हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • गीता और कांट के दर्शन की तुलना कीजिये।

    12 Sep, 2019 सामान्य अध्ययन पेपर 4 सैद्धांतिक प्रश्न

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण

    • प्रभावी भूमिका में गीता और कांट के दर्शन का संक्षिप्त परिचय दीजये।

    • दोनों दर्शनों में समानता लिखिये।

    • दोनों दर्शनों में अंतर बताइये।

    • अंततः सारगर्भित निष्कर्ष लिखिये।

    गीता हिन्दू धर्म तथा वेदांत दर्शन का सबसे महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है। वेदों और उपनिषदों में जिन नैतिक और दार्शनिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है, गीता उनमें समन्वय स्थापित करके उनका सारतत्त्व प्रस्तुत करती है। वहीं पश्चिमी दर्शन में निरपेक्षवादी नीतिमीमांसा का चरम विकास कांट के दर्शन में दिखाई देता है। इस सिद्धांत का सार यह है कि नैतिकता न तो मनुष्य की इच्छाओं या भावनाओं से संबंधित होती है और न ही कार्यों के परिणामों से, नैतिकता का एकमात्र संबंध विशुद्ध कर्त्तव्य चेतना से है।

    गीता और कांट के दर्शन में समानताएँ-

    • गीता में फल की आसक्ति का विरोध है कांट ने भी इसे अन्य रूप में कहा है- कर्त्तव्य, कर्त्तव्य के लिये फल के लिये नहीं।
    • दोनों में मन और इंद्रियों के नियमन पर बल दिया गया है।
    • दोनों में भौतिक सुखों की बजाय अध्यात्मिक सुखों पर बल दिया गया है।
    • दोनों संकल्प स्वातंत्र्य के समर्थक हैं।

    गीता और कांट के दर्शन में अंतर-

    • गीता में नीतिशास्त्र ईश्वर पर आधारित है तथा स्वयं ईश्वर ने ही नैतिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, जबकि कांट का दर्शन ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है। उसकी धारणा है कि विश्व में नैतिक व्यवस्था को चलाने के लिये ईश्वर के अस्तित्व में आस्था रखनी चाहिये।
    • गीता के अनुसार, फल की आकांक्षा के बिना कर्म करना चाहिये क्योंकि फल निश्चित ही मिलता है, जबकि कांट के अनुसार, फल मिलने की कोई गारंटी नहीं होती।
    • गीता में कठोरता अपेक्षाकृत कम है तथा यह सहज मानवीय भावनाओं को स्वीकार करती है जबकि कांट के दर्शन में कठोरवाद है तथा यह वासनाओं का दमन ज़रूरी मानता है।

    स्पष्टतः एक तरफ जहाँ गीता मानव जीवन के चार आश्रमों तथा पुरुषार्थों, कर्मवाद, पुनर्जन्म, आत्मा की अमरता आदि सिद्धांतों द्वारा समाज में नैतिकता स्थापित करने का प्रयास करती है तो वहीं दूसरी तरफ कांट का दर्शन प्रत्येक स्थिति में नैतिकता के पालन का समर्थन करता है।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close