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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • प्रश्न :

    भारत के कायापलट के लिये भारत सरकार ने नीति आयोग की स्थापना की है। नीति आयोग के कार्य और भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए इसके समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करें।

    01 Jul, 2017 सामान्य अध्ययन पेपर 2 राजव्यवस्था

    उत्तर :

    वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और विकास की आवश्यकताओं को देखते हुए भारत सरकार ने योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग (NITI: National Institution for Transforming India) की स्थापना की। इसका उद्देश्य निजी क्षेत्र को बाधित किये बिना नीति निर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ाते हुए प्रतिस्पर्धी संघवाद एवं सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना है।

    नीति आयोग के कार्य और भूमिकाः कैबिनेट प्रस्ताव द्वारा नीति आयोग के लिये अनेक कार्यों को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें चार प्रमुख शीर्षकों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है-

    (i) सहकारी संघवाद को बढ़ावा देनाः 

    • समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र एवं राज्यों के कार्यों की ओवरलैपिंग से निपटना।
    • सूचनाओं एवं अनुभवों के आदान-प्रदान की सुविधा के माध्यम से स्वस्थ अंतर-सरकारी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना।
    • केंद्र प्रायोजित योजनाओं को युक्तिसंगत बनाने का कार्य भी नीति आयोग का सौंपा गया था जिसे आयोग ने पूरा कर लिया है। 

    (ii) रणनीतिक दृष्टिकोण तथा दीर्घकालिक नीतियों के लिये फ्रेमवर्क का निर्माणः 

    • राष्ट्रीय स्तर पर विकास के लिये गाँव, ब्लॉक और जिला स्तर पर ‘बॉटम-अप अप्रोच’ से नियोजन करना एवं राज्य सरकारों के निचले स्तर तक नीतियों की रूपरेखा तैयार करना। 
    • मैक्रो एवं क्षेत्रीय स्तर के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी नियोजन करना।

    (iii) नवोन्मेष और ज्ञान केंद्र के रूप में विकासः

    • नीति आयोग की भूमिका रणनीतिक नियोजन के लिये हितधारकों के बीच भागीदारी को बढ़ावा देने के लिये एक थिंक-टेंक के रूप में है। इसके लिये इसने नीति व्याख्यान, अटल इनोवेशन मिशन (AIM) जैसे नवोन्मेषी कदम भी उठाए हैं।

    (iv) समन्वयः

    • आयोग का एक प्रमुख कार्य अंतर-सरकारी और अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना है जो पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा, विकास आदि के लिये आवश्यक है।

    चुनौतियाँः

    • नीति आयोग की व्यापक भूमिका एवं कार्यों को देखते हुए अधिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिये इसे वित्त आयोग की तरह संवैधानिक निकाय बनाना चाहिये।
    • नीति आयोग की संरचना को देखते हुए यह आशंका जताई जाती है कि इस पर नौकरशाही के हावी होने का खतरा है।
    • नीति आयोग के साथ विभिन्न मंत्रालयों के संघर्ष का खतरा है क्योंकि अनेक मुद्दों पर ओवरलैपिंग की संभावनाएँ बनी रहेंगी।

    निष्कर्षः नीति आयोग की सफलता मुख्यतः केंद्र-राज्य समन्वय पर निर्भर रहेगी अतः केंद्र सरकार को राज्यों को अपने विश्वास में  लेने का प्रयास करना चाहिये। इस संबंध में अंतर-राज्यीय परिषद के साथ नीति आयोग का समन्वय एक वांछनीय कदम होगा। 

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