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आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में अमरावती

  • 02 Apr 2026
  • 13 min read

स्रोत: द हिंदू 

लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है, जिसमें आधिकारिक तौर पर अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित किया गया है, जिससे शहर की स्थिति भविष्य के राजनीतिक उतार-चढ़ाव से सुरक्षित हो गई है।

  • यह विधेयक आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद आया है, जिसमें केंद्र सरकार से राजधानी की स्थिति को औपचारिक रूप देने का अनुरोध किया गया था।
  • वैधानिक संशोधन: यह विधेयक आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 5 में संशोधन करता है, जिसमें मूल रूप से हैदराबाद को 10 वर्ष से अधिक की अवधि के लिये साझा राजधानी नामित किया गया था।
    • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 में "अमरावती" को शामिल करके इसने पिछले "3-राजधानी" के प्रस्तावों (विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, कुरनूल को न्यायिक राजधानी और अमरावती को विधायी राजधानी के रूप में) को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया।
  • पूर्वव्यापी प्रभाव: अधिनियमित होने के पश्चात यह विधिक प्रावधान 2 जून, 2024 से पूर्वव्यापी रूप में अमरावती को राजधानी के रूप में मान्यता प्रदान करेगा, जो तेलंगाना के साथ 10-वर्षीय साझा राजधानी अवधि की समाप्ति को चिह्नित करता है।
  • संवैधानिक मिसाल: यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी विशेष शहर को किसी राज्य की स्थायी राजधानी घोषित करने के लिये संसद में एक विशिष्ट विधेयक लाया गया है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: यह विधेयक वर्ष 2014 के बाद के विभाजन की अनिश्चितता को समाप्त करता है, जो के.सी. शिव रामकृष्णन समिति की कई स्थानों पर विकेंद्रीकृत राजधानियों की सिफारिशों के साथ-साथ राज्य-स्तरीय नीतिगत परिवर्तनों को भी खारिज करता है।

और पढ़ें: आंध्र प्रदेश राज्य का निर्माण और विशेष श्रेणी का दर्जा  दर्जा 

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