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भारतीय अर्थव्यवस्था

ऊर्जा परिवर्तन को आकार देने वाली भारतीय पहल

  • 28 Jun 2021
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये

नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांज़ीशन से जुड़ी विभिन्न पहलों से संबंधित तथ्य

मेन्स के लिये

नवीकरणीय ऊर्जा और इससे बढ़ावा देने हेतु सरकार द्वारा किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने 'द इंडिया स्टोरी' पुस्तिका का शुभारंभ किया, जिसमें भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में ट्रांज़ीशन को आकार देने वाली भारतीय पहलों का संकलन किया गया है।

  • इस पुस्तिका को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा नागरिक केंद्रित त्वरित ऊर्जा ट्रांज़ीशन पर आयोजित कार्यक्रम में लॉन्च किया गया था।
    • यह संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन (PMI) और ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (CEEW) के सहयोग से आयोजित किया गया था।
  • मंत्री द्वारा  एक वेबसाइट भी लॉन्च की गई, जो दुनिया भर से ऊर्जा ट्रांज़ीशन संबंधी ज्ञान संसाधनों के भंडार के रूप में कार्य करेगी।

प्रमुख बिंदु

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का विकास:

  • पिछले 6 वर्षों में भारत की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में ढाई गुना से अधिक की वृद्धि हुई है और यह 141 गीगा वाट (बड़े हाइड्रो सहित) से अधिक तक पहुँच गई है।
    • यह देश की कुल क्षमता का लगभग 37 प्रतिशत है।
  • भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 15 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है और यह 41.09 गीगावाट पर पहुँच गई है। 
  • भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता दुनिया में चौथी सबसे बड़ी क्षमता है। वास्तव में भारत का वार्षिक नवीकरणीय ऊर्जा वर्द्धन वर्ष 2017 से कोयला आधारित थर्मल पावर से अधिक रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश में सुगमता:

  • पिछले 7 वर्षों के दौरान भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया गया है।
  • भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिये एक बहुत ही उदार विदेशी निवेश नीति अपनाई गई है, जिसमें इस क्षेत्र में स्वत: मार्ग के माध्यम से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई है।
    • ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
  • घरेलू और विदेशी निवेशकों को सहयोग एवं सुविधा प्रदान करने के लिये सभी मंत्रालयों में समर्पित ‘परियोजना विकास प्रकोष्ठों’ (PDC) और FDI प्रकोष्ठों की स्थापना की गई है।
    • ‘परियोजना विकास प्रकोष्ठों की स्थापना केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच समन्वय के माध्यम से निवेश योग्य परियोजनाओं के विकास हेतु की गई है और इस तरह भारत में निवेश योग्य परियोजनाओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश में विदेशी निवेश के प्रवाह में भी वृद्धि होती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा निवेश संवर्द्धन और सुविधा बोर्ड (REIPFB) पोर्टल
    • इस पोर्टल को परियोजनाओं के विकास और भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नया निवेश लाने के लिये उद्योग एवं निवेशकों को एकमुश्त सहायता और सुविधा प्रदान करने हेतु विकसित किया गया है।

उद्योग की प्रतिबद्धताएँ:

  • भारतीय उद्योग के कई सदस्यों ने स्वेच्छा से नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी लक्ष्यों की घोषणा की है और कार्बन डिस्क्लोज़र प्रोजेक्ट (CDP), रिन्यूएबल 100% (RE 100) और विज्ञान आधारित लक्ष्य (SBTs) के लिये प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है।
    • CDP एक वैश्विक प्रकटीकरण प्रणाली है, जो कंपनियों, शहरों, राज्यों और क्षेत्रों को उनके पर्यावरणीय प्रभावों को मापने और प्रबंधित करने में सक्षम बनाती है।
    • SBTs व्यवसायों द्वारा निर्धारित ग्रीनहाउस गैस कटौती लक्ष्य हैं।

ग्रीन टैरिफ

  • 'ग्रीन टैरिफ' नीति संबंधी नियम बनाए जा रहे हैं, जो बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को पारंपरिक ईंधन स्रोतों से बिजली की तुलना में सस्ती दर पर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली की आपूर्ति करने में मदद करेगी।
    • सरकार उर्वरकों और रिफाइनिंग उद्योगों (ग्रीन हाइड्रोजन खरीद दायित्वों) के लिये दायित्वों के साथ ग्रीन हाइड्रोजन को भी बढ़ावा दे रही है। 

नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की पहल:

  • अपतटीय पवन ऊर्जा हेतु ‘व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण’ का विकल्प।
  • ‘ग्रीन टर्म अहेड मार्केट’ और ‘ग्रीन डे अहेड मार्केट’।
  • ओपन एक्सेस के माध्यम से RE सुविधा के लिये नियम।
  • ऊर्जा के गैर-पारंपरिक संसाधनों को बढ़ावा देने के लिये एक्सचेंजों के माध्यम से RE खरीद को भी अधिसूचित किया जाएगा।

भारत के ऊर्जा ट्रांज़ीशन को आकार देने वाली पहल:

  • विद्युतीकरण:
    • प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य): विश्वसनीय और सस्ती बिजली तक पहुँच के माध्यम से ग्रामीण और शहरी परिवारों को सशक्त बनाना।
    • हरित ऊर्जा कॉरिडोर (GEC): भारत के राष्ट्रीय ट्रांसमिशन नेटवर्क के साथ ग्रिड से जुड़ी अक्षय ऊर्जा को सिंक्रोनाइज़ करना।
    • राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन (NSGM) और स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम (SMNP): भारत के बिजली क्षेत्र को एक सुरक्षित, अनुकूलित, टिकाऊ और डिजिटल रूप से सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप बनाना।
  • नवीकरणीय ऊर्जा:
    • राष्ट्रीय सौर मिशन: दुनिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम के केंद्र में 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा की महत्त्वाकांक्षा वाला कार्यक्रम।
    • पवन ऊर्जा क्रांति: स्वच्छ ऊर्जा निर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये भारत के मज़बूत पवन ऊर्जा क्षेत्र का लाभ उठाना।
    • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और सतत् कार्यक्रम: ईंधन आयात को कम करने, स्वच्छ ऊर्जा उपयोग बढ़ाने, कचरे का प्रबंधन करने और रोज़गार सृजित करने के लिये मूल्य शृंखला का निर्माण करना।
    • लघु जलविद्युत (SHP): दूरदराज़ के समुदायों को आर्थिक मुख्यधारा में एकीकृत करने के लिये जल शक्ति का उपयोग करना।
    • राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन: बहुमुखी स्वच्छ ईंधन की व्यावसायिक व्यवहार्यता की खोज करना।
    • उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना: भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मूल्य शृंखला में एकीकृत करना।
    • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और SAYAY: ईंधन आयात को कम करने, स्वच्छ ऊर्जा उपयोग बढ़ाने, कचरे का प्रबंधन करने और रोज़गार सृजित करने के लिये मूल्य शृंखला का निर्माण।
  • ऊर्जा दक्षता:
    • उजाला: नागरिकों के लिये सस्ती, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था और उपकरण की सुविधा प्रदान करना।
  • स्वच्छ कुकिंग:
    • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन के लिये घरों में एलपीजी गैस पहुँचाना- ‘स्वच्छ ईंधन, बेहतर जीवन’।
  • औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन
    • परफॉर्म अचीव एंड ट्रेड (PAT): ऊर्जा दक्षता में वृद्धि और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करना।
  • सतत् परिवहन:
    • FAME योजना: विश्वसनीय, सस्ती और कुशल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिये भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना।
    • भारतीय रेलवे का गोइंग ग्रीन मिशन: पर्यावरण संरक्षण से प्रेरित, वर्ष 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन कर रहा है।
    • सतत् विमानन: विमान और हवाई अड्डे के संचालन के साथ स्वच्छ ईंधन, ऊर्जा दक्षता और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण को एकीकृत करना।
  • जलवायु स्मार्ट सिटी:
    • स्मार्ट सिटी मिशन (SCM): 'स्मार्ट समाधान' के माध्यम से टिकाऊ और जलवायु अनुकूल शहरी आवास विकसित करना।
    • ग्रीन बिल्डिंग मार्केट: संसाधन कुशल, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल भवनों का निर्माण।
  • शहरी गैस वितरण:
    • भारत का CNG और PNG नेटवर्क: वाहनों, घरों और उद्योगों के लिये 'हरित' जीवाश्म ईंधन के उपयोग में वृद्धि।
  • कूलिंग एक्शन:
    • इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान: एयर कंडीशनर उद्योग को एक स्थायी कूलिंग वैल्यू चेन बनाने के लिये प्रोत्साहित करना।
  • कौशल:
    • स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स (SCGJ): भारत के सतत् विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिये एक कुशल और विशिष्ट कार्यबल का निर्माण करना।
  • वैश्विक पहल:
    • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): सतत् मानव विकास हेतु सूर्य की अनंत ऊर्जा का दोहन करने के लिये प्रेरित करना।
    • स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय (CEM): वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिये प्रौद्योगिकी संचालित संक्रमण हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
    • मिशन इनोवेशन (MI): बड़े पैमाने पर प्रभाव के लिये सफल स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के नवाचार में निवेश करना।

स्रोत- पीआईबी

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