट से नीचे रखी जाएगी।
  • संप्रेषण आधुनिकीकरण: ट्रांसमिशन उन्नयन के लिये ₹65,000–70,000 करोड़ का निवेश निर्धारित किया गया है, जिसमें ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, GIS सबस्टेशन और HVDC लाइनें शामिल हैं।
  • ऊर्जा वार रूम: इन पहलों की प्रगति पर निगरानी के लिये एक समर्पित मॉनिटरिंग सेल स्थापित किया जाएगा।
  • समयसीमा: इस रूपरेखा को मार्च 2026 की शुरुआत तक अंतिम रूप देने की उम्मीद है, जबकि इसका कार्यान्वयन उसी माह के मध्य से शुरू होने की संभावना है।

और पढ़ें: नीति आयोग


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