18 जून को लखनऊ शाखा पर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के ओपन सेमिनार का आयोजन।
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दृष्टि आईएएस ब्लॉग

युवाओं की ज़िंदगी को लीलता हार्ट अटैक

दिल एक धड़कता हुआ बहुत ही खूबसूरत शय है, यह न होता तो न हम होते और न ही हमें प्यार का दिलकश अहसास होता। बॉलीवुड के गानों और संवादों में भी इसे बहुत ही खूबसूरत तरीके से पिरोया गया है। इसे नाज़ुक, पागल, दीवाना और नादां बताया गया है, लेकिन असल में न तो ये पागल है, न ही दीवाना और न ही नादां है। बल्कि ये तो सब कुछ समझता है। ये हमारी वो बातें भी जानता है, जो हमें खुद भी नहीं पता होती हैं। जी हां, आप सोच रहे होंगे कि ये कैसे हो सकता है कि कोई बात हमारे दिल को पता हो, लेकिन हमें न पता हो। अब आप ही सोचिए कि क्या आपको सामान्य जीवनशैली के बीच ये पता चल पाता है कि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है या आपका बीपी सामान्य से अधिक है, या शुगर लेवल ज्यादा हो गया है। जवाब पाएंगे, नहीं। लेकिन हमारे दिल को ये पता चल जाता है और वह समय-समय पर आपको सचेत करने की कोशिश भी करता है। लेकिन हम बाकी कामों के चलते उसकी चेतावनी को अनसुना कर देते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि दिल पर बोझ बढ़ता चला जाता है और वह अचानक से किसी भी पल धड़कना बंद कर देता है। आज हम इस बारे में बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज के समय में तो यह एक गंभीर समस्या बन गया है।

हम आए दिन खबरों में देखते हैं कि कैसे कोई सुडौल शरीर वाला व्यक्ति जिम करते-करते अचानक से गिर जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है; कैसे एक दुल्हन वरमाला के समय अचानक से गिरकर मौत के मुंह में चली जाती है; कैसे सड़क पर चलते-चलते चार दोस्तों में से एक को छींक आती है और चंद पलों में उसकी ज़िंदगी खत्म हो जाती है। इतना ही नहीं, बड़ी-बड़ी हस्तियाँ भी इससे अछूती नहीं रह पाईं। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव, कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार पुनीत राजकुमार, अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला, बॉलीवुड गायक कृष्णकुमार कुन्नथ, अभिनेत्री मंदिरा बेदी के पति और फिल्म प्रोड्यूसर राज कौशल, प्रतिष्ठित अभिनेत्री सुरेखा सीकरी, रामानंद सागर के सबसे लोकप्रिय टीवी शो 'रामायण' में रावण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरविंद त्रिवेदी, अपने एक्टिंग स्किल्स और दिलदार अंदाज से सबको हंसाने वाले डॉ.हाथी यानी मशहूर एक्टर कवी कुमार आजाद, बॉलीवुड और टीवी जगत की मशहूर अदाकारा रीमा लागू, अनुभवी अभिनेता ओम पुरी और टेलीविजन जगत के जाने पहचाने नाम फारुख शेख और हाल ही में उत्तर प्रदेश के हाथरस से भाजपा सांसद राजवीर सहित न जाने कितने ही लोगों की ज़िंदगी को हार्ट अटैक ने लील लिया।

क्या कहते हैं आंकड़े:

आंकड़ों पर नज़र डालें तो, 'राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो' (NCRB) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक 2021 की तुलना में 2022 में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की संख्या में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में हार्ट अटैक से 32,457 लोगों की मौत हुई, जो पिछले साल दर्ज की गई 28,413 मौतों से काफी अधिक है। एनसीआरबी द्वारा संकलित आंकड़े यह भी बताते हैं कि हार्ट अटैक से मरने वाले लोगों में से 28,005 पुरुष थे और इनमें से 22,000 लोग 45-60 वर्ष के आयु वर्ग के थे।

क्यों बढ़ रही दिल की परेशानियाँ:

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दिल की समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोविड-19 महामारी ने लोगों की जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित किया है। लोगों के बीच फिजिकल एक्टिविटी में कमी, तनाव और अवसाद में बढ़ोत्तरी और खराब खानपान की आदतें भी बढ़ी हैं। इसके अलावा, इस दौरान लोग प्रीडायबिटीज, प्री-हाइपरटेंशन, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का शिकार हो रहे हैं, जो हार्ट अटैक की बड़ी वजहें हैं। इसके अलावा, वायु प्रदूषण भी हमारे दिल का दुश्मन है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण से दुनिया भर में लगभग 40 लाख मौतें हो जाती हैं, जिसमें 60 फीसदी लोगों को दिल की बीमारियां होती हैं। हवा में मौजूद धूल के बारीक कण ह्रदय की धमनियों में जाकर जम जाते हैं और इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक के लक्षण:

पिछले कुछ समय में हार्ट अटैक की जो घटनाएं सामने आईं, उनमें दिल ने लोगों को संभलने का एक भी मौका नहीं दिया। लेकिन कई बार दिल यानी हार्ट हमें अपनी परेशानियों को बताने की कोशिश करता है और हम नज़रअंदाज कर देते हैं। अगर हमें ऐसे संकेत दिखें तो उन्हें बिना नज़रअंदाज किए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

  • सीने, पीठ, गले व जबड़े, दोनों कंधों में दर्द
  • ठंडा पसीना
  • थकान
  • सीने में जलन या अपच
  • चक्कर आना
  • जी मिचलाना
  • सांस लेने में कठिनाई
  • उलझन
  • सांस फूलना
  • बेचैनी व घबराहट महसूस होना
  • कुछ कदम चलने में भी परेशानी होना

ऐसे रखें अपने दिल को दुरुस्त:

इंटेंस वर्कआउट न करें- विशेषज्ञों का मानना है कि इंटेंस वर्कआउट और बहुत अधिक एक्सरसाइज के चलते भी हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। किसी की देखा-देखी अपनी क्षमता से ज़्यादा एकाएक बहुत हैवी वर्कआउट करने से हृदय पर दबाव पड़ता है और दबाव न झेल पाने की स्थिति में हार्ट अटैक आता है। इसलिए वर्कआउट करने से पहले यह चेक करवा लें कि कहीं आपको किसी प्रकार की समस्या तो नहीं है, और अगर है तो विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार एक्सरसाइज करें। बेवजह ज्यादा स्मार्ट बनने व दूसरों को दिखाने के लिये अपने दिल को तकलीफ न दें।

मोटापे और हाई बीपी को नियंत्रित रखें- जंक फूड की बढ़ती लत हमें मोटापा, हाई बीपी और डायबिटीज का शिकार बना रही है। जबकि हम सब जानते हैं कि ये बीमारियां सीधे तौर पर हार्ट अटैक को आमंत्रित करती हैं। इसलिए चीनी, नमक, मैदा आदि प्रोसेस्ड फूड से जितनी दूरी रखेंगे, दिल भी उतना ही मजबूत होगा। अपने खानपान में सुधार करके मोटापे, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखकर और रोजाना हल्की एक्सरसाइज करके हम अपने दिल का ख्याल रख सकते हैं।

तनाव से बचें- आज के समय में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो मानसिक तनाव, चिंता, कुंठा आदि का शिकार न हो। तेजी से बढ़ रहे आत्महत्या व हार्ट अटैक के मामले इसकी प्रत्यक्ष गवाही देते हैं। तनाव की वजह से स्वस्थ दिल भी बीमारी की चपेट में आ जाता है। जी हां, आपको बता दें कि लगातार मानसिक तनाव से शरीर में रोगों से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) का उत्पादन काफी तेज हो जाता है। और ये अतिरिक्त कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवार में चिपक जाती हैं और खून के प्रवाह को रोकती हैं। जिसकी वजह से खून के थक्के बनने लगते हैं और दिल व दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भारत में वर्ष 2019 में सात महानगरों में किए गए सर्वे में पाया गया कि 30 से 40 साल के 57 फीसदी युवाओं में तनाव की वजह से दिल की बीमारियां पैदा हो रही हैं। यह एक भारी संख्या है जो गंभीरता की ओर इशारा कर रही है। वहीं, डॉक्टरों का यह भी कहना है कि जब हम रोजमर्रा के जीवन में काम या किसी अन्य चीज़ को लेकर बहुत ज्यादा तनाव लेने लगते हैं, तो हमारे सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है। और इस बदलाव का प्रभाव नकारात्मक रूप से हमारे दिल पर पड़ता है।

पर्याप्त नींद लें- कई बार काम के अधिक बोझ व तनाव के चलते लोग सही से सोते नहीं हैं। जबकि डॉक्टरों के अनुसार हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेनी ज़रूरी है। जिस व्यक्ति को हर रोज़ अच्छी व गहरी नींद आती है, तो यह मान लें कि उस शख्स ने आधी जंग जीत ली है। क्योंकि जब कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद लेता है तो उस दौरान शरीर आराम करता है। और जब शरीर स्वस्थ रहता है तो दिल भी अपना काम अच्छे से करता है।

पारिवारिक बीमारियों के इतिहास का ध्यान रखें- आजकल इस बात की भी खूब चर्चा हो रही है। अगर किसी व्यक्ति के परिवार में से किसी को दिल से संबंधित समस्या रही है तो उसे सचेत रहने की ज़्यादा ज़रूरत है। साथ ही, अगर दूसरी वजहें (मोटापा, डायबिटीज, बीपी, कोलेस्ट्रॉल आदि) भी मौजूद हैं तो दिल से जुड़ी जांच 25 साल के बाद से ही शुरू कर देनी चाहिए। जांच होने की वजह से हम समय पर उपचार कराकर बचाव कर सकते हैं। वहीं, कोरोना वायरस भी दिल के मरीजों के लिये बेहद खतरनाक साबित हुआ है। यह देखने में आया है कि जो लोग दिल के मरीज नहीं हैं उनके ह्रदय पर भी कोरोना संक्रमण की वजह से बहुत बुरा असर पड़ा है। इसलिए अगर आपको कोरोना का संक्रमण हुआ है तब आपको अपने दिल के प्रति और भी ज्यादा सजग रहने की ज़रूरत है।

महिलाओं की तुलना में पुरुषों का दिल कमजोर क्यों?

आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुष हार्ट अटैक के शिकार ज़्यादा हो रहे हैं। जिसका एक मुख्य कारण स्त्री और पुरुष का मूल स्वभाव है। महिलाएं एक-दूसरे से बातचीत करके अपने दुख शेयर कर लेती हैं; रोकर अपने मन को हल्का कर लेती हैं। जबकि पुरुष इसके उलट हैं। पितृसत्तात्मक समाज होने के कारण लड़कों को बचपन से ही बताया जाता है कि “तुम लड़के हो, तुम्हें रोना शोभा नहीं देता”। ऐसे में वो बचपन से ही धीरे-धीरे कठोर आवरण ढकने की कोशिश करते हैं। वो अपने दुख, तकलीफें ज़ल्दी किसी के साथ शेयर नहीं करते, निजी जिंदगी की बातें किसी से साझा नहीं करते, अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। और ये चीजें उनके लिए हानिकारक हो सकती हैं। शायद बशीर बद्र ने ऐसे पुरुषों के लिये ही लिखा होगा-

हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं

दिल हमेशा उदास रहता है

ऐसे में जब पुरुषों का दिल ही ख़ुश नहीं है तो क्या शरीर की ऊपरी मज़बूती उन्हें स्वस्थ रख सकती है? मज़बूत शरीर और कमज़ोर दिल असल में यही असामयिक मृत्यु का कारण बन जाता है। दोस्तों के साथ, परिवार के साथ या अपने किसी भी प्रिय इंसान के साथ संवाद कीजिए, मन में कुछ तकलीफ है तो उसे साझा करिए। संवाद करेंगे तो संवेदनाएं कायम रहेंगी और संवेदनाएं ही आपको सकारात्मक रहने की ताकत देंगी। संवेदनाएं होंगी तो आप ख़ुशी, ग़म, इन सबकी अभिव्यक्ति बेहतर तरीक़े से कर पाएंगे और यह अभिव्यक्ति ही आपको और आपके दिल को स्वस्थ रखेगी। अपने मन को घुटन से बचाइए और दिल को ख़ुलकर सांस लेने (हवा भरने) दीजिए।

हार्ट अटैक से बचाव की तात्कालिक विधियां:

इमरजेंसी नंबर पर कॉल करें- यदि आपको या आपके किसी साथी को सीने में तकलीफ या हार्ट अटैक के अन्य लक्षण हैं तो सबसे पहले मेडिकल इमरजेंसी पर कॉल करें। यदि आपको अपने पास आने के लिये एम्बुलेंस या आपातकालीन वाहन नहीं मिल सकता है, तो किसी पड़ोसी या मित्र की मदद से तत्काल नजदीकी अस्पताल जाएं।

यदि आप योग्य हैं तो सीपीआर (CPR) दें- अगर मरीज बेहोश होकर गिर जाए और उसकी सांस रुक जाए तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता के मिलने तक रक्त प्रवाह को बनाए रखने के लिये जल्द से जल्द उसे सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू करें। सीपीआर सिर्फ कार्डियक अरेस्ट में ही नहीं बल्कि पानी में डूबने से, जहरीली गैस से या धुएं के कारण सांस रुक जाने पर भी तुरंत शुरू करने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

डिफाइब्रिलेटर का इस्तेमाल करें- अगर मरीज बेहोश है और आपके पास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डीफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध है, तो इसका उपयोग करने के लिये डिवाइस के निर्देशों का पालन करें। इसका इस्तेमाल आमतौर पर तब होता है, जब किसी वजह से दिल की धड़कन तेज या कम हो जाती है। यह उपकरण कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के मामलों में बहुत मददगार साबित होता है।

यहाँ पर आपके मन में शायद यह प्रश्न उठा होगा कि क्या कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक दोनों अलग-अलग हैं। तो आपको बता दें कि ‘हां’। दोनों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे लगते हैं जिससे लोगों को समझने में मुश्किल होती है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक आया है या वह कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुआ है। दरअसल, हार्ट अटैक के दौरान दिल धड़कता रहता है लेकिन मांसपेशियों को ठीक तरह से खून नहीं मिल पाता है। उस वक्त शरीर के बाकी हिस्सों में खून का संचार होता रहता है। हार्ट अटैक आने पर व्यक्ति होश में रहता है। जबकि कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति के हृदय के अंदर खून तो पहुंचता है लेकिन ह्रदय खून को पंप करना बंद कर देता है। जिससे शरीर के दूसरे अंगों तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है। ऐसे में शरीर के दूसरे हिस्से भी काम करना बंद कर देते हैं। दिल धड़कना बंद कर देता है तो इंसान सांस नहीं ले पाता है। हार्ट अटैक की स्थिति में भी सडन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

इतनी तेजी से बढ़ रही दिल की परेशानियों को देखते हुए अब ज़रूरत है कि युवा अपनी दौड़ती-हांफती ज़िंदगी में कुछ चैन के पल चुराएं। ऑफिस और घर की परेशानियों को किनारे कर खुद के साथ सुकून के दो पल बिताएं। दिल पर किसी भी तरह का बोझ न डालें। सही जीवनशैली अपनाएं; ऐसी कोई भी चीज जो आपके स्वास्थ्य के लिये नुकसानदायक है, उसे आज ही त्याग दें। खुश रहें और दूसरों को भी खुश रखें। जब आप खुश रहेंगे, तो आपकी आधे से ज़्यादा परेशानियाँ ऐसे ही ख़त्म हो जाएंगी और आपका दिल भी खु़शी से झूमेगा। इस संदर्भ में बहादुर शाह ज़फ़र की ये पंक्तियां याद आती हैं-

कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसे

इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में

  शालिनी बाजपेयी  

(शालिनी बाजपेयी यूपी के रायबरेली जिले से हैं। इन्होंने आईआईएमसी, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा करने के बाद जनसंचार एवं पत्रकारिता में एम.ए. किया। मीडिया संस्थानों में काम करने के बाद वर्तमान में ये हिंदी साहित्य की पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न मंचों के लिए लेखन कार्य कर रही हैं।)

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