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मध्य प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 24 Feb 2026
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मध्य प्रदेश सरकार ने किया सरसों के किसानों के लिये भावांतर भुगतान योजना का विस्तार

चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से भावांतर योजना को सरसों तक विस्तारित कर दिया है तथा प्रमुख फसलों के लिये सहायक उपायों की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • कृषि पर विशेष ध्यान: राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है।
  • पाँच लक्षित फसलें: नई सहायता घोषणाओं के अंतर्गत प्रमुख फसलों में उड़द, सरसों, चना, मसूर और तुअर (अरहर) शामिल हैं।
    • उड़द की कृषि करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त ₹600 प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा, जिससे इस दलहन फसल की कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • सरसों के लिये भावांतर: सरकार ने सरसों के लिये भावांतर भुगतान योजना का विस्तार किया है, जिसके तहत MSP और वास्तविक बाज़ार मूल्य के बीच यदि कोई अंतर होगा तो उस मूल्यांतर की भरपाई किसानों को की जाएगी।
    • तुअर (अरहर) की खरीद के लिये मूल्य समर्थन व्यवस्था के अंतर्गत NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय खरीद एजेंसियों के माध्यम से प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
  • उद्देश्य: इन उपायों का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को अपनी उपज के लिये लाभकारी मूल्य मिलें, मूल्य अस्थिरता के जोखिम कम हों, फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिले और अंततः ग्रामीण आय में वृद्धि हो।
  • महत्त्व: मध्य प्रदेश की नवीनतम कृषि नीति घोषणाएँ वित्तीय प्रोत्साहनों, सुदृढ़ खरीद प्रणालियों और प्रमुख फसलों के लिये मूल्य जोखिम न्यूनीकरण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने की बहु-आयामी रणनीति को दर्शाती हैं।
    • ये निर्णय ग्रामीण विकास और दीर्घकालिक कृषि अनुकूलन पर राज्य सरकार के निरंतर फोकस की पुष्टि करते हैं।

और पढ़ें:  भावांतर योजना, मध्य प्रदेश बजट 2026-27, NAFED, MSP 


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे मधुमक्खी गलियारे विकसित करेगा NHAI

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपनी सतत अवसंरचना विकास रणनीति के तहत भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों के कुछ हिस्सों के साथ परागण-अनुकूल ‘मधुमक्खी गलियारे’ विकसित करने की एक अग्रणी पहल की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • अपनी तरह की पहली पहल: NHAI का ‘मधुमक्खी गलियारे’ कार्यक्रम सड़क किनारे की वृक्षारोपण पट्टियों को केवल सजावटी हरियाली से बदलकर पारिस्थितिक रूप से कार्यात्मक हरित गलियारों में परिवर्तित करेगा, जो मधुमक्खियों तथा जंगली मधुमक्खियों जैसे परागणकर्त्ताओं को समर्थन प्रदान करेंगे।
  • उद्देश्य: इस परियोजना का लक्ष्य घटती परागणकर्त्ता आबादी की समस्या का समाधान करना, जैव विविधता को बढ़ावा देना तथा कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण फसल परागण जैसी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
    • मधुमक्खी गलियारे में निरंतर रैखिक वनस्पति पट्टियाँ विकसित की जाएंगी, जिनमें फूलदार वृक्ष, झाड़ियाँ, औषधीय पौधे और घास शामिल होंगी, जो पूरे वर्ष पराग तथा मधुरस उपलब्ध कराएंगी।
  • देशज प्रजातियाँ: नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी प्रजातियाँ, जो मधुरस तथा पराग से समृद्ध मानी जाती हैं, क्रमबद्ध (स्टैगर्ड) पुष्पन पैटर्न के साथ लगाई जाएंगी, ताकि पूरे वर्ष परागणकर्त्ताओं को निरंतर समर्थन मिल सके।
  • कार्यान्वयन रणनीति: NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय कृषि-जलवायु परिस्थितियों और स्थानीय पारिस्थितिक उपयुक्तता के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों के उपयुक्त हिस्सों तथा खाली भूमि खंडों की पहचान करेंगे।
    • वित्तीय वर्ष 2026-27 में NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 40 लाख वृक्ष लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60% ‘मधुमक्खी गलियारे’ पहल के अंतर्गत लगाए जाएंगे।
    • इस अवधि में कम से कम तीन समर्पित परागणकर्ता गलियारों के विकास की अपेक्षा है।
  • महत्त्व: NHAI की ‘मधुमक्खी गलियारे’ पहल अवसंरचना-आधारित पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का एक अभिनव मॉडल प्रस्तुत करती है, जिसके माध्यम से भारत के राजमार्ग नेटवर्क का उपयोग परागणकर्त्ताओं के आवास और जैव विविधता को समर्थन देने के लिये किया जाएगा।

और पढ़ें:  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), मधुमक्खी गलियारे, हरित गलियारे, कृषि-जलवायु, जैव विविधता


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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026

चर्चा में क्यों?

भारत ने 28 फरवरी, 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 को ‘विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत को गति देने वाली’ थीम के साथ मनाया।

मुख्य बिंदु:

  • पृष्ठभूमि: भारत में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है, ताकि भौतिक विज्ञानी सी. वी. रमन द्वारा वर्ष 1928 में किये गए रमन प्रभाव की खोज का सम्मान किया जा सके, जिसके लिये उन्हें वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 2026 की थीम: ‘विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत को गति देने वाली’ थीम ने विकसित भारत के निर्माण में महिला वैज्ञानिकों और नवोन्मेषकों के योगदान पर ज़ोर दिया तथा अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं STEM क्षेत्रों में उनके प्रयासों को मान्यता दी।
    • यह थीम विज्ञान में महिलाओं और बालिकाओं के अंतर्राष्ट्रीय दिवस जैसे वैश्विक प्रयासों के अनुरूप रही, जिसका उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करना है।
  • राष्ट्रीय समारोह: स्कूलों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों एवं विज्ञान केंद्रों में विज्ञान प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, वाद-विवाद, प्रतियोगिताएँ एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये गए, ताकि महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया जा सके और भावी पीढ़ियों के वैज्ञानिकों को प्रेरित किया जा सके।
  • महत्त्व: इस दिवस ने नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया और राष्ट्रीय विकास में विज्ञान की भूमिका को स्वीकार किया, जबकि वर्ष 2026 की थीम ने STEM क्षेत्रों में लैंगिक अंतर को कम करने तथा महिलाओं के नेतृत्व वाले वैज्ञानिक प्रगति को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।

और पढ़ें: विकसित भारत, सी.वी. रमन, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025


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भारतीय मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने BAFTA पुरस्कार 2026 जीता

चर्चा में क्यों?

मणिपुरी भाषा की भारतीय फिल्म ‘बूंग’ ने 79वें ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविज़न आर्ट्स (BAFTA) पुरस्कार 2026 में सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म का पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक जीत: ‘बूंग’ प्रतिष्ठित BAFTA पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म श्रेणी जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई।
  • प्रतिस्पर्द्धा: इस मणिपुरी फिल्म ने ज़ूटोपिया 2 और लिलो एंड स्टिच जैसी प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
  • फिल्म की पृष्ठभूमि: फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है और इसे फरहान अख्तर तथा रितेश सिधवानी सहित अन्य निर्माताओं का समर्थन प्राप्त है।
    • ‘बूंग’ एक कमिंग-ऑफ-एज ड्रामा है, जो मणिपुर के एक युवा बालक की अपने परिवार को पुनः एकजुट करने की भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है।
    • इसका प्रीमियर वर्ष 2024 मेंटोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था और इसे कई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है।
  • थीम: फिल्म बचपन, पारिवारिक रिश्तों, पहचान एवं भावनात्मक दृढ़ता के इर्द-गिर्द घूमती है, जो इसे बच्चों और परिवारों के लिये वैश्विक स्तर पर उपयुक्त बनाती है।
    • लंदन में आयोजित पुरस्कार समारोह के दौरान निर्देशक ने भावुक स्वीकृति भाषण दिया, जिसमें उन्होंने सांस्कृतिक कथाओं को रेखांकित किया और शांति का आह्वान किया, जो पूरे विश्व के दर्शकों के साथ गूंजा।
  • महत्त्व: यह फिल्म भारतीय सिनेमा के लिये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निर्माण को इस श्रेणी में बाफ्टा पुरस्कार मिला है।
    • इस जीत के माध्यम से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की सामाजिक-सांस्कृतिक कहानियों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है, जिन्हें अब तक मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा में सीमित स्थान ही प्राप्त था।

और पढ़ें: पूर्वोत्तर भारत


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