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राजस्थान स्टेट पी.सी.एस.

  • 02 Mar 2026
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राजस्थान Switch to English

राजस्थान ने प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिये पारंपरिक नामों को पुनः बहाल किया

चर्चा में क्यों?

ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने तथा औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राजस्थान राज्य सरकार ने तीन प्रमुख कस्बों माउंट आबू, कामां और जहाज़पुर के नाम आधिकारिक रूप से परिवर्तित कर दिये।

मुख्य बिंदु:

  • सांस्कृतिक पुनरुद्धार: राज्य विधानसभा में घोषित यह निर्णय, ‘वि-औपनिवेशीकरण’ और सांस्कृतिक पुनर्प्राप्ति की व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति के अनुरूप है।
  • माउंट आबू — नया नाम 'आबू राज': सिरोही ज़िले में स्थित माउंट आबू, राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है, जो अपनी शीतल जलवायु, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थापत्य धरोहर, विशेषकर विश्व प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर के लिये जाना जाता है।
    • ‘अबू राज’ नाम क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को प्रतिबिंबित करने के उद्देश्य से रखा गया है, जिसका संबंध प्राचीन ‘अर्बुद’ संदर्भों से माना जाता है और जो राजसी/सार्वभौम विरासत का संकेत देता है।
  • कामां — नया नाम: कामवन: भरतपुर ज़िले में स्थित कामां, ब्रज सांस्कृतिक क्षेत्र का हिस्सा है और इसका उल्लेख भागवत पुराण तथा स्कंद पुराण जैसे हिंदू ग्रंथों में मिलता है।
    • ‘कामवन’ नाम प्राचीन ‘कामवन’ की पुनर्स्थापना करता है, जो भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से जुड़ा एक पौराणिक वन माना जाता है।
  • जहाज़पुर — नया नाम: यज्ञपुर: भीलवाड़ा ज़िले में स्थित जहाज़पुर का संबंध वैदिक परंपराओं और यज्ञ संस्कारों से रहा है।
    • ‘यज्ञपुर’ नाम को अपनाकर सरकार का उद्देश्य नगर की आध्यात्मिक विरासत तथा उसकी वैदिक सांस्कृतिक परंपराओं को उजागर करना है।
  • महत्त्व: यह नाम परिवर्तन उस व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न राज्य क्षेत्रीय गौरव, भाषायी मूल और सांस्कृतिक स्मृति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थान-नामों की पुनर्समीक्षा कर रहे हैं।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

ईरान ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में अली खामेनेई की कथित मृत्यु के बाद, ईरान के इस्लामी गणराज्य ने अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद के एक प्रमुख सदस्य के रूप में नियुक्त किया है, जिससे प्रभावी रूप से उन्हें संक्रमण काल ​​के दौरान कार्यवाहक सर्वोच्च अभिकर्त्ता के रूप में तैनात किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • नेतृत्व परिषद: ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत, अब एक तीन-सदस्यीय अंतरिम निकाय इस्लामी गणराज्य का शासन चला रहा है। 
    • इसमें अराफी के साथ राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं, जो नेतृत्व के इस अभूतपूर्व शून्य के बीच सत्ता की निरंतरता सुनिश्चित करते हैं।
  • भूमिका और अधिकार: अंतरिम नेतृत्व परिषद सर्वोच्च अभिकर्त्ता के संवैधानिक कर्त्तव्यों का तब तक निर्वहन करती है, जब तक कि 'विशेषज्ञों की सभा' द्वारा स्थायी उत्तराधिकारी का चयन नहीं कर लिया जाता। 
    • ईरान में सर्वोच्च अभिकर्त्ता सर्वोच्च अधिकार होता है, जो सशस्त्र बलों, न्यायपालिका, राज्य प्रसारण और प्रमुख नीतिगत निर्णयों की देख-रेख करता है।
  • अराफी की पृष्ठभूमि: वह एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और उन्होंने ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान में प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिसमें 'गार्जियन काउंसिल' और 'विशेषज्ञों की सभा' दोनों की सदस्यता शामिल है। 
    • कौम के प्रमुख मदरसों (सेमिनरी) का नेतृत्व भी किया है।
    • कौम शिया इस्लामी छात्रवृत्ति/विद्वत्ता का ईरान का प्रमुख केंद्र है और इसके मदरसों के साथ अराफी का जुड़ाव उनकी लिपिकीय (धार्मिक) स्थिति को और मज़बूत करता है।
  • शासन की निरंतरता: अंतरिम परिषद यह सुनिश्चित करती है कि संक्रमण काल ​​के दौरान कार्यकारी, सैन्य और न्यायिक अधिकार निर्बाध रूप से बने रहें।
  • महत्त्व: अंतरिम नेतृत्व परिषद में अलीरेज़ा अराफी की नियुक्ति ईरान के राजनीतिक संक्रमण का एक महत्त्वपूर्ण क्षण है, जो बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच नेतृत्व के उत्तराधिकार के लिये संवैधानिक प्रक्रियाओं को रेखांकित करता है।
और पढ़ें: ईरान-इज़राइल संघर्ष

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