दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स



रैपिड फायर

लघु जलविद्युत विकास योजना

  • 20 Mar 2026
  • 17 min read

स्रोत: पीआईबी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लघु जलविद्युत (SHP) विकास योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए मंज़ूरी दे दी है। इस योजना के लिये ₹2,584 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य लगभग 1,500 मेगावाट क्षमता स्थापित करना और विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

  • परियोजना का दायरा: यह योजना 1 मेगावाट से 25 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं को समर्थन प्रदान करती है, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी (NE) राज्यों तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती ज़िलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA):
    • उत्तर-पूर्वी राज्यों और सीमावर्ती ज़िलों के लिये: ₹3.6 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (जो भी कम हो), अधिकतम सीमा प्रति परियोजना ₹30 करोड़।
    • अन्य राज्यों के लिये: ₹2.4 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (जो भी कम हो), अधिकतम सीमा प्रति परियोजना ₹20 करोड़
  • प्रस्तावित लाभ:
    • सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: निर्माण चरण के दौरान इससे 15,000 करोड़ का निजी निवेश आकर्षित होने और 51 लाख व्यक्ति-दिवस का रोज़गार सृजित होने की संभावना है।
      • इससे स्थानीय निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा और 40 से 60 वर्षों की परियोजना अवधि के दौरान दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्थायी रोज़गार का सृजन होगा।
    • आत्मनिर्भर भारत: यह निवेश स्वदेशी स्रोतों से प्राप्त संयंत्रों और मशीनरी का 100 प्रतिशत उपयोग करके आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को पूरा करेगा, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण क्षमता को सुदृढ़ करता है
    • पर्यावरणीय लाभ: बड़े बांधों की तुलना में, लघु जलविद्युत परियोजनाएँ (SHP) पर्यावरण के दृष्टिकोण से अधिक सतत होती हैं। ये परियोजनाएँ व्यापक भूमि अधिग्रहण, वनों की कटाई और समुदायों के विस्थापन को कम करती हैं।
    • तकनीकी लाभ: अपनी विकेंद्रीकृत प्रकृति के कारण ये परियोजनाएँ पारेषण हानि (transmission losses) और लंबी दूरी के पारेषण बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता को कम करती हैं।
  • भावी योजना: भविष्य की लगभग 200  परियोजनाओं के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार करने में एजेंसियों की सहायता के लिये ₹30 करोड़ का आवंटन निर्धारित किया गया है।

और पढ़ें: भारत का जल संकट और जलविद्युत

close
Share Page
images-2
images-2