रैपिड फायर
चिरैलिटी-आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स
- 16 Feb 2026
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नेचर में प्रकाशित एक नवीन अध्ययन में ऐसे उपकरण का प्रदर्शन किया गया है, जो शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग किये बिना इलेक्ट्रॉनों को उनकी चिरैलिटी (हैंडेडनेस) के आधार पर अलग कर सकता है, जिससे निम्न-ऊर्जा खपत वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।
- इलेक्ट्रॉनों में चिरैलिटी: जिस प्रकार बायाँ और दायाँ हाथ एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, उसी प्रकार टोपोलॉजिकल सेमीमेटल में इलेक्ट्रॉनों में बाएँ-हाथ की या दाएँ-हाथ की चिरैलिटी पाई जाती है।
- चिरैलिटी उस विशिष्ट क्वांटम स्थिति को दर्शाती है जिसमें इलेक्ट्रॉन क्रिस्टल लैटिस/जालिका के भीतर गति करते हैं।
- सेमीमेटल या मेटैलॉइड्स भंगुर ठोस पदार्थ होते हैं जिनमें धात्विक रूप दिखता है, लेकिन रासायनिक गुण अधातु जैसे होते हैं। ये न तो विद्युत और न ही ऊष्मा के सुचालक होते हैं, फिर भी उत्कृष्ट अर्द्धचालक के रूप में कार्य करते हैं और उभयधर्मी ऑक्साइड का निर्माण करते हैं।
- पहचान में समस्या: चिरल इलेक्ट्रॉन सामान्य (नॉन-चिरल) इलेक्ट्रॉनों के साथ मिश्रित होते हैं। पहले इस्तेमाल होने वाली पहचान विधियों में शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों या रासायनिक डोपिंग की आवश्यकता होती थी, जिससे बड़े पैमाने पर उपयोग व्यावहारिक नहीं था।
- बैंड संरचना (Quantum Geometry) की भूमिका: क्रिस्टल में इलेक्ट्रॉन तरंग की तरह व्यवहार करते हैं और उनकी गति बैंड संरचना द्वारा नियंत्रित होती है।
- तांबे के तार में सीधी इलेक्ट्रॉन गति के विपरीत पैलेडियम गैलियम (PdGa) क्रिस्टल में ‘मरोड़ वाली’ (Twisted) बैंड संरचना पाई जाती है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉन साइडवेज़ (आड़े) बहते हैं। बहाव की दिशा इलेक्ट्रॉन की चिरैलिटी पर निर्भर करती है।
- उपकरण की कार्यप्रणाली: शोध टीम ने एक तीन-भुजीय उपकरण का निर्माण किया। इसमें धारा प्रवाहित करने पर PdGa की क्वांटम ज्यामिति एक प्रकार के वाल्व के रूप में कार्य करती है, जो बाएँ हाथ के इलेक्ट्रॉनों को एक भुजा में और दाएँ हाथ के इलेक्ट्रॉनों को दूसरी भुजा में प्रवाहित करती है, इस प्रकार प्रभावशाली ढंग से चिरल वाल्व का प्रदर्शन करती है।
- अनुप्रयोगों की दिशा: यह तकनीक कम ऊर्जा खपत वाले कंप्यूटिंग उपकरण और नवीन प्रकार की चुंबकीय मेमोरी डिवाइस विकसित करने में मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
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