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सर्वोच्च न्यायालय ने स्पेक्ट्रम को पब्लिक रिसोर्स बताया

  • 16 Feb 2026
  • 17 min read

स्रोत: द हिंदू 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि टेलीकॉम स्पेक्ट्रम भारत संघ के अधीन एक सार्वजनिक संसाधन है, इसे दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत बिक्री योग्य टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (TSP) की कॉर्पोरेट संपत्ति नहीं माना जा सकता है।

  • सीमित विशेषाधिकार: स्पेक्ट्रम (उपग्रहों के माध्यम से संचार हेतु प्रयुक्त विशिष्ट आवृत्ति बैंड) को स्वामित्व हित के रूप में नहीं, बल्कि उपयोग हेतु एक सीमित, सशर्त एवं विशेषाधिकार के रूप में प्रदान किया जाता है। 
    • यह अधिकार वैधानिक आवश्यकताओं, लाइसेंस की शर्तों और सार्वजनिक हित के अधीन है।
    • न्यायालय ने वित्तीय विवरणों में अमूर्त परिसंपत्तियों के रूप में दर्ज लाइसेंसिंग के अधिकार को स्वामित्व नहीं माना है।
    • स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग केवल भविष्य के आर्थिक लाभों पर नियंत्रण का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि कानूनी स्वामित्व विशेष रूप से भारत सरकार के पास निहित है।
  • IBC से बहिष्करण: न्यायालय ने माना कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) उन परिसंपत्तियों को अपने दायरे से बाहर रखती है, जिन पर कॉर्पोरेट देनदार का कोई स्वामित्व अधिकार नहीं है। 
    • चूँकि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSP) के पास स्पेक्ट्रम का कानूनी स्वामित्व नहीं है, इसे दिवाला समाधान या परिसमापन हेतु परिसंपत्तियों के समूह में शामिल नहीं किया जा सकता है।
  • दूरसंचार संबंधी कानूनों की सर्वोच्चता: न्यायालय ने कहा कि IBC के अधीन वैधानिक व्यवस्था स्पेक्ट्रम उपयोग के अधिकारों एवं दायित्वों का पुनर्गठन नहीं कर सकती, जो दूरसंचार विधेयक, 2023 एवं भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 के अनन्य विधिक शासन के अंतर्गत संचालित होते हैं।
  • लोक न्यास सिद्धांत: राज्य को जनता का न्यासी मानते हुए न्यायालय ने रेखांकित किया कि स्पेक्ट्रम का प्रबंधन जन‑कल्याण में होना चाहिये और इसे अनुच्छेद 14 (न्यायसंगतता और पारदर्शिता) के मानकों का अनुपालन करना होगा।
  • महत्त्व: यह निर्णय वित्तीय लेनदारों (जैसे– SBI) के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो ऋण वसूली हेतु स्पेक्ट्रम के अधिकारों का मुद्रीकरण करना चाहते थे।
    • अब दूरसंचार विभाग (DoT) के पास एयरसेल और आरकॉम जैसे डिफॉल्टर ऑपरेटरों से स्पेक्ट्रम वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है।

और पढ़ें: सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन

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