रैपिड फायर
भारत का ब्रेल ईकोसिस्टम
- 07 Jan 2026
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प्रतिवर्ष 4 जनवरी को मनाया जाने वाला 'विश्व ब्रेल दिवस' ब्रेल लिपि को केवल पढ़ने की एक प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिये शिक्षा, गरिमा और समान भागीदारी के प्रवेश द्वार के रूप में रेखांकित करता है।
- परिचय: ब्रेल एक स्पर्शजन्य (छूकर लिखने और पढ़ने) लेखन और पठन प्रणाली है, जिसका उपयोग उन लोगों द्वारा किया जाता है जो दृष्टिबाधित हैं या जिनकी दृष्टि कमज़ोर है। यह छह बिंदुओं वाले एक सेल पर आधारित होती है, जिसमें तीन-तीन बिंदुओं की दो पंक्तियाँ होती हैं। उभरे हुए इन बिंदुओं के विभिन्न संयोजन अक्षरों, संख्याओं, विराम चिह्नों और प्रतीकों को दर्शाते हैं, जिससे इसे स्पर्श के माध्यम से पढ़ा जा सकता है।
- ब्रेल स्वयं में कोई भाषा नहीं है, बल्कि एक कोड है जो विभिन्न भाषाओं को स्पर्शजन्य रूप (छूकर पढ़ने और लिखने) में पढ़ने और लिखने की सुविधा प्रदान करता है।
- यह भारत में 19वीं सदी के अंत में प्रस्तुत किया गया था और तब से दृष्टिहीन लोगों के साक्षरता और सशक्तीकरण का केंद्र बना हुआ है। भारत में 50.32 लाख दृष्टिहीन व्यक्ति (जनगणना 2011) हैं।
- कानूनी आधार: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 पहुँच योग्यता, समावेशी शिक्षा तथा ब्रेल और सहायक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
- सरकारी पहलें:
- भारती ब्रेल (मानक भारती ब्रेल कोड, 2025): भारत की एकीकृत यूनिकोड-आधारित ब्रेल लिपि, जो भारतीय भाषाओं में डिजिटल पहुँच को सक्षम बनाती है।
- सुगम्य भारत अभियान एवं सुगम्य पुस्तकालय: यह एक राष्ट्रीय ढाँचा है, जो ब्रेल-सक्षम सार्वजनिक अवसंरचना तथा मुद्रित अक्षमता (Print Disabilities) वाले व्यक्तियों के लिये बहुभाषी डिजिटल शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
- दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय संस्थान (NIEPVD): इसने राष्ट्रीय ब्रेल मानकों के तकनीकी उन्नयन और डिजिटल अनुकूलता के लिये ड्राफ्ट भारती ब्रेल 2.1 (2026) जारी किया है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता: दिव्यांगजन के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCRPD) का पक्षकार होने के कारण भारत ब्रेल सहित सुलभ प्रारूपों में सूचना और शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करता है।
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