प्रारंभिक परीक्षा
आर्टेमिस II मिशन
चर्चा में क्यों?
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल, 2026 को लॉन्च होने वाला है, जो पिछले 5 दशकों में पहली बार लो-अर्थ ऑर्बिट से परे मानव उपस्थिति को पुनः स्थापित करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मानवयुक्त परीक्षण उड़ान है।
आर्टेमिस II मिशन क्या है?
- परिचय: नासा का आर्टेमिस II आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन है और 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार मनुष्य चंद्रमा के चरों ओर यात्रा करेंगे। यह 10-दिवसीय लुनार फ्लाईबाई मिशन ओरियन अंतरिक्ष यान पर 4 अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा ताकि गहन-अंतरिक्ष लाइफ सपोर्ट सिस्टम को वेरिफाई किया जा सके।
- क्रू प्रोफाइल: चार-व्यक्ति के चालक दल में गहन-अंतरिक्ष अन्वेषण के लिये कई लोग "पहली बार" शामिल हुए:
- रीड वाइसमैन (कमांडर): नासा के अनुभवी और पूर्व मुख्य अंतरिक्ष यात्री।
- विक्टर ग्लोवर (पायलट): लो-अर्थ ऑर्बिट से परे यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।
- क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ): चंद्रमा के चरों ओर यात्रा करने वाली पहली महिला।
- जेरेमी हैनसेन (मिशन विशेषज्ञ): कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के एक अंतरिक्ष यात्री, वह पृथ्वी की कक्षा छोड़ने वाले पहले गैर-अमेरिकी हैं।
- प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्टरी): चालक दल चंद्रमा पर नहीं उतरेगा। इसके बजाय, वे फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी का उपयोग करके "लुनार फ्लाईबाई" करेंगे। वे चंद्रमा के सुदूर हिस्से से लगभग 7,400 किमी. आगे उड़ान भरेंगे, इससे पहले कि वे पृथ्वी पर वापस "स्लिंगशॉट" करने के लिये लुनार ग्रेविटी का उपयोग करेंगे।
- कक्षीय यांत्रिकी में "स्लिंगशॉट", जिसे अधिक औपचारिक रूप से गुरुत्वाकर्षण सहायता के रूप में जाना जाता है, एक युद्धाभ्यास है जहाँ एक अंतरिक्ष यान अपने वेग और पथ को बदलने के लिये किसी ग्रह या चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और कक्षीय गति का उपयोग करता है। यह ओरियन अंतरिक्ष यान को अपने मुख्य इंजनों का उपयोग करके "टर्न अराउंड" के बगैर पृथ्वी पर लौटने की अनुमति देता है।
- लॉन्च आर्किटेक्चर: यह मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) का उपयोग करता है, यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जो 8.8 मिलियन पाउंड का बल उत्पन्न करता है - अपोलो-युग के शनि V से लगभग 15% अधिक है।
- उन्नत संचार: पहली बार NASA लेज़र कम्युनिकेशन (O2O) का परीक्षण करेगा, जो 260 Mbps पर डेटा संचारित करने के लिये इन्फ्रारेड लेज़र का उपयोग करेगा, जो लुनार डिस्टेंस से 4K वीडियो स्ट्रीमिंग की अनुमति देगा।
- जैविक अनुसंधान: AVATAR (ए वर्चुअल एस्ट्रोनॉट टिश्यू एनालॉग रिस्पांस) का प्रयोग चालक दल अपने सेल के साथ "ऑर्गन-ऑन-ए-चिप" तकनीक का उपयोग करके गहन-अंतरिक्ष विकिरण और माइक्रोग्रैविटी के वास्तविक समय के प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
- वैश्विक सहयोग: यह मिशन जर्मनी, अर्जेंटीना, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब से क्यूबसैट्स तैनात करेगा ताकि विकिरण परिरक्षण, अंतरिक्ष मौसम और लुनार रोवर कंपोनेंट का अध्ययन किया जा सके।
चंद्रमा पर विभिन्न लैंडिंग मिशन कौन-कौन से हैं?
ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग (1966-1976)
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मिशन (वर्ष) |
देश |
विवरण |
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लूना 9 (1966) |
सोवियत संघ (USSR) |
पहला अंतरिक्ष यान जिसने सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग कर यह सिद्ध किया कि चंद्र सतह किसी मोटी धूल की परत के बजाय वाहन को सहारा देने के लिये पर्याप्त ठोस है। |
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सर्वेयर 1 (1966) |
अमेरिका (USA) |
अमेरिका का पहला सफल रोबोटिक लैंडिंग मिशन, जिसने 11,000 से अधिक तस्वीरें और चंद्र मृदा के तापमान तथा रडार परावर्तन से संबंधित महत्त्वपूर्ण डेटा एकत्र किया, जिससे भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में सहायता मिली। |
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अपोलो 11 (1969) |
अमेरिका (USA) |
यह पहला मानवयुक्त चंद्र अवतरण मिशन था, जिसमें नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन ने चंद्र सतह पर चलकर नमूने एकत्र किये तथा सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटे। |
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लूना 16 (1970) |
सोवियत संघ (USSR) |
यह एक रोबोटिक मिशन था, जिसने पहली बार किसी स्वचालित अंतरिक्ष यान द्वारा चंद्र सतह पर उतरकर वहाँ ड्रिलिंग की तथा चंद्र मृदा को पृथ्वी पर लाने के लिये एक वापसी कैप्सूल प्रक्षेपित किया। |
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अपोलो 17 (1972) |
अमेरिका (USA) |
अपोलो कार्यक्रम का अंतिम मिशन, जिसमें सबसे लंबी चंद्र सैर (Moonwalk) और व्यापक भू-वैज्ञानिक अध्ययन किये गए, साथ ही ‘ऑरेंज सॉइल’ की खोज भी की गई। |
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लूना 24 (1976) |
सोवियत संघ (USSR) |
यह सोवियत संघ का अंतिम चंद्र मिशन था, जिसने लगभग 2 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग कर मृदा के सैंपल/ नमूने पृथ्वी पर भेजे, जिससे चंद्रमा पर जल के प्रारंभिक संकेतों के प्रमाण मिले। |
आधुनिक युग की सॉफ्ट लैंडिंग (2013-वर्तमान)
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मिशन (वर्ष) |
देश |
विवरण |
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चांग'ई 3 (2013) |
चीन |
चीन का पहला चंद्र लैंडिंग मिशन, जिसमें युतू (Yutu) रोवर भेजा गया। इसने दूरगामी दूरबीन का उपयोग करके किसी अन्य खगोलीय पिंड की सतह से पहली बार खगोलीय अवलोकन किया। |
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चांग'ई 4 (2019) |
चीन |
एक ऐतिहासिक मिशन जिसने चंद्रमा के दूरवर्ती (फार) पक्ष पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग सफलतापूर्वक की और चंद्रमा के ‘अंधकारमय’ पक्ष से पृथ्वी के साथ संचार बनाए रखने के लिये एक रिले उपग्रह का उपयोग किया। |
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चंद्रयान-3 (2023) |
भारत |
भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, जो इसे दक्षिणी ध्रुव के निकट पहली बार लैंड करने वाला देश बनाती है, जिसमें प्रज्ञान रोवर को तैनात कर ज्वालामुखीय सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि की गई और चंद्र मृदा के गुणों का अध्ययन किया गया। |
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SLIM (2024) |
जापान |
‘मून स्नाइपर’ के नाम से प्रसिद्ध इस मिशन ने उच्च-सटीक अवतरण प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया, जब अंतिम अवतरण के दौरान इंजन समस्या के बावजूद यह अपने लक्ष्य के 100 मीटर के भीतर सुरक्षित रूप से उतर गया। |
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IM-1 (ओडीसियस) (2024) |
अमेरिका (प्राइवेट) |
वाणिज्यिक कंपनी द्वारा चंद्रमा पर पहली सफल लैंडिंग और 50 वर्षों में अमेरिकी द्वारा चंद्र सतह पर पहली वापसी, हालाँकि लैंडर ने उतरते समय थोड़ा झुकाव प्रदर्शित किया। |
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चांग'ई 6 (2024) |
चीन |
एक जटिल और विश्व में पहली बार किये गए इस मिशन ने चंद्रमा के दूरवर्ती दक्षिणी ध्रुव-ऐटकेन बेसिन पर लैंडिंग कर विशिष्ट मृदा सैंपल एकत्र किये और पृथ्वी पर लौटाए, जिससे चंद्रमा के प्रारंभिक इतिहास की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। |
निर्धारित लैंडिंग प्रयास (2026 और उसके बाद)
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मिशन (अनुमानित) |
देश/एजेंसी |
विवरण |
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ब्लू मून MK1 (2026) |
ब्लू ओरिजिन |
एक वाणिज्यिक कार्गो डेमो मिशन, जिसे बड़े पैमाने पर लैंडिंग प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा प्रणाली का परीक्षण करने के लिये डिज़ाइन किया गया, जिसने चंद्रमा पर स्थायी मानव बुनियादी ढाँचा और भारी लॉजिस्टिक्स के मार्ग को प्रशस्त किया। |
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Griffin-1 (2026) |
एस्ट्रोबोटिक |
यह मिशन नासा के VIPER रोवर को दक्षिणी ध्रुव पर भेजने का उद्देश्य रखता है, ताकि वाटर आइस की खोज की जा सके, जो भविष्य की कॉलोनियों के लिये ईंधन और ऑक्सीजन बनाने में आवश्यक है। |
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चांग'ई 7 (2026) |
चीन |
एक परिष्कृत बहु-खंडीय मिशन जिसमें लैंडर, रोवर और एक ‘उड़ने वाला/फ्लाइंग’ डिटेक्टर शामिल हैं, जो दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त गड्ढों का अन्वेषण करने और वाटर आइस के साक्ष्य की खोज करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। |
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आर्टेमिस IV (2028) |
नासा |
यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग के रूप में पहला होने की संभावना रखता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर ले जाएगा और दीर्घकालिक अन्वेषण के लिये परमानेंट बेस कैंप का निर्माण शुरू करेगा। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. आर्टेमिस II के संदर्भ में "फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी" क्या है?
यह एक कक्षीय मार्ग है जो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की सहायता से अंतरिक्ष यान को बिना इंजन चालू किये स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर वापस मोड़ देता है, जिससे प्रणोदन विफल होने की स्थिति में भी चालक दल की सुरक्षा बनी रहती है।
2. आर्टेमिस II पर जिस O2O सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है, उसका क्या महत्व है?
ओरियन आर्टेमिस II ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (O2O) इन्फ्रारेड लेज़रों का उपयोग करके उच्च बैंडविड्थ डेटा ट्रांसमिशन (260 Mbps) प्रदान करता है, जिससे गहरे अंतरिक्ष से रीयल-टाइम 4K वीडियो और उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा का आदान-प्रदान संभव होता है।
3. आर्टेमिस II के क्रू की संरचना की क्या विशेषता है?
इस दल में निम्न-पृथ्वी कक्षा से परे जाने वाली पहली महिला (क्रिस्टिना कोच) और पहले अश्वेत व्यक्ति (विक्टर ग्लोवर) शामिल हैं, साथ ही पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी (जेरेमी हैनसेन) भी शामिल हैं।
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)
इसरो द्वारा लॉन्च किया गया मंगलयान:
- इसे मार्स ऑर्बिटर मिशन भी कहा जाता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला दूसरा देश बन गया है।
- भारत अपने पहले ही प्रयास में स्वयं के अंतरिक्षयान द्वारा मंगल ग्रह की परिक्रमा करने में सफल एकमात्र देश बन गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? (2014)
अंतरिक्षयान : प्रयोजन
1- कैसिनी-हाइगेंस : शुक्र की परिक्रमा करना और दत्त का पृथ्वी तक संचारण करना
2- मेसेंजर : बुध का मानचित्रण और अन्वेषण
3- वॉयजर 1 और 2 : बाह्य सौर परिवार का अन्वेषण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के थेमिस मिशन, जो हाल ही में खबरों में था, का उद्देश्य क्या है? (2008)
(a) मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना का अध्ययन करना।
(b) शनि के उपग्रहों का अध्ययन करना।
(c) उच्च अक्षांश पर आकाश के रंगीन प्रदर्शन का अध्ययन करना।
(d) तारकीय विस्फोटों का अध्ययन करने के लिये एक अंतरिक्ष प्रयोगशाला का निर्माण करना।
उत्तर: (c)
रैपिड फायर
ओडिशा दिवस
केंद्रीय गृहमंत्री और सहकारिता मंत्री ने ओडिशा दिवस के अवसर पर ओडिशा के लोगों को शुभकामनाएँ दीं।
- स्थापना और महत्त्व: प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला उत्कल दिवस (ओडिशा स्थापना दिवस) वर्ष 1936 में अलग उड़ीसा प्रांत के गठन की स्मृति में मनाया जाता है, जिससे यह ब्रिटिश शासन के दौरान भाषायी आधार पर गठित भारत का पहला राज्य बना।
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: इस क्षेत्र को प्राचीन काल में कलिंग के नाम से जाना जाता था, जिसे 261 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक ने जीत लिया था।
- बाद में महामेघवाहन वंश के राजा खारवेल ने एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की और इस क्षेत्र की समृद्ध कला और वास्तुकला को बढ़ावा देने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।
- गजपति मुकुंद देव ओडिशा के अंतिम हिंदू राजा थे, जिनकी वर्ष 1576 में हार के बाद यह क्षेत्र मुगलों के अधीन आ गया, इसके बाद मराठों और अंततः ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया।
- प्रशासनिक उपेक्षा: ब्रिटिश शासन के दौरान ओडिशा को विभाजित कर बंगाल प्रेसीडेंसी में मिला दिया गया था, जिससे ओड़िया भाषी क्षेत्र बंगाल, मद्रास, मध्य प्रांतों तथा बिहार में बिखर गए। इससे सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक एकरूपता का ह्रास हुआ।
- राज्य का दर्जा पाने का आंदोलन: एक अलग ओडिशा प्रांत की मांग की 1928 में एक ब्रिटिश उपसमिति द्वारा जाँच की गई, जिसका नेतृत्व क्लेमेंट एटली ने किया।
- इसे वर्ष 1930 के गोलमेज़ सम्मेलन में महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति द्वारा मज़बूत समर्थन मिला और वर्ष 1932 में सैमुअल ओ'डॉनेल की अध्यक्षता वाले सीमा आयोग ने इसके गठन की सिफारिश की।
- अलग पहचान के लिये लंबे संघर्ष के बाद ओडिशा प्रांत का अंततः 1 अप्रैल, 1936 को गठन किया गया।
- यह आंदोलन मुख्यतः अहिंसक रहा, जिसमें याचिकाओं, सम्मेलनों, बौद्धिक प्रयासों और युवाओं की भागीदारी पर बल दिया गया।
- सर जॉन ऑस्टिन हब्बैक को इस प्रांत का पहला गवर्नर नियुक्त किया गया।
- मुख्य अग्रदूत: इस आंदोलन का नेतृत्व मधुसूदन दास, गोपबंधु दास, फकीर मोहन सेनापति और पंडित नीलकंठ दास जैसे प्रमुख व्यक्तित्वों ने किया, जबकि उत्कल सम्मिलनी (ओडिशा एसोसिएशन) ने ओड़ियाभाषी क्षेत्रों को एकजुट करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
- दिसंबर 1903 में कटक में आयोजित इसका पहला सम्मेलन अलग ओडिशा प्रांत की मांग से संबंधित प्रस्ताव पारित करने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण था।
- संवैधानिक विकास: प्रारंभ में इस राज्य का नाम उड़ीसा था, जिसे वर्ष 2011 में 113वें संवैधानिक संशोधन विधेयक, 2010 (जो बाद में 96वें संशोधन अधिनियम के रूप में लागू हुआ) तथा उड़ीसा (नाम परिवर्तन) विधेयक के माध्यम से आधिकारिक रूप से ओडिशा कर दिया गया।
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और पढ़ें: ओडिशा के सीमा विवाद |
रैपिड फायर
आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में अमरावती
लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है, जिसमें आधिकारिक तौर पर अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित किया गया है, जिससे शहर की स्थिति भविष्य के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से सुरक्षित हो गई है।
- यह विधेयक आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें केंद्र सरकार से राजधानी की स्थिति को औपचारिक रूप देने का अनुरोध किया गया था।
- वैधानिक संशोधन: यह विधेयक आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 5 में संशोधन करता है, जिसमें मूल रूप से हैदराबाद को 10 वर्ष से अधिक की अवधि के लिये साझा राजधानी नामित किया गया था।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में "अमरावती" को शामिल करके इसने पिछले "3-राजधानी" के प्रस्तावों (विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, कुरनूल को न्यायिक राजधानी और अमरावती को विधायी राजधानी के रूप में) को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया।
- पूर्वव्यापी प्रभाव: अधिनियमित होने के पश्चात यह विधिक प्रावधान 2 जून, 2024 से पूर्वव्यापी रूप में अमरावती को राजधानी के रूप में मान्यता प्रदान करेगा, जो तेलंगाना के साथ 10-वर्षीय साझा राजधानी अवधि की समाप्ति को चिह्नित करता है।
- संवैधानिक मिसाल: यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी विशेष शहर को किसी राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने के लिये संसद में एक विशिष्ट विधेयक लाया गया है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: यह विधेयक वर्ष 2014 के बाद के विभाजन की अनिश्चितता को समाप्त करता है, जो के.सी. शिव रामकृष्णन समिति की कई स्थानों पर विकेंद्रीकृत राजधानियों की सिफारिशों के साथ-साथ राज्य-स्तरीय नीतिगत परिवर्तनों को भी खारिज करता है।
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और पढ़ें: आंध्र प्रदेश राज्य का निर्माण और विशेष श्रेणी का दर्जा |
रैपिड फायर
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026
लोकसभा ने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया, जो दंड-आधारित व्यवस्था से विश्वास-आधारित शासन की ओर बदलाव करते हुए व्यापार और जीवन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
2026 विधेयक की मुख्य विशेषताएँ
- क्षेत्र और विस्तार: यह विधेयक 23 मंत्रालयों के अधीन 80 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में बदलाव करता है और इनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है।
- यह विधेयक जिन प्रमुख कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है, उनमें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 शामिल हैं।
- विधेयक के माध्यम से रियल एस्टेट, कोयला, खनन, नौवहन, पेट्रोलियम, ऊर्जा, रेलवे, कॉपीराइट और पेटेंट से संबंधित कानूनों में भी संशोधन किया जाएगा।
- यह विधेयक जिन प्रमुख कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है, उनमें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 शामिल हैं।
- नियामकीय बदलाव: यह छोटे नागरिक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और आपराधिक अभियोजन के स्थान पर नागरिक दंड तथा ‘पहले चेतावनी’ के सिद्धांत को लागू करता है। जानबूझकर अनुपालन न करने के मामलों के लिये न्यायालयों को सुरक्षित रखते हुए यह प्रणालीगत बोझ को कम करता है और सभी हितधारकों के लिये अधिक ‘पूर्वानुमेय, पारदर्शी और निष्पक्ष’ नियामकीय वातावरण बनाने का प्रयास करता है।
- संस्थागत ढाँचा: न्याय प्रक्रिया को सुगम बनाने और न्यायालयों पर बोझ कम करने के लिये विधेयक में निर्णय अधिकारी की नियुक्ति तथा अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- परामर्शात्मक दृष्टिकोण: इस विधेयक को नीति आयोग के तहत उच्च स्तरीय समिति की बैठकों और 49 बैठकों वाली चयन समिति प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया, जिसमें उद्योग जगत के नेताओं और विषय विशेषज्ञों की भागीदारी रही।
रैपिड फायर
आयकर अधिनियम, 2025
आयकर अधिनियम, 2025, 1 अप्रैल, 2026 को आधिकारिक रूप से लागू हो गया है, जिसने छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को प्रतिस्थापित कर दिया है।
- मूल उद्देश्य: माना जाता है कि ये संशोधन छूट संबंधी सीमाओं को वर्तमान लागत संरचनाओं और मुद्रास्फीति के रुझानों के साथ संरेखित करने के लिये डिज़ाइन किये गए हैं, जिसने अनेक विद्यमान सीमाओं को अप्रचलित बना दिया है।
- व्यापक उद्देश्य कर संबंधी प्रशासन व्यवस्था को आधुनिक बनाते हुए वेतनभोगी व्यक्तियों पर कर का बोझ कम करना है।
- परिचालन ढाँचा: केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने नए विधायी प्रावधानों को परिचालन योग्य बनाने के लिये आयकर नियम, 2026 को अधिसूचित किया।
- प्रक्रियागत परिवर्तन (फॉर्म 130 की शुरुआत): मानकीकरण और डिजिटलीकरण के लिये एक बड़े प्रयास में, पारंपरिक फॉर्म 16 [स्रोत पर कर संबंधी कटौती (TDS) प्रमाणपत्र जो एक नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को जारी किया जाता है] को रिपोर्टिंग की सटीकता में सुधार के लिये एक नए सिस्टम-जनरेटेड फॉर्म 130 द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
- कर वर्ष का एकीकरण: वित्तीय वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (AY) जैसी अलग-अलग अवधारणाओं को समाप्त कर उन्हें एक संयुक्त ‘कर वर्ष’ में समाहित किया गया है।
- डिजिटल विस्तार: अब अघोषित आय की परिभाषा में वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है और तलाशी व ज़ब्ती के दौरान अधिकारियों को ‘वर्चुअल डिजिटल स्पेस’ (जैसे– सोशल मीडिया और ईमेल सर्वर) तक पहुँच प्रदान की गई है।
- मानकीकृत अनुपालन: इस परिवर्तन में सरलीकृत और पुन: तैयार किये गए कर संबंधी फॉर्म शामिल हैं, जिन्हें फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक उपयोगकर्त्ता-अनुकूल और कुशल बनाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- रणनीतिक दृष्टिकोण: इस सुधार को कर संबंधी प्रशासन में सुधार और विकसित भारत के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- आयकर: यह एक प्रत्यक्ष कर है, जो किसी वित्तीय वर्ष के दौरान व्यक्तियों, कंपनियों या अन्य संस्थाओं द्वारा अर्जित आय पर लगाया जाता है। भारत में व्यक्तिगत करदाताओं के लिये इसे प्रगतिशील टैक्स स्लैब के अनुसार लगाया जाता है।
- ये स्लैब नवीन कर व्यवस्था के तहत या लागू छूट और कटौतियों के साथ भिन्न हो सकते हैं।
- केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिये भारत का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 7.99 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 8.14 लाख करोड़ रुपये से 1.9% कम है।
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और पढ़ें: आयकर विधेयक, 2025 |
रैपिड फायर
भारत द्वारा वर्ष 2026 की पहली BRICS युवा समन्वय बैठक की मेज़बानी
हाल ही में भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के तहत युवा जुड़ाव को शुरू करते हुए पहली BRICS युवा समन्वय बैठक आभासी रूप में आयोजित की।
- आयोजक: यह युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधीन युवा कार्य विभाग द्वारा आयोजित की गई थी।
- विषय: बैठक "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिये निर्माण" विषय के तहत आयोजित की गई थी।
- उद्देश्य: युवा सहयोग को सुदृढ़ करना और BRICS देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
- भागीदारी: सभी BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया और बैठक ने सहयोग के प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर सदस्य देशों को संरेखित करने में मदद की।
- प्रमुख पहलें: भारत ने BRICS युवा ट्रैक 2026 का एक सिंहावलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें वार्षिक रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें कार्यसमूह की बैठकें, विषयगत जुड़ाव, सर्व ब्रिक्स स्वयंसेवी गतिविधियाँ, युवा विकास मंच, युवा परिषद बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक शामिल हैं।
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: शिक्षा और कौशल, उद्यमिता, विज्ञान एवं नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य और खेल, पर्यावरण एवं स्थिरता, अंतर-धार्मिक संवाद तथा युवा आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करना।
- भारत की अध्यक्षता: इस बैठक ने भारत के नेतृत्व के दौरान BRICS युवा ट्रैक 2026 की औपचारिक शुरुआत को चिह्नित किया और इसकी अध्यक्षता के दौरान आगामी जुड़ाव की नींव रखी।
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और पढ़ें: 17वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन |