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स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरमेंट 2026

  • 27 Feb 2026
  • 68 min read

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

चर्चा में क्यों? 

स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरमेंट (SOE) 2026 रिपोर्ट, जिसे विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र तथा डाउन टू अर्थ द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया है, चेतावनी देती है कि मानवीय गतिविधियों के कारण कई ग्रह-सीमाएँ पार की जा रही हैं, साथ ही पारिस्थितिकी तंत्र का ह्रास के चलते भारत भर में मानव–बाघ संघर्ष भी तेज़ हो रहा है।

स्टेट ऑफ इंडियाज़ एनवायरमेंट (SOE) 2026 रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

  • ग्रह-सीमाओं का संकट: SOE 2026 रिपोर्ट चेतावनी देती है कि पृथ्वी की स्थिरता बनाए रखने वाली नौ में से सात ग्रह-सीमाएँ (Planetary Boundaries) पार हो चुकी हैं, जिनमें महासागरीय अम्लीकरण सातवीं पार की गई सीमा के रूप में उभरकर सामने आया है।
    • पार की जा चुकी ग्रह-सीमाओं में जलवायु परिवर्तन, जैवमंडलीय अखंडता, भूमि-प्रणाली में परिवर्तन, मीठे जल का क्षय, जैव-भू-रासायनिक प्रवाह, नवीन कृत्रिम तत्त्व (नोवेल एंटिटीज़) तथा महासागरीय अम्लीकरण शामिल हैं।
    • औद्योगिक युग के बाद से महासागरों की अम्लता में लगभग 30-40% की वृद्धि हुई है, जिससे समुद्री ईकोसिस्टम पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
  • जलवायु संकट की तीव्रता: रिपोर्ट रेखांकित करती है कि विश्व 1.5°C वैश्विक तापवृद्धि सीमा के उल्लंघन के कगार पर है, जो अपरिवर्तनीय जलवायु प्रभावों का संकेत देता है।
    • जलवायु संबंधी व्यवधान अनुमान से पहले ही सामने आ रहे हैं, जिससे प्रवाल भित्ति और अमेज़न वर्षावन जैसे ईकोसिस्टम गंभीर टिपिंग पॉइंट की ओर धकेले जा रहे हैं।
  • जैव विविधता और वनों में गिरावट: वैश्विक वन आवरण घटकर 59% रह गया है, जो 75% के सुरक्षित स्तर से काफी कम है, जबकि प्रजातियों के विलुप्त होने की दर प्रति मिलियन प्रजाति-वर्ष 100 से अधिक है (जो सुरक्षित सीमा से दस गुना अधिक है)।
    • प्राकृतिक आवासों का क्षरण और पारिस्थितिकी असंतुलन जैव विविधता के ह्रास को तीव्र कर रहे हैं।
  • स्वच्छ जल और प्रदूषण के खतरे: अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण स्वच्छ जल के भंडार गंभीर दबाव में हैं।
    • प्लास्टिक, सिंथेटिक रसायनों और अन्य नवीन तत्त्वों का बढ़ता प्रसार दीर्घकालिक पारिस्थितिक तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न करता है, जो प्रदूषण की बढ़ती चुनौती को रेखांकित करता है।
  • मानव-बाघ संघर्ष में वृद्धि: रिपोर्ट के अनुसार आवास क्षरण, शिकार प्रजातियों की कमी तथा वनों के निकट मानव गतिविधियों के बढ़ने से बाघों के व्यवहार में परिवर्तन आ रहा है और मानव-बाघ मुठभेड़ों की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
    • आक्रामक पौधा लैंटाना कैमरा अब वनों और झाड़ीदार क्षेत्रों के लगभग 50% भाग पर विस्तृत हो चुका है, जिससे देशी घासों का दमन हो रहा है और बाघों के लिये उपलब्ध शिकार प्रजातियाँ घट रही हैं। इससे बाघों को मवेशियों का शिकार करने के लिये विवश होना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप मानव-बाघ संपर्क और संघर्ष बढ़ जाता है।

अनुशंसाएँ

  • संस्थागत अखंडता: पर्यावरणीय प्रक्रिया-आधारित कागज़ी कार्यवाही की बजाय वास्तविक पारिस्थितिकीय सार को प्राथमिकता देने के लिये राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और पर्यावरणीय क्लियरिंग हाउसों को सुदृढ़ बनाना।
  • संप्रभु जलवायु कार्रवाई: राष्ट्रीय लेखांकन में 'ग्रहों की सीमाओं' को एकीकृत करना और तकनीक-नेतृत्व वाले, 'फुल-स्टैक' डीकार्बोनाइजेशन।
  • सह-अस्तित्व मॉडल: 'लैंडस्केप-स्केल' गवर्नेंस की ओर अग्रसर, जो स्थानीय समुदायों को संरक्षण में बाधा मानने के बजाय उन्हें प्राथमिक हितधारक के रूप में देखता है।

प्लैनेटरी बाउंड्री

  • परिचय: 'प्लैनेटरी बाउंड्रीज़' फ्रेमवर्क उन सुरक्षित सीमाओं को परिभाषित करता है जिनके भीतर मानवता पृथ्वी की जीवन-सहायता प्रणालियों को अस्थिर किये बगैर कार्य कर सकती है।
    • इसे सर्वप्रथम वर्ष 2009 में जोहान रॉकस्ट्रॉम के नेतृत्व में वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित किया गया था और वर्ष 2023 में अपडेट किया गया। यह नौ महत्त्वपूर्ण पृथ्वी प्रणाली प्रक्रियाओं की पहचान करता है जो ग्रहों की स्थिरता को नियंत्रित करती हैं।
    • इन बाउंड्री को पार करने से आकस्मिक और अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय परिवर्तनों का जोखिम बढ़ जाता है, जो पारिस्थितिक तंत्र, अर्थव्यवस्थाओं और मानव अस्तित्व के लिये खतरा उत्पन्न करते हैं।
    • ये बाउंड्री परस्पर संबंधित हैं, जिसका अर्थ है कि एक प्रणाली में व्यवधान दूसरों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
    • ये नीति निर्माताओं और वैज्ञानिकों को यह आकलन करने में मदद करते हैं कि क्या मानवीय गतिविधियाँ पृथ्वी को उसके 'सुरक्षित परिचालन स्थान' से पृथक् कर रही हैं।
  • नौ 'प्लैनेटरी बाउंड्रीज़' की स्थिति:
    • जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता गर्मी को रोकती है, जिससे वैश्विक तापन और जलवायु पैटर्न बदल जाते हैं। बढ़ते CO₂ स्तरों ने इस सीमा को सुरक्षित स्तर से परे पहुँचा दिया है।
    • बायोस्फीयर इंटीग्रिटी (जैव विविधता हानि): प्रजातियों के विलुप्त होने की त्वरित दर और पारिस्थितिक तंत्र का क्षरण पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन और लचीलेपन को कमज़ोर करता है।
    • भूमि प्रणाली में परिवर्तन: वनों की कटाई, कृषि और शहरीकरण ने वैश्विक वन आवरण को सुरक्षित स्तर से नीचे कर दिया है, जिससे कार्बन अवशोषण की क्षमता और जैव विविधता कमज़ोर हुई है।
    • मीठे जल की स्थिति में परिवर्तन: नदियों, झीलों और मृदा आर्द्रता के चक्रों में मानवीय हस्तक्षेप जल सुरक्षा, पारिस्थितिक तंत्र और जलवायु विनियमन के लिये खतरा उत्पन्न करता है।
    • बायोजियोकेमिकल फ्लो: उर्वरकों से निकलने वाला अतिरिक्त नाइट्रोजन और फॉस्फोरस पोषक चक्रों को बाधित करता है, जिससे यूट्रोफिकेशन और पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन उत्पन्न होता है।
    • नए प्रकार के पदार्थ (पारिस्थितिक तंत्र पर हमला): पर्याप्त सुरक्षा मूल्यांकन के बिना प्लास्टिक, कृत्रिम रसायन और आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (जीएमओ) जैसे नए पदार्थ पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
    • महासागरीय अम्लीकरण: औद्योगिक युग के बाद से महासागर 30-40% अधिक अम्लीय हो गए हैं, जो प्रवाल (Corals) और कवचधारी (शेल फोर्मिंग) जीवों को नुकसान पहुँचा रहे हैं जिससे महासागरों की कार्बन अवशोषण क्षमता कमज़ोर हो रही है।
    • वायुमंडलीय एरोसोल (सुरक्षित स्तर के भीतर, लेकिन संभावित जोखिम वाले): ये वायु में मौजूद कण हैं जो जलवायु और मानसून के प्रारूप को प्रभावित करते हैं। वर्तमान में, इनका स्तर सुरक्षित सीमा के भीतर है, लेकिन यह क्षेत्रीय रूप से व्यवधान उत्पन्न करते हैं।
    • समतापमंडलीय ओज़ोन क्षरण (सुरक्षित सीमा के भीतर): मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत हुए वैश्विक प्रयासों के परिणामस्वरूप ओज़ोन परत की बहाली पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हुई है।

निष्कर्ष:

SOE 2026 रिपोर्ट एक कठोर 'प्लेनेटरी हेल्थ चेक' (ग्रह के स्वास्थ्य की जाँच) के रूप में कार्य करती है, जो इस मूल सत्य को रेखांकित करती है कि “खराब पर्यावरण कभी भी अच्छी अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता।” चूँकि भारत नौ में से सात 'प्लेनेटरी बाउंड्रीज़' (ग्रह की सीमाओं) का उल्लंघन कर रहा है, इसलिये विकसित भारत @ 2047 के विज़न को प्राप्त करने के लिये भारत को ‘प्रतिक्रियात्मक क्षतिपूर्ति’ (Reactive Compensation) के मॉडल से बदलकर ‘सक्रिय क्षतिपूर्ति’ (Proactive Restoration) के मॉडल को अपनाना होगा।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. पर्यावरणीय शासन के एक उपकरण के रूप में प्लैनेटरी बाउंड्रीज़ फ्रेमवर्क की अवधारणा पर चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. प्लैनेटरी बाउंड्रीज़ क्या हैं?
ये सुरक्षित पारिस्थितिक सीमाएँ हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि मानव गतिविधियाँ पृथ्वी की जीवन-समर्थन प्रणालियों को अस्थिर न करें। इन सीमाओं के भीतर कार्य करके मानवता अपूरणीय पर्यावरणीय परिवर्तनों के जोखिम में वृद्धि किये बिना आगे बढ़ सकती है। इन सीमाओं का उल्लंघन गंभीर और अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति का खतरा उत्पन्न करता है।

2. SOE 2026 के अनुसार कितनी प्लैनेटरी बाउंड्रीज़ का उल्लंघन हो चुका है?
नौ में से सात ग्रहीय सीमाओं का अतिक्रमण हो चुका है। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि, भूमि-प्रणाली में बदलाव, ताज़े पानी की कमी, जैव-रासायनिक चक्र प्रवाह, नवीन तत्त्वों का निर्माण और महासागरों का अम्लीकरण शामिल हैं।

3. महासागरीय अम्लीकरण एक बड़ी चिंता क्यों है?
औद्योगिक युग के बाद से महासागरों की अम्लता में 30–40% की वृद्धि हुई है, जिससे प्रवाल भित्तियों, समुद्री जैव विविधता और महासागरों की कार्बन अवशोषण क्षमता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

4. लैंटाना कैमारा और मानव–बाघ संघर्ष के बीच क्या संबंध है?
यह आक्रामक पौधा स्थानीय घासों को दबाकर, शिकार की उपलब्धता को कम करता है और इसके परिणामस्वरूप, बाघों को पशुधन पर हमला करने के लिए मजबूर करता है। इससे मानव और बाघ के बीच संघर्ष में वृद्धि होती है।

5. SOE 2026 रिपोर्ट कौन-से संस्थागत सुधार सुझाती है?
रिपोर्ट में राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सशक्त बनाने, राष्ट्रीय लेखांकन में प्लैनेटरी बाउंड्रीज़ को शामिल करने तथा समुदाय-आधारित परिदृश्य को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।

https://www.youtube.com/watch?v=gI7i4pJ8gCE

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

मेन्स

प्रश्न. ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापन) की चर्चा कीजिये और वैश्विक जलवायु पर इसके प्रभावों का उल्लेख कीजिये। क्योटो प्रोटोकॉल, 1997 के आलोक में ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनने वाली ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को कम करने के लिये नियंत्रण उपायों को समझाइये। (2022)

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