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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • वर्तमान परिदृश्य में राजनीति का अपराधीकरण किये जाने से न सिर्फ राजनीतिक मूल्याें में गिरावट आ रही है बल्कि इसने सुशासन की स्थापना की आशा को भी धूमिल किया है। प्रस्तुत विषय पर चर्चा करते हुए सुधार के लिये किये जाने वाले उपायों को स्पष्ट कीजिये। (250 शब्द)

    20 Nov, 2019 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    प्रश्न विच्छेद

    • प्रश्नानुसार, राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण से पड़े नकारात्मक प्रभाव व इसमें सुधार के संबंध में किये जाने वाले उपायों पर चर्चा करनी है।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • राजनीति का अपराधीकरण किये जाने के संदर्भ में एक संक्षिप्त भूमिका देते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिये।

    • राजनीति व सुशासन पर पड़े नकारात्मक प्रभावों को संक्षेप में स्पष्ट कीजिये।

    • सुधार से संबंधित उपाय सुझाइये।

    • प्रश्नानुसार संक्षेप में निष्कर्ष दीजिये।

    भारत के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर नज़र डालें तो हम देख सकते हैं कि राजनीति में अपराधीकरण दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इससे न केवल राजनीतिक मर्यादाओं का ह्रास हो रहा है बल्कि यह सुशासन के प्रयासों को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। इस दिशा में सुधारों के लिये सरकार द्वारा एक अभिनव प्रयास राजनीतिज्ञों से जुड़े आपराधिक मामलों के त्वरित निपटान के लिये त्वरित अदालतों का गठन है।

    लोकतांत्रिक सुधारों से संबंधित एक संगठन के अनुसार, वर्तमान लोकसभा के 34 प्रतिशत सदस्यों पर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं तथा राज्यों के संदर्भ में तो यह स्थिति और भी भयावह है। ये विशिष्ट वर्ग ही अपने व्यक्तिगत हित के लिये न सिर्फ कानून की धज्जियाँ उड़ाते हैं बल्कि राजनीति व प्रशासन में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी आदि के माध्यम से राजनीति को अपराधियों का जमावड़ा बना देते हैं। राजनीति में बढ़ती इस प्रकार की गतिविधियों से सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र ही दूषित नहीं हो रहा है बल्कि इसने देश में सुशासन की स्थापना को भी असंभव सा बना दिया है क्योंकि राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ने से पारदर्शिता उत्तरदायित्व, समानता का समावेशन तथा विधि का शासन जैसे प्रमुख सुशासन के तत्त्वों की प्राप्ति संभव नहीं हैं। साथ ही, इसने लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की अवधारणा को भी कमज़ोर किया है।

    उपर्युक्त विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने तथा एक लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिये प्रशासन में कुछ सुधार किया जाना अपेक्षित है। इन सुधारों को हम निम्न रूपों में देख सकते हैं-

    • सुशासन के सिद्धांतों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाना चाहिये।
    • प्रशासन में जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करना चाहिये।
    • राजनीतिज्ञ व अपराधिक तत्त्वों की साठ-गाँठ पर नियंत्रण स्थापित किया जाना चाहिये।
    • राजनीतिक दलों के व्यय को नियंत्रित करने के लिये विधिक प्रयास किये जाने चाहिये।
    • भ्रष्ट व आपराधिक प्रवृत्ति में लिप्त व्यक्तियों के राजनीति में प्रवेश पर अंकुश लगाया जाना चाहिये।
    • द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग के आवश्यक सुझावों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना चाहिये।
    • प्रशासन में इस प्रकार की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये।

    इस प्रकार उपर्युक्त उपायों द्वारा सुधार के प्रयास किये जाने चाहिये क्योंकि देश की लोकतांत्रिक छवि को मज़बूत करने व विकास को बढ़ावा देने के लिये राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण पर नियंत्रण किया जाना अति आवश्यक है।

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