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ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

प्रारंभिक परीक्षा

लोकसभा में महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों? 

एक सांसद (MP) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के विरुद्ध एक सारगर्भित प्रस्ताव पेश किया है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय हित के विरुद्ध कथित आचरण के आधार पर उन्हें संसद से अयोग्य ठहराने और आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।

प्रस्तावों से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: संसदीय प्रक्रिया के अंतर्गत, 'प्रस्ताव' से तात्पर्य किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत उस औपचारिक प्रस्तावना से है, जिसके माध्यम से सदन से किसी विषय पर निर्णय अपेक्षित होता है।
    • सदन द्वारा निर्धारित प्रत्येक प्रश्न को एक प्रस्ताव के रूप में प्रस्तावित किया जाना चाहिये, जिसे तत्पश्चात या तो सकारात्मक या नकारात्मक रूप में निर्णीत किया जाता है। 
    • प्रस्ताव ही संसद में सभी चर्चाओं एवं निर्णयों का बुनियादी आधार है।
  • प्रस्तावों की स्वीकार्यता: स्पीकर किसी प्रस्ताव की स्वीकार्यता का निर्णय लेते हैं। लोकसभा में कार्य-संचालन एवं प्रक्रिया के नियम 186 के तहत किसी प्रस्ताव को स्वीकार किये जाने हेतु विशिष्ट मापदंडों को पूरा करना आवश्यक है, जिनमें शामिल हैं:
    • इसमें एक निश्चित मुद्दा उठाया जाना चाहिये।
    • इसमें तर्क, व्यंग्यपूर्ण अभिव्यक्तियाँ या मानहानि वाले कथन नहीं होने चाहिये।
    • यह हाल की घटना के मामले तक सीमित होना चाहिये।
    • यह किसी ऐसे मामले से संबंधित नहीं होना चाहिये जो वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन हो (न्याय हेतु विचाराधीन)।
    • यह मुख्य रूप से भारत सरकार से संबंधित होना चाहिये।
  • प्रस्तावों के प्रकार: प्रस्तावों को उनकी स्वतंत्रता एवं उद्देश्य के आधार पर तीन प्राथमिक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

सारगर्भित प्रस्ताव

  • परिचय: सारगर्भित प्रस्ताव एक स्व-निहित प्रस्ताव होता है, जो अपने आपमें पूर्ण होता है तथा बिना किसी अन्य प्रस्ताव के संदर्भ के सदन के स्पष्ट निर्णय को अभिव्यक्त करने के लिये तैयार किया जाता है।
    • इसका उपयोग उच्च प्राधिकार वाले व्यक्तियों के आचरण पर चर्चा करने या महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के लिये किया जाता है।
  • उदाहरण: सभी संकल्प सारगर्भित प्रस्ताव होते हैं क्योंकि वे स्वयं में पूर्ण होते हैं और संसद के निर्णय को प्रकट करते हैं। 
    • इसे उपयोग किया जाता है:
      • राष्ट्रपति की महाभियोग की प्रक्रिया 
      • सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाना
      • स्पीकर या डिप्टी स्पीकर का चुनाव 
      • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव
      • सार्वजनिक महत्त्व के विषय पर स्थगन प्रस्ताव
      • मंत्रिपरिषद में विश्वास या अविश्वास प्रस्ताव
      • स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव 
      • सदस्य के पद को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव 
      • सामान्य जनहित के विषयों पर चर्चा के लिये प्रस्ताव

स्थानापन्न प्रस्ताव

  • जानकारी: प्रतिस्थापन प्रस्ताव मूल प्रस्ताव (जैसे– किसी नीति या स्थिति पर विचार करने का प्रस्ताव) के स्थान पर प्रस्तुत किये जाते हैं।
    • हालाँकि ये एक विचार व्यक्त कर सकते हैं, ये मूल प्रस्ताव पर निर्भर होते हैं। 
  • प्रक्रिया: किसी नीति पर चर्चा के दौरान कोई सदस्य प्रतिस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है।
    • चर्चा के अंत में केवल प्रतिस्थापन प्रस्ताव को ही मतदान के लिये रखा जाता है।
  • उदाहरण: वर्ष 1991 में, अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा के दौरान, सदस्यों ने प्रतिस्थापन प्रस्ताव (Substitute Motions) प्रस्तुत किये ताकि यह व्यक्त किया जा सके कि सरकार की विदेश नीति “असंतोषजनक” थी कुछ विशिष्ट विफलताओं (जैसे– गल्फ युद्ध के प्रति प्रतिक्रिया) के कारण।

सहायक प्रस्ताव

  • परिचय: यह एक प्रस्ताव है जो किसी अन्य प्रस्ताव पर निर्भर करता है या संसद में किसी कार्यवाही के बाद आता है।
    • अपने आपमें इसका कोई अर्थ नहीं है और सदन की मूल गति (original motion) या कार्यवाही के संदर्भ के बिना यह सदन के निर्णय को व्यक्त करने में सक्षम नहीं है।
  • सहायक प्रस्तावों के प्रकार:
    • अनुषंगी प्रस्ताव: यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे सदन की कार्यप्रणाली में विभिन्न प्रकार के विधायी कार्यों के संचालन के लिये एक नियमित पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है।
      • यह कार्यवाही की प्रगति को सुगम बनाता है, जैसे कि यह प्रस्ताव रखना कि किसी विधेयक पर विचार किया जाए या उस विधेयक को पारित किया जाए।
    • प्रतिस्थापन प्रस्ताव: इसे बहस के दौरान विचाराधीन मुख्य प्रश्न को बदलने या विलंबित करने के लिये पेश किया जाता है। ये अक्सर विलंबकारी (जिनका उद्देश्य कार्यवाही में देरी करना होता है) होते हैं।
      • उदाहरणों में शामिल हैं: किसी विधेयक को सेलेक्ट या जॉइंट समिति को पुनः सौंपना, इसे सार्वजनिक राय के लिये पुनः प्रसारित करना या इसके विचार को किसी बाद की तिथि तक स्थगित करना।
    • संशोधन: यह एक अधीनस्थ प्रस्ताव है, जो मुख्य प्रश्न पर अंतिम निर्णय से पहले विचार का एक नया चरण प्रस्तुत करता है।
      • यह विधेयक, प्रस्ताव, प्रस्तावना या यहाँ तक कि किसी अन्य संशोधन में परिवर्तन करने का प्रयास कर सकता है, ताकि प्रस्ताव को अधिक स्वीकार्य बनाया जा सके या सदन के समक्ष एक वैकल्पिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सके।

भारतीय संसद में प्रस्ताव (Motions in Indian Parliament)

विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव
(Breach of Privilege Motion)

  • यह किसी सदस्य द्वारा उस समय प्रस्तुत किया जाता है, जब उसे लगता है कि किसी मंत्री ने किसी मामले के तथ्यों को रोककर या गलत या विकृत तथ्य देकर सदन या उसके एक या अधिक सदस्यों के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है। इसका उद्देश्य संबंधित मंत्री की निंदा करना होता है।
  • इसे राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

निन्दा प्रस्ताव (Censure Motion)

  • इसे लोकसभा में अपनाने के कारणों का उल्लेख होना चाहिये।
  • इसे किसी व्यक्तिगत मंत्री या मंत्रियों के समूह या संपूर्ण मंत्रिपरिषद के खिलाफ प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • यह विशिष्ट नीतियों और कार्यों के लिये मंत्रिपरिषद की निंदा करने के लिये प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion)

  • इसे लोकसभा में तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के एक निश्चित मामले पर सदन का ध्यान आकर्षित करने के लिये प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसमें सरकार के खिलाफ निंदा का एक तत्त्व शामिल होता है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

अनियत-दिन-वाले प्रस्ताव (No-Day-Yet-Named Motion)

  • यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है लेकिन इस पर चर्चा के लिये कोई तारीख तय नहीं की गई है।
  • इसे राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है।

अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion)

  • संविधान का अनुच्छेद 75 कहता है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
  • दूसरे शब्दों में, लोकसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित करके मंत्री को पद से हटा सकती है।
  • प्रस्ताव को स्वीकृत करने के लिये 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks)

  • प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के पहले सत्र को राष्ट्रपति द्वारा संबोधित किया जाता है।
  • राष्ट्रपति के इस अभिभाषण पर संसद के दोनों सदनों में 'धन्यवाद प्रस्ताव' नामक प्रस्ताव पर चर्चा होती है।
  • यह प्रस्ताव सदन में पारित होना चाहिये। नहीं तो सरकार गिर जाती है।

कटौती प्रस्ताव (Cut Motions)

  • कटौती प्रस्ताव लोकसभा के सदस्यों को दी गई एक विशेष शक्ति है। किसी अनुदान की राशि को कम करने अथवा एक निश्चित सीमा तक घटाने का प्रस्ताव कटौती प्रस्ताव कहलाता है। इसमें अनुदान माँग के हिस्से के रूप में सरकार द्वारा वित्त विधेयक में विशिष्ट आवंटन के लिये चर्चा की जा रही मांग का विरोध किया जाता है।
  • यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो यह एक अविश्वास मत के बराबर होता है और यदि सरकार निचले सदन में संख्या बढ़ाने में विफल रहती है, तो वह सदन के मानदंडों के अनुसार इस्तीफा देने के लिये बाध्य होती है।
  • निम्नलिखित में से किसी भी तरीके से मांग की राशि को कम करने के लिये एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है:
  • नीति निरनुमोदन कटौती प्रस्ताव: यह इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि मांग की राशि को घटाकर 1 रुपये कर दिया जाए (यह मांग में निहित नीति की अस्वीकृति का प्रतिनिधित्व करता है)।
  • मितव्ययिता कटौती प्रस्ताव: इसे इस तरह से प्रस्तुत किया जाता है कि मांग की राशि में उल्लिखित राशि की कमी की जाए।
  • सांकेतिक कटौती प्रस्ताव: इसे इसलिये प्रस्तुत किया जाता है ताकि मांग की राशि में 100 रुपये की कटौती की जा सके ( यह एक विशिष्ट शिकायत व्यक्त करता है)।
  • इसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

समापन प्रस्ताव (Closure Motion)

  • यह सदन के समक्ष किसी मामले पर बहस को कम करने के लिये किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया गया एक प्रस्ताव होता है।
  • यदि प्रस्ताव को सदन द्वारा अनुमोदित किया जाता है, तो बहस तुरंत रोक दी जाती है और मामले पर मतदान किया जाता है।
  • समापन प्रस्ताव चार प्रकार के होते हैं:
  • साधारण समापन: जब कोई सदस्य प्रस्ताव करता है कि 'इस मामले पर पर्याप्त चर्चा हो चुकी है तो अब मतदान किया जाए'।
  • खंडश: समापन: इस मामले में, किसी विधेयक के खंड या एक लंबे संकल्प को बहस शुरू होने से पहले भागों में बांटा जाता है। बहस पूरे हिस्से को कवर करती है और पूरे हिस्से को वोट देने के लिये रखा जाता है।
  • कंगारू समापन: इस प्रकार के तहत, केवल महत्वपूर्ण खंड बहस और मतदान के लिये जाते हैं और बीच में आने वाले खंडों को छोड़ दिया जाता है और पारित  मान लिया जाता है।
  • गिलोटिन समापन: यह तब होता है जब समय की कमी के कारण किसी विधेयक या संकल्प के बिना चर्चा किये गए खंडों को भी चर्चा किये गए खंडों के साथ मतदान के लिये रखा जाता है।

व्यवस्था का प्रश्न (Point of Order)

  • जब सदन की कार्यवाही प्रक्रिया संबंधी सामान्य नियमों का पालन नहीं करती है तो कोई सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है।
  • व्यवस्था का प्रश्न सदन के नियमों या संविधान के ऐसे अनुच्छेदों की व्याख्या या प्रवर्तन से संबंधित होना चाहिये जो सदन के कामकाज को नियंत्रित करते हैं और ऐसा प्रश्न उठाया जाना चाहिये जो अध्यक्ष के संज्ञान में हो।
  • यह आमतौर पर सरकार पर लगाम लगाने के लिये विपक्षी सदस्य द्वारा उठाया जाता है।
  • यह एक असाधारण युक्ति है क्योंकि यह सदन के समक्ष कार्यवाही को स्थगित कर देती है। व्यवस्था के प्रश्न पर किसी बहस की अनुमति नहीं है।

विशेष उल्लेख (Special Mention)

  • ऐसा मामला जो राज्यसभा में प्रश्नकाल, आधे घंटे की चर्चा, अल्पावधि चर्चा या स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या सदन के किसी नियम के तहत नहीं उठाया जा सकता है, विशेष उल्लेख के तहत उठाया जा सकता है। 
  • लोकसभा में इसके समकक्ष प्रक्रियात्मक उपकरण को 'नियम 377 के तहत नोटिस (उल्लेख)' के रूप में जाना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. संसदीय प्रक्रिया में मोशन क्या है?
मोशन एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसे किसी सदस्य द्वारा सदन का निर्णय प्राप्त करने के उद्देश्य से पेश किया जाता है। यह सभी संसदीय चर्चा और प्रस्तावों की आधारशिला है।

2. सब्सटेंटिव मोशन (Substantive Motion) क्या है?
यह एक स्वायत्त प्रस्ताव होता है, जो स्वयं ही सदन के निर्णय को व्यक्त करने में सक्षम होता है। इसे प्रमुख कार्यों, जैसे– विश्वास मत (confidence Motion) या पदावनति प्रस्ताव (removal resolution) के लिये उपयोग किया जाता है।

3. लोकसभा में मोशन की वैधता कौन तय करता है?
स्पीकर नियम 186 के अंतर्गत मोशन की वैधता का निर्णय करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि मोशन प्रक्रिया और संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप हो।

4. सब्स्टिट्यूट और सब्सिडियरी मोशन में क्या अंतर है?
सब्स्टिट्यूट मोशन मूल मोशन को प्रतिस्थापित करता है, जबकि सब्सिडियरी मोशन किसी अन्य मोशन पर निर्भर करता है ताकि प्रक्रिया को संशोधित, स्थगित या सुगम बनाया जा सके।

5. संसदीय लोकतंत्र में मोशन क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
मोशन चर्चा को सक्षम बनाते हैं, जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं तथा सदन को सार्वजनिक मामलों पर औपचारिक रूप से अपनी इच्छा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत की संसद किसके/किनके द्वारा मंत्रिपरिषद के कृत्यों के ऊपर नियंत्रण रखती है? (2017)

  1. स्थगन प्रस्ताव 
  2. प्रश्नकाल 
  3. अनुपूरक प्रश्न

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)


रैपिड फायर

सेवा तीर्थ

स्रोत: द हिंदू 

प्रधानमंत्री ने एक एकीकृत प्रशासनिक परिसर 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन किया। इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यालय स्थित हैं।

  • यह महत्त्वपूर्ण बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय के लगभग 8 दशकों से साउथ ब्लॉक (जो अब युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा है) से संचालित होने के क्रम को समाप्त करता है। यह परिवर्तन नई दिल्ली के भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में औपचारिक उद्घाटन की 95वीं वर्षगाँठ (13 फरवरी, 1931) के साथ हुआ, जो इसका ऐतिहासिक महत्त्व दर्शाता है।
  • दार्शनिक अर्थ: इस नाम का दार्शनिक अर्थ संस्कृत में निहित है: 'सेवा' का तात्पर्य नि:स्वार्थ समर्पण या सेवा से है। 'तीर्थ' एक पवित्र स्थान या मार्गदर्शक बिंदु को इंगित करता है, जो बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।
    • इस परिसर पर “नागरिक देवो भव” लिखा हुआ है, जिसका अर्थ है कि नागरिक भगवान के समान हैं
  • स्थापत्य कला का प्रभाव: प्रवेश द्वार को डॉ. बिमल पटेल ने डिज़ाइन किया है और इसमें चालुक्य मंदिरों (11वीं-13वीं शताब्दी) से प्रेरित पत्थर की नक्काशी का प्रयोग किया गया है। साथ ही, यहाँ पुष्पीय पत्थर के रूपांकन भी हैं, जो वर्गाकार आधार वाले ज्यामितीय मंदिर प्रारूप से लिये गए हैं।
    • इसमें समकालीन अलंकरण तत्त्वों के रूप में बौद्ध स्तूपों से प्रेरित धातु से ढके गुंबद शामिल हैं। 
    • यह सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह सफेद और लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित है तथा इस सुविधा में आधुनिक खुले कार्यक्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों के लिये उच्च तकनीक से सुसज्जित 'इंडिया हाउस' और 4-स्टार हरित भवन मानक जैसी विशेषताएँ मौजूद हैं।
  • पहला आधिकारिक कार्य: प्रधानमंत्री ने अपने पहले आधिकारिक कार्य के रूप में 'सेवा तीर्थ' में 'पीएम राहत योजना' की शुरुआत की। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को सुनिश्चित अस्पताल में भर्ती और उपचार प्रदान करना है। इस पहल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तत्काल चिकित्सा देखभाल की कमी के कारण किसी भी व्यक्ति की जान पर कोई जोखिम न हो।

और पढ़ें: सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना 


रैपिड फायर

LHS 1903 प्रणाली

स्रोत: द हिंदू

खगोलविदों ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के Cheops अंतरिक्ष टेलीस्कोप का उपयोग करके लाल बौना तारा LHS 1903 के चार ग्रहों वाली अनूठी प्रणाली की खोज की है, जिसमें ग्रहों की व्यवस्था वर्तमान ग्रह निर्माण सिद्धांतों को चुनौती देती है।

  • प्रणाली का अवलोकन: इस तंत्र में चार ग्रह शामिल हैं - दो सुपर-अर्थ (चट्टानी) और दो मिनी-नेपच्यून (गैसीय), जो पृथ्वी से 117 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक लाल बौने तारे की परिक्रमा कर रहे हैं।
  • निर्माण का विरोधाभास: पारंपरिक मॉडल यह सुझाव देते हैं कि चट्टानी ग्रहों (Rocky Planets) का निर्माण तारे के समीप होता है, जबकि गैस जाइंट ग्रह का निर्माण उससे अधिक दूरी पर होता है।
    • हालाँकि LHS 1903 का सबसे बाहरी (चौथा) ग्रह चट्टानी (Rocky) है, जबकि वह अपने गैसीय साथियों (Gaseous Siblings) की तुलना में तारे से अधिक दूरी पर स्थित है।
    • शोधकर्त्ताओं का सुझाव है कि इन ग्रहों का निर्माण एक के बाद एक हुआ, जिससे चौथे ग्रह के बनने से पहले ही उपलब्ध गैस समाप्त हो गई या फिर किसी विनाशकारी घटना के कारण चौथे ग्रह ने अपना वायुमंडल खो दिया, जिससे वह केवल एक चट्टानी बाहरी ग्रह के रूप में रह गया।
  • चट्टानी ग्रह: इन चट्टानी ग्रहों को 'सुपर-अर्थ' के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिनकी संरचना पृथ्वी के समान है लेकिन इनका द्रव्यमान पृथ्वी से दो से दस गुना अधिक है।
  • सब-नेपच्यून पड़ोसी: बीच के दो ग्रह मिनी-नेपच्यून हैं, जो पृथ्वी से बड़े लेकिन नेपच्यून से छोटे हैं और मोटे गैसीय आवरण से विशिष्ट हैं।
  • रहने योग्य होने की संभावना: चौथा ग्रह विशेष वैज्ञानिक रुचि का विषय है क्योंकि इसका अनुमानित सतह का तापमान 60°C है, जो इसे ऐसी श्रेणी में रखता है जहाँ संभावित रूप से जीवन का समर्थन संभव हो सकता है।
  • तारे की विशेषताएँ: मुख्य तारा LHS 1903 एक लाल बौना तारा है, जो सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 50% से कम और चमक का बहुत छोटा हिस्सा (अक्सर 5% से भी कम) रखता है, आकाशगंगा (Milky Way) में सबसे सामान्य प्रकार का तारा है।

और पढ़ें: रेड ड्वार्फ स्टार की परिक्रमा करता विशाल ग्रह


रैपिड फायर

दवा-प्रतिरोधी निमोनिया के खिलाफ नाइट्रिक ऑक्साइड

स्रोत: द हिंदू

एक अध्ययन में पता चला है कि उच्च खुराक वाली इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड (300 ppm) ने दवा-प्रतिरोधी निमोनिया को काफी हद तक कम किया, जो रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के खिलाफ एक संभावित नई रणनीति प्रदान करता है।

  • दवा-प्रतिरोधी निमोनिया, विशेष रूप से स्यूडोमोनास एरुगिनोसा द्वारा उत्पन्न, इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में एक गंभीर जटिलता है और यह अस्पताल में होने वाले लगभग हर पाँचवें निमोनिया का कारण बनता है।

दवा-प्रतिरोधी निमोनिया

  • परिचय: यह फेफड़ों के अल्वियोली में सूजन है, जो ऐसे बैक्टीरिया के कारण होती है जो उपचार में सामान्यतः प्रयुक्त एक या अधिक एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं।

प्रमुख रोगजनक:

रोगजनक

प्रभाव

स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया

समुदाय-संगृहीत बैक्टीरियल निमोनिया (Community-Acquired Bacterial Pneumonia) का प्रमुख कारण।

मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस (MRSA)

(हॉस्पिटल एक्वायर्ड/ स्वास्थ्य सेवा संबंधी निमोनिया) में शामिल।

ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया (स्यूडोमोनास एरुगिनोसा, क्लेबसिएला न्यूमोनिया)

हॉस्पिटल एक्वायर्ड निमोनिया (HAP) और बहु-दवा प्रतिरोधी मामलों में सामान्य।

  • क्लिनिकल निहितार्थ: क्लिनिकल प्रतिक्रिया में देरी, अस्पताल में लंबी अवधि तक भर्ती और सेप्सिस या मृत्यु सहित गंभीर परिणामों का बढ़ा हुआ जोखिम

नाइट्रिक ऑक्साइड

  • नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) एक रंगहीन गैस है, जिसे नाइट्रोजन का ऑक्साइड कहा जाता है। यह एक स्थिर फ्री रेडिकल है जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, जिससे यह अत्यधिक प्रतिक्रियाशील बनता है और इसका अल्पकालिक अर्द्ध-जीवन (कुछ सेकंड से मिनट) होता है। यह कोशिका झिल्लियों में आसानी से प्रवेश कर सकता है।
  • अंतर्जात उत्पादन: स्तनधारियों में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) का संश्लेषण 'एल-आर्जिनिन' (L-arginine) नामक अमीनो एसिड से होता है, जिसे 'नाइट्रिक ऑक्साइड सिंथेसेस' (NOS) नामक एंज़ाइमों के एक परिवार द्वारा अंजाम दिया जाता है।
  • प्रमुख फिजियोलॉजी कार्य

प्रणाली

कार्य

हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र

वासोडिलेटर → रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को कम करता है और प्लेटलेट एकत्रीकरण (platelet aggregation) को रोकता है।

स्नायु तंत्र

न्यूरोट्रांसमीटर/न्यूरोमोड्यूलेटर यह सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी और स्मृति निर्माण प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

रोग प्रतिरोधक तंत्र

यह रोगजनकों के चयापचय को बाधित करके सूक्ष्मजीव-रोधी और ट्यूमर-रोधी गतिविधि प्रदर्शित करता है।

  • चिकित्सा और चिकित्सकीय प्रासंगिकता (Medical and Therapeutic Relevance): नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) की खोज एंडोथेलियम-व्युत्पन्न शिथिलता कारक (EDRF) के रूप में हुई थी, जिसके लिये वर्ष 1998 में फिजियोलॉजी (Physiology) में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

और पढ़ें: निमोनिया


रैपिड फायर

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पेक्ट्रम को पब्लिक रिसोर्स बताया

स्रोत: द हिंदू 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि टेलीकॉम स्पेक्ट्रम भारत संघ के अधीन एक सार्वजनिक संसाधन है, इसे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत बिक्री योग्य टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (TSP) की कॉर्पोरेट संपत्ति नहीं माना जा सकता है।

  • सीमित विशेषाधिकार: स्पेक्ट्रम (उपग्रहों के माध्यम से संचार हेतु प्रयुक्त विशिष्ट आवृत्ति बैंड) को स्वामित्व हित के रूप में नहीं, बल्कि उपयोग हेतु एक सीमित, सशर्त एवं विशेषाधिकार के रूप में प्रदान किया जाता है। 
    • यह अधिकार वैधानिक आवश्यकताओं, लाइसेंस की शर्तों और सार्वजनिक हित के अधीन है।
    • न्यायालय ने वित्तीय विवरणों में अमूर्त परिसंपत्तियों के रूप में दर्ज लाइसेंसिंग के अधिकार को स्वामित्व नहीं माना है।
    • स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग केवल भविष्य के आर्थिक लाभों पर नियंत्रण का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कानूनी स्वामित्व विशेष रूप से भारत सरकार के पास निहित है।
  • IBC से बहिष्करण: न्यायालय ने माना कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) उन परिसंपत्तियों को अपने दायरे से बाहर रखती है, जिन पर कॉर्पोरेट देनदार का कोई स्वामित्व अधिकार नहीं है। 
    • चूँकि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSP) के पास स्पेक्ट्रम का कानूनी स्वामित्व नहीं है, इसे दिवाला समाधान या परिसमापन हेतु परिसंपत्तियों के समूह में शामिल नहीं किया जा सकता है।
  • दूरसंचार संबंधी कानूनों की सर्वोच्चता: न्यायालय ने कहा कि IBC के अधीन वैधानिक व्यवस्था स्पेक्ट्रम उपयोग के अधिकारों एवं दायित्वों का पुनर्गठन नहीं कर सकती, जो दूरसंचार विधेयक, 2023 एवं भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 के अनन्य विधिक शासन के अंतर्गत संचालित होते हैं।
  • लोक न्यास सिद्धांत: राज्य को जनता का न्यासी मानते हुए न्यायालय ने रेखांकित किया कि स्पेक्ट्रम का प्रबंधन जन‑कल्याण में होना चाहिये और इसे अनुच्छेद 14 (न्यायसंगतता और पारदर्शिता) के मानकों का अनुपालन करना होगा।
  • महत्त्व: यह निर्णय वित्तीय लेनदारों (जैसे– SBI) के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो ऋण वसूली हेतु स्पेक्ट्रम के अधिकारों का मुद्रीकरण करना चाहते थे।
    • अब दूरसंचार विभाग (DoT) के पास एयरसेल और आरकॉम जैसे डिफॉल्टर ऑपरेटरों से स्पेक्ट्रम वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है।

और पढ़ें: सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन


रैपिड फायर

चिरैलिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स

स्रोत: द हिंदू

नेचर में प्रकाशित एक नवीन अध्ययन में ऐसे उपकरण का प्रदर्शन किया गया है, जो शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग किये बिना इलेक्ट्रॉनों को उनकी चिरैलिटी (हैंडेडनेस) के आधार पर अलग कर सकता है, जिससे निम्न-ऊर्जा खपत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।

  • इलेक्ट्रॉनों में चिरैलिटी: जिस प्रकार बायाँ और दायाँ हाथ एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, उसी प्रकार टोपोलॉजिकल सेमीमेटल में इलेक्ट्रॉनों में बाएँ-हाथ की या दाएँ-हाथ की चिरैलिटी पाई जाती है।
    • चिरैलिटी उस विशिष्ट क्वांटम स्थिति को दर्शाती है जिसमें इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल लैटिस/जालिका के भीतर गति करते हैं।
  • सेमीमेटल या मेटैलॉइड्स भंगुर ठोस पदार्थ होते हैं जिनमें धात्विक रूप दिखता है, लेकिन रासायनिक गुण अधातु जैसे होते हैं। ये न तो विद्युत और न ही ऊष्मा के सुचालक होते हैं, फिर भी उत्कृष्ट अर्द्धचालक के रूप में कार्य करते हैं और उभयधर्मी ऑक्साइड का निर्माण करते हैं।
  • पहचान में समस्या: चिरल इलेक्ट्रॉन सामान्य (नॉन-चिरल) इलेक्ट्रॉनों के साथ मिश्रित होते हैं। पहले इस्तेमाल होने वाली पहचान विधियों में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों या रासायनिक डोपिंग की आवश्यकता होती थी, जिससे बड़े पैमाने पर उपयोग व्यावहारिक नहीं था।
  • बैंड संरचना (Quantum Geometry) की भूमिका: क्रिस्टल में इलेक्ट्रॉन तरंग की तरह व्यवहार करते हैं और उनकी गति बैंड संरचना द्वारा नियंत्रित होती है।
    • तांबे के तार में सीधी इलेक्ट्रॉन गति के विपरीत पैलेडियम गैलियम (PdGa) क्रिस्टल में ‘मरोड़ वाली’ (Twisted) बैंड संरचना पाई जाती है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन साइडवेज़ (आड़े) बहते हैं। बहाव की दिशा इलेक्ट्रॉन की चिरैलिटी पर निर्भर करती है।
  • उपकरण की कार्यप्रणाली: शोध टीम ने एक तीन-भुजीय उपकरण का निर्माण किया। इसमें धारा प्रवाहित करने पर PdGa की क्वांटम ज्यामिति एक प्रकार के वाल्व के रूप में कार्य करती है, जो बाएँ हाथ के इलेक्ट्रॉनों को एक भुजा में और दाएँ हाथ के इलेक्ट्रॉनों को दूसरी भुजा में प्रवाहित करती है, इस प्रकार प्रभावशाली ढंग से चिरल वाल्व का प्रदर्शन करती है।
  • अनुप्रयोगों की दिशा: यह तकनीक कम ऊर्जा खपत वाले कंप्यूटिंग उपकरण और नवीन प्रकार की चुंबकीय मेमोरी डिवाइस विकसित करने में मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

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