दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

दृष्टि आईएएस ब्लॉग

UPSC​ CSE 2026 अधिसूचना: सेवारत अधिकारियों और चयनित उम्मीदवारों के लिये नए पात्रता नियम

  • 17 Feb, 2026
UPSC​ CSE 2026 अधिसूचना: सेवारत अधिकारियों और चयनित उम्मीदवारों के लिये नए पात्रता नियम

विषयसूची 

  • सेवारत अधिकारियों के लिये नवीन 'प्रतिबंध' नियम: स्पष्टीकरण 
    • वर्तमान IAS और IFS अधिकारियों के लिये प्रतिबंध 
    • वर्तमान IPS अधिकारियों के लिये प्रतिबंध 
    • भविष्य के प्रयासों पर प्रतिबंध (सेवा आवंटन एवं प्रशिक्षण से संबद्ध) 
    • CSE-2025 या उससे पहले के उम्मीदवारों के लिये प्रतिबंध 
  • कारण: UPSC ने सेवारत अधिकारियों के लिये नियमों में बदलाव क्यों किया? 
  • प्रभाव विश्लेषण: इसका आपके लिये महत्त्व 
  • समापन संदेश 
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 के लिये आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत बदलाव शामिल है, जिसे प्रत्येक गंभीर उम्मीदवार को समझना आवश्यक है। ‘पात्रता शर्तों’ में एक ऐसा निर्णायक संशोधन किया गया है, जो विशेष रूप से पहले से चयनित उम्मीदवारोंअर्थात समूह ‘A’ सेवाओं या IPS के रूप में कार्यरत अधिकारियों को प्रभावित करता है। 

कई वर्षों से, चयनित अधिकारियों द्वारा अपनी सेवा या रैंक को उन्नत करने के लिये परीक्षा में पुनः बैठने का चक्र CSE प्रणाली की एक मानक विशेषता रही है। CSE 2026 अधिसूचना, इस प्रवृत्ति पर स्पष्ट रूप से एक सख्त समय-सीमा निर्धारित करती है। 

चाहे आप LBSNAA में प्रवेश हेतु परीक्षा देने का सपना देखने वाले नए उम्मीदवार हों या फिर अपने अगले प्रयास की योजना बना रहे सेवारत अधिकारी हों, यहाँ नए प्रतिबंधों का विस्तृत विवरण दिया गया है और बताया गया है कि वर्ष 2026 की अधिसूचना सिविल सेवा परीक्षा के लिये एक महत्त्वपूर्ण मोड़ क्यों है। 

सेवारत अधिकारियों के लिये नवीन 'प्रतिबंध' नियम: स्पष्टीकरण 

UPSC ने उन अभ्यर्थियों के लिये स्पष्ट सीमाएँ निर्धारित की हैं, जिन्हें पिछली परीक्षा के आधार पर पहले ही किसी सेवा (जैसे: IAS, IPS आदि) में नियुक्त किया जा चुका है। प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं: 

1. वर्तमान IAS और IFS अधिकारियों के लिये प्रतिबंध 

  • पूर्ण अपात्रता: जो उम्मीदवार पिछली परीक्षा के परिणामों के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में नियुक्त हो चुके हैं और वर्तमान में उस सेवा के सदस्य हैं, वे CSE 2026 में सम्मिलित होने के पात्र नहीं होंगे। 
  • परीक्षा चक्र के दौरान नियुक्ति की स्थिति: 
    • यदि किसी उम्मीदवार को प्रारंभिक परीक्षा 2026 समाप्त होने के बाद IAS या IFS में नियुक्त किया जाता है, तो वो मुख्य परीक्षा 2026 में बैठने के पात्र नहीं होगा, भले ही उसने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो। 
    • यदि किसी उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा 2026 के प्रारंभ होने के बाद लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले IAS या IFS में नियुक्त किया जाता है, तो CSE-2026 के परिणाम के आधार पर किसी भी सेवा में नियुक्ति के लिये उन पर विचार नहीं किया जाएगा। 

2. वर्तमान IPS अधिकारियों के लिये प्रतिबंध 

  • IPS के लिये दोबारा आवेदन नहीं कर सकते: जो उम्मीदवार पिछली परीक्षा के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित या नियुक्त हो चुके हैं, वे CSE-2026 के परिणाम के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा के लिये पुनः आवेदन करने या उसमें नियुक्त होने के पात्र नहीं हैं। 

3. भविष्य में किये जाने वाले प्रयासों पर प्रतिबंध (सेवा आवंटन एवं प्रशिक्षण) 

  • अगली परीक्षा के लिये एक बार की छूट: CSE-2026 के आधार पर IPS या केंद्रीय सेवा समूह 'A' में आवंटित उम्मीदवार तत्काल बाद की परीक्षा (CSE-2027) में तभी उपस्थित हो सकते हैं, जब उन्हें प्रशिक्षण से औपचारिक छूट प्राप्त हो। 
    • यह छूट केवल एक बार के लिये है। 
    • यह छूट केवल एक बार के लिये मान्य होगी तथा उम्मीदवार के लिये फाउंडेशन कोर्स में सम्मिलित होना अनिवार्य रहेगा। 
  • सेवा रद्द होने की स्थिति: 
    • यदि कोई उम्मीदवार प्रशिक्षण में शामिल नहीं होता है या छूट की प्रक्रिया पूर्ण नहीं करता, तो CSE-2026 के आधार पर उसका सेवा आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा। 
    • यदि CSE-2027 में सेवा आवंटन के लिये अनुशंसा की जाती है, तो वे CSE-2026 या CSE-2027 में आवंटित सेवा का चयन कर सकते हैं। यदि CSE-2027 में आवंटन नहीं होता है, तो वे CSE-2026 में आवंटित सेवा में शामिल हो सकते हैं। 
      • जो उम्मीदवार CSE-2026 या CSE-2027 में आवंटित सेवाओं के लिये प्रशिक्षण में शामिल नहीं होते हैं, उनके दोनों वर्षों के लिये आवंटन रद्द कर दिये जाएंगे। 
  • भविष्य की परीक्षाओं पर रोक (CSE-2028 के बाद): जो उम्मीदवार इस छूट का लाभ उठाते हैं और CSE-2027 में उपस्थित होते हैं, उन्हें CSE-2028 या उसके बाद किसी भी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वे आवंटित सेवा से औपचारिक रूप से त्यागपत्र न दे दें। 

4. CSE-2025 या उससे पहले के उम्मीदवारों के लिये प्रतिबंध 

  • CSE 2025 या उससे पहले के आधार पर किसी सेवा में आवंटित अभ्यर्थियों को अपनी सेवा से त्यागपत्र दिये बिना CSE-2026 या CSE-2027 में से किसी एक परीक्षा में सम्मिलित होने (पात्रता के अधीन) का एक बार का अवसर दिया गया है। 
  • हालाँकि, यदि वे CSE-2028 या उसके बाद की परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपनी आवंटित सेवा से इस्तीफा देना होगा। 

कारण: UPSC ने सेवारत अधिकारियों के लिये नियमों में बदलाव क्यों किया? 

स नीतिगत बदलाव से सिविल सेवा भर्ती प्रणाली में मौजूद तीन दीर्घकालिक अक्षमताओं का समाधान होता है: 

  • रिक्त पदों के आवंटन को अनुकूलित करना: अतीत में, उम्मीदवार अगले प्रयास की तैयारी के लिये अवकाश लेते समय सेवा सीट पर अपना अधिकार बनाए रखते थे। सफल होने पर उन्हें पदोन्नत कर  दिया जाता था; असफल होने पर वे वापस लौट आते थे। इससे प्रायः मूल सीट वर्षों तक खाली रह जाती थी, जिससे प्रभावी रूप से 'कृत्रिम रिक्तियाँ' बन जाती थीं और अन्य योग्य उम्मीदवारों को अवसर से वंचित कर दिया जाता था। 
  • प्रशिक्षण के मूल्य को अधिकतम करना: सरकार फाउंडेशन कोर्स (FC) और व्यावसायिक प्रशिक्षण में भारी निवेश करती है। जो उम्मीदवार प्रशिक्षण में विलंब करते हैं या आधे मन से प्रशिक्षण लेते हैं, ताकि वे दोबारा परीक्षा देने पर ध्यान केंद्रित कर सकें, वे बहुमूल्य सरकारी संसाधनों और प्रशिक्षण क्षमता को बर्बाद करते हैं। 
  • प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना: अधिकारियों का लगातार आना-जाना (जो दो वर्ष के भीतर ही भर्ती होते हैं, छुट्टी लेते हैं और इस्तीफा दे देते हैं) विभागीय कार्यकुशलता को बाधित करता है। नया नियम यह सुनिश्चित करता है कि सेवा में शामिल होने वाले लोग मानसिक रूप से तैयार हों और सेवा करने के लिये प्रतिबद्ध हों। 

प्रभाव विश्लेषण: इसका आपके लिये क्या अर्थ है? 

चयनित उम्मीदवारों के लिये: एक निर्णायक करियर विकल्प 

सरकारी पद पर रहते हुए अनिश्चित काल तक प्रयास करने के दिन अब समाप्त हो गए हैं। अब आपके सामने दो विकल्प हैं: 

  • विकल्प A: अपनी वर्तमान सेवा आवंटन को स्वीकार करें, अपने करियर की प्रगति पर ध्यान केंद्रित करें और वहाँ एक विरासत का निर्माण करें। 
  • विकल्प B: अपने 'एक बार मिलने वाले अवसर' (2026 या 2027 में) का गंभीरता से उपयोग करें। अपग्रेड पाने का यह आपका आखिरी 'सुरक्षित' मौका है। 
  • विकल्प C: यदि आप वर्ष 2028 तक प्रतीक्षा करते हैं, तो आपको IAS बनने के सपने को पूरा करने के लिये इस्तीफा देकर अपनी नौकरी को जोखिम में डालने हेतु तैयार रहना होगा। 

नए उम्मीदवारों के लिये 

यदि आप पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवार हैं या कोई ऐसे व्यक्ति हैं, जिसने अभी तक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, तो यह बहुत अच्छी खबर है 

  • वास्तविक रिक्तियाँ: सीट ब्लॉक करने की प्रथा पर अंकुश लगने से, अंतिम मेरिट सूची में अधिक 'नई' सीटें प्रभावी रूप से उपलब्ध होंगी। 
  • समान अवसर: वर्ष 2028 से आगे, आपको ऐसे कम प्रतिस्पर्द्धियों का सामना करना पड़ेगा, जिनके पास प्रथम श्रेणी की नौकरी का आत्मविश्वास और वित्तीय सुरक्षा है। अनुभवी लोग संभवतः आपके साथ प्रतिस्पर्द्धा करने के लिये इस्तीफा देने से पहले दो बार सोचेंगे। 
  • त्वरित आवंटन: सिस्टम में कम रिपीटर होने से सेवा आवंटन सुचारु रूप से होगा और संभवतः आरक्षित सूचियों को तेज़ी से जारी किया जा सकेगा। 

समापन संदेश 

UPSC​ CSE 2026 अधिसूचना 'प्रयासों के चक्र' से हटकर 'निर्णायक करियर विकल्प' की ओर एक मौलिक परिवर्तन का संकेत देती है। सेवारत अधिकारियों के लिये अब पुनः परीक्षा देने पर सख्त सीमाएँ लागू होंगी, जबकि नए उम्मीदवारों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा और स्पष्ट रिक्तियों की उम्मीद है। यह परिवर्तन केवल प्रक्रियात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। अब प्रत्येक प्रयास का अधिक महत्त्व और परिणाम होगा।​ 

हालात पहले से कहीं अधिक गंभीर हैं, इसलिये आपकी तैयारी सटीक होनी चाहिये। इस प्रयास को सफल बनाने और नए परिदृश्य में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में आपकी सहायता करने के लिये, हम आपको हमारे विशेष प्रोग्राम का उपयोग करने के लिये आमंत्रित करते हैं:

GS पेपर 1 एवं CSAT हेतु ऑनलाइन पाठ्यक्रम  UPSC प्रिलिम्स परीक्षा हेतु टेस्ट सीरीज़

और पढ़ें: 

UPSC अधिसूचना 2026: परीक्षा तिथिरिक्तियाँ और पात्रता मानदंड  

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

1. ​​क्या सेवारत IAS या IFS अधिकारी CSE 2026 परीक्षा में शामिल हो सकते हैं?​ +

नहीं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या भारतीय विदेश सेवा (IFS) में पिछली परीक्षा के आधार पर नियुक्त और उस सेवा में कार्यरत उम्मीदवार CSE 2026 में बैठने के लिये पात्र नहीं हैं। 

2. ​​यदि मुझे CSE 2026 सत्र के दौरान IAS या IFS में नियुक्त किया जाता है तो क्या होगा?​  +

दो स्थितियाँ हैं: 

  • यदि आपकी नियुक्ति प्रारंभिक परीक्षा 2026 समाप्त होने के बाद होती है, तो आप मुख्य परीक्षा 2026 में बैठने के पात्र नहीं होंगे, भले ही आपने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो। 
  • यदि मुख्य परीक्षा 2026 के प्रारंभ होने के बाद, लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले आपकी नियुक्ति होती है, तो CSE-2026 के परिणाम के आधार पर आपको किसी भी सेवा में नियुक्ति हेतु पात्र नहीं माना जाएगा। 
3. ​​क्या एक सेवारत IPS अधिकारी दोबारा IPS में शामिल होने का विकल्प चुन सकता है?​ +

नहीं। किसी पूर्व परीक्षा के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित या नियुक्त उम्मीदवार CSE-2026 के परिणाम के आधार पर दोबारा IPS के लिये आवेदन नहीं कर सकता है और न ही उसे IPS सेवा में पुनः प्रविष्टि की अनुमति होगी।  

4. ​​यदि मेरा चयन CSE-2026 में हो जाता है, तो क्या मैं CSE-2027 की परीक्षा में शामिल हो सकता हूँ?​ +

जी हाँ, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ: 

  • आप आगामी परीक्षा (CSE-2027) में तभी उपस्थित हो सकते हैं, जब आपको प्रशिक्षण से एक बार की छूट प्राप्त हो जाए। 
  • आपको फाउंडेशन कोर्स (FC) प्रशिक्षण में शामिल होना ही होगा। 
  • यदि आप प्रशिक्षण में शामिल होने या छूट का लाभ उठाने में विफल रहते हैं, तो आपका सेवा आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। 
5. ​​क्या मैं ​​सेवारत रहते हुए​​ अनिश्चित काल तक परीक्षाएँ देना जारी रख सकता हूँ?​ +

​​नहीं। जो उम्मीदवार छूट का लाभ उठाकर CSE-2027 की परीक्षा में शामिल होते हैं, उन्हें CSE-2028 या उसके बाद की किसी भी परीक्षा में बैठने की ​​अनुमति नहीं होगी, जब तक कि वे अपनी आवंटित सेवा से इस्तीफा नहीं दे देते।​

6. ​​मुझे CSE-2025 (या उससे पहले) के लिये चुना गया है। ये नियम मुझ पर किस प्रकार लागू होते हैं?​ +

आपके पास एक प्रकार का ‘ग्रैंडफादर क्लॉज़’ (पुराने नियमों के तहत कार्यरत रहने की अनुमति) है: 

  • आपको अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा दिये बिना CSE-2026 या CSE-2027 में से किसी एक परीक्षा में उपस्थित होने का एक बार अवसर दिया जाता है। 
  • यदि आप CSE-2028 या उसके बाद की परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं, तो आपको पहले अपनी आवंटित सेवा से इस्तीफा देना होगा। 
7. ​​UPSC ने ये प्रतिबंध क्यों लगाए हैं?​ +

इस नीति का उद्देश्य तीन मुख्य मुद्दों का समाधान करना है: 

  • रिक्तियों का अनुकूलन: पुनः प्रयास की तैयारी करते समय उम्मीदवारों द्वारा सीटों पर कब्ज़ा बनाए रखने के कारण उत्पन्न होने वाली 'कृत्रिम रिक्तियों' को रोकना। 
  • प्रशिक्षण को अधिकतम करना: यह सुनिश्चित करना कि आधारभूत पाठ्यक्रमों और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर खर्च किये गए राज्य संसाधन उन उम्मीदवारों द्वारा बर्बाद न हों, जो केवल आधे मन से शामिल होते हैं या शामिल होने में देरी करते हैं। 
  • प्रशासनिक स्थिरता: दो वर्ष के भीतर ही पदभार ग्रहण करने और इस्तीफा देने वाले अधिकारियों की संख्या में कमी लाना। 
8. ​​इससे नए उम्मीदवारों को क्या लाभ होगा?​ +
  • ​​अधिक वास्तविक रिक्तियाँ: सीटों की अवरुद्धता कम हो गई है, जिससे योग्यता सूची में अधिक 'नई' सीटें उपलब्ध हो गई हैं। 
  • समान अवसर: वर्ष 2028 से, नए कर्मचारियों को ऐसे कम प्रतिस्पर्द्धियों का सामना करना पड़ेगा, जिनके पास प्रथम श्रेणी की नौकरी की सुरक्षा है। 
  • तेज़ आवंटन: कम रिपीटर्स से आवंटन सुचारु हो सकता है और आरक्षित सूचियों को तेज़ी से जारी किया जा सकता है। 
close
Share Page
images-2
images-2