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वीर सावरकर की पुण्यतिथि

  • 27 Feb 2026
  • 22 min read

स्रोत: पीआईबी

प्रधानमंत्री ने विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की 60वीं पुण्यतिथि (26 फरवरी, 2026) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका निधन 26 फरवरी, 1966 को बंबई में हुआ था।

विनायक दामोदर सावरकर

  • परिचय: वे एक क्रांतिकारी राष्ट्रवादी, राजनीतिक विचारक और समाज सुधारक थे, जो बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं से प्रेरित थे। उन्हें स्वातंत्र्यवीर सावरकर के नाम से भी जाना जाता था।
  • क्रांतिकारी राष्ट्रवाद: उन्होंने वर्ष 1899 में मित्र मेला की स्थापना की, जो बाद में वर्ष 1904 में अभिनव भारत सोसाइटी के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने लंदन में फ्री इंडिया सोसाइटी (1906) की भी स्थापना की। वे क्रांतिकारी गतिविधियों के केंद्र, इंडिया हाउस (श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा लंदन में स्थापित) से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए थे।
  • मुकदमा और कालापानी की सज़ा: उन्हें नासिक के कलेक्टर की हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था (नासिक षड्यंत्र मामला, 1910)। उन्हें मार्सिले (फ्राँस) के रास्ते ले जाते समय उन्होंने अंग्रेजों से भागने का एक प्रयास किया, लेकिन उन्हें दोबारा पकड़ लिया गया और मुकदमा चलाकर कालापानी की सज़ा सुनाई गई।
    • मुकदमे के बाद, उन्हें 50 साल के कारावास की सज़ा सुनाई गई और वर्ष 1911 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेलुलर जेल (कालापानी) में निर्वासित कर दिया गया। वर्ष 1911 से 1920 के बीच कई दया याचिका के बाद, उन्हें अंततः 1924 में रिहा किया गया।
  • राजनीतिक कॅरियर: उन्होंने वर्ष 1937 से 1943 तक हिंदू महासभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन (1942) का विरोध करते हुए इसे अव्यावहारिक बताया। इसके अलावा वे क्रिप्स मिशन (1942) और वेवेल योजना (1945) पर हुई चर्चाओं में भी शामिल रहे।
  • सामाजिक सुधार: उन्होंने अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया। इसके लिये उन्होंने अंतर-जातीय विवाह को प्रोत्साहित किया, वर्ष 1931 में रत्नागिरि में पतित-पावन मंदिर की स्थापना कर दलितों के मंदिर प्रवेश का समर्थन किया तथा समुद्र पार यात्रा (सी-क्रॉसिंग) के अधिकार का भी समर्थन किया।
  • साहित्यिक योगदान: उन्होंने अपनी प्रभावशाली पुस्तक 'द हिस्ट्री ऑफ द फर्स्ट वार ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस' (1909) लिखी, जिसने 1857 के विद्रोह को एक एकीकृत राष्ट्रवादी संघर्ष के रूप में पुनर्परिभाषित किया। वे अपने लेखन (जैसे– 'एसेंशियल्स ऑफ हिंदुत्व') के लिये कभी-कभी 'महरट्टा' (Mahratta) उपनाम का उपयोग भी करते थे।
    • वर्ष 1923 में रत्नागिरि में नज़रबंदी के दौरान, उन्होंने 'हिंदुत्व: हू इज़ अ हिंदू?' नामक कालजयी रचना की। इस पुस्तक में उन्होंने भारत को एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान के आधार पर 'हिंदू राष्ट्र' के रूप में परिभाषित किया।
  • विरासत: सावरकर के बलिदानों को एक प्रतीकात्मक सम्मान देते हुए वर्ष 2002 में पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे का नाम बदलकर वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कर दिया गया।

Vinayak_Damodar_Savarkar

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