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सुखोई -30 एमकेआई

  • 03 Feb 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

सुखोई- 30 MKI, ब्रह्मोस मिसाइल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, चीफ ऑफ डिफेंस

मेन्स के लिये:

रक्षा चुनौतियों से संबंधित मुद्दे, हिन्द महासागर के क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile) से लैस चौथी पीढ़ी के लड़ाकू जेट सुखोई- 30 एमकेआई (Sukhoi-30 MKI) के एक दस्ते (Squadron) को दक्षिणी वायु कमान के तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन में शामिल किया गया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु:

  • इस दस्ते को औपचारिक रूप से देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस (Chief of Defence- CDS) द्वारा दक्षिणी वायु कमान में शामिल किया गया।
  • यह दस्ता, टाइगर्स 222 दस्ते का पुनरुत्थान है। ध्यातव्य है कि टाइगर्स 222 दस्ते को वर्ष 1969 में सुखोई- 7 विमान के साथ स्थापित किया गया था और जुलाई 1971 में इस दस्ते को हलवारा (Halwara) में स्थानांतरित किया गया था और इसका प्रयोग वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में किया गया था।
  • CDS के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल से लैस सुखोई- 30 MKI हमारे सशस्त्र बलों के लिये गेम-चेंजर साबित होगा।
  • सुखोई- 30 जेट को ब्रह्मोस (हवा से सतह पर मार करने वाली) मिसाइलों को ले जाने के लिये संशोधित किया गया है, जिससे उन्हें लंबी दूरी के सटीक हमले करने की क्षमता मिलती है।

सुखोई- 30 एमकेआई और ब्रह्मोस का एकीकरण

  • वर्ष 2014 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (Hindustan Aeronautics Limited- HAL) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड (BrahMos Aerospace Pvt Ltd- BAPL) ने मिसाइल के साथ एकीकरण के लिये दो सुखोई- 30 एमकेआई विमानों को संशोधित करने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये थे।
  • यह दुनिया में पहली बार था जब किसी लड़ाकू विमान में इतनी भारी वज़न वाली मिसाइल को एकीकृत किया गया।
  • 2.5 टन वाली ब्रह्मोस मिसाइल सुखोई- 30 MKI लड़ाकू विमान पर स्थापित किया जाने वाला सबसे भारी हथियार है।

सुखोई- 30 एमकेआई को दक्षिणी कमान में शामिल करने के निहितार्थ

  • दक्षिणी कमान के तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन में इसे शामिल करने से हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी तंत्र को मज़बूत किया जा सकता है।
  • यह दस्ता न केवल समुद्री डोमेन की सुरक्षा को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगा बल्कि कमज़ोर क्षेत्रों की रक्षा करने वाली थल सेना के समर्थन में भी कार्य कर सकता है।
  • यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) में हवाई और समुद्री प्रभुत्व बनाए रखने में मदद करेगा।

सुखोई- 30 MKI के बारे में

  • यह रूस के सुखोई और भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के सहयोग से निर्मित लंबी दूरी का फॉइटर जेट है।
  • यह एक बार में 3000 किमी. तक की दूरी तय कर सकता है तथा इसमें हवा में ही ईधन भरा जा सकता है।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

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