रैपिड फायर
जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026
- 02 Apr 2026
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लोकसभा ने जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया, जो दंड-आधारित व्यवस्था से विश्वास-आधारित शासन की ओर बदलाव करते हुए व्यापार और जीवन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
2026 विधेयक की मुख्य विशेषताएँ
- क्षेत्र और विस्तार: यह विधेयक 23 मंत्रालयों के अधीन 80 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में बदलाव करता है और इनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है।
- यह विधेयक जिन प्रमुख कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है, उनमें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 शामिल हैं।
- विधेयक के माध्यम से रियल एस्टेट, कोयला, खनन, नौवहन, पेट्रोलियम, ऊर्जा, रेलवे, कॉपीराइट और पेटेंट से संबंधित कानूनों में भी संशोधन किया जाएगा।
- यह विधेयक जिन प्रमुख कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव करता है, उनमें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 शामिल हैं।
- नियामकीय बदलाव: यह छोटे नागरिक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और आपराधिक अभियोजन के स्थान पर नागरिक दंड तथा ‘पहले चेतावनी’ के सिद्धांत को लागू करता है। जानबूझकर अनुपालन न करने के मामलों के लिये न्यायालयों को सुरक्षित रखते हुए यह प्रणालीगत बोझ को कम करता है और सभी हितधारकों के लिये अधिक ‘पूर्वानुमेय, पारदर्शी और निष्पक्ष’ नियामकीय वातावरण बनाने का प्रयास करता है।
- संस्थागत ढाँचा: न्याय प्रक्रिया को सुगम बनाने और न्यायालयों पर बोझ कम करने के लिये विधेयक में निर्णय अधिकारी की नियुक्ति तथा अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
- परामर्शात्मक दृष्टिकोण: इस विधेयक को नीति आयोग के तहत उच्च स्तरीय समिति की बैठकों और 49 बैठकों वाली चयन समिति प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया गया, जिसमें उद्योग जगत के नेताओं और विषय विशेषज्ञों की भागीदारी रही।