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केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की स्वीकृति दी
- 25 Feb 2026
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चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम (Keralam)’ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है, जिससे राज्य का आधिकारिक नाम मलयालम भाषा में प्रचलित नाम के अनुरूप हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- पृष्ठभूमि: ‘केरलम (Keralam)’ राज्य का मूल मलयालम नाम है, जिसका सांस्कृतिक और भाषायी प्रयोग सदियों से निरंतर होता रहा है।
- प्राचीन संदर्भ: इस शब्द का उल्लेख सम्राट अशोक के द्वितीय शिलालेख (257 ईसा पूर्व) में ‘केरलपुत्र’ के रूप में मिलता है, जो चेर वंश को संदर्भित करता है।
- भाषायी पुनर्गठन: मलयालम भाषी समुदायों के लिये एकीकृत ‘केरलम’ की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही उठती रही है।
- औपनिवेशिक नाम: अंग्रेज़ी नाम ‘केरल’ औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान प्रचलन में आया और स्वतंत्रता के बाद भी बनाए रखा गया।
- प्रस्ताव: केरल विधानसभा ने पहले सर्वसम्मति से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर इसे केंद्र सरकार को अनुमोदन हेतु भेजा था।
- संवैधानिक और कानूनी आधार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन तथा मौजूदा राज्यों के नाम, क्षेत्रफल या सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार देता है।
- प्रक्रिया: इस प्रक्रिया हेतु आवश्यक है:
- राष्ट्रपति की अनुशंसा पर संसद में विधेयक प्रस्तुत किया जाता है।
- विधेयक को संबंधित राज्य विधानसभा के विचार हेतु भेजा जाता है (हालाँकि ये विचार बाध्यकारी नहीं होते)।
- मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, परिवर्तन को औपचारिक रूप देने हेतु विधेयक संसद में पेश किया जाता है।
- संसदीय स्वीकृति: विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से पारित होना आवश्यक है।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु भेजा जाता है।
- अनुसूचियों में संशोधन: अधिनियम के अधिसूचित होने पर संविधान की प्रथम अनुसूची (राज्यों के नामों की सूची) और चतुर्थ अनुसूची (राज्यसभा में सीटों के आवंटन से संबंधित) को तद्नुसार अद्यतन किया जाता है।
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और पढ़ें: प्रथम अनुसूची, अनुच्छेद 3 |