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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 26 Feb 2026
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छत्तीसगढ़ बजट 2026–27

चर्चा में क्यों?

  • छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य विधानसभा में बजट 2026-27 पेश किया, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने ₹1.72 लाख करोड़ का 'संकल्प बजट' प्रस्तुत किया।

मुख्य बिंदु:

  • बजट ढाँचा और विज़न: यह बजट 'SANKALP' (संकल्प) की अवधारणा पर आधारित है, जो GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता/किसान, नारी) और GATI (शासन, बुनियादी ढाँचा, प्रौद्योगिकी, उद्योग) के स्तंभों पर निर्मित है।
    • S – समावेशी विकास (Samaveshi Vikas): यह सुनिश्चित करना कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं, किसानों, युवाओं, आदिवासी समुदायों और वंचित समूहों तक पहुँचे।
    • A – अधोसंरचना (Infrastructure): आर्थिक गतिविधियों को गति देने हेतु सड़कों, जल संसाधनों, शैक्षिक नगर, स्वास्थ्य सुविधाओं और कनेक्टिविटी सहित भौतिक एवं डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना।
    • N – निवेश (Investment): औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिये निवेश को आकर्षित करना।
    • K – कुशल मानव संसाधन (Skilled Human Resources): भविष्य के लिये तैयार कार्यबल बनाने हेतु कौशल विकास और शिक्षा को प्राथमिकता देना।
    • A – अंत्योदय (Antyodaya): उन कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना जो सबसे गरीब और सबसे कमज़ोर वर्गों, जिनमें जनजातीय क्षेत्र तथा दूरस्थ क्षेत्र शामिल हैं, का उत्थान करते हैं।
    • L – आजीविका (Livelihood): कृषि सहायता, MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) विकास, पर्यटन और रोज़गार योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण तथा शहरी आजीविका में सुधार करना।
    • P – नीति से परिणाम तक (Policy to Results): स्थानीय स्तर पर नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और मापने योग्य परिणामों को सुनिश्चित करना।
  • राजकोषीय स्थिति (₹ करोड़ में):
    • सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): 7,09,553
    • कुल प्राप्तियाँ: 1,72,000
    • कुल व्यय: 1,72,000
    • राजस्व व्यय: 1,45,000
    • पूंजीगत व्यय: 26,500
    • बजट में पूंजीगत व्यय का अनुपात: 15.4%
    • GSDP में पूंजीगत व्यय का अनुपात: 3.7%
    • राजस्व घाटा: 2,000
    • राजकोषीय घाटा: 20,400
    • GSDP के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा: 2.87%
  • प्रमुख योजनाएँ (₹ करोड़ में):
    • कृषक उन्नति योजना: 10,000
    • महतारी वंदन योजना: 8,200
    • जल जीवन मिशन: 3,000 करोड़
    • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: 2,000 करोड़
    • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: 1,725 करोड़
    • समग्र शिक्षा अभियान: 1,500 करोड़
    • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी): 825 करोड़
    • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: 820 करोड़
    • दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि श्रमिक कल्याण योजना: 600 करोड़
    • समग्र विकास योजना (ग्रामीण विकास): 300 करोड़
  • प्रमुख विभागों के लिये प्रावधान (₹ करोड़ में):
    • स्कूल शिक्षा: 22,360 करोड़
    • पंचायत एवं ग्रामीण विकास: 16,560 करोड़
    • कृषि: 13,507 करोड़
    • खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति: 12,820 करोड़
    • महिला एवं बाल विकास: 11,000 करोड़
    • लोक निर्माण: 9,451 करोड़
    • ऊर्जा: 9,015 करोड़
  • सामाजिक क्षेत्र एवं कल्याण:
    • स्वास्थ्य, पोषण एवं परिवार कल्याण: स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने हेतु ₹3,500 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, जिसमें आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।
    • सरकारी कर्मचारियों के लिये ₹100 करोड़ के प्रावधान के साथ कैशलेस चिकित्सा उपचार योजना।
    • बेहतर ग्रामीण स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ नए ज़िला अस्पतालों और विशिष्ट स्वास्थ्य संस्थानों (जैसे कैंसर और हृदय केंद्र) की योजना बनाई गई है।
  • महिला एवं बाल विकास: रानी दुर्गावती योजना: बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर दीर्घकालिक वित्तीय सहायता के रूप में ₹1.5 लाख प्रदान किये जाएंगे।
    • संपत्ति के पंजीकरण शुल्क में 50% की छूट महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व के लिये  प्रोत्साहित करती है।
    • ₹1,400 करोड़ के आवंटन के साथ पेंशन और कल्याण योजनाओं को बढ़ाया गया।
    • मातृ एवं बाल कल्याण कार्यक्रमों और आँगनवाड़ी सेवाओं का विस्तार बचपन के पोषण को मज़बूत करता है।
    • महतारी सहयोग: मातृत्व कल्याण और पोषण योजनाओं के लिये पर्याप्त आवंटन, जिससे मातृत्व एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था के परिणामों में सुधार हो सके।
      • रायपुर में 250 महतारी सदन और 200 सीटों वाला एक OBC गर्ल्स हॉस्टल बनाना।
  • शिक्षा और कौशल विकास:
    • शैक्षिक नगर: शिक्षा की पहुँच एवं गुणवत्ता में सुधार के लिये अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में शैक्षिक नगर बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
    • स्कूल शिक्षा विभाग को सबसे अधिक आवंटन दिया गया है, जिसमें ₹22,000 करोड़ की राशि शामिल है।
    • मानव पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने के लिये विश्वविद्यालय अनुदान (University grants), ITI और पॉलिटेक्निक संस्थानों के आधुनिकीकरण हेतु धनराशि आवंटित की गई है।
    • नवाचार, कौशल निर्माण और प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिये  AI मिशन, निपुण मिशन और स्पोर्ट्स एक्सीलेंस (खेल उत्कृष्टता) मिशन जैसे नए मिशन शुरू किये गए हैं।
  • बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी
    • लोक निर्माण के लिये ₹9,450 करोड़ आवंटित किये गए हैं, जिसका मुख्य ध्यान सड़कों के विस्तार पर है।
    • 'मुख्यमंत्री त्वरित सड़क कनेक्टिविटी योजना' के लिये ₹200 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
    • सिंचाई और ग्रामीण जलापूर्ति के लिये कुल ₹3,500 करोड़ की जल संसाधन योजनाएँ प्रस्तावित हैं।
    • कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिये क्षेत्रीय हवाई अड्डों (बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर) के विस्तार हेतु समर्पित फंड आवंटित किया गया है।
    • नए सब-स्टेशनों और रूफटॉप सोलर (छत पर सौर ऊर्जा) पहलों के साथ विद्युत के बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जाएगा।
  • कृषि एवं ग्रामीण विकास
    • कृषि उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिये 'कृषक उन्नति योजना' के तहत ₹10,000 करोड़ का प्रावधान।
    • मतनार और देउरगाँव बैराज (₹2,024 करोड़) जैसी सिंचाई परियोजनाओं को सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने के लिये डिज़ाइन किया गया है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जो पहले अछूते थे।
    • भूमिहीन कृषि परिवारों को सहायता प्रदान कर उनकी आजीविका सुरक्षा को बढ़ाया गया है।
  • जनजातीय, बस्तर और क्षेत्रीय फोकस: बस्तर और सरगुजा जैसे ऐतिहासिक रूप से वंचित क्षेत्रों के समावेशी विकास पर मुख्य ज़ोर दिया गया है:
    • लक्षित उत्थान: बुनियादी ढाँचे, आजीविका, शिक्षा और बस्तर-सरगुजा ओलंपिक जैसी सांस्कृतिक पहलों के माध्यम से इन क्षेत्रों का विकास।
    • सुरक्षा उपाय: शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिये बस्तर फाइटर्स के 1,500 नए पदों सहित अतिरिक्त सुरक्षा उपाय।
  • औद्योगिक विकास और आर्थिक विस्तार:
    • निवेश और रोज़गार को बढ़ावा देने के लिये 23 नए औद्योगिक पार्क स्थापित करने हेतु ₹250 करोड़ का प्रावधान।
    • औद्योगिक विकास को मज़बूत करने हेतु MSME, स्टार्टअप और निवेश मिशनों पर ज़ोर।
    • आर्थिक अवसरों के विविधीकरण के लिये  मैनपाट और अन्य गंतव्यों के लिये पर्यटन विकास कोष।
    • आर्थिक नियोजन में पर्यावरण और हरित पहलों का समावेश।
  • राजकोषीय और सामाजिक संतुलन: बजट का लगभग 40% सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिये, 36% आर्थिक गतिविधियों के लिये और शेष प्रशासनिक एवं सामान्य सेवाओं के लिये आरक्षित है। यह संतुलित आवंटन सुनिश्चित करता है कि कल्याण और विकास साथ-साथ चलें।
  • मिशन-आधारित विकास पहल: शासन को आधुनिक बनाने, नवाचार का समर्थन करने और उभरते क्षेत्रों में रोज़गार सृजन के लिये निम्नलिखित मिशन शुरू किये गए हैं:
    • मुख्यमंत्री AI मिशन
    • पर्यटन विकास मिशन
    • स्पोर्ट्स एक्सीलेंस (खेल उत्कृष्टता) मिशन
    • बुनियादी ढाँचा मिशन
    • स्टार्टअप और कौशल मिशन
  • पर्यावरण एवं वन विकास:
    • वन संरक्षण के लिये आवंटन के साथ वन विभाग में 1,000 पदों पर भर्ती और अभयारण्य एवं ईको-टूरिज़्म विकास के लिये महत्त्वपूर्ण फंडिंग।
    • सतत और हरित आर्थिक विकास की पहलों पर विशेष ज़ोर।
  • महत्त्व: छत्तीसगढ़ बजट 2026-27, जिसकी थीम 'SANKALP' है, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे, उद्योग, जनजातीय कल्याण, महिला सशक्तीकरण और सतत विकास को मज़बूत करके सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का एक व्यापक खाका (Blueprint) प्रदान करता है। जन-कल्याणकारी व्यय और आर्थिक प्रोत्साहन के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण के साथ, इस बजट का लक्ष्य राज्य को समावेशी विकास एवं दीर्घकालिक समृद्धि की ओर ले जाना है।

राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

UN ने चार भारतीय राज्यों में सड़क सुरक्षा वित्तपोषण परियोजना लॉन्च की

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) ने भारत में एक 'सतत सड़क सुरक्षा वित्तपोषण परियोजना' (Sustainable Road Safety Financing Project) शुरू की है, जिसका उद्देश्य चयनित राज्यों में सड़क सुरक्षा हस्तक्षेपों के लिये वित्तीय तंत्र और क्षमता को मज़बूत करना है।

  • इस परियोजना का उद्घाटन नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा के लिये संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत, जीन टॉड (Jean Todt) की यात्रा के दौरान किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: इस पहल का लक्ष्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिये सतत और समन्वित वित्तपोषण तंत्र स्थापित करना है।
    • तकनीकी और नीतिगत सहायता प्रदान करने के लिये यह परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), UNICEF और 'सेव लाइफ फाउंडेशन' (Save LIFE Foundation) जैसे गैर-लाभकारी संगठनों के साथ साझेदारी में लागू की जा रही है।
  • फोकस राज्य: प्रभावी सड़क सुरक्षा कार्य योजनाओं को लागू करने की क्षमता निर्माण के लिये यह वित्तपोषण परियोजना भारत के चार राज्यों राजस्थान, केरल, तमिलनाडु और असम में शुरू की जा रही है।
  • आवश्यकता: भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है, जिससे स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में व्यापक क्षति होती है। अनुमानों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं से देश की GDP का लगभग 3% नुकसान होता है।
  • सतत वित्तपोषण रणनीतियाँ: यह परियोजना सड़क सुरक्षा के लिये अनुमानित और निरंतर फंड सुनिश्चित करने हेतु रोड सेफ्टी बॉण्ड, समर्पित कर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) जैसे नवीन वित्तीय उपकरणों को बढ़ावा देती है।
  • क्षमता निर्माण: इसका एक मुख्य हिस्सा राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर सड़क सुरक्षा निवेशों की योजना बनाने, बजट तैयार करने तथा उनकी निगरानी करने के लिये संस्थागत क्षमता को मज़बूत करना है।
  • वैश्विक संरेखण: यह पहल 'सड़क सुरक्षा के लिये दशक की कार्ययोजना 2021-2030' (Global Plan for the Decade of Action for Road Safety) का समर्थन करती है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक पूरे विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों को आधा करना है।

और पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र, सड़क सुरक्षा, WHO, UNICEF, PPP


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

रॉब जेटन नीदरलैंड के सबसे युवा और पहले समलैंगिक प्रधानमंत्री बने

चर्चा में क्यों?

रॉब जेटन ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है, उन्होंने देश का सबसे युवा और पहला समलैंगिक नेता बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने फरवरी 2026 में कार्यभार सॅंभाला।

मुख्य बिंदु:

  • ऐतिहासिक नेतृत्व: रॉब जेटन 38 वर्ष की आयु में डच इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री और नीदरलैंड का नेतृत्व करने वाले पहले घोषित समलैंगिक व्यक्ति बन गए हैं। यह राजनीति में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व की प्रगति को रेखांकित करता है।
    • वे तीन दलों के अल्पमत गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनकी मध्यमार्गी पार्टी डेमोक्रेट्स 66 (D66), मध्य-दक्षिणपंथी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अपील (CDA) और उदारवादी पीपल्स पार्टी फॉर फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी (VVD) शामिल है। निचली सदन की 150 सीटों में से इस गठबंधन के पास कुल 66 सीटें हैं।
  • शपथ ग्रहण समारोह (Swearing-In Ceremony): हेग (The Hague) स्थित हुइस टेन बॉश पैलेस (Huis ten Bosch Palace) में राजा विलेम-अलेक्जेंडर ने नई सरकार को शपथ दिलाई।
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि: जेटन के राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 2010 में नगर निगम स्तर से हुई थी।
    • वे वर्ष 2017 में डच प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में शामिल हुए और प्रधानमंत्री बनने से पहले जलवायु एवं ऊर्जा नीति मंत्री तथा उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
  • महत्त्व: जेटन के नेतृत्व को समावेशिता और विविधता के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, विशेष रूप से LGBTQ+ समुदाय के लिये। नीदरलैंड समान अधिकारों को बढ़ावा देने के लिये जाना जाता है (नीदरलैंड वर्ष 2001 में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने वाला विश्व का पहला देश था)।

और पढ़ें: भारत-नीदरलैंड


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

पाँच नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे स्टेशनों को ‘ईट राइट स्टेशन’ सर्टिफिकेशन मिला

चर्चा में क्यों?

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के अंतर्गत आने वाले पाँच रेलवे स्टेशनों को यात्रियों के लिये सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन सेवाएँ सुनिश्चित करने हेतु भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 'ईट राइट स्टेशन' (Eat Right Station) प्रमाणन से सम्मानित किया गया है।

मुख्य बिंदु:

    • ईट राइट स्टेशन: यह पहल FSSAI के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'ईट राइट इंडिया' आंदोलन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनता के बीच खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और पोषण को बढ़ावा देना है।
    • सम्मानित स्टेशन: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के पाँच स्टेशनों को स्टेशन परिसर में स्थित खाद्य आउटलेट्स पर उच्च स्तर की स्वच्छता, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिये यह प्रमाणन प्रदान किया गया है।
      • दीमापुर रेलवे स्टेशन (नागालैंड)
      • अलीपुरद्वार रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल)
      • कोकराझार रेलवे स्टेशन (असम)
      • गोलकगंज रेलवे स्टेशन (असम)
      • न्यू माल जंक्शन रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल)
    • प्रमाणन के मानदंड: यह प्रमाणन खाद्य सुरक्षा दिशानिर्देशों, स्वच्छता प्रोटोकॉल, भोजन के उचित भंडारण एवं रख-रखाव, सुरक्षित जल की उपलब्धता और उपभोक्ता जागरूकता उपायों के कड़े मूल्यांकन के बाद दिया जाता है।
    • कार्यान्वयन भागीदार: इस प्रमाणन को सफल बनाने में FSSAI, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे, खाद्य विक्रेताओं और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने मिलकर खाद्य सुरक्षा बुनियादी ढाँचे तथा यात्री जागरूकता में सुधार के लिये प्रयास किये।
    • पहल का विस्तार: ‘ईट राइट स्टेशन’ कार्यक्रम सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार के अन्य राष्ट्रीय प्रयासों, जैसे स्वच्छ भारत मिशन और सुरक्षित जल पहल का पूरक है तथा अन्य रेलवे ज़ोनों को भी इसी तरह के मानक अपनाने हेतु प्रोत्साहित करता है।

    और पढ़ें: ईट राइट स्टेशन, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), स्वच्छ भारत मिशन


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