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प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों? 

नीति आयोग द्वारा कराए गए एक मूल्यांकन से पता चला है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीज़ों को महत्त्वपूर्ण जेब से व्यय (आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर- OOPE) वहन करना पड़ता है।

  • नीति आयोग के विकास मूल्यांकन और निगरानी कार्यालय (डेवलपमेंट मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिस- DEMO) को प्रस्तुत किये गए अध्ययन में बीमा कवरेज के बावजूद लाभार्थियों पर जारी वित्तीय बोझ पर प्रकाश डाला गया है।

PMJAY पर किये गए अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?

  • निजी सुविधाओं में उच्च जेब से व्यय (OOPE): योजना के तहत निजी अस्पतालों का उपयोग करने वाले लाभार्थियों को प्रति अस्पताल में भर्ती होने पर औसतन लगभग 53,965 रुपये का जेब से व्यय वहन करना पड़ा।
  • सार्वजनिक बनाम निजी असमानता: सरकारी सुविधाओं में औसत जेब से व्यय काफी कम 21,827 रुपये था।
    • इस प्रकार निजी अस्पतालों में जेब से व्यय सार्वजनिक अस्पतालों की तुलना में दोगुने से अधिक है।
  • वित्तीय बोझ की व्यापकता: PMJAY को कैशलेश योजना के रूप में प्रचारित किये जाने के बावज़ूद 65% लाभार्थियों को अभी भी अपनी जेब से भुगतान करना पड़ा, जबकि केवल 35% ने पूरी तरह से कैशलेश अस्पताल में भर्ती का लाभ उठाया।
  • प्राथमिक लागत कारक: मरीज़ों को जेब से व्यय करने के लिये मजबूर करने वाले प्रमुख व्यय में दवाएँ, नैदानिक सेवाएँ और परिवहन शामिल थे।
    • अध्ययन ने स्वीकार किया कि परिवहन लागत योजना के तहत स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है।
  • गैर-बीमित की तुलना में सीमित राहत: PMJAY रोगियों के लिये समग्र औसत जेब से व्यय 34,790 रुपये था।
    • यह गैर-बीमित रोगियों (38,084 रुपये) के औसत व्यय से कम (3,294 रुपये कम) है, जो दर्शाता है कि योजना की वित्तीय ढाल वर्तमान में संकटपूर्ण वित्तपोषण (डिस्ट्रेस फाइनेंसिंग) को पूरी तरह से रोकने में अपर्याप्त है।

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के संदर्भ में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत पहल के एक प्रमुख घटक के रूप में शुरू की गई PMJAY विश्व की सबसे बड़ी सरकार-वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना है।
    • PMJAY का लक्ष्य सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करना और विनाशकारी स्वास्थ्य देखभाल व्यय को कम करना है जो प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों को गरीबी में धकेल देता है।
    • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्तर पर AB-PMJAY को लागू करता है, जबकि राज्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ (SHA) राज्य स्तर पर इसके कार्यान्वयन के लिये ज़िम्मेदार हैं।
  • कवरेज और वित्तीय संरचना
    • बीमा कवर: प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करता है।
    • देखभाल का दायरा: सख्ती से माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती को कवर करता है (प्राथमिक बाह्य रोगी देखभाल में शामिल नहीं)।
    • पूर्व और पश्चात अस्पताल में भर्ती: अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व के 3 दिन (निदान, परामर्श) और बाद के 15 दिनों के खर्च (दवाएँ और उससे संबंधित) को कवर करता है।
    • पूर्व-मौज़ूदा बीमारियाँ: पॉलिसी के पहले दिन से सभी पूर्व-मौजूदा स्थितियाँ कवर की जाती हैं।
  • वित्त पोषण पैटर्न: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। वित्तपोषण केंद्र और राज्यों के बीच निम्न अनुपात में साझा किया जाता है:
    • सामान्य राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिये 60:40।
    • पूर्वोत्तर राज्यों और हिमालयी राज्यों के लिये 90:10।
    • विधानमंडल के बगैर केंद्रशासित प्रदेशों के लिये 100% केंद्रीय वित्तपोषण।
  • पात्रता और लाभार्थी पहचान: प्रारंभ में यह भारत की आबादी के निचले 40% (लगभग 12 करोड़ कमज़ोर परिवार या 55 करोड़ व्यक्तियों) को लक्षित करता था।
    • लाभार्थियों की पहचान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिये क्रमशः सामाजिक-आर्थिक जातिगत जनगणना (SECC) 2011 के अभाव और व्यावसायिक मानदंडों के आधार पर की जाती है।
    • परिवार के आकार, उम्र और लिंग पर कोई सीमा नहीं रखी गई है, ताकि महिलाएँ, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक भी लाभ से वंचित न रहें।
    • सितंबर 2024 में PM-JAY का विस्तार करते हुए 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को, आय या SECC स्थिति की परवाह किये बिना, आयुष्मान वय वंदना कार्ड के माध्यम से शामिल किया गया। इससे लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिको को लाभ मिला।
    • इसे आशा कार्यकर्त्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं (AWWs) और आंगनवाड़ी सहायिकाओं (AWHs) को शामिल करने के लिये विस्तारित किया गया।
  • मुख्य परिचालन विशेषताएँ:
    • कैशलेस और पेपरलेस: लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के समय पूरी तरह कैशलेस तथा पेपरलेस सेवाओं का लाभ मिलता है।
      • आयुष्मान ऐप जैसी डिजिटल पहलों ने स्व-प्रमाणीकरण और कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है।
    • राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी: एक राज्य (जैसे– बिहार) का लाभार्थी देश भर में किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में (जैसे– महाराष्ट्र या दिल्ली में) उपचार प्राप्त कर सकता है।
    • सरकारी और निजी सूचीबद्धता: लाभार्थी सरकारी (पब्लिक) अस्पतालों तथा सूचीबद्ध निजी स्वास्थ्य संस्थानों दोनों में उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
    • हेल्थ बेनिफिट पैकेज (HBP): उपचार पूर्व-निर्धारित पैकेजों के अनुसार होता है, जिसमें इलाज से जुड़े सभी खर्च—दवाइयाँ, जाँच, सामग्री, डॉक्टर शुल्क, कमरा और भोजन—शामिल रहते हैं।
  • उपलब्धियाँ: दिसंबर 2025 तक 42 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किये जा चुके थे, जिसकी मदद से लगभग 11 करोड़ मरीजों का अस्पतालों में उपचार सफल हुआ।
    • यह योजना महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में सहायक रही है, जहाँ वे लगभग कुल कार्ड और अस्पताल में भर्ती का आधा हिस्सा रखती हैं।

और पढ़ें: आयुष्मान भारत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. आयुष्मान भारत के तहत PMJAY क्या है?
PMJAY एक सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जो प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कवर द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पताल में भर्ती उपचार के लिये प्रदान करती है।

2. PMJAY पर नीति आयोग की समीक्षा से क्या निष्कर्ष सामने आए?
इसमें पाया गया कि निजी अस्पतालों में आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय बहुत अधिक (₹53,965) है और, ‘कैशलेस’ सुविधा के होते हुए भी 65% लाभार्थी अपनी जेब से खर्च करते हैं

3. PMJAY के तहत OOPE के मुख्य चालक क्या हैं?
प्रमुख खर्चों में दवाइयाँ, जाँच और परिवहन लागत शामिल हैं, जबकि यातायात व्यय योजना में शामिल नहीं है।

4. भारत में PMJAY को कौन लागू करता है?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करता है, जबकि राज्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ (SHAs) राज्य स्तर पर इसके क्रियान्वयन का कार्य सँभालती हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ) 

प्रिलिम्स 

प्रश्न. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के संदर्भ में प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता ‘आशा’ के कार्य निम्नलिखित में से कौन-से हैं? (2012)

  1. स्त्रियों को प्रसवपूर्व देखभाल जाँच के लिये स्वास्थ्य सुविधा केंद्र साथ ले जाना।  
  2. गर्भावस्था के प्रारंभिक संसूचन के लिये गर्भावस्था परीक्षण किट का उपयोग करना।  
  3. पोषण एवं टीकाकरण पर जानकारी प्रदान करना।  
  4. बच्चे का प्रसव कराना

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

केवल 1, 2 और 3

केवल 2 और 4

केवल 1 और 3

 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (a)


मेन्स 

प्रश्न: सार्विक स्वास्थ्य सरंक्षण प्रदान करने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की अपनी परिसीमाएँ हैं। क्या आपके विचार में खाई को पाटने में निजी क्षेत्र सहायक हो सकता है? आप अन्य कौन-से व्यवहार्य विकल्प सुझाएंगे? (2015)


प्रारंभिक परीक्षा

महाड़ सत्याग्रह

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों?

20 मार्च, 2026 को ऐतिहासिक महाड़ सत्याग्रह अपनी 99वीं वर्षगाँठ मना रहा है, जो इसके शताब्दी वर्ष के आधिकारिक शुभारंभ का प्रतीक है। वर्ष 1927 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में हुए इस ऐतिहासिक आंदोलन के स्मरण में इस दिन को पूरे भारत में आधिकारिक तौर पर सामाजिक अधिकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • महाड़ सत्याग्रह भारत के उस मौलिक संघर्ष की याद दिलाता है, जो दमनकारी जाति व्यवस्था के विरुद्ध मानवीय गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिये किया गया था।

महाड़ सत्याग्रह के बारे में मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • पृष्ठभूमि: वर्ष 1923 में एस.के. बोले ने बॉम्बे विधानपरिषद में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत सार्वजनिक जलस्रोत, कुएँ और धर्मशालाओं को वंचित वर्गों के लिये उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
    • महाड़ नगरपालिका परिषद ने इस प्रस्ताव को वर्ष 1924 में अपनाया, लेकिन प्रभावशाली उच्च जाति के हिंदुओं के तीव्र विरोध के कारण अछूत वर्गों को वास्तव में नगर के चवदार तालाब (Chowder Tank) तक पहुँचने से रोका गया।
    • इसके प्रत्युत्तर में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के नेतृत्व में महाड़ सत्याग्रह शुरू किया गया, ताकि दलितों के चवदार तालाब तक पहुँच के कानूनी और नैतिक अधिकार को स्थापित किया जा सके।
  • महाड़ सत्याग्रह (1927) की घटनाएँ:
    • गरिमा के लिये मार्च (1927): 20 मार्च, 1927 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने चवदार तालाब तक एक शांतिपूर्ण मार्च का नेतृत्व किया और वहाँ से पानी पीकर सदियों पुरानी जाति-आधारित प्रतिबंध को तोड़ा तथा समानता के अधिकार को स्थापित किया।
    • हिंसक प्रतिक्रिया: उच्च जाति के समूहों ने मंदिर प्रवेश की अफवाहों के बीच प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। तालाब को प्रतीकात्मक रूप से गोबर और मूत्र से शुद्ध किया गया, जो जातिगत पूर्वाग्रह को दर्शाता है।
    • मनुस्मृति दहन: डॉ. अंबेडकर ने दिसंबर 1927 में दूसरा सत्याग्रह आयोजित करने की योजना बनाई, लेकिन उच्च जाति के हिंदुओं द्वारा दायर न्यायालयीन निषेधाज्ञा के कारण इसे रोका गया, जिसमें तालाब को निजी संपत्ति बताया गया था।
      • अंबेडकर ने तालाब का पुन: उपयोग नहीं किया, बल्कि मनुस्मृति का दहन किया, जो जातिवाद विरोधी विचारधारा को पूरी तरह खारिज करने का प्रतीक था।
    • कानूनी जीत (1937): एक दशक के लंबे संघर्ष के बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने डॉ. अंबेडकर के पक्ष में निर्णय दिया और तालाब को सभी समुदायों के लिये कानूनी रूप से खोल दिया

आधुनिक भारत के लिये महत्त्व और विरासत

  • प्रत्यक्ष कार्रवाई की ओर बदलाव: महाड़ की घटना दलित राजनीति में एक प्रतिमान बदलाव का प्रतीक थी, जिसमें ब्रिटिश सरकार को प्रार्थना पत्र और ज्ञापन सौंपने से लेकर प्रत्यक्ष, जन-संगठित नागरिक कार्रवाई करने तक का सफर तय किया गया।
  • नारीवादी आधार: सत्याग्रह के दौरान अंबेडकर ने विशेष रूप से दलित महिलाओं को संबोधित किया।
    • उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अस्पृश्यता के परिधान संबंधी प्रतीकों का त्याग करें और अपनी साड़ियाँ उसी प्रकार गरिमा के साथ पहनें, जैसे कि सवर्ण जातियाँ पहनती हैं। 
    • महिलाओं ने तुरंत इसका पालन किया, जिससे महाद 'इंटरसेक्शनल' (अंतर्विभागीय) नारीवादी दावे का एक प्रारंभिक केंद्र बन गया।
  • संवैधानिक आधारशिला: चवदार तालाब पर लड़ी गई वैचारिक लड़ाइयों ने भारतीय संविधान के मसौदे, विशेष रूप से अनुच्छेद 15 (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) के लिये प्रत्यक्ष नैतिक आधार तैयार किया।

सत्याग्रह

"नमक से पहले जल था" यह वाक्यांश भारत के दो सबसे बड़े अहिंसक आंदोलनों: अंबेडकर के महाड़ सत्याग्रह (1927) और गांधी के दांडी मार्च (1930) के बीच एक शक्तिशाली और आवश्यक समानता को दर्शाता है।

  • सत्याग्रह का स्वरूप: गांधी ने जनता को बाहरी उपनिवेशवाद (ब्रिटिश साम्राज्यवाद) के विरुद्ध एकजुट करने के लिये नमक का उपयोग किया, जबकि अंबेडकर ने आंतरिक उपनिवेशवाद (सामाजिक साम्राज्यवाद और जाति व्यवस्था) के खिलाफ संघर्ष करने के लिये पानी को माध्यम बनाया। इस प्रकार, सत्याग्रह के स्वरूप में भिन्नता थी।
  • संसाधनों का प्रतीकात्मक महत्त्व: दोनों नेताओं ने मानव अस्तित्व के सबसे बुनियादी तत्त्वों का उपयोग किया। 
    • गांधी ने यह दर्शाया कि नमक पर कर लगाना एक प्राकृतिक अधिकार का हनन था।
    • अंबेडकर ने यह दर्शाया कि पानी से वंचित करना स्वयं मानवता का ही हनन था।
  • स्वराज की अवधारणा: अंबेडकर के लिये महाड़ जल सत्याग्रह ने यह सिद्ध कर दिया कि अंग्रेज़ों से राजनीतिक स्वतंत्रता (स्वराज) तब तक अर्थहीन थी, जब तक कि वह भारत के सबसे हाशिये पर रहने वाले नागरिकों के लिये सामाजिक स्वतंत्रता और समानता के साथ न आए।
  • सुधार की गहराई: महाड़ (सत्याग्रह) ने सामाजिक दृष्टिकोण और जाति व्यवस्था में मौलिक परिवर्तन की मांग की, जबकि नमक सत्याग्रह 'नमक कर' जैसे विशिष्ट औपनिवेशिक कानूनों को चुनौती देने पर केंद्रित था।
  • विरासत: महाड़ ने समानता और मानवाधिकारों के संवैधानिक मूल्यों की नींव रखी, जबकि नमक सत्याग्रह ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक स्वतंत्रता आंदोलन को सुदृढ़ किया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. महाड़ सत्याग्रह का उद्देश्य क्या था?
दलितों के सार्वजनिक जलस्रोतों तक पहुँच के अधिकार का दावा करना, अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव को चुनौती देना है।

2. कौन-से संवैधानिक प्रावधान महाड़ सत्याग्रह से प्रभावित थे?
इसने अनुच्छेद 15 (भेदभाव का प्रतिषेध) और अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता के उन्मूलन) को प्रभावित किया।

3. वर्ष 1927 में मनुस्मृति जलाने का क्या महत्त्व था?
यह जाति-आधारित सामाजिक पदानुक्रम और असमानता के रूढ़िवादी धार्मिक औचित्य को अस्वीकार करने का प्रतीक था।

4. महाड़ सत्याग्रह नमक सत्याग्रह से किस प्रकार भिन्न है?
महाड़ ने आंतरिक सामाजिक उत्पीड़न को लक्षित किया, जबकि नमक सत्याग्रह ने बाहरी औपनिवेशिक शासन का विरोध किया।

5. 20 मार्च को सामाजिक सशक्तीकरण दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है?
यह महाड़ सत्याग्रह (1927) और समानता एवं सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका का स्मरण करता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स 

प्रश्न. प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2021)

1. मिताक्षरा ऊँची जाति की सिविल विधि थी और दायभाग निम्न जाति की सिविल विधि थी।

2. मिताक्षरा व्यवस्था में, पुत्र अपने पिता के जीवनकाल में ही संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे, जबकि दायभाग व्यवस्था में पिता की मृत्यु के उपरांत ही पुत्र संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते थे।

3. मिताक्षरा व्यवस्था किसी परिवार के केवल पुरुष सदस्यों के संपत्ति-संबंधी मामलों पर विचार करती है, जबकि दायभाग व्यवस्था किसी परिवार के पुरुष एवं महिला सदस्यों, दोनों के संपत्ति-संबंधी मामलों पर विचार करती है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) केवल 3

उत्तर: (b)


प्रश्न.अस्पृश्य समुदाय के लोगों को लक्षित कर, प्रथम मासिक पत्रिका विटाल-विध्वंसक किसके द्वारा प्रकाशित की गई थी? (2020)

(a) गोपाल बाबा वलंगकर

(b) ज्योतिबा फुले

(c) मोहनदास करमचंद गांधी

(d) भीमराव रामजी अंबेडकर

उत्तर: (a)


प्रश्न.सत्यशोधक समाज ने आयोजित किया: (2016)

(a) बिहार में जनजातियों के उत्थान के लिये एक आंदोलन

(b) गुजरात में मंदिर प्रवेश आंदोलन

(c) महाराष्ट्र में जाति-विरोधी आंदोलन

(d) पंजाब में किसान आंदोलन

उत्तर: (c)


प्रश्न. निम्नलिखित में से किन दलों की स्थापना डॉ. भीमराव अंबेडकर ने की थी? (2012)

1. पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया 

2. ऑल इंडिया शिड्यूल्ड कास्ट्स फेडेरेशन 

3. इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी 

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न. जाति व्यवस्था नई-नई पहचानों और सहचारी रूपों को धारण कर रही है। अतः भारत में जाति व्यवस्था का उन्मूलन नहीं किया जा सकता है। टिप्पणी कीजिये। (2018)

प्रश्न. अपसारी उपागमों और रणनीतियों के होने के बावज़ूद, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर का दलितों की बेहतरी का एसमान लक्ष्य था। स्पष्ट कीजिये। (2015)

प्रश्न. इस मुद्दे पर चर्चा कीजिये कि क्या और किस प्रकार दलित प्राख्यान (एसर्शन) के समकालीन आंदोलन जाति विनाश की दिशा में कार्य करते हैं? (2015)


चर्चित स्थान

साउथ पार्स गैस क्षेत्र और मध्य पूर्व के ऊर्जा केंद्र

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

इज़रायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर आक्रमण किया, जिसके प्रतिक्रियास्वरूप ईरान ने कतर के रास लफान और यूएई के हबशन जैसे खाड़ी क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों को लक्ष्य बनाया।

  • ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख ऊर्जा स्थलों के लिये निकासी चेतावनी जारी की, जिनमें यूएई का अल-होस्न गैस क्षेत्र, कतर का रास लफान रिफाइनरी, सऊदी अरब का अल-जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, कतर की मेसईद होल्डिंग कंपनी तथा सऊदी अरब की सैमरेफ रिफाइनरी शामिल हैं, जो क्षेत्र की महत्त्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना को लक्षित करते हुए संभावित तनाव वृद्धि का संकेत देती है।
  • साउथ पार्स/नॉर्थ डोम गैस क्षेत्र (ईरान/कतर):
    • स्थान: फारस की खाड़ी के जल के नीचे स्थित है।
    • महत्त्व: यह विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है, जो ईरान (जहाँ इसे साउथ पार्स कहा जाता है) और कतर (जहाँ इसे नॉर्थ फील्ड कहा जाता है) के बीच साझा किया गया है।
    • आर्थिक प्रभाव: इसमें लगभग 1,800 ट्रिलियन घन फीट गैस का भंडार अनुमानित है। साउथ पार्स ईरान के घरेलू गैस आपूर्ति का सबसे बड़ा स्रोत है, जो देश की लगभग 80% प्राकृतिक गैस आवश्यकताओं को पूरा करता है।
  • रास लफान औद्योगिक नगर (कतर):
    • स्थान: यह कतर प्रायद्वीप के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित है।
    • महत्त्व: यह कतर के द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के प्रसंस्करण और निर्यात का प्रमुख केंद्र है, जो साझा नॉर्थ फील्ड से निकाली गई गैस पर अत्यधिक निर्भर है।
      • कतर वैश्विक स्तर पर LNG का एक प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता है, इस केंद्र को क्षति पहुँचने से यूरोप और एशिया के ऊर्जा बाज़ारों पर सीधे प्रभाव पड़ सकता है।
  • हबशन गैस कॉम्प्लेक्स और बाब तेल क्षेत्र (यूएई):
    • स्थान: संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के आंतरिक (इनलैंड) क्षेत्रों में स्थित हैं।
    • महत्त्व: हबशन विश्व की सबसे बड़ी गैस प्रसंस्करण सुविधाओं में से एक है, जो यूएई की घरेलू विद्युत उत्पादन और निर्यात अर्थव्यवस्था के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसके निकट स्थित बाब क्षेत्र एक विशाल स्थलीय (ऑनशोर) तेल उत्पादन संपत्ति है।

Middle_East_Energy_Hubs

और पढ़ें: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल का हमला


रैपिड फायर

ASI ने तमिलनाडु में स्थलों के उत्खनन को स्वीकृति प्रदान की

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्त्व स्थल और अवशेष नियम, 1959 के तहत भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने तमिलनाडु में 8 प्रमुख स्थलों पर उत्खनन को स्वीकृति प्रदान की है।

  • महत्त्व: ये 8 स्थल सामूहिक रूप से लौह युग से लेकर कीलाडी जैसी शहरी बस्तियों तक तमिलनाडु के इतिहास का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो संभावित रूप से प्राचीन दक्षिण भारतीय शहरीकरण और वैश्विक व्यापार नेटवर्क के बीच के अंतर को समाप्त कर सकते हैं।

प्रमुख स्थल और उनका महत्त्व

प्रमुख स्थल

महत्त्व

कीलाडी

वैगई बेसिन में शहरी बस्ती; तमिल-ब्राह्मी लिपि और उन्नत जल निकासी प्रणालियों के साक्ष्य।

आदिचनल्लूर और करिवलमवंतनल्लूर

यह प्रमुख शवाधान प्रारंभिक अंत्येष्टि प्रथाओं और लौह युग की भौतिक संस्कृति के बारे में जानकारी प्रदान करता है ।

वेल्लोर

रोमन साम्राज्य के साथ वाणिज्यिक आदान-प्रदान के साक्ष्य, जिनमें आभूषण और सिक्के शामिल हैं।

थेलुंगनूर

यह लोहे के उपयोग में प्रारंभिक तकनीकी प्रगति का संकेत देता है, जो संभवतः कई सहस्राब्दियों पहले की है।

नागपट्टिनम और पट्टिनामरुदुर

यह ऐतिहासिक चोल-काल का बंदरगाह बौद्ध एवं हिंद महासागर के व्यापार विस्तार को दर्शाता है।

मणिकोल्लाई

दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ होने वाले लंबी दूरी के व्यापार से जुड़ा काँच के मोतियों का उत्पादन केंद्र।

  • तमिलनाडु की प्रतिबद्धता: तमिलनाडु सरकार ने अपने वर्ष 2025-26 के बजट में पुरातात्त्विक कार्यों के लिये 7 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं, जिसमें DNA टेस्टिंग और ऑप्टिकली स्टिम्युलेटेड ल्यूमिनेसेंस (OSL) डेटिंग जैसी उन्नत वैज्ञानिक विधियाँ शामिल हैं।
  • स्थलों की डेटिंग:
    • DNA टेस्टिंग (जेनेटिक टेस्टिंग या DNA प्रोफाइलिंग) एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग गुणसूत्रों, जीनों या प्रोटीनों में परिवर्तनों की पहचान करने, जैविक संबंधों और पैतृक मूल को निर्धारित करने के लिये किया जाता है।
      • पुरातत्त्व में इसका उपयोग कंकाल अवशेषों से निकाले गए प्राचीन DNA (aDNA) का विश्लेषण करके प्राचीन सभ्यताओं के प्रवास और वंशावली का पता लगाने के लिये किया जाता है।
    • OSL डेटिंग एक परिष्कृत भू-कालनिर्धारण (जियोक्रोनोलॉजिकल) तकनीक है जो यह निर्धारित करती है कि खनिज कण (जैसे– क्वार्ट्ज़ या फेल्डस्पार) आखिरी बार सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कब आए थे।
      • पुरातत्त्व में यह उन मृदा परतों की डेटिंग हेतु विशेष रूप से उपयोगी है, जिनमें कलाकृतियाँ पाई जाती हैं, विशेष रूप से जब रेडियोकार्बन डेटिंग के लिये जैविक सामग्री उपलब्ध नहीं होती है।

और पढ़ें: तमिल साहित्य: संगम काल


रैपिड फायर

लघु जलविद्युत विकास योजना

स्रोत: पीआईबी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लघु जलविद्युत (SHP) विकास योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मंज़ूरी दे दी है। इस योजना के लिये ₹2,584 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य लगभग 1,500 मेगावाट क्षमता स्थापित करना और विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

  • परियोजना का दायरा: यह योजना 1 मेगावाट से 25 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करती है, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी (NE) राज्यों तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती ज़िलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA):
    • उत्तर-पूर्वी राज्यों और सीमावर्ती ज़िलों के लिये: ₹3.6 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (जो भी कम हो), अधिकतम सीमा प्रति परियोजना ₹30 करोड़।
    • अन्य राज्यों के लिये: ₹2.4 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (जो भी कम हो), अधिकतम सीमा प्रति परियोजना ₹20 करोड़
  • प्रस्तावित लाभ:
    • सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: निर्माण चरण के दौरान इससे 15,000 करोड़ का निजी निवेश आकर्षित होने और 51 लाख व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजित होने की संभावना है।
      • इससे स्थानीय निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा और 40 से 60 वर्षों की परियोजना अवधि के दौरान दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्थायी रोज़गार का सृजन होगा।
    • आत्मनिर्भर भारत: यह निवेश स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त संयंत्रों और मशीनरी का 100 प्रतिशत उपयोग करके आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करेगा, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करता है
    • पर्यावरणीय लाभ: बड़े बांधों की तुलना में, लघु जलविद्युत परियोजनाएँ (SHP) पर्यावरण के दृष्टिकोण से अधिक सतत होती हैं। ये परियोजनाएँ व्यापक भूमि अधिग्रहण, वनों की कटाई और समुदायों के विस्थापन को कम करती हैं।
    • तकनीकी लाभ: अपनी विकेंद्रीकृत प्रकृति के कारण ये परियोजनाएँ पारेषण हानि (transmission losses) और लंबी दूरी के पारेषण बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता को कम करती हैं।
  • भावी योजना: भविष्य की लगभग 200  परियोजनाओं के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार करने में एजेंसियों की सहायता के लिये ₹30 करोड़ का आवंटन निर्धारित किया गया है।

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रैपिड फायर

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया 

हाल ही में ऑक्सफोर्ड वेलबीइंग रिसर्च सेंटर ने गैलप और यूएन सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क के सहयोग से संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस (20 मार्च) के अवसर पर वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट, 2026 प्रकाशित की।

मुख्य निष्कर्ष

  • वैश्विक रैंकिंग: फिनलैंड लगातार 9वें वर्ष विश्व का सबसे प्रसन्न देश बना हुआ है, इसके बाद आइसलैंड (दूसरे) और डेनमार्क (तीसरे) स्थान पर है। कोस्टारिका एक उल्लेखनीय प्रदर्शनकर्त्ता के रूप में उभरा, जो वर्ष 2023 में 23वें स्थान से बढ़कर चौथे स्थान पर पहुँच गया, जबकि इज़रायल 8वें स्थान पर रहा।
    • अफगानिस्तान वैश्विक स्तर पर सबसे कम प्रसन्न देश (147वाँ) बना हुआ है, इसके बाद सिएरा लियोन (146वाँ) और मलावी (145वाँ) का स्थान है। ब्रिक्स देशों में, चीन 65वें स्थान पर है, इसके बाद रूस (79वें) और ईरान (97वें) हैं।
  • एंग्लोस्फीयर की अनुपस्थिति: लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष 10 में कोई भी अंग्रेज़ीभाषी देश शामिल नहीं है। उल्लेखनीय रैंकिंग में न्यूज़ीलैंड (11वाँ), आयरलैंड (13वाँ), ऑस्ट्रेलिया (15वाँ), संयुक्त राज्य अमेरिका (23वाँ), कनाडा (25वाँ) और यूनाइटेड किंगडम (29वाँ) शामिल हैं।
  • भारत का प्रदर्शन: भारत 147 देशों में 116वें स्थान पर है, जो वर्ष 2025 में 118वें स्थान से मामूली सुधार को दर्शाता है।
    • इन आँकड़ों के अनुसार भारत कई पड़ोसी देशों से पीछे है; नेपाल (99वाँ) और पाकिस्तान (104वाँ) उच्च स्थान पर हैं, जबकि बांग्लादेश (127वाँ) और श्रीलंका (134वाँ) नीचे हैं।
  • मापन मानदंड: रैंकिंग जीवन मूल्यांकन (कैंट्रिल लैडर) द्वारा निर्धारित की जाती है और छह प्रमुख चरों के माध्यम से इसका विश्लेषण किया जाता है, अर्थात प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार।
  • सोशल मीडिया का "गोल्डीलॉक" का नियम: शोधकर्त्ताओं ने पाया कि मध्यम उपयोग (प्रति दिन 1 घंटे से कम) शून्य उपयोग की तुलना में कल्याण के लिये वास्तव में बेहतर है, लेकिन वैश्विक औसत बढ़कर 2.5 घंटे/दिन हो गया है, जो "हानिकारक" क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है।
    • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में अंतर: "निष्क्रिय/दृश्य" प्लेटफॉर्म (इंस्टाग्राम, टिकटॉक) - जो सामाजिक तुलना को ट्रिगर करते हैं - और "संचार" प्लेटफॉर्म (व्हाट्सएप, फेसबुक) के बीच एक महत्त्वपूर्ण अंतर व्यक्त करते हैं, जो लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में उच्च जीवन संतुष्टि से संबंधित हैं।

इंटरनेशनल हैप्पीनेस डे

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2012 में स्थापित इंटरनेशनल हैप्पीनेस डे प्रतिवर्ष 20 मार्च को मनाया जाता है ताकि कल्याण को एक मौलिक मानवीय लक्ष्य के रूप में मान्यता दी जा सके।
    • 20 मार्च की तारीख इसलिये चुनी गई क्योंकि यह बसंत विषुव के साथ मेल खाती है, एक ऐसा समय जब पृथ्वी पर प्रत्येक जगह दिन और रात लगभग बराबर होते हैं - जो सार्वभौमिक समानता और संतुलन का प्रतीक है।
  • यह पहल भूटान द्वारा शुरू की गई थी, एक ऐसा देश जो पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर सकल राष्ट्रीय खुशी (GNH) को प्राथमिकता देने के लिये प्रसिद्ध है।

और पढ़ें: वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट, 2025


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