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स्टेट पी.सी.एस.

  • 03 Feb 2026
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उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड को मिला 'बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम' पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड को विंग्स इंडिया 2026 में ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ का पुरस्कार प्रदान किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • कार्यक्रम: विंग्स इंडिया 2026 एक प्रमुख एविएशन कॉन्फ्रेंस और प्रदर्शनी है जो बेगमपेट एयरपोर्ट, हैदराबाद में आयोजित होगी।
  • पुरस्कार: उत्तराखंड को ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम’ का पुरस्कार मिला, जो विमानन अवसंरचना और कनेक्टिविटी के विकास हेतु उसकी सक्रिय नीतियों एवं पहलों को मान्यता देता है।
    • यह पुरस्कार उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी क्षेत्र से बढ़ती हवाई संपर्क सुविधा वाले राज्य में रूपांतरण को दर्शाता है, जिससे पर्यटन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार हुआ है।
  • नीतिगत पहलें: उत्तराखंड ने उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत हवाई संपर्क का विस्तार किया है तथा हेलीपोर्ट और हवाई पट्टियों का विकास किया है।
    • बेहतर नागरिक विमानन सुविधाओं से पर्यटन, हेली-पर्यटन और चार धाम यात्रा की सुगमता बढ़ी है, साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तथा आपदा-प्रतिक्रिया को भी बल मिला है।
  • राष्ट्रीय मान्यता: यह पुरस्कार केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री द्वारा प्रदान किया गया, जो विमानन विकास में उत्तराखंड की राष्ट्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

और पढ़ें: विंग्स इंडिया 2026, UDAN, चार धाम यात्रा


उत्तर प्रदेश Switch to English

IIT कानपुर ने 30 वर्षों के उपग्रह आँकड़ों का प्रयोग करके सूर्य के आंतरिक और अदृश्य हिस्सों का मानचित्रण किया

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने 30 वर्षों के उपग्रह अवलोकनों को एक उन्नत संगणकीय मॉडल में समाहित कर सूर्य के आंतरिक और अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र का पहला त्रि-आयामी मानचित्र तैयार किया है, जिससे सौर गतिकी की समझ में वृद्धि हुई है।

मुख्य बिंदु:

  • उपलब्धि: IIT कानपुर की शोध टीम ने एक त्रि-आयामी (3D) डायनेमो मॉडल विकसित किया है, जो तीन दशकों के सौर चुंबकीय क्षेत्र के अवलोकनों को समाहित कर सूर्य की आंतरिक चुंबकीय संरचना का मानचित्र तैयार करता है।
    • यह अध्ययन IIT कानपुर के भौतिकी विभाग के सौम्यदीप चटर्जी के नेतृत्व में किया गया।
  • डेटा स्रोत: इस मॉडल में NASA के SOHO और SDO जैसे उपग्रहों द्वारा लंबे समय तक एकत्र किये गए आँकड़ों का उपयोग किया गया है, जिन्होंने दशकों से सूर्य की सतह के चुंबकीय क्षेत्रों का विस्तृत विवरण प्रदान किया है।
    • सौर डायनेमो मानचित्रण: यह शोध सौर डायनेमो पर केंद्रित है जो सूर्य के गहरे आंतरिक भाग में होने वाली वह प्रक्रिया है, जिसके कारण सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है और जो सनस्पॉट, सौर ज्वालाओं तथा कोरोनल मास इजेक्शन को संचालित करती है।
    • 3D मॉडल की अंतर्दृष्टि: अवलोकनात्मक आँकड़ों को उन्नत संगणकीय तकनीकों के साथ जोड़कर यह मॉडल समय के साथ बड़े-पैमाने पर चुंबकीय पैटर्न के विकास को उजागर करता है तथा आंतरिक चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और परिवर्तन का अनुमान लगाने में सक्षम बनाता है।
  • अंतरिक्ष मौसम की प्रासंगिकता: सूर्य के अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण सौर चक्रों और अंतरिक्ष-मौसम घटनाओं की भविष्यवाणी क्षमता को बेहतर बनाता है, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, विद्युत  ग्रिड, GPS और संचार प्रणालियों को बाधित कर सकती हैं। 
    • यह मॉडल आगामी सौर चक्रों की अधिकतम तीव्रता का आकलन करने में भी सहायक है, जो तकनीकी अवसंरचना की सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • बिग डेटा: यह अध्ययन दर्शाता है कि विशाल अवलोकनात्मक आँकड़ों को संगणकीय मॉडलिंग के साथ जोड़कर पहले अप्राप्य रहे वैज्ञानिक निष्कर्षों को कैसे उजागर किया जा सकता है।

SOHO (सोलर एंड हेलियोस्फेरिक ऑब्ज़र्वेटरी):

  • NASA और ESA का संयुक्त मिशन।
  • वर्ष 1995 में प्रक्षेपित।
  • पृथ्वी और सूर्य के बीच लैग्रांज पॉइंट L1 पर स्थापित।
  • सूर्य के आंतरिक भाग, सतह, कोरोना, सौर पवन तथा कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) का अध्ययन करता है।

SDO (सोलर डायनेमिक्स ऑब्ज़र्वेटरी):

  • NASA का मिशन।
  • ‘लिविंग विद अ स्टार’ (LWS) कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2010 में प्रक्षेपित।
  • पृथ्वी के चारों ओर भू-समकालिक कक्षा (जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट) में परिक्रमा करता है।

और पढ़ें: सनस्पॉट, सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

SBI ने उभरते क्षेत्रों के वित्तपोषण के लिये CHAKRA सेंटर लॉन्च किया

चर्चा में क्यों?

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने उभरते क्षेत्रों (सनराइज़ सेक्टर्स) के वित्तपोषण को समर्थन देने के लिये ‘CHAKRA’ नामक एक समर्पित उत्कृष्टता केंद्र (CoE) शुरू किया है। यह देश के सबसे बड़े ऋणदाता द्वारा भावी पीढ़ी के उद्योगों में पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक रणनीतिक पहल को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: यह पहल वर्ष 2030 तक भविष्य-उन्मुख महत्त्वपूर्ण उद्योगों में ₹100 लाख करोड़ से अधिक के पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है।
  • विज़न: यह परियोजना मूल्यांकन, साक्ष्य-आधारित नीति संवाद, श्वेत पत्र (White Papers) और उद्योग गोलमेज बैठकों के माध्यम से निवेशकों तथा नीति-निर्माताओं को जानकारी उपलब्ध कराएगी।
  • आठ केंद्रित ‘उभरते’ क्षेत्र: यह उत्कृष्टता केंद्र विशेष रूप से विकसित भारत 2047 के विज़न के लिये आवश्यक क्षेत्रों को लक्ष्य बनाता है—
    • हरित ऊर्जा: नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन एवं अमोनिया तथा डीकार्बोनाइज़ेशन।
    • प्रौद्योगिकी एवं अवसंरचना: सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर अवसंरचना और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर।
    • भविष्य की गतिशीलता: इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ई-मोबिलिटी) और उन्नत सेल रसायन (ACC)/बैटरी भंडारण।
  • जोखिम प्रबंधन: पारंपरिक थिंक-टैंक के विपरीत, CHAKRA को एक ‘व्यावहारिक कार्यान्वयन मंच’ के रूप में तैयार किया गया है, जो उभरती तकनीकों के लिये विशेष जोखिम मॉडल विकसित करेगा ताकि असंगत या समयपूर्व निवेश से बचा जा सके।
  • वैश्विक साझेदारियाँ: SBI ने संयुक्त परियोजना मूल्यांकन और सह-वित्तपोषण को सक्षम करने के लिये जापान के MUFG और SMBC सहित 21 घरेलू व वैश्विक वित्तीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं।

और पढ़ें: उभरते क्षेत्र, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री (ACC), भारतीय स्टेट बैंक (SBI)


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

तमिलनाडु में भारत का पहला मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर

चर्चा में क्यों?

भारत को वैश्विक समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के तहत तमिलनाडु में नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज़ पार्क (NSHIP, TN) की स्थापना की गई है, जो विशाल जहाज़ निर्माण क्लस्टर के विकास के लिये समर्पित देश का पहला विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है।

मुख्य बिंदु:

  • संयुक्त उद्यम: यह SPV वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण (VOCPA) जो केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख बंदरगाह है और तमिलनाडु राज्य उद्योग प्रोत्साहन निगम (SIPCOT) के बीच 50:50 की साझेदारी है।
  • रणनीतिक स्थान: यह क्लस्टर तूतीकोरिन (थूथुकुडी) में विकसित किया जाएगा, जो अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग मार्गों के निकट अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाएगा।
  • परियोजना विनिर्देश: यह ग्रीनफील्ड क्लस्टर लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा, जिसमें 2 किलोमीटर लंबा जलतट (वॉटरफ्रंट) शामिल होगा।
    • 1,000 एकड़ क्षेत्र विशेष रूप से शिपयार्ड के लिये आरक्षित होगा।
    • शेष 1,000 एकड़ में सहायक उद्योग, समुद्री उपकरण निर्माण तथा सामान्य सामाजिक अवसंरचना विकसित की जाएगी।
  • क्षमता लक्ष्य: इस क्लस्टर को ऐसे शिपयार्ड स्थापित करने के लिये डिज़ाइन किया गया है, जिनकी कुल क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) होगी।
  • आर्थिक गुणक प्रभाव: इस परियोजना से 55,000 से अधिक लोगों के लिये रोज़गार सृजन और बड़े पैमाने पर वैश्विक निवेश आकर्षित होने की संभावना है।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता: यह ‘प्लग-एंड-प्ले’ औद्योगिक केंद्र विकसित करके भारत की वैश्विक जहाज़ निर्माण में हिस्सेदारी बढ़ाने में सहायता करेगा।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

नागालैंड में नई पुष्पीय पौध प्रजाति होया नागाएंसिस की खोज

चर्चा में क्यों?

नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्त्ताओं ने नागालैंड के उच्च-पर्वतीय क्षेत्रों में एक नई पुष्पीय पौध प्रजाति की खोज की है।

मुख्य बिंदु:

  • वैज्ञानिक नाम: होया नागाएंसिस (Hoya nagaensis)
    • कम-अन्वेषित वनों में किये गए व्यवस्थित वनस्पति सर्वेक्षणों के दौरान इसका दस्तावेज़ीकरण किया गया।
  • खोज स्थल: कावुनहोउ सामुदायिक आरक्षित वन, फेक ज़िला, नागालैंड।
    • यह खोज सामुदायिक संरक्षण वाले वनों के महत्त्व  को रेखांकित करती है, क्योंकि ऐसे वन प्रायः मानव हस्तक्षेप से लगभग मुक्त होते हैं और जैव विविधता से समृद्ध रहते हैं।
  • IUCN स्थिति: अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered)।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: नागालैंड के उच्च-पर्वतीय वन पूर्वी हिमालयी जैव-विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा हैं।
  • अनुसंधान महत्त्व: यह खोज भारत के वनस्पति अभिलेखों और वैश्विक पादप विज्ञान के लिये महत्त्वपूर्ण आँकड़े जोड़ती है तथा क्षेत्र में आगे पारिस्थितिक एवं संरक्षण-आधारित अध्ययनों को प्रोत्साहित करती है।

और पढ़ें: IUCN, स्थानांतरण कृषि, जैव विविधता हॉटस्पॉट


हरियाणा Switch to English

हरियाणा में 39वाँ सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026

चर्चा में क्यों?

39वाँ सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड में शुरू हो गया है।

मुख्य बिंदु:

  • संस्करण: यह सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का 39वाँ संस्करण है, जिसका आयोजन वर्ष 1987 से प्रतिवर्ष किया जा रहा है।
  • उद्घाटन: इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति में किया।
  • थीम: वर्ष 2026 के संस्करण की थीम ‘लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत’ है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देना है।
    • थीम राज्य: उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम राज्यों के रूप में चुना गया है, जहाँ की विशिष्ट शिल्पकला, परंपराएँ तथा व्यंजन प्रदर्शित किये जा रहे हैं।
  • साझेदार देश: वर्ष 2026 मेले का साझेदार देश मिस्र है।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: इसमें भारत की विविध परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकनृत्य, संगीत प्रस्तुतियाँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
    • यहाँ हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, लोककला, पारंपरिक चित्रकला, धातुकर्म, मिट्टी के बर्तन, लकड़ी के शिल्प और क्षेत्रीय व्यंजन प्रदर्शित किये जा रहे हैं।
  • महत्त्व: यह मेला कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण, पारंपरिक शिल्प संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये एक प्रमुख मंच प्रदान करता है।

और पढ़ें: 38वाँ सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2025, आत्मनिर्भर भारत


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