प्रारंभिक परीक्षा
आर्टेमिस II मिशन
- 02 Apr 2026
- 74 min read
चर्चा में क्यों?
नासा का आर्टेमिस II मिशन 1 अप्रैल, 2026 को लॉन्च होने वाला है, जो पिछले 5 दशकों में पहली बार लो-अर्थ ऑर्बिट से परे मानव उपस्थिति को पुनः स्थापित करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण मानवयुक्त परीक्षण उड़ान है।
आर्टेमिस II मिशन क्या है?
- परिचय: नासा का आर्टेमिस II आर्टेमिस कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन है और 1972 के अपोलो 17 मिशन के बाद पहली बार मनुष्य चंद्रमा के चरों ओर यात्रा करेंगे। यह 10-दिवसीय लुनार फ्लाईबाई मिशन ओरियन अंतरिक्ष यान पर 4 अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा ताकि गहन-अंतरिक्ष लाइफ सपोर्ट सिस्टम को वेरिफाई किया जा सके।
- क्रू प्रोफाइल: चार-व्यक्ति के चालक दल में गहन-अंतरिक्ष अन्वेषण के लिये कई लोग "पहली बार" शामिल हुए:
- रीड वाइसमैन (कमांडर): नासा के अनुभवी और पूर्व मुख्य अंतरिक्ष यात्री।
- विक्टर ग्लोवर (पायलट): लो-अर्थ ऑर्बिट से परे यात्रा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति।
- क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ): चंद्रमा के चरों ओर यात्रा करने वाली पहली महिला।
- जेरेमी हैनसेन (मिशन विशेषज्ञ): कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के एक अंतरिक्ष यात्री, वह पृथ्वी की कक्षा छोड़ने वाले पहले गैर-अमेरिकी हैं।
- प्रक्षेपवक्र (ट्रेजेक्टरी): चालक दल चंद्रमा पर नहीं उतरेगा। इसके बजाय, वे फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी का उपयोग करके "लुनार फ्लाईबाई" करेंगे। वे चंद्रमा के सुदूर हिस्से से लगभग 7,400 किमी. आगे उड़ान भरेंगे, इससे पहले कि वे पृथ्वी पर वापस "स्लिंगशॉट" करने के लिये लुनार ग्रेविटी का उपयोग करेंगे।
- कक्षीय यांत्रिकी में "स्लिंगशॉट", जिसे अधिक औपचारिक रूप से गुरुत्वाकर्षण सहायता के रूप में जाना जाता है, एक युद्धाभ्यास है जहाँ एक अंतरिक्ष यान अपने वेग और पथ को बदलने के लिये किसी ग्रह या चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और कक्षीय गति का उपयोग करता है। यह ओरियन अंतरिक्ष यान को अपने मुख्य इंजनों का उपयोग करके "टर्न अराउंड" के बगैर पृथ्वी पर लौटने की अनुमति देता है।
- लॉन्च आर्किटेक्चर: यह मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) का उपयोग करता है, यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जो 8.8 मिलियन पाउंड का बल उत्पन्न करता है - अपोलो-युग के शनि V से लगभग 15% अधिक है।
- उन्नत संचार: पहली बार NASA लेज़र कम्युनिकेशन (O2O) का परीक्षण करेगा, जो 260 Mbps पर डेटा संचारित करने के लिये इन्फ्रारेड लेज़र का उपयोग करेगा, जो लुनार डिस्टेंस से 4K वीडियो स्ट्रीमिंग की अनुमति देगा।
- जैविक अनुसंधान: AVATAR (ए वर्चुअल एस्ट्रोनॉट टिश्यू एनालॉग रिस्पांस) का प्रयोग चालक दल अपने सेल के साथ "ऑर्गन-ऑन-ए-चिप" तकनीक का उपयोग करके गहन-अंतरिक्ष विकिरण और माइक्रोग्रैविटी के वास्तविक समय के प्रभावों का अध्ययन करेंगे।
- वैश्विक सहयोग: यह मिशन जर्मनी, अर्जेंटीना, दक्षिण कोरिया और सऊदी अरब से क्यूबसैट्स तैनात करेगा ताकि विकिरण परिरक्षण, अंतरिक्ष मौसम और लुनार रोवर कंपोनेंट का अध्ययन किया जा सके।
चंद्रमा पर विभिन्न लैंडिंग मिशन कौन-कौन से हैं?
ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग (1966-1976)
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मिशन (वर्ष) |
देश |
विवरण |
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लूना 9 (1966) |
सोवियत संघ (USSR) |
पहला अंतरिक्ष यान जिसने सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग कर यह सिद्ध किया कि चंद्र सतह किसी मोटी धूल की परत के बजाय वाहन को सहारा देने के लिये पर्याप्त ठोस है। |
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सर्वेयर 1 (1966) |
अमेरिका (USA) |
अमेरिका का पहला सफल रोबोटिक लैंडिंग मिशन, जिसने 11,000 से अधिक तस्वीरें और चंद्र मृदा के तापमान तथा रडार परावर्तन से संबंधित महत्त्वपूर्ण डेटा एकत्र किया, जिससे भविष्य के मानव मिशनों की तैयारी में सहायता मिली। |
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अपोलो 11 (1969) |
अमेरिका (USA) |
यह पहला मानवयुक्त चंद्र अवतरण मिशन था, जिसमें नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन ने चंद्र सतह पर चलकर नमूने एकत्र किये तथा सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटे। |
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लूना 16 (1970) |
सोवियत संघ (USSR) |
यह एक रोबोटिक मिशन था, जिसने पहली बार किसी स्वचालित अंतरिक्ष यान द्वारा चंद्र सतह पर उतरकर वहाँ ड्रिलिंग की तथा चंद्र मृदा को पृथ्वी पर लाने के लिये एक वापसी कैप्सूल प्रक्षेपित किया। |
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अपोलो 17 (1972) |
अमेरिका (USA) |
अपोलो कार्यक्रम का अंतिम मिशन, जिसमें सबसे लंबी चंद्र सैर (Moonwalk) और व्यापक भू-वैज्ञानिक अध्ययन किये गए, साथ ही ‘ऑरेंज सॉइल’ की खोज भी की गई। |
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लूना 24 (1976) |
सोवियत संघ (USSR) |
यह सोवियत संघ का अंतिम चंद्र मिशन था, जिसने लगभग 2 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग कर मृदा के सैंपल/ नमूने पृथ्वी पर भेजे, जिससे चंद्रमा पर जल के प्रारंभिक संकेतों के प्रमाण मिले। |
आधुनिक युग की सॉफ्ट लैंडिंग (2013-वर्तमान)
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मिशन (वर्ष) |
देश |
विवरण |
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चांग'ई 3 (2013) |
चीन |
चीन का पहला चंद्र लैंडिंग मिशन, जिसमें युतू (Yutu) रोवर भेजा गया। इसने दूरगामी दूरबीन का उपयोग करके किसी अन्य खगोलीय पिंड की सतह से पहली बार खगोलीय अवलोकन किया। |
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चांग'ई 4 (2019) |
चीन |
एक ऐतिहासिक मिशन जिसने चंद्रमा के दूरवर्ती (फार) पक्ष पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग सफलतापूर्वक की और चंद्रमा के ‘अंधकारमय’ पक्ष से पृथ्वी के साथ संचार बनाए रखने के लिये एक रिले उपग्रह का उपयोग किया। |
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चंद्रयान-3 (2023) |
भारत |
भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, जो इसे दक्षिणी ध्रुव के निकट पहली बार लैंड करने वाला देश बनाती है, जिसमें प्रज्ञान रोवर को तैनात कर ज्वालामुखीय सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि की गई और चंद्र मृदा के गुणों का अध्ययन किया गया। |
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SLIM (2024) |
जापान |
‘मून स्नाइपर’ के नाम से प्रसिद्ध इस मिशन ने उच्च-सटीक अवतरण प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन किया, जब अंतिम अवतरण के दौरान इंजन समस्या के बावजूद यह अपने लक्ष्य के 100 मीटर के भीतर सुरक्षित रूप से उतर गया। |
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IM-1 (ओडीसियस) (2024) |
अमेरिका (प्राइवेट) |
वाणिज्यिक कंपनी द्वारा चंद्रमा पर पहली सफल लैंडिंग और 50 वर्षों में अमेरिकी द्वारा चंद्र सतह पर पहली वापसी, हालाँकि लैंडर ने उतरते समय थोड़ा झुकाव प्रदर्शित किया। |
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चांग'ई 6 (2024) |
चीन |
एक जटिल और विश्व में पहली बार किये गए इस मिशन ने चंद्रमा के दूरवर्ती दक्षिणी ध्रुव-ऐटकेन बेसिन पर लैंडिंग कर विशिष्ट मृदा सैंपल एकत्र किये और पृथ्वी पर लौटाए, जिससे चंद्रमा के प्रारंभिक इतिहास की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। |
निर्धारित लैंडिंग प्रयास (2026 और उसके बाद)
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मिशन (अनुमानित) |
देश/एजेंसी |
विवरण |
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ब्लू मून MK1 (2026) |
ब्लू ओरिजिन |
एक वाणिज्यिक कार्गो डेमो मिशन, जिसे बड़े पैमाने पर लैंडिंग प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा प्रणाली का परीक्षण करने के लिये डिज़ाइन किया गया, जिसने चंद्रमा पर स्थायी मानव बुनियादी ढाँचा और भारी लॉजिस्टिक्स के मार्ग को प्रशस्त किया। |
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Griffin-1 (2026) |
एस्ट्रोबोटिक |
यह मिशन नासा के VIPER रोवर को दक्षिणी ध्रुव पर भेजने का उद्देश्य रखता है, ताकि वाटर आइस की खोज की जा सके, जो भविष्य की कॉलोनियों के लिये ईंधन और ऑक्सीजन बनाने में आवश्यक है। |
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चांग'ई 7 (2026) |
चीन |
एक परिष्कृत बहु-खंडीय मिशन जिसमें लैंडर, रोवर और एक ‘उड़ने वाला/फ्लाइंग’ डिटेक्टर शामिल हैं, जो दक्षिणी ध्रुव के छायायुक्त गड्ढों का अन्वेषण करने और वाटर आइस के साक्ष्य की खोज करने के लिये डिज़ाइन किया गया है। |
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आर्टेमिस IV (2028) |
नासा |
यह मिशन आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग के रूप में पहला होने की संभावना रखता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर ले जाएगा और दीर्घकालिक अन्वेषण के लिये परमानेंट बेस कैंप का निर्माण शुरू करेगा। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. आर्टेमिस II के संदर्भ में "फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी" क्या है?
यह एक कक्षीय मार्ग है जो चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की सहायता से अंतरिक्ष यान को बिना इंजन चालू किये स्वाभाविक रूप से पृथ्वी की ओर वापस मोड़ देता है, जिससे प्रणोदन विफल होने की स्थिति में भी चालक दल की सुरक्षा बनी रहती है।
2. आर्टेमिस II पर जिस O2O सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है, उसका क्या महत्व है?
ओरियन आर्टेमिस II ऑप्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम (O2O) इन्फ्रारेड लेज़रों का उपयोग करके उच्च बैंडविड्थ डेटा ट्रांसमिशन (260 Mbps) प्रदान करता है, जिससे गहरे अंतरिक्ष से रीयल-टाइम 4K वीडियो और उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा का आदान-प्रदान संभव होता है।
3. आर्टेमिस II के क्रू की संरचना की क्या विशेषता है?
इस दल में निम्न-पृथ्वी कक्षा से परे जाने वाली पहली महिला (क्रिस्टिना कोच) और पहले अश्वेत व्यक्ति (विक्टर ग्लोवर) शामिल हैं, साथ ही पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी (जेरेमी हैनसेन) भी शामिल हैं।
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)
इसरो द्वारा लॉन्च किया गया मंगलयान:
- इसे मार्स ऑर्बिटर मिशन भी कहा जाता है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाला दूसरा देश बन गया है।
- भारत अपने पहले ही प्रयास में स्वयं के अंतरिक्षयान द्वारा मंगल ग्रह की परिक्रमा करने में सफल एकमात्र देश बन गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं? (2014)
अंतरिक्षयान : प्रयोजन
1- कैसिनी-हाइगेंस : शुक्र की परिक्रमा करना और दत्त का पृथ्वी तक संचारण करना
2- मेसेंजर : बुध का मानचित्रण और अन्वेषण
3- वॉयजर 1 और 2 : बाह्य सौर परिवार का अन्वेषण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b)
प्रश्न: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के थेमिस मिशन, जो हाल ही में खबरों में था, का उद्देश्य क्या है? (2008)
(a) मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना का अध्ययन करना।
(b) शनि के उपग्रहों का अध्ययन करना।
(c) उच्च अक्षांश पर आकाश के रंगीन प्रदर्शन का अध्ययन करना।
(d) तारकीय विस्फोटों का अध्ययन करने के लिये एक अंतरिक्ष प्रयोगशाला का निर्माण करना।
उत्तर: (c)