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लोकसभा में महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव

  • 16 Feb 2026
  • 49 min read

स्रोत: द हिंदू 

चर्चा में क्यों? 

एक सांसद (MP) ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के विरुद्ध एक सारगर्भित प्रस्ताव पेश किया है, जिसके माध्यम से राष्ट्रीय हित के विरुद्ध कथित आचरण के आधार पर उन्हें संसद से अयोग्य ठहराने और आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की गई है।

प्रस्तावों से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?

  • परिचय: संसदीय प्रक्रिया के अंतर्गत, 'प्रस्ताव' से तात्पर्य किसी सदस्य द्वारा प्रस्तुत उस औपचारिक प्रस्तावना से है, जिसके माध्यम से सदन से किसी विषय पर निर्णय अपेक्षित होता है।
    • सदन द्वारा निर्धारित प्रत्येक प्रश्न को एक प्रस्ताव के रूप में प्रस्तावित किया जाना चाहिये, जिसे तत्पश्चात या तो सकारात्मक या नकारात्मक रूप में निर्णीत किया जाता है। 
    • प्रस्ताव ही संसद में सभी चर्चाओं एवं निर्णयों का बुनियादी आधार है।
  • प्रस्तावों की स्वीकार्यता: स्पीकर किसी प्रस्ताव की स्वीकार्यता का निर्णय लेते हैं। लोकसभा में कार्य-संचालन एवं प्रक्रिया के नियम 186 के तहत किसी प्रस्ताव को स्वीकार किये जाने हेतु विशिष्ट मापदंडों को पूरा करना आवश्यक है, जिनमें शामिल हैं:
    • इसमें एक निश्चित मुद्दा उठाया जाना चाहिये।
    • इसमें तर्क, व्यंग्यपूर्ण अभिव्यक्तियाँ या मानहानि वाले कथन नहीं होने चाहिये।
    • यह हाल की घटना के मामले तक सीमित होना चाहिये।
    • यह किसी ऐसे मामले से संबंधित नहीं होना चाहिये जो वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन हो (न्याय हेतु विचाराधीन)।
    • यह मुख्य रूप से भारत सरकार से संबंधित होना चाहिये।
  • प्रस्तावों के प्रकार: प्रस्तावों को उनकी स्वतंत्रता एवं उद्देश्य के आधार पर तीन प्राथमिक श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

सारगर्भित प्रस्ताव

  • परिचय: सारगर्भित प्रस्ताव एक स्व-निहित प्रस्ताव होता है, जो अपने आपमें पूर्ण होता है तथा बिना किसी अन्य प्रस्ताव के संदर्भ के सदन के स्पष्ट निर्णय को अभिव्यक्त करने के लिये तैयार किया जाता है।
    • इसका उपयोग उच्च प्राधिकार वाले व्यक्तियों के आचरण पर चर्चा करने या महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के लिये किया जाता है।
  • उदाहरण: सभी संकल्प सारगर्भित प्रस्ताव होते हैं क्योंकि वे स्वयं में पूर्ण होते हैं और संसद के निर्णय को प्रकट करते हैं। 
    • इसे उपयोग किया जाता है:
      • राष्ट्रपति की महाभियोग की प्रक्रिया 
      • सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाना
      • स्पीकर या डिप्टी स्पीकर का चुनाव 
      • राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव
      • सार्वजनिक महत्त्व के विषय पर स्थगन प्रस्ताव
      • मंत्रिपरिषद में विश्वास या अविश्वास प्रस्ताव
      • स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव 
      • सदस्य के पद को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव 
      • सामान्य जनहित के विषयों पर चर्चा के लिये प्रस्ताव

स्थानापन्न प्रस्ताव

  • जानकारी: प्रतिस्थापन प्रस्ताव मूल प्रस्ताव (जैसे– किसी नीति या स्थिति पर विचार करने का प्रस्ताव) के स्थान पर प्रस्तुत किये जाते हैं।
    • हालाँकि ये एक विचार व्यक्त कर सकते हैं, ये मूल प्रस्ताव पर निर्भर होते हैं। 
  • प्रक्रिया: किसी नीति पर चर्चा के दौरान कोई सदस्य प्रतिस्थापन प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकता है।
    • चर्चा के अंत में केवल प्रतिस्थापन प्रस्ताव को ही मतदान के लिये रखा जाता है।
  • उदाहरण: वर्ष 1991 में, अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा के दौरान, सदस्यों ने प्रतिस्थापन प्रस्ताव (Substitute Motions) प्रस्तुत किये ताकि यह व्यक्त किया जा सके कि सरकार की विदेश नीति “असंतोषजनक” थी कुछ विशिष्ट विफलताओं (जैसे– गल्फ युद्ध के प्रति प्रतिक्रिया) के कारण।

सहायक प्रस्ताव

  • परिचय: यह एक प्रस्ताव है जो किसी अन्य प्रस्ताव पर निर्भर करता है या संसद में किसी कार्यवाही के बाद आता है।
    • अपने आपमें इसका कोई अर्थ नहीं है और सदन की मूल गति (original motion) या कार्यवाही के संदर्भ के बिना यह सदन के निर्णय को व्यक्त करने में सक्षम नहीं है।
  • सहायक प्रस्तावों के प्रकार:
    • अनुषंगी प्रस्ताव: यह एक ऐसा प्रस्ताव है जिसे सदन की कार्यप्रणाली में विभिन्न प्रकार के विधायी कार्यों के संचालन के लिये एक नियमित पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है।
      • यह कार्यवाही की प्रगति को सुगम बनाता है, जैसे कि यह प्रस्ताव रखना कि किसी विधेयक पर विचार किया जाए या उस विधेयक को पारित किया जाए।
    • प्रतिस्थापन प्रस्ताव: इसे बहस के दौरान विचाराधीन मुख्य प्रश्न को बदलने या विलंबित करने के लिये पेश किया जाता है। ये अक्सर विलंबकारी (जिनका उद्देश्य कार्यवाही में देरी करना होता है) होते हैं।
      • उदाहरणों में शामिल हैं: किसी विधेयक को सेलेक्ट या जॉइंट समिति को पुनः सौंपना, इसे सार्वजनिक राय के लिये पुनः प्रसारित करना या इसके विचार को किसी बाद की तिथि तक स्थगित करना।
    • संशोधन: यह एक अधीनस्थ प्रस्ताव है, जो मुख्य प्रश्न पर अंतिम निर्णय से पहले विचार का एक नया चरण प्रस्तुत करता है।
      • यह विधेयक, प्रस्ताव, प्रस्तावना या यहाँ तक कि किसी अन्य संशोधन में परिवर्तन करने का प्रयास कर सकता है, ताकि प्रस्ताव को अधिक स्वीकार्य बनाया जा सके या सदन के समक्ष एक वैकल्पिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सके।

Motions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. संसदीय प्रक्रिया में मोशन क्या है?
मोशन एक औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसे किसी सदस्य द्वारा सदन का निर्णय प्राप्त करने के उद्देश्य से पेश किया जाता है। यह सभी संसदीय चर्चा और प्रस्तावों की आधारशिला है।

2. सब्सटेंटिव मोशन (Substantive Motion) क्या है?
यह एक स्वायत्त प्रस्ताव होता है, जो स्वयं ही सदन के निर्णय को व्यक्त करने में सक्षम होता है। इसे प्रमुख कार्यों, जैसे– विश्वास मत (confidence Motion) या पदावनति प्रस्ताव (removal resolution) के लिये उपयोग किया जाता है।

3. लोकसभा में मोशन की वैधता कौन तय करता है?
स्पीकर नियम 186 के अंतर्गत मोशन की वैधता का निर्णय करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि मोशन प्रक्रिया और संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप हो।

4. सब्स्टिट्यूट और सब्सिडियरी मोशन में क्या अंतर है?
सब्स्टिट्यूट मोशन मूल मोशन को प्रतिस्थापित करता है, जबकि सब्सिडियरी मोशन किसी अन्य मोशन पर निर्भर करता है ताकि प्रक्रिया को संशोधित, स्थगित या सुगम बनाया जा सके।

5. संसदीय लोकतंत्र में मोशन क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
मोशन चर्चा को सक्षम बनाते हैं, जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं तथा सदन को सार्वजनिक मामलों पर औपचारिक रूप से अपनी इच्छा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करते हैं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स

प्रश्न. भारत की संसद किसके/किनके द्वारा मंत्रिपरिषद के कृत्यों के ऊपर नियंत्रण रखती है? (2017)

  1. स्थगन प्रस्ताव 
  2. प्रश्नकाल 
  3. अनुपूरक प्रश्न

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)

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