झारखंड Switch to English
विश्व आर्थिक मंच में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे झारखंड के मुख्यमंत्री
चर्चा में क्यों?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जनवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाली विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में भाग लेंगे, जो राज्य की इस वैश्विक आर्थिक मंच पर पहली उपस्थिति को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख क्षेत्र: राज्य वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिये संसाधन शासन, सतत उद्योग, महत्त्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संक्रमण, पर्यटन और निवेश में अवसरों को उजागर करेगा।
- महत्त्व: यह दौरा झारखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर झारखंड की पहचान बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- विषय और कार्यसूची: झारखंड की भागीदारी "प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास" विषय के अंतर्गत है।
- यह इंडिया पवेलियन और WEF प्लेटफॉर्म पर आयोजित विषयगत सत्रों के माध्यम से सतत और समावेशी विकास पर केंद्रित है।
- डावोस के बाद यूके यात्रा: दावोस के बाद, प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेगा और लंदन तथा ऑक्सफोर्ड जैसे शहरों में संस्थागत, शैक्षणिक एवं निवेश-उन्मुख चर्चाओं में भाग लेगा।
- ऑक्सफोर्ड में विशेष व्याख्यान: मुख्यमंत्री सोरेन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में व्याख्यान देंगे, जिससे वह इस संस्थान में भाषण देने वाले पहले भारतीय मुख्यमंत्री बनेंगे।
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
पिपरावा के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
चर्चा में क्यों?
भारत ने नई दिल्ली में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें देश की बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक धरोहर को प्रदर्शित किया गया।
मुख्य बिंदु
- शीर्षक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “प्रकाश और कमल: जागृत व्यक्ति के अवशेष” शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
- अवशेषों का महत्त्व: ये पवित्र अवशेष 125 वर्षों के बाद यूनाइटेड किंगडम से भारत वापस लाए गए।
- आयोजन स्थल: प्रदर्शनी ऐतिहासिक राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
- खोज: पिपरावा के अवशेष वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरावा गाँव में स्थित एक बौद्ध स्तूप से उत्खनन के दौरान प्राप्त किये गए थे।
- बौद्ध संबंध: बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर संरक्षित करने के भारत के प्रयास थाईलैंड, वियतनाम, मंगोलिया और रूस जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालु आकर्षित होते हैं।
- शास्त्रीय भाषा: बुद्ध की शिक्षाएँ मूल रूप से पाली भाषा में थीं और भारत पाली को वर्ष 2024 में शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देते हुए वैश्विक स्तर पर इसको बढ़ावा दे रहा है।
- महत्त्व: यह प्रदर्शनी बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को सशक्त करती है और शांति, सद्भाव तथा वैश्विक सांस्कृतिक एकता को प्रोत्साहित करती है।
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