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स्टेट पी.सी.एस.

  • 23 Mar 2026
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उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश में 'अमोघ ज्वाला' अभ्यास

चर्चा में क्यों?

भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में ‘अमोघ ज्वाला’ अभ्यास का समापन किया।

मुख्य बिंदु:

  • अवधि: यह अभ्यास 13 दिनों (6 मार्च–18 मार्च, 2026) तक आयोजित किया गया।
  • उद्देश्य: बहु-क्षेत्रीय परिचालन वातावरण में प्रौद्योगिकी-आधारित यंत्रीकृत युद्ध क्षमताओं का सत्यापन करना।
    • इसमें मज़बूत कमान एवं नियंत्रण ढाँचे के तहत यंत्रीकृत बलों का अटैक हेलीकॉप्टर, लड़ाकू विमान, मानव रहित हवाई प्रणालियाँ, एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ और नेटवर्क-सक्षम युद्धक्षेत्र प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत उपयोग प्रदर्शित किया गया।

और पढ़ें:  मानव रहित हवाई प्रणालियाँ


हरियाणा Switch to English

PMMSY ने हरियाणा में मत्स्य विकास को बढ़ावा दिया

चर्चा में क्यों?

 प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के कार्यान्वयन ने हरियाणा में मत्स्य क्षेत्र के विकास को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश में वृद्धि हुई है और जलीय कृषि अवसंरचना का विस्तार हुआ है।

मुख्य बिंदु:

  • योजना: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र का सतत विकास करना, मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना तथा मछुआरों की आय में वृद्धि करना है।
    • मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 से इस योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
    • हरियाणा में मत्स्य परियोजनाओं को कुल ₹760.87 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई है, जिसमें केंद्र का अंश ₹262.16 करोड़ है।
  • अवसंरचना विकास: प्रमुख पहलों में ग्रो-आउट/पालन तालाबों का विकास, फिश कियोस्क की स्थापना, पुनः परिसंचारी जलीय कृषि प्रणाली (RAS), बायोफ्लॉक इकाइयाँ, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज इकाइयाँ और एक एकीकृत एक्वा पार्क की स्थापना शामिल हैं।
    • इस योजना ने विशेष रूप से महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदायों के लिये नए रोज़गार के अवसर सृजित किये हैं।
  • तकनीकी हस्तक्षेप: RAS और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों को अपनाने से मछली पालन में दक्षता, उत्पादकता एवं स्थिरता में सुधार हुआ है।
    • RAS एक बंद-चक्र (क्लोज़्ड-लूप) मछली पालन प्रणाली है, जिसमें पानी को फिल्टर करके पुनः उपयोग किया जाता है और निरंतर शुद्धिकरण के माध्यम से जल की गुणवत्ता बनाए रखी जाती है। यह कम भूमि और जल संसाधनों में ही अधिक घनत्व पर मछली पालन संभव बनाती है और साथ ही रोग के खतरे तथा पर्यावरणीय प्रभाव को घटाती है।
    • बायोफ्लॉक तकनीक: बायोफ्लॉक प्रणाली में लाभकारी सूक्ष्मजीवों का उपयोग कर जैविक अपशिष्ट को आहार में परिवर्तित किया जाता है, जिससे जल की गुणवत्ता और मछलियों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह पर्यावरण-अनुकूल और किफायती विधि उच्च घनत्व वाले पालन के लिये उपयुक्त है तथा सतत प्रथाओं को बढ़ावा देती है।
  • ब्लू रिवोल्यूशन: इस पहल ने हरियाणा में ‘ब्लू रिवोल्यूशन’ को बढ़ावा दिया है, जिससे जलीय कृषि गतिविधियों का विस्तार हुआ है और मत्स्य क्षेत्र सशक्त हुआ है।
  • महत्त्व: यह कार्यक्रम कृषि के विविधीकरण, ग्रामीण आजीविका सृजन और मत्स्य जैसे क्षेत्रों को मज़बूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नोट: प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की एक केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना है, जिसका कुल प्रावधान ₹6000 करोड़ है, जिसमें विश्व बैंक और एजेंस फ्राँसेज़ दे डेवलपमेंट (Agence Française de Développement - AFD) का सहयोग भी शामिल है। PM-MKSSY को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिये सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।

और पढ़ें: PMMSY, ब्लू रिवोल्यूशन, PM-MKSSY


बिहार Switch to English

MoSPI ने बिहार में SDG और लैंगिक सांख्यिकी कार्यशाला का आयोजन किया

चर्चा में क्यों?

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs), पर्यावरण लेखांकन और लैंगिक सांख्यिकी के निगरानी ढाँचों पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला बिहार के पटना में आयोजित की गई।

मुख्य बिंदु:

  • आयोजन प्राधिकरण: यह कार्यशाला सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा बिहार सरकार और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से आयोजित की गई।
  • मुख्य थीम: कार्यशाला में तीन प्रमुख क्षेत्रों—SDG निगरानी ढाँचे, पर्यावरण लेखांकन और लैंगिक सांख्यिकी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • उद्देश्य: प्रभावी नीतिगत निर्माण और विकास परिणामों की निगरानी के लिये समयबद्ध, सुदृढ़ और पृथक (डिसएग्रीगेटेड) डेटा संग्रह पर ज़ोर दिया गया।
  • जारी की गई रिपोर्टें:
    • पर्यावरण लेखांकन व्याख्या शृंखला: परागण सेवाएँ
    • प्लैनेट इन फोकस: SDGs के तहत पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाना
    • बड़े पैमाने पर समृद्धि प्रदान करना: SDGs के माध्यम से भारत का आर्थिक रूपांतरण
  • SDG निगरानी पहलें: इसमें राष्ट्रीय संकेतक ढाँचा, पंचायत उन्नति सूचकांक और पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) जिला SDG सूचकांक के साथ-साथ वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाएँ शामिल हैं।
  • लैंगिक सांख्यिकी: महिलाओं के कार्य, गतिशीलता, लैंगिक डेटा अंतराल और लैंगिक-संवेदनशील नीतिनिर्माण के साथ अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों को उजागर किया गया।
  • पर्यावरण लेखांकन: पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े प्रमुख विषयों भारत में पर्यावरण लेखांकन ढाँचों का कार्यान्वयन, वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन और राज्य स्तर पर वन लेखांकन के अनुभव पर चर्चा की गई। साथ ही जैव विविधता और परागण सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन पर भी विचार किया गया।
    • पर्यावरणीय सांख्यिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिये राज्य स्तर की पहलों तथा TEEB परियोजना के अंतर्गत जैविक खेती और कृषि वानिकी के आर्थिक मूल्यांकन का भी अध्ययन किया गया।
      • TEEB (द इकोनॉमिक्स ऑफ इकोसिस्टम्स एंड बायोडायवर्सिटी): यह एक वैश्विक पहल है, जो जैव विविधता के आर्थिक मूल्य को रेखांकित करती है और नीतिनिर्माण एवं व्यावसायिक निर्णयों में पारिस्थितिकी तंत्र के पहलुओं को शामिल करने का समर्थन करती है।
  • महत्त्व: यह कार्यशाला डेटा-आधारित शासन, सतत विकास और समावेशी वृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

और पढ़ें: SDG, UNDP, विकसित भारत 2047, समावेशी विकास


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