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प्रौद्योगिकी

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग

  • 20 Dec 2018
  • 13 min read

संदर्भ


भारत बुनियादी शोध के क्षेत्र में शीर्ष रैंकिंग देशों में से एक है। वर्ष 2018 में बदलते वैश्विक परिदृश्य और प्रतिस्पर्द्धी अर्थव्यवस्था में भारतीय विज्ञान को वृद्धि एवं विकास के सबसे शक्तिशाली उपकरणों में से एक माना जाता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology-S&T) के नए क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मई 1971 में स्थापित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science & Technology-DST) देश में S&T गतिविधियों के आयोजन, समन्वय और प्रचार के लिये एक नोडल विभाग की भूमिका निभाता है।

वर्ष 2018 में विभाग की प्रमुख पहल, उपलब्धियाँ और विशेषताएँ निम्नानुसार हैं:

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतःविषय साइबर पर राष्ट्रीय मिशन (National Mission on Interdisciplinary Cyber)-भौतिक प्रणालियों (Physical Systems) को लॉन्च करने के लिये अपनी मंज़ूरी दी है ताकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा पाँच साल की अवधि के लिये 3660 करोड़ रुपए के कुल व्यय पर  इस मिशन को कार्यान्वित किया जा सके।
  • यह मिशन समाज की बढ़ती तकनीकी आवश्यकताओं को संबोधित करता है और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के लिये अग्रणी देशों के अंतर्राष्ट्रीय रुझानों और रोडमैप (international trends and road maps) को प्राथमिकता देता है।
  • नवंबर में ग्लोबल कूलिंग पुरस्कार (Global Cooling Prize) को लॉन्च किया गया, यह नवाचार के क्षेत्र में एक चुनौती है, जिसका उद्देश्य आवासीय शीतलन समाधान (residential cooling solution) के विकास को बढ़ावा देना है ताकि वर्तमान के मानक उत्पादों की तुलना में जलवायु प्रभाव को कम-से-कम पाँच गुना (5x) कम किया जा सकें। यह तकनीक 2050 तक CO2 के समकक्ष 100 गीगाटन (gigatons) उत्सर्जन में कमी कर सकती है। 2 साल की प्रतिस्पर्द्धा के बाद पुरस्कार राशि में 3 मिलियन अमेरिकी डॉलरसे अधिक का पुरस्कार दिया जाएगा।
  • अपनी एक्ट ईस्ट नीति के तहत 19-30 नवंबर, 2018 के दौरान नई दिल्ली में भारत द्वारा पहले आसियान-भारत इनोटेक शिखर सम्मेलन (ASEAN-India InnoTech Summit) की मेज़बानी की गई। इनोटेक शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय और आसियान शोधकर्त्ताओं, वैज्ञानिकों, इनोवेटर्स, टेक्नोक्रैटस, निजी कंपनियों, स्टार्ट-अप आदि के बीच नेटवर्क स्थापित करना है। इस नेटवर्क के माध्यम से भारत और आसियान देशों के हितधारकों के बीच एक आसियान-भारत नवाचार एवं प्रौद्योगिकी डेटाबैंक (ASEAN-India Innovation and Technology Databank) का निर्माण किया जाएगा।
  • वाहन प्रदूषण (vehicular pollution) का मुकाबला करने के लिये नई दिल्ली में ‘वायु’ (Wind Augmentation and purify Ying Unit- WAYU) प्रणाली की शुरुआत की गई। वायु प्रणाली वातावारण में मौजूद PM10, PM2.5, CO, VOCs, HC में कमी कर सकती है।
  • ‘The Make Tomorrow for Innovation Generation’ विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और इंटेल टेक्नोलॉज़िज तथा इंडो-यूएस S&T फोरम के बीच एक पीपीपी पहल है। इस कार्यक्रम में 14-17 वर्ष की आयु वर्ग के स्कूली बच्चों को किट प्रदान कर उन्हें इसके उपयोग से अभिनव प्रोटोटाइप बनाने के लिये प्रोत्साहित किया गया।
  • जुलाई 2018 में भारत में अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) के भारत-कोरियाई केंद्र की स्थापना के संदर्भ में दोनों देशों की सरकार के बीच एक बड़ी साझेदारियों की घोषणा की गई, यह केंद्र सभी सहकारी कार्यक्रमों के व्यवस्थित संचालन और प्रबंधन के केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
  • Physiology, दवा और संबद्ध क्षेत्रों के 30 युवा मेधावी भारतीय विद्वानों ने 24-29 जून, 2018 के दौरान जर्मनी के Lindau में आयोजित 68वीं नोबेल पुरस्कार विजेताओं की बैठक में भाग लिया। 27 युवा भारतीय वैज्ञानिक/इनोवेटर्स ने 25-29 जून 2018 के दौरान डरबन (दक्षिण अफ्रीका) में आयोजित ब्रिक्स वैज्ञानिक कॉन्क्लेव (BRICS Scientist Conclave) में भी भाग लिया। सम्मेलन में सामाजिक अनुप्रयोगों के लिये ऊर्जा, जल और सूचना एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग पर आधारित तीन विषयों को शामिल किया गया। कॉन्क्लेव द्वारा ब्रिक्स यंग इनोवेटर्स पुरस्कार प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, इसमें 23 वर्ष के एक भारतीय इनोवेटर को ‘ब्रिक्स के सबसे आशाजनक इनोवेटर’ (BRICS most promising Innovator) के रूप में सम्मानित किया गया।
  • भारत और कनाडा के बीच हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य दोनों देशों के बीच उत्कृष्ट अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर केंद्रित साझेदारी को प्रोत्‍साहित करना है, जो दोनों देशों को नई खोज करने के कार्य में मज़बूती प्रदान करेगा। दोनों पक्ष वैश्विक चुनौतियों से निपटने; आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की क्षमता को साकार करने; डिजिटल अर्थव्यवस्था; स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों; साइबर सुरक्षा और स्वच्छ विकास, स्मार्ट शहरीकरण तथा भविष्य की गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिये सहयोग बढ़ाएंगे।
  • भारतीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने नवाचार और उद्यमिता उत्सव (Festival of Innovation and Entrepreneurship-FINE) का उद्घाटन किया।
  • भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इज़राइल के राष्ट्रीय तकनीकी नवाचार प्राधिकरण (National Technological Innovation Authority) ने संयुक्त रूप से पाँच वर्षों की अवधि के लिये 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 'भारत-इज़राइल औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी नवाचार कोष' (India-Israel Industrial R&D and Technological Innovation Fund-I4 Fund) की स्थापना की। यह कोष संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के लिये समर्थन प्रदान करेगा जिसका उद्देश्य व्यावसायिक तकनीक के लिये संभावित नवाचार प्रौद्योगिकी-संचालित उत्पादों, सेवाओं अथवा प्रक्रियाओं को सह-विकसित करना है।  

2018 की शुरुआत में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगकी मंत्रालय ने विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (Science and Engineering Research Board-SERB) की निम्नलिखित तीन योजनाओं की शुरुआत भी की।  

  1. शोध विशिष्टता के लिये शिक्षक एसोसिएटशिप (Teacher Associate ship for Research Excellence- TARE): इस योजना का उद्देश्य राज्य स्तर पर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और निजी शैक्षणिक संस्थानों में काम कर रहे प्राध्यापकों की अंतर्निहित क्षमता को टैप करना है, जो प्रशिक्षित तो हैं लेकिन सुविधाओं, वित्तपोषण और मार्गदर्शन की कमी सहित विभिन्न कारणों से अपने शोध को आगे बढ़ाने में कठिनाई का सामना करते हैं। ‘तारे’ (TARE) योजना राज्य विश्वविद्यालयों या कॉलेजों में नियमित रूप से काम कर रहे शिक्षकों को IIT, IISC, IISER, राष्ट्रीय लैब्स आदि जैसे शैक्षणिक संस्थानों में अंशकालिक अनुसंधान करने की अनुमति देती है। ये शिक्षक जिस शहर में स्थित संस्थान में पढ़ा रहे होंगे उसी शहर में स्थित IIT, IISC, IISER, राष्ट्रीय लैब्स आदि के साथ काम करने का मौका मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत 500 रुपए तक का यात्रा भत्ता भी दिया जाएगा।
  2. ओवरसीज विजिटिंग डॉक्टोरल फ़ेलोशिप (Overseas Visiting Doctoral Fellowship- OVDF): इस योजना के अंतर्गत 100 भारतीय छात्रों को अपने शोध कार्य के दौरान 12 महीनों के लिये विदेशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध करने का अवसर प्रदान किया जाता है तथा प्रत्येक छात्र को प्रतिमाह 2000 डॉलर की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
  3. SERB विशिष्ट अन्वेषण पुरस्कार (Distinguished Investigator Award-DIA): DIA को SERB/DST परियोजनाओं के उन PIs (Principal Investigators-PIs) की पहचान करने और उन्हें पुरस्कृत करने के लिये शुरू किया गया है जिन्होंने उल्लेखनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है। DIA एक बार अर्थात् One-Time करियर पुरस्कार (one-time career award) है जो विशेष रूप से उन युवा वैज्ञानिकों के लिये शुरू किया गया है जिन्हें कोई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार या फैलोशिप प्राप्त नहीं हुई है।
  • वर्ष की कुछ अन्य प्रमुख पहलों में  IISc बंगलूरू में भारत की पहली Supercritical Brayton Cycle CO2 Test Facility का उद्घाटन किया गया, जिसमें सौर ऊर्जा सहित ताप स्रोतों की विस्तृत श्रृंखला द्वारा संचालित अत्यधिक कुशल कॉम्पैक्ट पावर प्लांटों का मार्ग प्रशस्त करने की क्षमता है।
  • विज्ञान के क्षेत्र को और अधिक प्रचलित रूप प्रदान करने के लिये ‘अवसर’ (Augmenting Writing Skills for Articulating Research-AWSAR) नामक एक नई पहल शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य आम लोगों के बीच भारतीय शोध को बढ़ावा देते हुए उन्हें प्रसारित करना है ताकि किसी भी आम व्यक्ति के लिये इन शोध-पत्रों एवं इनके उद्देश्यों को समझना रोमांचक हो।

    S&T के क्षेत्र में एक ड्राफ्ट पॉलिसी दस्तावेज़ ‘श्रीमान’ (Scientific Research Infrastructure and Maintenance Networks-SRIMAN) भी तैयार किया गया है ताकि विज्ञान के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान कार्यों को और अधिक बढ़ावा दिया जा सके। वर्ष 2019 में S&T के क्षेत्र में बहुत-सी उपलब्धियाँ हासिल किये जाने की संभावना है।
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