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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 10 Mar 2026
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हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026

चर्चा में क्यों?

हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026 भारत में अरबपतियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाती है।

मुख्य बिंदु: 

  • नए अरबपति: रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025–26 में भारत में 57 नए अरबपति जुड़े, जिससे कुल संख्या बढ़कर 308 हो गई। इससे भारत वैश्विक स्तर पर धन सृजन के सबसे तेज़ी से बढ़ते केंद्रों में से एक बन गया है।
    • भारत संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा सबसे बड़ा अरबपति केंद्र बना हुआ है।
  • कुल संपत्ति: भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति में 10% की वृद्धि होकर लगभग ₹112.6 ट्रिलियन हो गई है।
  • औसत संपत्ति: भारतीय अरबपतियों की औसत संपत्ति लगभग ₹36,570 करोड़ है, जो अब चीन के अरबपतियों की औसत संपत्ति से भी अधिक हो गई है।
  • संपत्ति का वितरण: कुल अरबपतियों में से 199 व्यक्तियों की संपत्ति में वृद्धि हुई, जबकि 109 व्यक्तियों की संपत्ति में कमी आई या कोई बदलाव नहीं हुआ।
  • मुंबई का प्रभुत्व: मुंबई, जिसे भारत की अरबपति राजधानी कहा जाता है, अब भी 95 अरबपतियों के साथ देश का प्रमुख अरबपति केंद्र बना हुआ है।
    • भारत के अन्य प्रमुख अरबपति केंद्र हैं:
      • नई दिल्ली
      • बंगलूरू
      • हैदराबाद
  • विकास की गति: इस वर्ष मुंबई में 15 नए अरबपति जुड़े, जो वैश्विक वित्तीय केंद्रों, जैसे न्यूयॉर्क (14) और लंदन (9) से अधिक हैं।
  • एशियाई रैंकिंग: हालाँकि मुंबई भारत में शीर्ष स्थान पर है, लेकिन उसने एशिया की अरबपति राजधानी का दर्जा शेन्ज़ेन को खो दिया है, जहाँ अब 132 अरबपति रहते हैं।
  • शीर्ष भारतीय अरबपति (हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2026)
    • मुकेश अंबानी
      • रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष
      • भारत के सबसे धनी व्यक्ति बने हुए हैं।
    • गौतम अडानी
      • अडानी समूह के संस्थापक
      • वैश्विक स्तर पर प्रमुख धन सृजकों में शामिल।
    • शिव नादर
      • HCL टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक।
    • साइरस पूनावाला
      • सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक।
    • राधाकिशन दमानी
      • एवेन्यू सुपरमार्ट्स (डीमार्ट) के संस्थापक।
  • आर्थिक परिवर्तन: वर्ष 2026 की सूची में शामिल 80% से अधिक भारतीय अरबपति एक दशक पहले इस सूची में नहीं थे, जो पारंपरिक पारिवारिक व्यवसायों से हटकर नए युग की उद्यमिता की ओर बदलाव को दर्शाता है।
  • लैंगिक अंतर: भारत के अरबपतियों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 7% है, जो अत्यधिक उच्च संपत्ति वाले वर्ग में लैंगिक असमानता को दर्शाती है।

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मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर

चर्चा में क्यों?

 मोजतबा खामेनेई एक ईरानी धर्मगुरु हैं और इस्लामिक गणराज्य ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर हैं। उन्हें 8 मार्च, 2026 को इस पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई का स्थान लिया, जो वर्ष 1989 से देश पर शासन कर रहे थे।

मुख्य बिंदु:   

  • प्रारंभिक जीवन: मोजतबा खामेनेई का जन्म ईरान के मशहद शहर में हुआ था।
    • उन्होंने शिया विद्वता के प्रमुख केंद्र कोम के धार्मिक शिक्षण संस्थानों (सेमिनरी) में इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन किया।
    • ईरान–इराक युद्ध के दौरान उन्होंने कथित रूप से स्वयंसेवी बलों में सेवा दी।
  • सैन्य संबंध: उन्होंने वर्ष 1987 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर ईरान–इराक युद्ध के अंतिम वर्षों में सेवा की। उनके IRGC और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहरे एवं दीर्घकालिक संबंध माने जाते हैं।
  • राजनीतिक भूमिका: माना जाता है कि वर्ष 2005 और 2009 में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद के उभार के पीछे वे प्रमुख रणनीतिकार थे।
  • विरोध का दमन: आलोचकों और सुधारवादी नेताओं ने लंबे समय से उन पर 2009 के ग्रीन मूवमेंट तथा बाद के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर हुए हिंसक दमन की योजना बनाने का आरोप लगाया है।
  • वंशानुगत उत्तराधिकार: उनका चयन ऐतिहासिक और विवादास्पद माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति ने वंशानुगत शासन को अस्वीकार किया था।
    • इस प्रकार की ‘वंशवादी’ व्यवस्था की ओर यह बदलाव देश के भीतर असंतोष को और बढ़ा सकता है।
  • कट्टर नीति की निरंतरता: विशेषज्ञों के अनुसार उनका नेतृत्व यह संकेत देता है कि ईरान अपनी टकरावपूर्ण नीतियों को जारी रख सकता है।
    • उन्हें अपने पिता की तुलना में परमाणु हथियार विकसित करने के प्रति अधिक समर्थक माना जाता है।
  • भूराजनैतिक तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें ‘कमज़ोर नेता’ बताते हुए इस चयन को ‘अस्वीकार्य’ कहा है, जबकि इज़राइल ने संकेत दिया है कि उनका उत्तराधिकारी अभी भी ‘निशाना बनाए जाने योग्य’ है।
    • इसके विपरीत रूस और चीन ने ईरानी संविधान के आधार पर उनकी नियुक्ति का समर्थन व्यक्त किया है।

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डेनमार्क ने HIV तथा सिफिलिस के माता से शिशु संचरण का उन्मूलन किया

चर्चा में क्यों?

27 फरवरी, 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेनमार्क को यूरोपीय संघ का पहला देश प्रमाणित किया, जिसने HIV और सिफिलिस दोनों के माँ-से-शिशु में संचरण (EMTCT) को समाप्त कर दिया है।

मुख्य बिंदु:   

  • उपलब्धि: डेनमार्क ने वर्ष 2021 से 2024 के बीच EMTCT के लिये निर्धारित कड़े अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा किया, जिनमें शामिल हैं:
    • संक्रमण दर: नवजात शिशुओं में नए संक्रमणों को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 50 से कम रखना।
    • जाँच और उपचार: यह सुनिश्चित करना कि कम से कम 95% गर्भवती महिलाओं की जाँच हो और उन्हें आवश्यक उपचार प्राप्त हो।
    • सार्वभौमिक देखभाल: अपनी सार्वभौमिक स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से मुफ्त या कम लागत पर प्रसवपूर्व जाँच और देखभाल उपलब्ध कराना।
  • वैश्विक स्थिति: डेनमार्क अब बोत्सवाना, मलेशिया और क्यूबा सहित 20 से अधिक देशों तथा क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जिन्हें WHO द्वारा इसी प्रकार की मान्यता प्राप्त है।
  • ट्रिपल एलिमिनेशन लक्ष्य: अब डेनमार्क अपने प्रमाणित संक्रमण-मुक्त सूची में हेपेटाइटिस B को जोड़कर ‘ट्रिपल एलिमिनेशन’ हासिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
  • जन स्वास्थ्य: यह उपलब्धि समन्वित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और मज़बूत डेटा निगरानी प्रणालियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
  • मानवाधिकार: यह सफलता ऐसे अधिकार-आधारित नीतियों पर आधारित है, जो किसी भी पृष्ठभूमि के बावजूद सभी के लिये स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच सुनिश्चित करती हैं।
  • SDG लक्ष्य: यह उपलब्धि नवजात शिशुओं और बच्चों की निवारणीय मृत्यु को समाप्त करने, सतत विकास लक्ष्य 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) की प्राप्ति में प्रत्यक्ष रूप से सहायक है।

और पढ़ें: SDG, HIV और सिफिलिस


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