दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स



प्रारंभिक परीक्षा

अंतरिक्ष अन्वेषण को बढ़ावा देने हेतु लद्दाख में नवीन टेलीस्कोप

  • 14 Feb 2026
  • 62 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

चर्चा में क्यों? 

केंद्रीय बजट 2026-27 ने लद्दाख में दो नई विश्व स्तरीय दूरबीनों (टेलीस्कोप) — नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप (NLST) और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इंफ्रारेड टेलिस्कोप (NLOT) को स्वीकृति प्रदान की है, साथ ही मौजूदा हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप के उन्नयन को भी स्वीकृति प्रदान की है।

  • इस कदम को भारत और 'ग्लोबल साउथ' में अवलोकनात्मक खगोल विज्ञान के लिये एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • लद्दाख, जहाँ पहले से ही हान्ले डार्क स्काई रिज़र्व स्थित है, आदर्श उच्च-तुंगता, शुष्क एवं स्वच्छ वायुमंडलीय स्थितियाँ प्रदान करता है, जो इसे विश्व के सबसे अच्छे खगोलीय स्थलों में से एक बनाता है।

नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) क्या है?

  • परिचय: नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) सौर भौतिकी हेतु समर्पित एक अत्याधुनिक सुविधा होगी। यह अनुमानतः आगामी 5-6 वर्षों में शुरू हो जाएगी।
    • इसे पैंगोंग त्सो झील के निकट मिरक क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। इसमें 2-मीटर का द्वारक (एपर्चर) होगा तथा यह कोडाइकनाल सौर वेधशाला (1899) एवं उदयपुर सौर वेधशाला (1975) के बाद भारत की तीसरी भू-आधारित सौर वेधशाला होगी।
  • ऑपरेशनल स्पेक्ट्रम: यह टेलीस्कोप विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के दृश्य एवं निकट-अवरक्त तरंगदैर्ध्य में संचालित होगा।
  • वैज्ञानिक उद्देश्य:
    • मूलभूत सौर गतिकी एवं चुंबकत्व का अध्ययन करना।
    • सौर घटनाओं का अवलोकन करना तथा स्पेस-वेदर प्रोसेस का मानचित्रण करना।
    • यह डेटा राष्ट्रीय अंतरिक्ष परिसंपत्तियों जैसे- उपग्रह और प्रक्षेपण यानों की सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • अंतरिक्ष मिशनों के साथ समन्वय: NLST से प्राप्त डेटा ISRO के आदित्य-L1 मिशन (भारत का अंतरिक्ष आधारित सौर वेधशाला) को पूरक करेगा, जिससे हेलियोफिजिक्स में भारत की नेतृत्व भूमिका सुदृढ़ होगी।

नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) क्या है?

  • परिचय: नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT), जो हांले में बनाया जाएगा, 13.7 मीटर अपर्चर वाला सेगमेंटेड-मिरर टेलीस्कोप होगा और ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रम में कार्यरत विश्व के सबसे बड़े दूरबीनों में से एक बन जाएगा।
    • NLOT की अगले दशक तक तैयार होने की संभावना है।
  • प्रौद्योगिकी: एक एकल ग्लास उपकरण बजाय, NLOT का प्राथमिक दर्पण 90 छोटे षट्भुज आकार के सेगमेंटेड मिररों से बना होगा, जो एक बड़े यूनिट के रूप में कार्य करेंगे। 
    • यह डिज़ाइन अंतर्राष्ट्रीय थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना में भारत के अनुभव का लाभ प्राप्त करता है।
  • वैज्ञानिक उद्देश्य: एक्सोप्लैनेट्स, तारकीय विकास और सुपरनोवा पर अग्रिम अनुसंधान करना।
    • ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित संकेत खोजने का प्रयास करना।
  • भौगोलिक लाभ: हांले की उच्च ऊँचाई, शीत और शुष्क वायुमंडलीय स्थिति तथा स्पष्ट आकाश के कारण यहां एकत्रित डेटा में अन्य स्थानों पर आम डिफ्रैक्शन संबंधी समस्याएँ नहीं होंगी।

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) क्या है?

  • परिचय: HCT एक 2.01 मीटर ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप है, जो हांले, लद्दाख में इंडियन एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी में स्थित है।
    • इसने पहला प्रकाश (First Light) वर्ष 2000 में प्राप्त किया था और वर्ष 2003 से नियमित वैज्ञानिक अवलोकन शुरू किये। 
    • टेलीस्कोप को कर्नाटक के होसाकोटे में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (CREST) से एक समर्पित सैटेलाइट लिंक के माध्यम से रिमोटली ऑपरेट किया जाता है।
    • यह उन्नत उपकरणों से सुसज्जित है, जिनमें हिमालया फेंट ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोग्राफ (HFOSC), नियर-इन्फ्रारेड इमेजिंग स्पेक्ट्रोग्राफ (TIRSPEC) और हांले ईशेल स्पेक्ट्रोग्राफ (HESP) शामिल हैं।
    • उच्च पॉइंटिंग और ट्रैकिंग सटीकता, उत्कृष्ट छवि गुणवत्ता, और धुंधले सितारों पर गाइड करने में सक्षम ऑटो-गाइडर प्रणाली के साथ, HCT ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड खगोल विज्ञान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेष रूप से सुपरनोवा जैसी अस्थायी ब्रह्मांडीय घटनाओं के अध्ययन में।
  • अपग्रेड विवरण: इस टेलीस्कोप को 3.7 मीटर सेगमेंटेड प्राथमिक दर्पण प्रणाली में अपग्रेड किया जाएगा।
  • भविष्य में भूमिका: यह ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड तरंग दैर्ध्य में कार्य करता रहेगा।
    • इसका संचालन प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं जैसे- LIGO-इंडिया (महाराष्ट्र में गुरुत्वीय तरंग वेधशाला) और स्क्वायर किलोमीटर एरे (ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में रेडियो टेलीस्कोप परियोजना) का पूरक होगा।

खगोलशास्त्र में इन विकासों का महत्त्व क्या है?

  • विशिष्ट देशांतर लाभ: NLST और NLOT दोनों ही इस विशेष देशांतर पर काम करने वाले अनन्य सुविधाएँ होंगी।
    • यह आकाश की वैश्विक निगरानी में एक महत्त्वपूर्ण अंतर को कम करता है, जिससे ऐसे खगोलीय घटनाओं की लगातार निगरानी संभव हो जाती है, जिन्हें अन्य समय क्षेत्रों के दूरबीनें मिस कर सकती हैं।
    • यह आकाश की वैश्विक निगरानी में एक महत्त्वपूर्ण कमी को पूरा करता है, जिससे उन खगोलीय घटनाओं की निरंतर निगरानी संभव हो पाती है जो अन्य समय क्षेत्रों में स्थित दूरबीनों से छूट सकती हैं।
  • डेटा संप्रभुता: ये सुविधाएँ उच्च गुणवत्ता वाला ऐसा डेटा उत्पन्न करेंगी जो पहले अंतर्राष्ट्रीय निर्भरता के बिना भारतीय वैज्ञानिकों के लिये दुर्गम था।
  • ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: यह परियोजना ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की वैज्ञानिक क्षमताओं को बढ़ावा देती है, जो भारतीय शोधकर्त्ताओं को प्राथमिकता के आधार पर टेलीस्कोप अवलोकन समय प्रदान करती है और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाती है।
  • अंतरिक्ष मौसम की निगरानी: NLST (नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप) सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) की निगरानी के लिये महत्त्वपूर्ण होगा। भारत के उपग्रहों, संचार ग्रिड और बिजली बुनियादी ढाँचे को सौर तूफानों से बचाने के लिये इन 'अंतरिक्ष मौसम' की घटनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नेशनल लार्ज़ सोलर टेलीस्कोप (NLST) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
NLST का उद्देश्य सौर चुंबकत्व, गतिशीलता और सोलर फ्लेयर व कोरोनल मास एजेक्शन (CMEs) जैसी अंतरिक्ष मौसम घटनाओं का अध्ययन करना है, ताकि उपग्रहों और संचार प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

2. नेशनल लार्ज़ ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) को अद्वितीय क्यों बनाता है?
NLOT एक 13.7 मीटर का सेगमेंटेड-मिरर टेलीस्कोप होगा, जो अपने तरंगदैर्ध्य क्षेत्र में विश्व के सबसे बड़े टेलीस्कोपों में से एक होगा और यह एक्सोप्लानेट्स और ब्रह्मांडीय विकास पर शोध की सुविधा प्रदान करेगा।

3. लद्दाख को इन दूरबीनों के लिये क्यों चुना गया?
हनले उच्च ऊँचाई, शुष्क वायुमंडल और साफ आकाश प्रदान करता है, जिससे विकिरण न्यूनतम होती है तथा सटीक खगोलीय अवलोकन के लिये यह आदर्श स्थान है।

4. HCT अपग्रेड भारत के खगोलशास्त्र तंत्र में कैसे योगदान देता है?
हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप (HCT) को 3.7-मीटर के सेगमेंटेड मिरर के साथ अपग्रेड करने से 'ट्रांजिएंट एस्ट्रोनॉमी' (अल्पकालिक खगोलीय घटनाओं के अध्ययन) को मज़बूती मिलेगी और यह लीगो-इंडिया तथा स्क्वायर किलोमीटर एरे जैसी सुविधाओं का पूरक बनेगा।

5. खगोलशास्त्र में “डेटा संप्रभुता” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि भारत उच्च गुणवत्ता वाले खगोलीय डेटा का उत्पादन और नियंत्रण देश में ही करता है, जिससे विदेशी वेधशालाओं पर निर्भरता कम होती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स:

प्रश्न. आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के संदर्भ में हाल ही में समाचार में आए दक्षिणी ध्रुव पर स्थित एक कण सूचकांक (पार्टिकल डिटेक्टर)' आइसक्यूब (IceCube)', के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2015)

  1. यह विश्व का सबसे बड़ा  बर्फ में एक घन किलोमीटर घेरे वाला न्यूट्रिनो सूचकांक (पार्टिकल डिटेक्टर) है। 
  2. यह डार्क मैटर की खोज के लिये बनी शक्तिशाली दूरबीन है। 
  3. यह बर्फ में गहराई में दबा हुआ है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)


प्रश्न.1 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के संदर्भ में हाल ही में खबरों में रहा "भुवन" क्या है?  (वर्ष 2010)

 (A) भारत में दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इसरो द्वारा लॉन्च किया गया एक छोटा उपग्रह

 (B) चंद्रयान-द्वितीय के लिए अगले चंद्रमा प्रभाव जाँच को दिया गया नाम

 (C) भारत की 3डी इमेजिंग क्षमताओं के साथ इसरो का एक जियोपोर्टल

 (D) भारत द्वारा विकसित अंतरिक्ष दूरदर्शी

 उत्तर: (C)

close
Share Page
images-2
images-2