हरियाणा Switch to English
गिरिराज सिंह ने दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन का उद्घाटन किया
चर्चा में क्यों?
गिरिराज सिंह, केंद्रीय वस्त्र मंत्री ने भिवानी के एक कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वस्त्र सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वस्त्र, परिधान और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की देश की महत्त्वाकांक्षाओं को रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु:
- सम्मेलन और स्थान: 'एडवांस्ड टेक्सटाइल स्ट्रक्चरल कंपोजिट्स एंड जियोसिंथेटिक्स' पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ATSCG-2026) हरियाणा के भिवानी स्थित टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल एंड साइंसेज (TIT&S) में आयोजित किया गया।
- फोकस: TIT&S द्वारा PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में उन्नत वस्त्र कंपोजिट और जियोसिंथेटिक्स में उभरते रुझानों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- सरकारी सहायता: इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के तहत वस्त्र मंत्रालय का समर्थन प्राप्त हुआ।
- रणनीतिक सहयोग: तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को मज़बूत करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किये गए।
- वैश्विक भागीदारी: इसमें 14 देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और एयरोस्पेस, रक्षा और बुनियादी ढाँचा अनुप्रयोगों के लिये नवीन डिज़ाइनों पर ज्ञान साझा किया।
- वित्तीय आवंटन: मंत्री ने वस्त्र उद्योग को अपग्रेड करने और R&D को बढ़ावा देने के लिये केंद्र सरकार द्वारा ₹1,500 करोड़ के अतिरिक्त आवंटन पर प्रकाश डाला।
- बाज़ार का विज़न:
- वैश्विक निर्यात: वर्तमान में वैश्विक वस्त्र निर्यात का मूल्य $800 बिलियन है, जिसमें तकनीकी वस्त्रों की हिस्सेदारी $200 बिलियन है।
- भारतीय खपत: भारत में कंपोजिट सामग्री की खपत वर्तमान में 300 ग्राम प्रति व्यक्ति के निचले स्तर पर है, जबकि उन्नत देशों में यह 11 किलोग्राम है।
- PLI योजना: उच्च मूल्य वाले उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये PLI योजना के तहत इस क्षेत्र को कुल ₹10,500 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
| और पढ़ें: PLI योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
ईरान ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया
चर्चा में क्यों?
संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में अली खामेनेई की कथित मृत्यु के बाद, ईरान के इस्लामी गणराज्य ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद के एक प्रमुख सदस्य के रूप में नियुक्त किया है, जिससे प्रभावी रूप से उन्हें संक्रमण काल के दौरान कार्यवाहक सर्वोच्च अभिकर्त्ता के रूप में तैनात किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- नेतृत्व परिषद: ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत, अब एक तीन-सदस्यीय अंतरिम निकाय इस्लामी गणराज्य का शासन चला रहा है।
- इसमें अराफी के साथ राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं, जो नेतृत्व के इस अभूतपूर्व शून्य के बीच सत्ता की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।
- भूमिका और अधिकार: अंतरिम नेतृत्व परिषद सर्वोच्च अभिकर्त्ता के संवैधानिक कर्त्तव्यों का तब तक निर्वहन करती है, जब तक कि 'विशेषज्ञों की सभा' द्वारा स्थायी उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लिया जाता।
- ईरान में सर्वोच्च अभिकर्त्ता सर्वोच्च अधिकार होता है, जो सशस्त्र बलों, न्यायपालिका, राज्य प्रसारण और प्रमुख नीतिगत निर्णयों की देख-रेख करता है।
- अराफी की पृष्ठभूमि: वह एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और उन्होंने ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान में प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिसमें 'गार्जियन काउंसिल' और 'विशेषज्ञों की सभा' दोनों की सदस्यता शामिल है।
- कौम के प्रमुख मदरसों (सेमिनरी) का नेतृत्व भी किया है।
- कौम शिया इस्लामी छात्रवृत्ति/विद्वत्ता का ईरान का प्रमुख केंद्र है और इसके मदरसों के साथ अराफी का जुड़ाव उनकी लिपिकीय (धार्मिक) स्थिति को और मज़बूत करता है।
- शासन की निरंतरता: अंतरिम परिषद यह सुनिश्चित करती है कि संक्रमण काल के दौरान कार्यकारी, सैन्य और न्यायिक अधिकार निर्बाध रूप से बने रहें।
- महत्त्व: अंतरिम नेतृत्व परिषद में अलीरेज़ा अराफी की नियुक्ति ईरान के राजनीतिक संक्रमण का एक महत्त्वपूर्ण क्षण है, जो बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच नेतृत्व के उत्तराधिकार के लिये संवैधानिक प्रक्रियाओं को रेखांकित करता है।
| और पढ़ें: ईरान-इज़राइल संघर्ष |

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