अंतर्राष्ट्रीय संबंध
भारत और ब्राज़ील सहयोग को मज़बूत करना
- 23 Feb 2026
- 101 min read
प्रिलिम्स के लिये: ब्रिक्स, G20, जैव ईंधन गठबंधन (GBA), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPIs), एंटी-डंपिंग/काउंटरवेलिंग ड्यूटी, दुर्लभ मृदा तत्त्व, महत्त्वपूर्ण खनिज, ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF), जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (NSG), अमेज़न, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन
मेन्स के लिये: भारत में ब्राज़ील राष्ट्रपति के दौरे के मुख्य निष्कर्ष, भारत-ब्राज़ील संबंधों के प्रमुख आकर्षण, भारत-ब्राज़ील संबंधों में आने वाली बाधाएँ, आगे की राह
चर्चा में क्यों?
ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने भारत के राज्य दौरे के दौरान डिजिटल साझेदारी, रक्षा, ऊर्जा संक्रमण और वैश्विक शासन सुधार के क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण समझौते किये।
- भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति को वर्ष 2026 में भारत में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये आमंत्रित किया है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय (Theme) "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिये निर्माण" (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) निर्धारित किया गया है।
सारांश
- भारत-ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी (2006) को ब्राज़ील के राष्ट्रपति के फरवरी 2026 के दौरे के दौरान और मज़बूत किया गया, जिसमें डिजिटल साझेदारी, महत्त्वपूर्ण खनिज और रक्षा सहयोग पर समझौते हुए।
- दोतरफा व्यापार 2025 में 15.21 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा और वर्ष 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- दोनों देश BRICS, G20, जैव ईंधन गठबंधन (GBA) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में सहयोग करते हैं, साथ ही NSG सदस्यता में मतभेद तथा भौगोलिक दूरी जैसी चुनौतियों का सामना भी करते हैं।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति के भारत दौरे के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?
- भारत–ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी की पुष्टि: दोनों देशों ने ब्राज़ील–भारत रणनीतिक साझेदारी (2006) की पुष्टि की और ब्रासीलिया संयुक्त वक्तव्य 2025 के पाँच प्राथमिक स्तंभों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई:
- रक्षा और सुरक्षा
- खाद्य और पोषण सुरक्षा
- ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन
- डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियाँ
- रणनीतिक क्षेत्रों में औद्योगिक साझेदारी
- डिजिटल और AI भागीदारी:
- भविष्य के लिये डिजिटल साझेदारी: 'भारत-ब्राज़ील डिजिटल पार्टनरशिप फॉर द फ्यूचर' के तहत दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने ओपन प्लैनेटरी इंटेलिजेंस नेटवर्क (OPIN) के लॉन्च की सराहना की।
- उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPIs) का उपयोग करके विकासशील देशों में सतत विकास और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।
- AI सहयोग: दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय AI पहलों के महत्त्व को रेखांकित किया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्ताव, डिजिटल ग्लोबल कॉम्पैक्ट, यूनेस्को की AI नैतिकता पर सिफारिश और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक शासन पर BRICS नेताओं की घोषणा शामिल हैं।
- भविष्य के लिये डिजिटल साझेदारी: 'भारत-ब्राज़ील डिजिटल पार्टनरशिप फॉर द फ्यूचर' के तहत दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने ओपन प्लैनेटरी इंटेलिजेंस नेटवर्क (OPIN) के लॉन्च की सराहना की।
- व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग: वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में 25.5% की वृद्धि हुई और वर्ष 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके साथ ही गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने और एंटी-डंपिंग से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिये प्रतिबद्धता जताई गई।
- भारत-MERCOSUR अधिमान्य व्यापार समझौता (PTA) को सुदृढ़ करने के लिये दोनों पक्षों ने इसके दायरे का विस्तार करने पर सहमति जताई और इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की पारस्परिक मान्यता पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये।
- महत्त्वपूर्ण खनिज सहयोग: नेताओं ने दुर्लभ मृदा तत्त्वों और अन्य महत्त्वपूर्ण खनिजों में सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन तथा स्टील आपूर्ति शृंखला हेतु खनन क्षेत्र में सहयोग संबंधी MoU पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।
- साइबर सहयोग: उन्होंने साइबर गवर्नेंस, डेटा संरक्षण और साइबर अपराध के खिलाफ युद्ध पर चर्चा करने के लिये ब्रासीलिया (नवंबर 2025) में आयोजित होने वाले पहले भारत-ब्राज़ील साइबर संवाद का स्वागत किया।
- जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण: भारत के प्रधानमंत्री ने बेलेम (नवंबर 2025) में COP30 की मेज़बानी करने और ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) शुरू करने के लिये ब्राज़ील की सराहना की।
- कई देशों ने सतत ईंधन के उपयोग को वर्ष 2035 तक चार गुना बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिसके लिये उन्होंने ‘बेलेम 4x प्लेज ऑन सस्टेनेबल फ्यूल्स’ को अपनाया है।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा: दोनों देश भारत में वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर तीसरे संयुक्त आयोग (अगस्त 2026) के आयोजन, भारत के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय तक ब्राज़ील की पहुँच और DPIIT और ब्राज़ील के विकास मंत्रालय के बीच घनिष्ठ संबंधों के माध्यम से बौद्धिक संपदा (IP) सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए।
भारत-ब्राज़ील सहयोग के प्रमुख स्तंभ क्या हैं?
- भारत और ब्राज़ील ने वर्ष 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित किये थे। भारत ने अपना दूतावास पहले तत्कालीन राजधानी रियो डी जनेरियो में खोला, जिसे बाद में वर्ष 1971 में ब्रासीलिया स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में, भारत का महावाणिज्य दूतावास साओ पाउलो में स्थित है, जबकि ब्राज़ील का महावाणिज्य दूतावास मुंबई में है।
- व्यापार और निवेश: ब्राज़ील लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में 25% से अधिक की वृद्धि हुई और यह 15.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया (भारतीय निर्यात - 8.35 बिलियन अमेरिकी डॉलर, ब्राज़ील से आयात- 6.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर)।
- भारत के प्रमुख निर्यातों में प्रसंस्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, कृषि रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। ब्राज़ील के निर्यातों में कच्चा तेल, सोयाबीन तेल, सोना, कच्ची चीनी, कपास और लौह अयस्क शामिल हैं।
- ब्राज़ील में कुल भारतीय निवेश 15 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
- रक्षा सहयोग: एक रक्षा सहयोग समझौते (2003) को वर्ष 2006 में अनुमोदित किया गया, जिससे संयुक्त रक्षा समिति (JDC) का गठन हुआ।
- 2 +2 राजनीतिक-सैन्य वार्त्ता का उद्घाटन नई दिल्ली में (मार्च 2024 में) किया गया था।
- स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों और अन्य सैन्य जहाज़ों के रखरखाव के लिये हाल ही में मझगाँव डॉक लिमिटेड और भारत तथा ब्राज़ील की नौसेनाओं के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए।
- ऊर्जा संक्रमण और जैव ईंधन: 'नवीकरणीय ऊर्जा महाशक्तियों' के तौर पर, ये दोनों राष्ट्र वैश्विक डीकार्बोनाइज़ेशन एजेंडा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इसके लिये वे जैव ईंधन मानकों में सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं तथा एक सतत विमानन ईंधन (SAF) गलियारे का निर्माण कर रहे हैं।
- यह सहयोग अब केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक है, जो अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता मानदंड स्थापित करने के लिये ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (GBA) का उपयोग करता है।
- भारत की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और ब्राज़ील के रेनोवा बायो कार्यक्रम का उद्देश्य जैव ईंधन के मिश्रण को बढ़ावा देना है।
- बहुपक्षीय शासन और G4 सुधार: भारत और ब्राज़ील संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और विश्व व्यापार संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों के लोकतंत्रीकरण की मांग के लिये एक संयुक्त राजनयिक गुट के रूप में सक्रियता से सहयोग कर रहे हैं। उनका यह सहयोग बहुपक्षीय शासन और G4 सुधार पर केंद्रित है। दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि वर्तमान वैश्विक संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
- G4 समूह के मंच से, दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिये ‘पाठ-आधारित वार्त्ता’ की रणनीति पर समन्वय कर रहे हैं।
भारत-ब्राज़ील के प्रभावी सहयोग को कौन-सी बाधाएँ सीमित करती हैं?
- भौगोलिक और रसद संबंधी चुनौतियाँ: 14,000 किमी. से अधिक की अत्यधिक भौगोलिक दूरी और सीधी कनेक्टिविटी के अभाव में परिवहन लागत काफी बढ़ जाती है, जिससे माल को गंतव्य तक पहुँचने में लंबा समय लगता है। इन रसद संबंधी बाधाओं के कारण यह व्यापार अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया या पड़ोसी देशों के साथ होने वाले व्यापार की तुलना में कम प्रतिस्पर्द्धी हो जाता है।
- व्यापार संरचना और विषमता: द्विपक्षीय व्यापार की विशेषता प्राथमिक वस्तु-केंद्रित संरचना है, जो इसे वैश्विक मूल्य अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है। भारत मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है, जबकि ब्राज़ील से चीनी, सोयाबीन तेल और सोना आयात करता है।
- चीन का रणनीतिक प्रभाव: ब्राज़ील का चीन के साथ मज़बूत आर्थिक सहयोग भारत के लिये एक रणनीतिक असंतुलन उत्पन्न करता है।
- चीन ब्राज़ील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह प्रभुत्व भारतीय कंपनियों के लिये ब्राज़ीलियाई बाज़ार में प्रतिस्पर्द्धा को अधिक कठिन बना देता है।
- जबकि भारत ग्लोबल साउथ में चीनी प्रभाव के प्रति सतर्क रहा है, ब्राज़ील ने चीनी नेतृत्व वाली पहलों के प्रति अधिक ग्रहणशीलता दिखाई है, जिससे BRICS ढाँचे के भीतर सहयोग के ‘सामंजस्य’ में कभी-कभी भिन्नताएँ उत्पन्न हुई हैं।
- रक्षा सहयोग का प्रारंभिक चरण: रक्षा सहयोग अभी शुरुआती अवस्था में है; संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण या बड़े रक्षा खरीद समझौते सीमित हैं, विशेषकर भारत के अपने पारंपरिक साझेदारों, जैसे– रूस, फ्राँस या यहाँ तक कि अमेरिका की तुलना में।
भारत-ब्राज़ील संबंधों को और सुदृढ़ करने हेतु किन उपायों की आवश्यकता है?
- ट्रेड बास्केट का विविधीकरण एवं गहनता: उच्च-मूल्य विनिर्मित वस्तुओं, आईटी सेवाओं तथा इंजीनियरिंग उत्पादों के लिये बाज़ार पहुँच को सुगम बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये।
- जैव-ईंधन, औषधि/फार्मास्यूटिकल्स एवं एयरोस्पेस (जैसे–एंब्राएर) जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रमों को प्रोत्साहित करने से अंतः-उद्योगीय व्यापार विकसित होगा, जो मूल्य-आघातों के प्रति अधिक सुदृढ़ होगा।
- प्रत्यक्ष समुद्री एवं वायु संपर्क की स्थापना: भारत और ब्राज़ील को शिपिंग लागत कम करने के लिये एक समुद्री कॉरिडोर स्थापित करना चाहिये तथा दिल्ली/मुंबई और साओ पाउलो के बीच सीधी उड़ानें/फ्लाइट्स प्रारंभ करनी चाहिये, जिससे व्यापार, पर्यटन और व्यावसायिक संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।
- उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा महत्त्वपूर्ण खनिजों में संयुक्त पहल नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आपूर्ति शृंखला की अनुकूलनशीलता को सुदृढ़ कर सकती हैं।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग का संस्थानीकरण: भारत और ब्राज़ील को केवल प्रतीकात्मक सैन्य अभ्यासों से आगे बढ़ते हुए MALE ड्रोन के सह-विकास, विमान के पुर्ज़ों के संयुक्त उत्पादन तथा संयुक्त सैन्य अभ्यासों के विस्तार के लिये रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिये। हाल की प्रगति, जैसे– स्कॉर्पीन पनडुब्बी रखरखाव संबंधी समझौते पर आधारित यह कदम सहयोग को सुदृढ़ करेगा।
- सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा: द्विपक्षीय संबंधों में सामाजिक आधार को सुदृढ़ करने हेतु छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का विस्तार तथा पुर्तगाली (ब्राज़ील) और हिंदी भाषा प्रशिक्षण को प्रोत्साहन देना आवश्यक है, जिससे ऐसी विशेषज्ञ पीढ़ी तैयार होगी जो एक-दूसरे के बाज़ार और संस्कृति को गहराई से समझे।
- बहुपक्षीय मंचों पर प्रयासों का समन्वय: BRICS, G20, G-4, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन, आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन तथा संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर समन्वित प्रयास वैश्विक शासन सुधारों में ग्लोबल साउथ के नेताओं के रूप में उनके प्रभाव को सुदृढ़ करेंगे।
निष्कर्ष
ब्राज़ील के राष्ट्रपति की 2026 की राजकीय यात्रा से सुदृढ़ हुई भारत-ब्राज़ील सामरिक साझेदारी डिजिटल रूपांतरण, ऊर्जा संक्रमण और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में बढ़ती अभिसरण प्रवृत्ति को दर्शाती है। भौगोलिक दूरी, व्यापार असंतुलन तथा NSG से जुड़े मतभेद जैसी चुनौतियों को बेहतर संपर्क, विविधीकृत व्यापार और समन्वित बहुपक्षीय कार्रवाई के माध्यम से दूर करना दोनों देशों के लिये वास्तविक अर्थों में ग्लोबल साउथ के अग्रणी नेता के रूप में उभरने हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा।
|
दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न: प्रश्न. “भारत-ब्राज़ील सामरिक साझेदारी ग्लोबल साउथ की आवाज़ को सशक्त बनाने की कुंजी है।” इस संबंध में निहित अवसरों एवं चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत-ब्राज़ील सामरिक साझेदारी कब स्थापित हुई और इसके पाँच प्राथमिक स्तंभ क्या हैं?
वर्ष 2006 में स्थापित इस साझेदारी के पाँच प्राथमिक स्तंभ हैं: (1) रक्षा एवं सुरक्षा, (2) खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, (3) ऊर्जा संक्रमण एवं जलवायु परिवर्तन, (4) डिजिटल रूपांतरण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ, (5) रणनीतिक क्षेत्रों में औद्योगिक साझेदारी।
2. भारत-ब्राज़ील द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति और लक्ष्य क्या है?
वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार में 25.5% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 15.21 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा। वर्ष 2030 तक इसे 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
3. जैव-ईंधन के क्षेत्र में भारत और ब्राज़ील किस प्रकार सहयोग करते हैं?
ब्राज़ील वर्ष 2023 में स्थापित ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस का सह-संस्थापक है। दोनों देश भारत की राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति और ब्राज़ील के रेनोवा-बायो कार्यक्रम के बीच समन्वय कर ब्लेंडिंग लक्ष्यों को बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से किस एक समूह में चारों देश G-20 के सदस्य हैं? (2020)
(a) अर्जेंटीना, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की
(b) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और न्यूज़ीलैंड
(c) ब्राज़ील, ईरान, सऊदी अरब और वियतनाम
(d) इंडोनेशिया, जापान, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया
उत्तर: (a)
