बिहार Switch to English
बिहार में सोलर-प्लस-बैटरी स्टोरेज परियोजना का शुभारंभ
चर्चा में क्यों?
- बिहार ने लखीसराय ज़िले के कजरा में स्थापित सौर-प्लस-बैटरी भंडारण परियोजना के प्रथम चरण का सफलतापूर्वक परिचालन शुरू कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- कार्यान्वयन एजेंसी: इस परियोजना का क्रियान्वयन राज्य की स्वामित्व वाली बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) द्वारा किया जा रहा है।
- परियोजना क्षमता: परियोजना की कुल क्षमता 301 मेगावाट सौर ऊर्जा है, जिसमें 495 मेगावाट-घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता शामिल है, जिससे यह पूर्वी भारत की सबसे बड़ी सौर-ऊर्जा-भंडारण परियोजनाओं में शामिल होती है।
- चरण-I: पहले चरण में 185 मेगावाट सौर क्षमता के साथ 254 मेगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) शामिल है।
- प्रयुक्त तकनीक: बैटरी स्टोरेज सिस्टम में लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO₄) तकनीक का उपयोग किया गया है, जो उच्च तापीय स्थिरता और सुरक्षा के लिये जानी जाती है।
- BESS की भूमिका: BESS दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा का भंडारण कर शाम के चरम मांग घंटों के दौरान विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
- ग्रिड एकीकरण: परियोजना से उत्पादित विद्युत का निष्कासन 132 kV ट्रांसमिशन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे राज्य विद्युत ग्रिड के साथ निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित होता है।
- चरण-II: शेष 116 मेगावाट सौर ऊर्जा और 241 मेगावाट-घंटे की BESS को जनवरी, 2027 तक चालू करने की योजना है।
- रणनीतिक महत्त्व: यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा परंपरागत जीवाश्म-ईंधन आधारित विद्युत पर निर्भरता कम करने के बिहार के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करती है।
- पर्यावरणीय महत्त्व: सौर-प्लस-भंडारण परियोजनाएँ कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि तथा सतत् विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देती हैं।
झारखंड Switch to English
विश्व आर्थिक मंच में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे झारखंड के मुख्यमंत्री
चर्चा में क्यों?
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जनवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाली विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में भाग लेंगे, जो राज्य की इस वैश्विक आर्थिक मंच पर पहली उपस्थिति को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
- प्रमुख क्षेत्र: राज्य वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिये संसाधन शासन, सतत उद्योग, महत्त्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संक्रमण, पर्यटन और निवेश में अवसरों को उजागर करेगा।
- महत्त्व: यह दौरा झारखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर झारखंड की पहचान बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- विषय और कार्यसूची: झारखंड की भागीदारी "प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास" विषय के अंतर्गत है।
- यह इंडिया पवेलियन और WEF प्लेटफॉर्म पर आयोजित विषयगत सत्रों के माध्यम से सतत और समावेशी विकास पर केंद्रित है।
- डावोस के बाद यूके यात्रा: दावोस के बाद, प्रतिनिधिमंडल यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेगा और लंदन तथा ऑक्सफोर्ड जैसे शहरों में संस्थागत, शैक्षणिक एवं निवेश-उन्मुख चर्चाओं में भाग लेगा।
- ऑक्सफोर्ड में विशेष व्याख्यान: मुख्यमंत्री सोरेन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में व्याख्यान देंगे, जिससे वह इस संस्थान में भाषण देने वाले पहले भारतीय मुख्यमंत्री बनेंगे।
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
पिपरावा के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
चर्चा में क्यों?
भारत ने नई दिल्ली में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें देश की बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक धरोहर को प्रदर्शित किया गया।
मुख्य बिंदु
- शीर्षक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “प्रकाश और कमल: जागृत व्यक्ति के अवशेष” शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
- अवशेषों का महत्त्व: ये पवित्र अवशेष 125 वर्षों के बाद यूनाइटेड किंगडम से भारत वापस लाए गए।
- आयोजन स्थल: प्रदर्शनी ऐतिहासिक राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
- खोज: पिपरावा के अवशेष वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरावा गाँव में स्थित एक बौद्ध स्तूप से उत्खनन के दौरान प्राप्त किये गए थे।
- बौद्ध संबंध: बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर संरक्षित करने के भारत के प्रयास थाईलैंड, वियतनाम, मंगोलिया और रूस जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालु आकर्षित होते हैं।
- शास्त्रीय भाषा: बुद्ध की शिक्षाएँ मूल रूप से पाली भाषा में थीं और भारत पाली को वर्ष 2024 में शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देते हुए वैश्विक स्तर पर इसको बढ़ावा दे रहा है।
- महत्त्व: यह प्रदर्शनी बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को सशक्त करती है और शांति, सद्भाव तथा वैश्विक सांस्कृतिक एकता को प्रोत्साहित करती है।
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उत्तर प्रदेश Switch to English
उत्तर प्रदेश में प्रथम राज्य स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश ने लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU) में अपने पहले राज्य स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु
- कार्यक्रम: इस पुस्तकालय का उद्घाटन ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल की जयंती पर किया गया।
- स्थान: ब्रेल पुस्तकालय विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय की पहली मंजिल पर स्थित है।
- पुस्तक संग्रह: इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप 54 स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को समाहित करने वाली 4,000 से अधिक ब्रेल पुस्तकें रखी गई हैं।
- समावेशी पहुँच: विश्वविद्यालय के बाहर के दृष्टिबाधित छात्र भी पुस्तकालय के संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
- महत्त्व: यह उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा के प्रयासों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- विस्तार योजनाएँ: एक वर्ष के भीतर संग्रह को 10,000 ब्रेल पुस्तकों तक विस्तारित करने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं।
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