मुख्य परीक्षा
वर्षांत समीक्षा 2025: व्यय विभाग
- 14 Jan 2026
- 60 min read
चर्चा में क्यों?
वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग (DoE) बड़े पैमाने पर लाभों के डिजिटलीकरण, राज्यों में रणनीतिक पूंजी निवेश और व्यापक नीतिगत सुधारों के माध्यम से वित्तीय प्रबंधन में परिवर्तनकारी क्षमता प्रदर्शित कर चुका है।
व्यय विभाग की मुख्य उपलब्धियाँ क्या हैं?
- पारदर्शिता के लिये DBT का विस्तार: सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) वर्ष 2025-26 में 966 प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजनाओं की आधारशिला बन गई है, जिससे 210.56 करोड़ लेनदेन (31 दिसंबर, 2025 तक) के माध्यम से लाभार्थियों को 2.87 लाख करोड़ रुपये सीधे और वास्तविक समय में भुगतान किये गए।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer–DBT) से संबंधित ओपन हाउस सेशंस एवं क्षेत्रीय सम्मेलनों के माध्यम से नागरिक सहभागिता को सुदृढ़ कर शासन को अधिक उत्तरदायी, समावेशी एवं नागरिक-उन्मुख बनाया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर सरकारी निधियों के पारदर्शी, दक्ष तथा जवाबदेह प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके एवं लाभ का प्रेषण सही पात्रों तक समयबद्ध रूप से हो सके।
- राज्यों में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना: ‘पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता (SASCI) योजना’ को लागू किया गया, जिसके तहत आवंटन 12,000 करोड़ रुपये (2020-21) से बढ़ाकर 1,50,000 करोड़ रुपये (2025-26) किया गया।
- वर्ष 2020-21 से अब तक राज्यों को 4,49,845 करोड़ रुपये वितरित किये गए हैं, जिससे उनकी उत्पादक क्षमता में वृद्धि हो और निजी निवेश को प्रोत्साहन मिले।
- Covid-19 महामारी के बीच वर्ष 2020-21 में शुरू की गई 'SASCE' (राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिये विशेष सहायता) योजना राज्यों को विशेष रूप से पूंजीगत व्यय हेतु 50 वर्षीय ब्याजमुक्त ऋण प्रदान करती है। यह आर्थिक सुधार को गति देती है, क्योंकि पूंजीगत व्यय का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर 'उच्च गुणक प्रभाव/मल्टीप्लायर इफेक्ट' बहुत अधिक होता है, इसमें खर्च किये गए प्रत्येक ₹1 के बदले ₹3 का आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
- सुधारों से जुड़े प्रोत्साहनों के साथ राज्यों को उधार की सुविधा: 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप वर्ष 2025-26 के लिये राज्यों की शुद्ध उधार सीमा (NBC) को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3% पर निर्धारित किया गया।
- विद्युत क्षेत्र सुधारों से संबद्ध प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन के तहत राज्यों को GSDP के अतिरिक्त 0.5% तक उधारी की अनुमति दी गई, जिससे कार्यकुशलता बढ़ी, सब्सिडी में DBT को बढ़ावा मिला और वितरण हानियों में कमी आई।
- सार्वजनिक खरीद प्रणाली का आधुनिकीकरण: व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिये खरीद मैनुअलों (सामान, परामर्श एवं गैर-परामर्श सेवाएँ, कार्य) में व्यापक संशोधन किया गया तथा रिवर्स ऑक्शन और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी सुधार जैसी आधुनिक प्रक्रियाएँ लागू की गईं।
- वित्त आयोग के अनुदानों और आपदा कोष का प्रबंधन: 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं को लागू किया, जिसमें विकास-पश्चात राजस्व घाटा, स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये अनुदान जारी किये गए।
- वर्ष 2025-26 में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के केंद्रीय भाग के रूप में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक और राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिये 5,200 करोड़ रुपये से अधिक जारी किये गए।
- राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन कोष, राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, आपदा प्रबंधन में सहायक योजनाएँ हैं।
- शिकायत निवारण: स्वचालित ग्राहक शिकायत निवारण प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष 150,000 से अधिक शिकायतों के समाधान को सुव्यवस्थित किया गया।
- वेतन संबंधी सुधार: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढाँचों की समीक्षा और संशोधन के लिये 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया गया।
ऋण संबंधी प्रावधान
- भारतीय संविधान के भाग बारह का अध्याय II संघ और राज्यों के ऋण से संबंधित है। इसमें दो प्रमुख प्रावधान हैं:
- अनुच्छेद 292 के तहत भारत सरकार (केंद्र सरकार) द्वारा ऋण को नियंत्रित किया जाता है, जो उसे भारत की संचित निधि के संपार्श्विक ऋण लेने का अधिकार देता है, यह संसद द्वारा निर्मित कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन है।
- अनुच्छेद 293 राज्यों द्वारा ऋण को नियंत्रित करता है।
- अनुच्छेद 293 (3) स्पष्ट करता है कि एक राज्य, यदि वह केंद्र सरकार (या केंद्र या उसके पूर्ववर्ती से कोई बकाया ऋण/गारंटी) का ऋणी बना रहता है, तो उसे कोई अन्य ऋण लेने से पहले भारत सरकार की पूर्व सहमति प्राप्त करनी होगी।
वर्तमान ऋण संरचना
- केंद्र सरकार के लिये, ऋण-से-GDP अनुपात वर्ष 2024–25 में 57.1% और 2025–26 में 56.1% होने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य इसे वर्ष 2030–31 तक 50 ± 1% तक पहुँचाना है।
- वर्तमान में, राज्य सरकारें कुल सामान्य सरकारी ऋण का लगभग एक-तिहाई भाग धारित करती हैं, वर्ष 2014–15 और 2019–20 के बीच समग्र सार्वजनिक ऋण में वृद्धि के 50% से अधिक में योगदान दिया।
वित्त मंत्रालय
- परिचय: वित्त मंत्रालय सरकार की वित्तीय व्यवस्था का प्रबंधन करता है और सभी आर्थिक एवं वित्तीय मामलों की देख-रेख करता है। इसकी ज़िम्मेदारियों में कराधान, वित्तीय विधान, वित्तीय संस्थान, पूंजी बाज़ार, केंद्र-राज्य वित्त तथा केंद्रीय बजट की तैयारी शामिल हैं।
- यह भारतीय राजस्व सेवा, भारतीय आर्थिक सेवा, भारतीय लागत लेखा सेवा तथा भारतीय सिविल लेखा सेवा जैसी सेवाओं/कैडरों का भी नियंत्रण करता है।
- वित्त मंत्रालय के अंतर्गत विभाग: यह मंत्रालय छह विभागों के माध्यम से कार्य करता है, जिनमें आर्थिक कार्य विभाग, राजस्व विभाग, व्यय विभाग तथा वित्तीय सेवाएँ विभाग शामिल हैं।
- आर्थिक कार्य विभाग: यह केंद्रीय बजट की तैयारी करता है तथा समष्टि-अर्थव्यवस्था और राजकोषीय नीति, सार्वजनिक ऋण और पूंजी बाज़ारों का प्रबंधन करता है। यह मुद्रा निर्माण, बाह्य वित्तीय संबंधों (जैसे– G20, BRICS) का संचालन करता है और निवेशों (FDI, NIIF) की निगरानी भी करता है।
- वित्तीय सेवाएँ विभाग: यह बैंकिंग, बीमा और पेंशन सुधारों की देख-रेख करता है, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) और NABARD जैसे वित्तीय संस्थानों का प्रबंधन करता है, तथा PMJDY, PMSBY और PMMY जैसी प्रमुख योजनाओं का संचालन करता है।
निष्कर्ष
व्यय विभाग डिजिटल प्लेटफाॅर्म, सुधार-आधारित प्रोत्साहनों, पूंजीगत व्यय समर्थन तथा खरीद सुधारों के माध्यम से राजकोषीय दक्षता और सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करता है। ये प्रयास पारदर्शी शासन, राज्य वित्त और सेवा प्रदायगी को प्रबल करते हुए दीर्घकालिक आर्थिक विकास लक्ष्यों के अनुरूप सार्वजनिक व्यय को संरेखित करते हैं।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्र. आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में राज्यों को पूंजीगत व्यय हेतु विशेष सहायता योजना की भूमिका का परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत के DBT पारिस्थितिक तंत्र में PFMS की क्या भूमिका है?
PFMS वास्तविक समय में पारदर्शी निधि अंतरण को सक्षम बनाता है और 966 DBT योजनाओं का समर्थन करता है, जिससे लास्ट-माइल डिलीवरी और राजकोषीय जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
2. राज्यों को पूंजीगत व्यय हेतु विशेष सहायता योजना क्या है?
यह योजना राज्यों को 50 वर्षों की ब्याज-मुक्त ऋण सहायता प्रदान करती है, जिससे पूंजीगत व्यय बढ़े, निजी निवेश आकर्षित हो और उत्पादक क्षमता में वृद्धि हो।
3. नेट बॉरोइंग सीलिंग राजकोषीय अनुशासन को कैसे समर्थन देती है?
15वें वित्त आयोग के अनुसार GSDP के 3% की नेट बॉरोइंग सीलिंग राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता और समष्टि-अर्थव्यवस्था में संतुलन स्थापित करती है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से किसको/किनको भारत सरकार के पूंजी बजट में शामिल किया जाता है? (2016)
1. सड़कों, इमारतों, मशीनरी आदि जैसी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण पर व्यय
2. विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण
3. राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों को अनुदत्त ऋण और अग्रिम
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
मेन्स
प्रश्न. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के माध्यम से सरकारी प्रदेय व्यवस्था में सुधार एक प्रगतिशील कदम है, किंतु इसकी अपनी सीमाएँ भी हैं। टिप्पणी कीजिये। (2022)