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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 10 Oct, 2020
  • 22 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट्स: 10 अक्तूबर, 2020

रुद्रम

Rudram

9 अक्तूबर, 2020 को भारतीय वायु सेना के लिये विकसित भारत की पहली स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइलरुद्रम’ (Rudram) का भारत के पूर्वी तट से सुखोई-30 एमकेआई (Sukhoi-30 MKI) जेट से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

Rudram

एंटी-रेडिएशन मिसाइल: 

  • एंटी-रेडिएशन मिसाइलों को दुश्मन देश की रडार, संचार परिसंपत्तियों एवं अन्य रेडियो आवृत्ति स्रोतों का पता लगाने, ट्रैक करने और उनको बेअसर करने के लिये डिज़ाइन किया जाता है जो आमतौर पर किसी देश की वायु रक्षा प्रणालियों का हिस्सा होती हैं।
  • इस तरह के मिसाइल नेवीगेशन तंत्र में एक जड़त्वीय नेवीगेशन प्रणाली (Inertial Navigation System) शामिल होती है।
    • ‘जड़त्वीय नेवीगेशन प्रणाली’ एक कम्प्यूटरीकृत तंत्र है जो ऑब्जेक्ट की अपनी स्थिति में परिवर्तन का उपयोग करता है और GPS के साथ युग्मित होता है।

 पैसिव होमिंग हेड (Passive Homing Head):

  • मिसाइल को एक दिशा में निर्देशित करने के लिये इसमें एक ‘पैसिव होमिंग हेड’ (Passive Homing Head) प्रणाली का भी उपयोग किया गया है। 
    • ‘पैसिव होमिंग हेड’ एक ऐसी प्रणाली है जो प्रोग्राम के रूप में आवृत्तियों के एक विस्तृत बैंड पर लक्ष्य (रेडियो आवृत्ति स्रोतों) की पहचान, उसे वर्गीकृत एवं संलग्न कर सकती है।
    • अर्थात् यदि एक बार रुद्रम मिसाइल लक्ष्य पर केंद्रित हो जाती है तो विकिरण स्रोत को बीच में बंद करने पर भी यह सटीक रूप से प्रहार करने में सक्षम है।

मारक क्षमता:

  • लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जाने वाली मिसाइल मापदंडों के आधार पर रुद्रम की ऑपरेशनल रेंज 100 किमी. से अधिक है।

रुद्रम को विकसित करने वाला संगठन:

  • रुद्रम, हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा डिज़ाइन एवं विकसित किया गया है।   
  • DRDO ने लगभग 8 वर्ष पहले इस तरह की एंटी-रेडिएशन मिसाइलों का विकास शुरू किया था।
  • लड़ाकू जेट विमानों के साथ इसका एकीकरण भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Ltd.) की विभिन्न DRDO सुविधाओं एवं संरचनाओं का एक सहयोगात्मक प्रयास रहा है।
  • हालाँकि इस मिसाइल का परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई जेट से किया गया है किंतु इसे अन्य लड़ाकू जेट विमानों से लॉन्च किये जाने के लिये भी अनुकूलित किया जा सकता है।

‘रुद्रम’ का नामकरण:

  • संस्कृत से लिया गया शब्द ‘रुद्रम’ (RUDRAM) में A-R-M अक्षर शामिल हैं जो एंटी-रेडिएशन मिसाइल (Anti-Radiation Missile) के संक्षिप्त नाम को प्रतिबिंबित करते हैं।
  • संस्कृत शब्द ‘रुद्रम’ का अर्थ ‘दुखों का निवारण’ (Remover of Sorrows) है। 

हवाई युद्ध में इन मिसाइलों की महत्ता:

  • रुद्रम को भारतीय वायु सेना (IAF) की ‘सप्रेशन ऑफ एनिमी एयर डिफेंस’ (Suppression of Enemy Air Defence- SEAD) क्षमता को बढ़ाने के लिये विकसित किया गया है।
  • SEAD रणनीति के कई पहलुओं में से एक के रूप में एंटी-रेडिएशन मिसाइलों का उपयोग मुख्य रूप से दुश्मन की हवाई रक्षा परिसंपत्तियों पर हमले के लिये हवाई संघर्ष के प्रारंभ में किया जाता है।


विज्ञान ज्योति और ‘एंगेज विद साइंस’

Vigyan Jyoti and Engage with Science 

8 अक्तूबर, 2020 को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology) और आईबीएम इंडिया (IBM India) ने DST की दो पहलों ‘विज्ञान ज्योति’ (Vigyan Jyoti) एवं ‘एंगेज विद साइंस’ (Engage with Science) को आगे बढ़ाने के लिये आपस में सहयोग की घोषणा की।

STEM

प्रमुख बिंदु:

  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (Science Technology, Engineering, and Mathematics- STEM) में रुचि बढ़ाने हेतु मेधावी छात्राओं के लिये मौजूदा अवसरों का विस्तार किया जाएगा और IBM के साथ साझेदारी से देश के युवाओं में सीखने एवं वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिये एक शिक्षण मंच तैयार किया जाएगा।

विज्ञान ज्योति (Vigyan Jyoti):

  • विज्ञान ज्योति छात्राओं को STEM सीखने हेतु प्रोत्‍साहन देने और STEM कॅॅरियर के प्रति उन्हें प्रेरित करने के लिये तथा उच्च शिक्षा में STEM को आगे बढ़ाने के लिये (विशेष रूप से उन क्षेत्रों के शीर्ष महाविद्यालयों जहाँ लड़कियों की संख्‍या काफी कम है) 9 से 12 वीं कक्षा तक की मेधावी छात्राओं हेतु समान अवसरों का निर्माण करने के लिये एक कार्यक्रम है।
  • छात्राओं को STEM क्षेत्रों में उच्च शिक्षा एवं कॅॅरियर बनाने हेतु प्रेरित करने के लिये DST ने वर्ष 2019 में विज्ञान ज्योति कार्यक्रम शुरू किया था।
  • इस कार्यक्रम के माध्‍यम से आसपास के वैज्ञानिक संस्थानों का दौरा, विज्ञान शिविर, प्रख्यात महिला वैज्ञानिकों के व्याख्यान और कॅॅरियर परामर्श के लिये छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। 
  • इस कार्यक्रम को अभी तक जवाहर नवोदय विद्यालय द्वारा देश के 58 ज़िलों में लागू किया गया है जिसमें लगभग 2900 छात्राओं की भागीदारी है।

‘एंगेज विद साइंस’ (Engage with Science):

  • ‘एंगेज विद साइंस’ (विज्ञान प्रसार) हाईस्कूल के छात्रों को उच्च शिक्षा संस्थानों से जोड़ने के लिये छात्रों, शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों के साथ एक समुदाय का गठन करने की एक पहल है।

‘आईबीएम इंडिया’ की भूमिका: 

  • आईबीएम इंडिया के साथ DST की साझेदारी वर्तमान गतिविधियों को मज़बूत करेगी और भविष्य में ‘विज्ञान ज्योति’ पहल को अधिक स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा। 
  • आईबीएम इंडिया में कार्य करने वाली महिला तकनीकी विशेषज्ञ छात्राओं को कार्यक्रम के तहत STEM में कॅॅरियर बनाने के लिये प्रेरित करेंगी।

इंस्पायर अवार्ड्स-मानक (Inspire Awards-MANAK):

  • DST और आईबीएम इंडिया का उद्देश्य एक मज़बूत ‘STEM इकोसिस्टम’ तैयार करना है, जो इंस्पायर अवार्ड्स-मानक [Inspire Awards-MANAK (Million Minds Augmenting National Aspirations and Knowledge)] के माध्यम से महत्त्वपूर्ण विचारकों, समस्या-समाधानकर्त्ताओं के सहयोग से अगली पीढ़ी के इनोवेटरों यानी स्कूल के छात्रों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देता है।


अमृत मिशन 

AMRUT Mission

हाल ही में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों में अमृत (AMRUT) मिशन  के तहत किये गए कार्यों की सराहना की।

Amrut-mission

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 31 मार्च, 2021 तक विस्तारित मिशन अवधि के भीतर सभी परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है ताकि केंद्रीय सहायता का लाभ उठाया जा सके। 
    • इन दो पहाड़ी राज्यों के मामले में अमृत मिशन के तहत केंद्रीय सहायता की राशि 90%  है। 
  • अमृत (AMRUT) मिशन  के तहत हिमाचल प्रदेश में 32 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और 41 परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं। 
  • इस मिशन के तहत उत्तराखंड में 593 करोड़ रुपए की कुल 151 परियोजनाएँ शामिल हैं। इनमें से 47 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं और 100 परियोजनाएँ कार्यान्वित की जा रही हैं।
  • हिमाचल प्रदेश को अमृत (AMRUT) मिशन के तहत की गई राष्ट्रीय रैंकिंग में 15वाँ और उत्तराखंड को 24वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।

‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) अभियान: 

Catch-the-Rain

  • हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिये केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। 
  • राष्ट्रीय जल मिशन (NWM) के तहत शुरू किया गया ‘कैच द रेन’ अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून से पहले जलवायु परिस्थितियों और उप-मृदा स्तर के लिये उपयुक्त वर्षा जल संरक्षण ढाँचा (Rain Water Harvesting Structures- RWHS) तैयार करने के लिये राज्यों एवं विभिन्न हितधारकों को आकर्षित करना है।  
    • इस अभियान के तहत वर्षा जल की प्रत्येक बूँद का संरक्षण करना है। 

लक्ष्य: 

  • इस अभियान का लक्ष्य शहरों की सभी इमारतों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को लागू करना है।

अमृत (AMRUT) मिशन

  • ‪‎अमृत (AMRUT) मिशन का पूरा नाम ‘अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन’ है। 
  • इसे भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा जून 2015 में लॉन्च किया गया था।
  • इसके अंतर्गत उन परियोजनाओं को भी शामिल किया जाता है जो जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (JNNURM) के अंतर्गत अधूरी रह गई हैं। 
  • इसका नोडल मंत्रालय केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय है।
  • अमृत परियोजना के अंतर्गत जिन कस्बों या क्षेत्रों को चुना जा रहा है वहाँ बुनियादी सुविधाएँ जैसे- बिजली, पानी की सप्लाई, सीवर, कूड़ा प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, ट्रांसपोर्ट, बच्चों के लिये पार्क, अच्छी सड़क और चारों तरफ हरियाली आदि विकसित की जा रही हैं।

गोवा: 'हर घर जल' वाला पहला राज्य

Goa: First 'Har Ghar Jal' State

हाल ही में 2.30 लाख ग्रामीण परिवारों को कवर करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 100% कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connections) उपलब्ध कराकर गोवा देश में ‘हर घर जल‘ वाला पहला राज्य (First 'Har Ghar Jal' State) बन गया।

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प्रमुख बिंदु:

  • जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission- JJM) के तहत गोवा के ग्रामीण क्षेत्रों में 100% ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ उपलब्ध कराया गया है। 
    • इस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाना तथा उनके  जीवन को आसान बनाना है। 

Jal-Jeevan-Mission

जल परीक्षण के लिये प्रशिक्षण: 

  • गोवा में जल परीक्षण सुविधाओं को मज़बूत करने के लिये 14 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएँ (Water Quality Testing Laboratories), राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories- NABL) से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं। 
  • ‘जल जीवन मिशन’ के तहत प्रत्येक गाँव में 5 व्यक्तियों विशेष रूप से महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (Field Test Kits) के उपयोग में प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे कि गाँव में ही पानी का परीक्षण किया जा सके।

वैश्विक महामारी और गोवा में प्रशासनिक सक्रियता:   

  • गोवा राज्य की यह उपलब्धि (प्रत्येक ग्रामीण घर को विशेष रूप से COVID-19 महामारी के दौरान नल कनेक्शन उपलब्ध कराना) अन्य राज्यों के लिये एक उदाहरण है।
  • घरों में नल कनेक्शन से जल के संदर्भ में ग्रामीण भारत में होने वाली यह मौन क्रांति ‘नए भारत के लिये कार्य प्रगति पर है’ का सूचक है।
    • केंद्र सरकार के लिये शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 10 अक्तूबर , 2020

महिलाओं की सुरक्षा हेतु नए परामर्श 

केंद्र ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों से निपटने के लिये राज्‍यों को एक नये परामर्श जारी किये हैं और कहा है कि पुलिस द्वारा निर्धारित नियमों का पालन न कर पाना देश की न्‍याय प्रणाली के साथ खिलवाड़ है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस परामर्श में कहा गया है कि किसी भी संज्ञेय अपराध में दण्‍ड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure- CrPC) के तहत अनिवार्य रूप से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिये। परामर्श के अनुसार कानून में पुलिस थाने को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर हुए किसी अपराध के सिलसिले में ज़ीरो FIR दायर करने का भी अधिकार दिया गया है। महिलाओं से यौन दुष्‍कर्म सहित किसी भी संज्ञेय अपराध के होने की सूचना मिलने पर पुलिस के लिये प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना आवश्‍यक है। मंत्रालय ने कहा है कि कानून के प्रावधानों को कड़ा करने और क्षमता बढ़ाने के उपायों के बाद भी पुलिस द्वारा अनिवार्य नियमों का पालन न किया जाना देश की आपराधिक न्‍याय प्रक्रिया के लिये उचित नहीं है। परामर्श में कहा गया है कि नियमों के पालन में कोई चूक नजर आने पर इसकी जांच की जानी चाहिये और इसके लिये उत्‍तरदायी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तत्‍काल कठोर कार्रवाई की जानी चाहिये।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य में हमारा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण शामिल होता है। यह हमारे सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। सर्वप्रथम इसका प्रारंभ वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ द्वारा की गई थी। इस वर्ष मानसिक स्वास्थ्य दिवस ‘सभी के लिये मानसिक स्वास्थ्य: अधिक से अधिक निवेश, अधिक से अधिक पहुँच’  थीम के साथ मनाया जा रहा है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पहली बार वर्ष  1992 में संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव रिचर्ड हंटर और वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ (World Health Fedreation For Mental Health) की पहल पर मनाया गया था। यह 150 से अधिक सदस्य देशों वाला एक वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संगठन है। इसके बाद वर्ष 1994 में तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव यूजीन ब्रॉडी के सुझाव के बाद विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस को एक थीम के साथ मनाने की शुरुआत की गई। वर्ष 1994 में पहली बार ‘विश्व में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार’ नामक थीम के साथ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया था।

सागर कवच

भारतीय नौसेना ने ‘सागर कवच’ नामक दो दिवसीय तटीय सुरक्षा अभ्यास किया। सुरक्षा अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा भारतीय तटरक्षक बल के साथ आयोजित किया गया था। तटीय सुरक्षा तंत्र की जांच करने और मानक संचालन प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये यह अर्ध-वार्षिक अभ्यास है। भारतीय तटरक्षक बल के लगभग 50 गश्ती जहाज़ और भारतीय नौसेना के 20 जहाज़ों ने अभ्यास में भाग लिया। भारतीय नौसेना और तट रक्षक बल के अलावा आसूचना ब्यूरो, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, समुद्री प्रवर्तन विंग, मत्स्य विभाग, कोचीन शिपयार्ड और तटीय जिला प्रशासन ने भी भाग लिया। अभ्यास के दौरान प्रतिभागियों को रेड और ब्लू नामक दो टीमों में विभाजित किया गया था। रेड टीम ने तटीय क्षेत्रों में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकवादी गतिविधियों का अनुकरण किया। ब्लू टीम ने घुसपैठ की कोशिशों को बेअसर करने के लिये तटीय सुरक्षा निगरानी को अंजाम दिया।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की शुरुआत की। यह योजना युवाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही हरित ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा देगी। यह योजना मुख्य रूप से प्रवासी कामगारों और युवाओं को लक्षित करती है जो लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न शहरों से अपनी नौकरी छोड़कर अपने घरों को लौट गए हैं। योजना के प्रत्येक लाभार्थी को 25 किलोवाट के सौर ऊर्जा संयंत्र भी आवंटित किया जाना है। अनुमान है कि ये सौर ऊर्जा संयंत्र प्रति वर्ष 38,000 यूनिट विद्युत उत्पन्न करेंगे। उत्पन्न विद्युत को उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन द्वारा 25 वर्षों के लिये खरीदा जाना है। स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्र एक ही भूमि पर फल सब्जियों और जड़ी बूटियों की एकीकृत खेती में मदद करेंगे।


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