- फ़िल्टर करें :
- भूगोल
- इतिहास
- संस्कृति
- भारतीय समाज
-
प्रश्न :
प्रश्न. भारतीय समाज में संयुक्त परिवार व्यवस्था से एकल परिवार और एकल-व्यक्ति परिवारों की ओर एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया है। इस परिवर्तन को प्रेरित करने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारकों की विवेचना कीजिये तथा सामाजिक सुरक्षा और देखभाल प्रणालियों पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)
15 Dec, 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 1 भारतीय समाजउत्तर :
हल करने का दृष्टिकोण:
- संयुक्त परिवार व्यवस्था से एकल परिवारों की ओर होने वाले परिवर्तन को परिभाषित करते हुए उत्तर लेखन की शुरुआत कीजिये।
- उन कारणों का परीक्षण कीजिये, जिनके कारण यह परिवर्तन हो रहे हैं।
- सामाजिक सुरक्षा और देखभाल प्रणाली पर इसके प्रभाव का परीक्षण कीजिये।
- तद्नुसार उचित निष्कर्ष दीजिये।
परिचय:
भारतीय समाज संयुक्त परिवार की संरचनाओं से एकल और एकल-व्यक्ति परिवारों की ओर एक क्रमिक परिवर्तन का साक्षी है। यह परिवर्तन आधुनिकीकरण, शहरीकरण और जनांकिकीय वृद्धावस्था के साथ होने वाले गहन जनांकिकीय, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों को दर्शाता है।
वर्ष 2001 और 2011 के बीच, भारत में एकल परिवार प्रमुख परिवार प्रारूप के रूप में उभरे हैं, जिसका हिस्सा 51.7% (19.31 करोड़ परिवारों में से 9.98 करोड़) से बढ़कर 52.1% (24.88 करोड़ परिवारों में से 12.97 करोड़) हो गया, जो संयुक्त परिवार की संरचनाओं से दूर एक स्थिर परिवर्तन को रेखांकित करता है।
मुख्य भाग:
परिवर्तन को प्रेरित करने वाले कारक
- सामाजिक कारक:
- शहरीकरण और प्रवास: जनगणना 2011 के अनुसार, 45 करोड़ से अधिक आंतरिक प्रवासी मौजूद हैं, जिनमें से कई काम और शिक्षा के लिये स्थानांतरित होते हैं, जिससे परिवार विखंडित होते हैं।
- परिवर्तित लैंगिक भूमिकाएँ: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019–21) से पता चलता है कि महिला शिक्षा और कार्यबल भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे संयुक्त परिवार समर्थन पर निर्भरता कम हुई है।
- जनांकिकीय परिवर्तन: घटती प्रजनन दर (कुल प्रजनन दर 2.0, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5) परिवार के आकार को कम करती है, जिससे संयुक्त परिवार कम व्यवहार्य हो जाते हैं।
- आर्थिक कारक:
- कृषि से सेवा अर्थव्यवस्था में बदलाव: गैर-कृषि रोज़गार परिवार-आधारित व्यवसायों पर गतिशीलता को प्राथमिकता देता है।
- आवास की कमी: शहरी आवास की कमी और उच्च किराया लागत एकल परिवारों को पक्षधर बनाती है।
- आय का व्यक्तिकरण: वेतन-आधारित रोज़गार रिश्तेदारों के बीच आर्थिक अंतर्निर्भरता को कमज़ोर करता है।
- सांस्कृतिक कारक:
- व्यक्तिवाद का उदय: विवाह में विलंब, अकेले रहने और तलाक की बढ़ती स्वीकार्यता।
- वैश्वीकरण: मीडिया एक्सपोजर एवं उपभोक्ता संस्कृति निज़ता और स्वायत्तता को बढ़ावा देती है।
- पितृसत्तात्मक प्राधिकार का क्षरण: युवाओं और महिलाओं के लिये निर्णय लेने की अधिक स्वायत्तता।
सामाजिक सुरक्षा और देखभाल प्रणालियों पर प्रभाव
- औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर बढ़ता बोझ: संयुक्त परिवारों में गिरावट ने पारंपरिक समर्थन तंत्रों को कमज़ोर कर दिया है, जिससे राज्य के नेतृत्व वाली सामाजिक सुरक्षा जैसे वृद्धावस्था पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भरता बढ़ी है, विशेष रूप से वृद्ध और एकल-व्यक्ति परिवारों के लिये।
- वृद्ध देखभाल की कमी: बढ़ती वृद्ध आबादी और कम परिवार के देखभालकर्त्ताओं के साथ, संस्थागत और समुदाय-आधारित वृद्ध देखभाल, जिसमें डे-केयर सेंटर, असिस्टेड लिविंग सुविधाएँ और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल हैं, की मांग में वृद्धि है।
- बच्चों के देखभाल और देखभाल सेवाओं पर दबाव: कामकाजी माता-पिता वाले एकल परिवार क्रेच, आँगनवाड़ी और निज़ी बाल देखभाल पर अधिक निर्भर हैं, जिससे प्रारंभिक बचपन देखभाल और विकास अवसंरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
- देखभाल असमानताओं में वृद्धि: गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुँच आय पर निर्भर होती जा रही है, जिससे उन लोगों के बीच असमानताएँ उत्पन्न होती हैं जो निज़ी सेवाओं का खर्च उठा सकते हैं और जो कम संसाधन वाली सार्वजनिक प्रणालियों पर निर्भर हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव की चिंताएँ: एकल-व्यक्ति परिवार और वृद्ध जोड़े अकेलेपन, अवसाद और सामाजिक अलगाव के उच्च जोखिम का सामना करते हैं, जिसके लिये मज़बूत मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय संलग्नता पहलों की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
हालाँकि एकल और एकल-व्यक्ति परिवारों की ओर परिवर्तन सामाजिक-आर्थिक प्रगति का प्रतीक है, यह पारंपरिक देखभाल नेटवर्क को कमज़ोर करता है। तेजी से बदलते समाज में समावेशी और गरिमापूर्ण सामाजिक समर्थन सुनिश्चित करने के लिये भारत को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और समुदाय-आधारित देखभाल प्रणालियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
To get PDF version, Please click on "Print PDF" button.
Print